जुलाई की शुरुआत में, एक संसद सत्र में ईरान के विदेश मंत्री मोहम्मद जवाद ज़रीफ़ ने तर्क दिया कि ईरान का चीन के साथ 25 साल के रणनीतिक समझौते की बातचीत में “कुछ भी गुप्त नहीं था”।1 ईरान एक ऐसा देश है जो न तो किसी महत्वपूर्ण क्षेत्रीय समूह का सदस्य है और न ही किसी बाहरी देश के साथ ऐसी औपचारिक साझेदारी में शामिल है जो अल्पकालिक या सामरिक से अधिक हो, ईरान का एक शक्तिशाली देश के साथ 25 साल की लंबी अवधि की व्यवस्था से क्रांतिकारी स्वतंत्रता और ईरान के प्राकृतिक संसाधनों के 'शोषण' की आशंकाओं के बारे में गरमागरम बहस शुरू होना बाध्य है। उन्नीसवीं सदी के उत्तरार्ध में एक कमजोर, भ्रष्ट क़ाजार राजशाही द्वारा क़र्ज़ के बदले यूरोपीय शक्तियों को ईरान की खनिज संपदा पर एकाधिकार रियायतें देने की स्मृति के अलावा, ईरान के पूर्व राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद द्वारा एक सार्वजनिक रैली में ‘विदेशी राज्यों के साथ गुप्त रूप से समझौते पर हस्ताक्षर करने’ का आरोप लगाकर रूहानी सरकार की निंदा करने के बाद चीन के साथ 25 साल के रोडमैप पर बहस सार्वजनिक छिड़ी।2
यह सुनिश्चित करने के लिए, चीन के साथ 25 साल के रणनीतिक संबंध की स्थापना ईरान के सुप्रीम लीडर ख़ामेनेई द्वारा 2016 में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की तेहरान यात्रा के दौरान स्वीकार की गई थी, जब दोनों देशों ने एक व्यापक रणनीतिक समझौते पर हस्ताक्षर किया था। ईरानी भू-राजनीतिक दृष्टि में पारंपरिक पूर्व-पश्चिम समस्या पर बल देते हुए, ख़ामेनेई ने तर्क दिया था कि “पश्चिमी लोग कभी भी ईरानी राष्ट्र का विश्वास जीतने में सक्षम नहीं हुए हैं और यह कि ईरान के प्रति अमेरिका की शत्रुतापूर्ण नीतियों के कारण ईरान के लोग और हमारे देश के अधिकारी स्वतंत्र देशों के साथ संबंध विकसित करने की खोज कर रहे हैं”।3 संयोग से, राष्ट्रपति अहमदीनेजाद (2005-2013) ने रफसंजानी (1989-1997) और खातमी (1997-2005) प्रशासन के दौरान ईरान की पश्चिमी उन्मुख विदेश नीति में सुधार के रूप में “लुक टू द ईस्ट” नीति की शुरुआत की, जबकि पश्चिमी उन्मुख विदेश नीति के तहत संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ संबंधों को सामान्य बनाने पर ध्यान केंद्रित किया था और यूरोपीय संघ के साथ ऊर्जा, व्यापार और निवेश पर केंद्रित और फिर बाद में ईरान के परमाणु मुद्दे पर संवाद राजनय का अनुसरण किया गया था। जब अहमदीनेजाद ने 2013 में पद छोड़ा, तब तक चीन ईरान का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार बनकर यूरोपीय संघ की जगह ले चुका था, जो ईरान के कुल व्यापार का लगभग एक तिहाई था।4 रूहानी प्रशासन ने परमाणु विवाद को सुलझाने के लिए पश्चिम के साथ बातचीत करने हेतु संपर्क किया था ताकि ईरानी अर्थव्यवस्था को अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के साथ पुनः जोड़कर ईरानी अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित किया जा सके। देश के लिए ईरानी मॉडरेट्स की राजनीतिक और आर्थिक दृष्टि ने अपेक्षाकृत अधिक खुले नागरिक समाज और व्यापक आर्थिक सुधारों को बढ़ावा दिया जिसमें इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के एकाधिकार को समाप्त करना और धार्मिक संस्थापनों को विकास के इंजन के रूप में जीवंत निजी क्षेत्र विकसित करना शामिल है।
राष्ट्रपति खातमी के सुधारवादी आंदोलन के बाद से, लीडर ख़ामेनेई और आईआरजीसी पर केंद्रित रूढ़िवादी याजक कुलीन इस बात को लेकर चिंतित थे कि पश्चिमी पूंजी और प्रौद्योगिकी के प्रवाह को कैसे उदार आर्थिक और राजनीतिक मूल्यों से अलग किया जा सकता है, और क्या ऐसा करना संभव है, जिसके परिणामस्वरूप इस्लामिक और क्रांतिकारी मूल्यों का 'क्षरण' हो सकता है। उन्होंने न केवल पूर्व के साथ, विशेष रूप से चीन के साथ संबंधों का पक्ष लिया है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में व्यापक एकीकरण के खिलाफ आयतुल्ला ख़ामेनेई की ‘प्रतिरोध की अर्थव्यावस्था’ की अवधारणा को भी अपनाया है। ख़ामेनेई ने कच्चे तेल के निर्यात पर ईरान की आर्थिक निर्भरता को कम करने और अमेरिकी प्रतिबंधों और आर्थिक दबावों से देश को सुरक्षा दिलाने के लिए घरेलू उत्पादन को मजबूत करने की दिशा में एक प्रमुख अवधारणा के रूप में प्रतिरोध की अर्थव्यवस्था पर बल दिया है। अंतर्मुखी होने के बजाय, यह ईरान और अन्य देशों, विशेष रूप से पड़ोसी देशों के बीच व्यापार, पारगमन और ऊर्जा संबंधों को अधिकतम बनाकर ईरान की स्थिति को बढ़ाने की के लिए आयात प्रतिस्थापन, घरेलू उत्पादन को पहल के साथ जोड़ता है।5
इस संदर्भ में, ईरान के तात्कालिक भू-आर्थिक वातावरण में चीन की भारी उपस्थिति के साथ-साथ बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) को ईरान के पूर्व और पश्चिम के बीच एक सेतु होने की ऐतिहासिक स्थिति को पुनः स्थापित करने के अवसर के रूप में देखा जाता है और ईरान में ऊर्जा अवसंरचना और परिवहन परियोजनाओं में चीनी निवेश के लिए रूपरेखा प्रदान करता है। लेकिन साथ ही, तेहरान को डर है कि कहीं चीन उसपर आर्थिक रूप से हावी न हो जाए और क्षेत्र में ईरान के उद्योगों के साथ प्रतिस्पर्धा कम न हो जाए।6 मध्य एशिया के ऊर्जा बाजार में चीन के प्रभुत्व ने ईरान की प्रतिस्पर्धी क्षति को भी घटाया है क्योंकि ये देश वैश्विक बाजार तक पहुँचने के लिए अब ईरान पर निर्भर नहीं हैं। बीआरआई कैस्पियन सागर के माध्यम से मध्य एशिया को दक्षिण काकेशस देशों के साथ जोड़ने और फिर वहां से यूरोप को जोड़ने की योजना बनाता है, जिससे क्षेत्र में ईरान की पारगमन स्थिति पर प्रभाव पड़ता नज़र आता है। इन सभी डर के बावजूद, ईरान की लुक टू द ईस्ट नीति 2.0, हालांकि जेसीपीओए से अमेरिका की निकासी से इसे बढ़ावा मिला है और ख़ामेनेई ने पश्चिम की जगह पूर्व को अधिमान्यता देने की अपील की है, वैश्विक राजनैतिक अर्थव्यवस्था में व्यवस्थित बदलावों की एक प्रतिक्रिया है जो एशिया में नई ताकतों के उदय से शुरू हुआ है, जिसमें चीन इस रचनात्मक शक्ति संक्रमण प्रक्रिया के केंद्र में है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर, ईरान बीआरआई को अमेरिका की प्रभुत्व वाली अंतर्राष्ट्रीय राजनीतिक अर्थव्यवस्था में शक्ति संतुलन बनाने में अपनी संभावित भूमिका के लिए महत्वपूर्ण मानता है।7 2016 की शुरुआत में जेसीपीओए के कार्यान्वयन के तुरंत बाद शी जिनपिंग की यात्रा का एक महत्वपूर्ण परिणाम यह था कि ईरान और चीन के बीच ऊर्जा, कनेक्टिविटी, औद्योगिक क्षमता और वित्त में द्विपक्षीय सहयोग के मुद्दों को बीआरआई की रूपरेखा के अंतर्गत निर्धारित किए गए थे, लेकिन 25 साल के रणनीतिक संबंध के रोडमैप पर पारस्परिक रूप से सहमति बननी बाकी थी।
ईरान पर अमेरिका की ‘अधिकतम दबाव’ नीति और चीन-अमेरिका व्यापार युद्ध के प्रकरण में ‘25-वर्ष के सौदे’ की वार्ता ने गति पकड़ी। अगस्त 2019 में, बियारिट्ज में जी 7 शिखर सम्मेलन, जिसमें राष्ट्रपति मैक्रोन ने अमेरिकी प्रशासन को अपने दबाव अभियान को ‘रोकने’ के लिए मजबूर करने का असफल प्रयास किया था, में भाग लेने के बाद एफएम ज़रीफ 25 साल के रणनीतिक संबंधों के रोडमैप पर चर्चा करने के लिए बीजिंग के लिए रवाना हुए। इसके बाद, अंतर्राष्ट्रीय मीडिया में अपुष्ट रिपोर्टें सामने आने लगी कि चीन को कच्चे तेल की खरीद में 32 प्रतिशत छूट मिली है और साथ ही दो सालों तक भुगतान करने से राहत मिली है और ईरान के तेल, गैस और परिवहन क्षेत्र में चीन ने 400 बिलियन डॉलर का निवेश किया है। सुरक्षा और दूरसंचार अवसंरचना, स्वास्थ्य और पर्यटन जैसे कई क्षेत्रों में भी पर्याप्त उपस्थिति को मंजूर किया गया था।8
एक विश्व व्यापी महामारी के प्रकरण में अमेरिका-चीन की गहरी होती दुश्मनी का अर्थ है कि ईरान और चीन दोनों अमेरिकी “एकपक्षीय” धमकी के खिलाफ अपनी भागीदारी को अपग्रेड करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।9 हालांकि, इस समय ईरान कोरोनावायरस की घटनाओं के खिलाफ अपनी दीर्घ लड़ाई में संलग्न है, चीन के साथ बढ़ते संबंधों को लेकर कुलीन के मध्य सर्वसम्मति के मतभेद इस वर्ष अप्रैल में नज़र आने लगे हैं, जब स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता ने कोरोनावायरस पर चीन की सांख्यिकी को ‘कड़वा मज़ाक’ बताया जिससे एक ऐसा विवाद उत्पन्न हुआ जिसकी वजह से तेहरान में चीनी राजदूत को ईरानी प्रवक्ता से तथ्यों और चीनी राष्ट्र के ‘महान प्रयासों’ का ‘सम्मान’ करने का आग्रह करना पड़ा।10 पर फिर भी, कट्टरपंथी-प्रभुत्व वाला संसद संभवतः चीन के साथ सौदे को स्वीकार करेगा, जो न केवल बीमार पड़ती ईरानी अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करेगा बल्कि ईरान को अन्य महत्वपूर्ण खिलाड़ियों के साथ भागीदारी में फेरबदल के लिए आवश्यक अवसर भी प्रदान करेगा जिन्हें ईरान और चीन का एक करीब आलिंगन में प्रवेश करना रास नहीं आएगा।
****
*डॉ. दीपिका सारस्वत, शोधकर्ता, विश्व मामलों की भारतीय परिषद, नई दिल्ली।
अस्वीकरण: व्यक्त किए गए विचार शोधकर्ता के हैं और परिषद के नहीं।
डिस्क्लेमर: इस अनुवादित लेख में यदि किसी प्रकार की त्रुटी पाई जाती है तो पाठक अंग्रेजी में लिखे मूल लेख को ही मान्य माने ।
अंत टिप्पण
1Iran Foreign Ministry Provides Explanation on 25-year Deal with China, Tasnim News Agency, July 8, 2020, https://www.tasnimnews.com/en/news/2020/07/08/2302636/iran-foreign-ministry-provides-explanation-on-25-year-deal-with-china Accessed on 12 July 2020.
2Iran government squeezed over ‘secretive’ deal with China, Al-Monitor, July 10, 2020, https://www.al-monitor.com/pulse/originals/2020/07/iran-government-rouhani-secretive-deal-china.html Accessed on 12 July 2020.?
3Iran will never forget China’ cooperation during times of sanction, January 23, 2016, https://english.khamenei.ir/news/3212/Iran-will-never-forget-China-s-cooperation-during-the-time-of Accessed on 13 July 2020.
4Vatanka Alex, China Courts Iran, Foreign Affairs, November 1, 2017, https://www.foreignaffairs.com/articles/china/2017-11-01/china-courts-iran Accessed on 12 July 2020.
5We must develop our economy from inside to combat sanctions: Ayatollah Khamenei, December 27, 2017, https://english.khamenei.ir/news/5370/We-must-develop-our-economy-from-inside-to-combat-sanctions Accessed on 11 July 2020.
6Shariatinia Mohsen and HamidrezaAzizi. 2019, “Iran and the Belt and Road Initiative: Amid Hope and Fear”, Journal of Contemporary China, https://www.tandfonline.com/doi/full/10.1080/10670564.2019.1594108 Accessed on 12 July 2020.
7Ibid.
8No, China isn’t giving Iran $400 billion, Bourse and Bazaar, September 20, 2019, https://www.bourseandbazaar.com/articles/2019/9/20/no-china-isnt-giving-iran-400-billion Accessed on 13 July 2020.
9Iran’s Zarif, China’s Wang condemn US practice of bullying, unilateralism, Pars Today, June 24, 2020, https://parstoday.com/en/news/iran-i122979-iran%E2%80%99s_zarif_china%E2%80%99s_wang_condemn_us_practice_of_bullying_unilateralism Accessed on 12 July 2020.
10Iran says world misled by China’s inaccurate coronavirus report, Iran Front Page, April 6, 2020, https://ifpnews.com/iran-says-world-misled-by-chinas-inaccurate-coronavirus-reports Accessed on 13 July 2020.