सारांश: वर्ष 2020 से, भारत आर्मेनिया का सबसे बड़ा रक्षा साझेदार बनकर उभरा है। दोनों देशों के बीच हाल ही में हुए उच्च– स्तरीय सैन्य प्रतिनिधिमंडलों के दौरे, दोनों देशों के बीच तेज़ी से बढ़ती साझेदारी को दर्शाते हैं। दक्षिण काकेशस में बदलती भू– राजनीतिक परिस्थितियों के बीच रक्षा सहयोग इस साझेदारी का मुख्य आधार बना हुआ है। भारत ने रडार सिस्टम, तोपें, ड्रोन और एंटी– ड्रोन सिस्टम्स की आपूर्ती की है जो दोनों देशों के संबंधों में उच्च स्तर के विश्वास को दर्शाते हैं।
सोवियत संघ के विघटन के बाद 1992 में भारत और आर्मेनिया के बीच सक्रिए राजनयिक संबंध स्थापित हुएi, हालांकि दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक व्यापारिक संबंध और सांस्कृतिक आदान– प्रदान पहले से ही रहे हैं। तब से इन संबंधों में लगातार प्रगति हुई है और रक्षा साझेदारी इस संबंध की मुख्य आधारशिला बनकर उभरी है।
क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्विता, ऐतिहासिक विवादों और बड़ी शक्तियों के बीच होड़ की वजह से दक्षिण काकेशस क्षेत्र में अनिश्चितता के बावजूद भारत और आर्मेनिया के संबंध लगातार मज़बूत हुए हैं। चारों तरफ से ज़मीन से घिरे देश के रूप में आर्मेनिया, अज़रबैजान, तुर्किए, जॉर्जिया और ईरान के बीच स्थित है। हालाँकि, बीते कुछ दशकों में अपने पड़ोसियों के साथ इसके संबंधों में उतार– चढ़ाव देखने को मिला है। बाकू और अंकारा के बीच करीबी संबंध हैं लेकिन येरेवन के साथ दोनों के कोई राजनयिक संबंध नहीं हैं। दूसरी ओर, तिब्लिसी और तेहरान के येरेवन के साथ संबंध बहुत अच्छे हैं।
रूस दक्षिण काकेशस क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। आर्मेनिया के साथ उसकी रणनीतिक साझेदारी है। येरेवन परंपरागत रूप से अपनी रक्षा और ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए मॉस्को पर बहुत निर्भर रहा है। फिर भी आर्मेनिया की सरकार रक्षा और विदेश नीति के मामलों में रूस पर अपनी निर्भरता कम करना चाहती है। रूस– यूक्रेन के बीच बहुत समय से जारी युद्ध के कारण रूसी हथियारों की आपूर्ति में देरी हुई है जिससे रक्षा क्षेत्र में विविधता लाने के प्रयासों को नई गति मिली है। आर्मेनिया ने भी अपनी बाहरी साझेदारियों में विविधता लाने और अपने राष्ट्रीय हितों की बेहतर सुरक्षा के लिए कई देशों के साथ तालमेल बिठाने वाली नीति अपनाई है।
बीते दशक से भारत के रक्षा निर्यात में जबरदस्त वृद्धि देखी गई है। वर्ष 2025-26 में, भारत ने लगभग 4.6 अरब डॉलर (38,424 करोड़ रु.)[i] मूल्य के रक्षा उपकरण और पुर्जों का निर्यात किया है जो बीते पिछले वर्ष 2024-25 के मुकाबले 62.66 प्रतिशत अधिक है। आज भारत लगभग 80 देशों को रक्षा हार्डवेयर का निर्यात करता है,[ii] और आर्मेनिया भारत का सबसे बड़े रक्षा निर्यात गंतव्यों में से एक बनकर उभरा है। बीते पांच वर्षों में, येरेवन ने स्वयं को नई दिल्ली के सबसे बड़े रक्षा साझीदार और उसके प्रयोग के लिए तैयार सैन्य हार्डवेर के केंद्र के रूप में स्थापित किया है।
भारत और आर्मेनिया के बीच रक्षा साझेदारी ने 2020 में गति पकड़ी थी, जब आर्मेनिया ने 'स्वाति' वेपन लोकेटिंग रडार खरीदने के लिए 4 करोड़ (40 मिलियन) अमेरिकी डॉलर का ऑर्डर दिया। यह रडार मोर्टार, तोप और रॉकेट जैसे आने वाले प्रोजेक्टाइल का पता लगाने और दुश्मन की तोप व रॉकेट लॉन्च करने की जगह का सटीक पता लगातर तत्काल जवाबी कार्रवाई करने में सक्षम है।
इस ऑर्डर की डिलीवरी 2022 में पूरी कर दी गई थी। तब से आर्मेनिया ने बीते 6 वर्षों में लगभग 2.2 अरब अमेरिकी डॉलर का सौदा किया है। इनमें डीआरडीओ और टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स के साथ मिलकर बनाया गया भारत फोर्ज का (ATAGS) दो– आर्टिलरी गन सिस्टम (155 मिलियन अमेरिकी डॉलर), कल्याणी सिस्टम की मल्टी– टेरेन आर्टिलरी गन मार्ग (MARG) 155मिमी सेल्फ– प्रोपेल्ड होवित्ज़र, ALS 51 ड्रोन, ज़ेन एंटी–ड्रोन सिस्टम और पिनाका मल्टी– बैरल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम शामिल है।[iii] बड़ी कामयाबी तब मिली जब आर्मेनिया ने 2022 में स्वदेशी आकाश वायु रक्षा प्रणाली के लिए 700 अरब अमेरिकी डॉलर का ऑर्डर दिया औऱ भारतीय प्रणाली का पहला विदेशी खरीददार बना।[iv]
भारत आर्मेनिया के लिए विश्वसनीय रक्षा साझेदार के रूप में उभरा है। दोनों पक्षों के बीच लगातार हो रही बातचीत रक्षा कूटनीति और रणनीतिक तालमेल के मज़बूत होने को दर्शाती है जिससे द्विपक्षीय संबंध और भी मज़बूत हो रहे हैं। फरवरी 2026 में, रक्षा प्रमुख जनरल अनिल चौहान के नेतृत्व में सैन्य प्रतिनिधिमंडल ने आर्मेनिया का दौरा किया, जहाँ उन्होंने राष्ट्रपति निकोल पशिन्यान और रक्षा मंत्री सुरेन पापिक्यान से मुलाकात की। इस दौरे के दौरान, रक्षा प्रमुख ने रक्षा अनुसंधान सुविधाओं का उद्धाटन किया और आर्मेनिया के चीफ ऑफ स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल एडवर्ड अस्र्यान[v] के साथ सैनिकों के संयुक्त प्रशिक्षण पर चर्चा भी की। मई 2026 में, आर्मेनिया के चीफ़ ऑफ स्टाफ ने उच्च– स्तरीय रक्षा प्रतिनिधिमंडल के साथ भारत का दौरा किया। बातचीत का मुख्य उद्देश्य संचालन संबंधी सहयोग और पारस्परिकता को बढ़ाना था, जिसके तहत सैन्य हार्डवेर का संयुक्त विकास, संयुक्त प्रशिक्षण अभ्यास और वायु शक्ति जैसे क्षेत्रों में सहयोग पर चर्चा की गई।[vi] [vii] ये घटनाक्रम द्विपक्षीय संबंधों को केवल रक्षा सहयोग के ऊपर उठाकर व्यापक रणनीतिक साझेदारी में बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
इससे यह बात भी साबित होती है कि भारत का सैन्य हार्डवेर अत्याधुनिक तकनीक और विशेष प्रणाली का मिला–जुला रूप है। ये सिस्टम युद्ध में परखे हुए और तकनीक के लिहाज़ से विश्वसनीय हैं जो सहयोगी देशों को किफायती विकल्प उपलब्ध कराते हैं। दूसरी बात, भारत आर्मेनिया को सोवियत दौर के पुरानी प्रणाली के साथ नए हथियारों को जोड़ने में भी मदद कर सकता है। भारत को इस क्षेत्र में महारत हासिल है और वह अपने सहयोगियों के साथ अपनी विशेषज्ञता साझा करने को तैयार है।
रक्षा कूटनीति और रक्षा निर्यात भारत– आर्मेनिया संबंधों के मुख्य स्तंभ बने हुए हैं। हालाँकि, अन्य क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने की बहुत गुंजाइश है। पश्चिम एशिया और यूक्रेन में जारी युद्धों ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं पर भारी दबाव डाला है। व्यापार में रुकावटों ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को बुरी तरह से प्रभावित किया है जबकि वर्तमान भू–राजनीतिक परिस्थिति में ऊर्जा सुरक्षा चिंता का महत्वपूर्ण विषय बनकर उभरी है।
इस बीच, भारत– आर्मेनिया संबंध वैकल्पिक व्यापार गलियारे विकसित करने और कैस्पियन सागर के माध्यम से यूरोप और मध्य एशिया तक पहुँच बढ़ाने के अवसर प्रदान करते हैं। भारत (INSTC) इंटरनेशनल नॉर्थ– साउथ कॉरिडोर का प्रमुख समर्थक रहा है जिसमें भारत की ऊर्जा आवश्यकताओं को मज़बूत करने के साथ– साथ आर्मेनिया और व्यापक क्षेत्र के लिए व्यापार एवं समृद्धि को बढ़ावा देने की क्षमता है। इससे ग्लोबल साउथ के साथ व्यापार को भी बढ़ावा मिल सकता है और दक्षिण काकेशस के लिए नए आर्थिक अवसर खुल सकते हैं।
दुर्लभ पृथ्वी तत्व, फार्मास्यूटिकल्स, कृषि–तकनीक, सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (ICT), आभूषण और बहुमूल्य रत्न जैसे क्षेत्रों में व्यापार में विविधता लाने से दोनों देशों को बहुत लाभ हो सकता है। भारत और आर्मेनिया के बीच सीधी उड़ानें फिर से शुरू होने से लोगों की आवाजाही आसान होगी। इससे आर्मेनिया में रहने वाले भारतीयों को भी लाभ होगा, लोगों के बीच आपसी मेल–जोल बढ़ेगा और अलग– अलग संस्कृतियों को समझने में मदद मिलेगी।
निष्कर्ष और भविष्य की राह
हालाँकि, भारत– आर्मेनिया संबंधों में रक्षा साझेदारी मुख्य आधार बनी हुई है फिर भी अनुसंधान और विकास, रक्षा निर्माण और संयुक्त प्रौद्योगिकी विकास में दीर्घकालिक निवेश इन संबंधों को और मज़बूत करेगा एवं भविष्य के लिए तैयार करेगा। आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (कृत्रिम बुद्धिमत्ता), मशीन लर्निंग और क्वांटम जैसी उभरती हुई तकनीक गहरे द्विपक्षीय सहयोग के लिए बड़े अवसर प्रदान करती हैं।
भारत– आर्मेनिया संबंधों को मज़बूत करने की दिशा में अगला महत्वपूर्ण कदम दोनों देशों के रक्षा और विदेश मंत्रियों के बीच औपचारिक 2+2 संवाद तंत्र स्थापित करना हो सकता है। इस प्रकार का तंत्र सुरक्षा सहयोग को संस्थागत रूप देगा और संबंधों को केवल रक्षा सहयोग तक सीमित रखने की बजाय व्यापक साझेदारी का रूप देगा जिससे रक्षा, कूटनीतिक और आर्थिक क्षेत्रों में आपसी तालमेल बेहतर होगा।
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*विकास राना, भारतीय वैश्विक परिषद, नई दिल्ली में शोध प्रशिक्षु हैं।
अस्वीकरण : यहां व्यक्त किए गए विचार निजी हैं।
डिस्क्लेमर: इस अनुवादित लेख में यदि किसी प्रकार की त्रुटी पाई जाती है तो पाठक अंग्रेजी में लिखे मूल लेख को ही मान्य माने ।
अंत टिप्पण:
[i] Defence exports skyrocket to record Rs 38,424 crore in Financial Year 2025-26, a massive 62.66% increase over previous fiscal
https://www.pib.gov.in/newsite/pmreleases.aspx?mincode=33®=48&lang=2
[ii]The Defence Decade: Enhanced Capability, Greater Capacity, and Stronger Credibility https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2273854®=3&lang=1
[iii] Weapon Locating Radar (WLR)
https://bel-india.in/product/weapon-locating-radar-wlr/
[iv] India ships first Akash air defence missile system battery to Armenia
https://www.newindianexpress.com/india/2024/Nov/12/india-ships-first-akash-air-defence-missilesystem-battery-to-armenia
[v] With Top General’s Visit to Yerevan, India Wants to Bolster Defense Ties with Armenia https://asbarez.com/with-top-generals-visit-to-yerevan-india-wants-to-bolster-defense-ties-witharmenia/
[vi] Armenia’s Top General Visits New Delhi to Deepen Defence Ties with India
https://www.rnamedia.in/demo/armenias-top-general-visits-new-delhi-to-deepen-defence-ties-withindia/15899
[vii] Armenia’s Top General Visits New Delhi to Deepen Defence Ties with India
https://www.rnamedia.in/international/armenia-turns-to-india-for-defence-systems-places-2-billionorder-since-2020/16568