12 जुलाई 2026 को, सीरिया की अंतरिम सरकार ने 8 दिसंबर 2024 को राष्ट्रपति बशर अल– असद को अपदस्थ किए जाने के बाद पहली बार संसद की बैठक बुलाई। साल 2025 के संवैधानिक घोषणापत्र के तहत, यह संसद 30 माह तक काम कर सकती है, जिससे कानून बनाने वाले स्थायी संविधान का मसौदा तैयार कर सकेंगे और भावी चुनावों का आधार तैयार कर सकेंगे। नया संसद भवन असद के बाद के सीरिया में राजनीतिक परिवर्तन का हिस्सा है। इसका मकसद लंबे गृहयुद्ध के बाद बर्बाद हुए सरकारी संस्थानों को फिर से बनाना है ताकि देश का कामकाज चलाया जा सके।
अंतरिम राष्ट्रपति अहमद अल–शारा ने 1 जुलाई 2026 को असद के बाद की पहली अंतरिम संसद को अंतिम रूप दिया। राष्ट्रपति असद की सरकार के तख़्तापलट के बाद, अंतरिम अधिकारियों ने जनवरी 2025 में संसद को भंग कर दिया था।
राष्ट्रपति अल–शारा ने तत्कालीन बाथ पार्टी के दौर की संसद को बहाल नहीं किया; इसके बजाय, उन्होंने मार्च 2025 में संवैधानिक घोषणा[i] जारी की, जिसमें प्रधानमंत्री का पद समाप्त कर दिया गया और कार्यकारी अधिकार राष्ट्रपति को सौंप दिए गए, जिससे राष्ट्रपति देश और सरकार, दोनों के प्रमुख बन गए। साथ ही, असद की सरकार के भंग होने से संसद पर राष्ट्रपति का नियंत्रण कम नहीं हुआ; बल्कि, एक ऐसी समिति बनाकर राष्ट्रपति का विधायी निकाय पर दबदबा कायम हो गया, जो संसद के दो– तिहाई सदस्यों की नियुक्ति करती है।
इस संदर्भ में, अक्टूबर 2025 में, स्थानीय समितियों और प्रांतीय चुनावी निकायों ने विधायिका के शुरुआती 140 सदस्यों (210 सीटों वाले सदन के दो– तिहाई सदस्य) को चुना। इसके अलावा, राष्ट्रपति अल– शारा ने 1 जुलाई 2026 को राष्ट्रपति आदेश जारी करके शेष 70 विधायकों को नियुक्त किया। राष्ट्रपति के पास संसद में पारित होने वाले किसी भी कानून को वीटो करने की शक्ति भी है।[ii] इसलिए, मुख्य रूप से राष्ट्रपति अलग–शारा के पास ही अधिकार था। सीरिया की अंतरिम सरकार ने दावा किया कि राष्ट्रपति की सूची धार्मिक और जातीय अल्पसंख्यकों, महिलाओं, प्रौद्योगिकीविदों और पेशेवरों जैसे कानून–निर्माताओं को शामिल कर संसद की विविधता को बढ़ाती है। हालांकि, कागज़ पर विविधता होने का मतलब यह नहीं है कि सीरिया की वर्तमान अंतरिम सरकार में वास्तव में प्रतिनिधित्व दिया जा रहा है।
देश में, नई विधायिका की इस बात के लिए बहुत आलोचना हुई कि वह देश की पूरी विविधता को नहीं दर्शाती है। नतीजतन, 7 जुलाई, पूर्व निर्धारित तिथि को, संसद की बैठक नहीं हो सकी। इसके अलावा, सीरिया की अंतरिम विधायी संस्था के सामने यह अनिश्चितता है कि क्या वह वास्तविक अधिकार के साथ अपनी कार्यवाही चला पाएगी या उसके फैसलों पर कार्यकारी विवेक और प्रक्रिया संबंधी अनिश्चितता का प्रभाव होगा।
इसी पृष्ठभूमि में, यह शोधपत्र संसद की संरचना, उसकी विशेषताओं और उसके कामकाज से जुड़ी राजनीति का विश्लेषण करता है।
संसद की संरचना
असद सरकार छोड़कर आए पूर्व जज अब्दुल हामिद अल–अवाक को विधायी निकाय का स्पीकर चुना गया है।[iii] वर्ष 2025 का संवैधानिक घोषणा–पत्र स्पीकर की ज़िम्मेदारियां निर्धारित करता है। विधायी निकाय के कार्यों में जारी राजनीतिक परिवर्तन के बीच कानून बनाना और सभी संबंधित पक्षों की सहमति से स्थायी संविधान का मसौदा तैयार कर उसे मंज़ूरी देना शामिल है। वर्ष 2025 के संवैधानिक घोषणा–पत्र के तहत, इसे कार्यकारी निकाय पर निगरानी रखने की ज़िम्मेदारी भी सौंपी गई है। इसके अलावा, सीरिया में लोकतांत्रिक व्यवस्था की राह बनाने के लिए भविष्य के चुनावों से जुड़े नियम और कानून तैयार करना भी इसके दायित्वों में शामिल है।
नई विधायिका का ढांचा मिले–जुले मॉडल पर आधारित है, जिसमें स्थानीय प्रतिनिधित्व और कार्यकारी अधिकार दोनों शामिल हैं। इसमें 210 सदस्यों को चुना जाता है: 140 सदस्य स्थानीय चुनावी निकायों के माध्यम से अप्रत्यक्ष रूप से चुने जाते हैं जबकि 70 सदस्यों को अंतरिम राष्ट्रपति सीधे नियुक्त करते हैं। राष्ट्रपति की सूची में दो अलावी, दो कुर्द और दो ईसाई शामिल थे।[iv] उत्तर– पूर्व में कुर्द नेतृत्व वाली सीरियन डेमोक्रेटिक फोर्सेज़ (SDF) से जुड़े सात कुर्द सांसदों में से किसी को भी राष्ट्रपति की सूची में शामिल नहीं किया गया था; इसलिए, इसने सांसदों के चयन की सरकारी प्रक्रिया को खारिज कर दिया।[v]
खास बात यह है कि, एसडीएफ (SDF) कुर्दिश नेतृत्व वाले मुख्य सैन्य और राजनीतिक संगठन के तौर पर काम करता है और उत्तर– पूर्वी सीरिया के महत्वपूर्ण हिस्सों का प्रशासन संभालता है। इसी प्रकार, राष्ट्रपति ने स्वेदा इलाके के ड्रूज़ नेता लैथ अल– वलौथ को नियुक्त किया। हालाँकि, उन्हें समुदाय के प्रतिनिधि की बजाय सरकार का समर्थक माना जाता है।[vi]
दक्षिणी स्वेदा ज़िले के लिए तय की गईं तीन सीटें खाली पड़ी हैं क्योंकि सुरक्षा कारणों से प्रांत में चुनावी कॉलेज बनाने का काम नहीं हो पाया। स्वेदा की अपनी सीटें खाली रहने से केंद्र की राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं और ड्रूज़ समुदाय की उम्मीदों के बीच बढ़ती खाई साफ़ नज़र आती है; यह समुदाय स्वयं को राजनीतिक रूप से अलग– थलग महसूस कर रहा है।[vii]
एक और समस्या यह है कि नियुक्त किए गए कई सदस्य गृह युद्ध के दौरान अपने समुदायों से विस्थापित हो गए थे। इसलिए, जिन प्रांतों का वे प्रतिनिधित्व करते हैं, वहाँ के लोगों के साथ उनके मज़बूत संबंध नहीं हैं।[viii] विपक्षी संगठनों, स्थापित पार्टियों और राजनीतिक आंदोलनों से जुड़े लोगों को भी व्यक्तिगत तौर पर नियुक्त किया गया, न कि उन समूहों के प्रतिनिधियों के तौर पर। इससे विधायी निकाय की संगठित राजनीतिक माहौल प्रस्तुत करने की क्षमता कमज़ोर हुई और प्रतिनिधित्व सामूहिक राजनीतिक एजेंडे के बजाय व्यक्तिगत पहचान तक सीमित रह गया।
नई संसद यह दिखाती है कि सीरिया ने पहले की बाथ–नियंत्रित विधायिका से पूरी तरह अलग हटकर विपक्ष के लोगों, पहले के असंतुष्टों, अल्पसंख्यक समुदायों के प्रतिनिधियों, महिलाओं और सीरिया के अलग– अलग इलाकों के सदस्यों को शामिल किया है। हालाँकि, राष्ट्रपति का अधिकार सबसे ऊपर बना हुई है, जिससे विधायिका के स्वतंत्र और मुक्त कामकाज में चुनौतियां पैदा होती हैं।
वर्ष 2025 का संवैधानिक घोषणा–पत्र यह पक्का करता है कि सीरिया में सत्ता का संतुलन राष्ट्रपति के पक्ष में बना रहे।[ix] सीरिया में अभी तक विधायिका और कार्यपालिका के बीच अधिकारों का बंटवारा नहीं हो पाया है जो इन संस्थाओं के उचित तरीके से काम करने के लिए ज़रूरी है। राष्ट्रपति के पास मंत्रियों, वरिष्ठ न्यायिक अधिकारियों और सैन्य व सुरक्षा कर्मियों को नियुक्त करने का अधिकार है, जिससे सीरियाई राष्ट्र पर उनका बहुत नियंत्रण रहता है और लोकतंत्र की स्थापना के लिए आवश्यक समावेशी राजनीतिक परिवर्तन की संभावना कम हो जाती है।
विधायिका पर कार्यपालिका की सर्वोच्चता कोई नई बात नहीं है और न ही यह केवल सीरिया तक सीमित है। अफ़गानिस्तान, इराक, सूडान और लीबिया में राजनीतिक परिवर्तन के मामलों से पता चला है कि कार्यपालिका ने विधायिका और न्यायपालिका पर नियंत्रण कर अपने अधिकारों का विस्तार किया है।
संभावित चुनौतियां
जब सीरिया असद के बाद संसद की अपनी पहली बैठक बुलाकर संवैधानिक स्थिरता हासिल करने की राह पर आगे बढ़ रहा है, तो उसे कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इससे यह बात स्पष्ट होती है कि वह नई संसद ऐसी राजनीतिक माहौल में अस्तित्व में आई है जो लगातार मुश्किल होता जा रहा है।
सबसे बुनियादी समस्या यह है कि सीरिया के सांसद जनता द्वारा चुनकर नहीं आते। ये प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष नियुक्ति प्रक्रियाओं के माध्यम से चुने गए कानून बनाने वालों का समूह है। सरकार का तर्क है कि एक दशक से भी अधिक समय तक चले लंबे युद्ध के प्रभाव और चुनाव कार्यालयों व मतदाताओं के पंजीयकों के बर्बाद हो जाने की वजह से देश भर में चुनाव करवा पाना संभव नहीं है।[x] इसके अलावा, कानून बनाने वाली संस्था के पास सरकार को हटाने या मंज़ूरी देने का अधिकार नहीं है, जिससे यह बिना लोकतांत्रिक वैधता वाली एक रबर– स्टैम्प संस्था बनकर रह गई है।
देश एक बिखरे हुए राजनीतिक संरचना से जूझ रहा है क्योंकि अंतरिम राष्ट्रपति के नेतृत्व वाली केंद्रीय सरकार के पार पूरे सीरिया में पूर्ण अधिकार नहीं हैं। सीरियन डेमोक्रेटिक फोर्सेज़ (SDF) पूर्वोत्तर सीरिया में ऑटोनॉमस एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ़ नॉर्थ एंड ईस्ट सीरिया(AANES)[xi] का शासन चला रही हैं जबकि ड्रूज़– बहुल स्वेदा प्रांत राजनीतिक रूप से अस्थिर बना हुआ है। नतीजा यह है कि सरकार ने नामांकन में देरी कर स्वेदा इलाके की तीन संसदीय सीटें खाली रखी हैं जिससे यह इलाका जारी राजनीतिक परिवर्तन की प्रक्रिया से कट गया है। इसलिए संसद में सार्थक और व्यापक राष्ट्रीय प्रतिनिधित्व की कमी है।
राजनीतिक परिवर्तन और संस्थागत सुधारों की जनता ने बार– बार आलोचना की है जिसके कारण अंतरिम सरकार के खिलाफ विरोध– प्रदर्शन हुए हैं। हालांकि, अंतरिम सरकार के कामकाज संभालने के बाद से सबसे अधिक चुनौतियां स्वेदा से सामने आई हैं, लेकिन 2026 की पहली छमाही में होम्स, हामा, अलेप्पो, ग्रामीण दमिश्क, इदलिब और देर– एज़– ज़ोर जैसे विपक्षी गढ़ों में भी विरोध– प्रदर्शन शुरू हो गए।[xii]
इन प्रदर्शनों में अंतरिम सरकारी संस्थाओं में बाथ सरकार से जुड़े अधिकारियों को फिर से शामिल करने का विरोध किया गया। प्रदर्शनकारियों ने बढ़ती बेरोज़गारी, जीवन–यापन की बढ़ती लागत, खराब होती सार्वजनिक सेवाओं और ईंधन की कमी जैसी समस्याओं को हल करने के लिए आर्थिक सुधारों के साथ– साथ संक्रमणकालीन न्याय की भी मांग की। इसलिए, नए संसद की वैधता इस बात पर निर्भर करती है कि वह लोगों की रोजमर्रा की चिंताओं का समाधा करने में कितनी सक्षम है।
एक और दीर्घकालिक चुनौती है– दशकों से युद्ध से तबाह सीरिया का पुनर्निर्माण। देश के ज्यादातर बुनियादी ढांचे, जैसे बिजली ग्रिड, सड़क नेटवर्क, शैक्षिक अवसंरचना, अस्पताल और पानी की व्यवस्था, को तत्काल पुनर्निर्माण की आवश्यकता है।[xiii]
गृहयुद्ध के कारण लाखों सीरियाई नागरिक या तो देश में ही विस्थापित हो गए या विदेशों में शरणार्थी बन गए हैं। नई अंतरिम सरकार के कार्यभार संभालने के बाद से कुछ अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध हटा लिए गए हैं; हालाँकि, देश को अभी भी विदेशी संस्थाओं से लगातार निवेश, शासन में सुधार और संस्थागत सुधारों की आवश्यकता है। इसलिए, संसद भारी आर्थिक संकट और जनता की उम्मीदों के बीच काम करेगी।
सुरक्षा के लगातार बने हुए खतरे, एकजुट सीरियाई राष्ट्र को फिर से बनाने की कोशिशों में भी बड़ी बाधा डालते हैं। केंद्रीय रेगिस्तान और पूर्वी इलाके में आईएसआईएस (ISIS) के बचे– खुचे सदस्य अभी भी सक्रिए हैं।[xiv] विचारधाराओं में अंतर और गहरे अविश्वास की वजह, पूर्व सशस्त्र विद्रोही समूहों और अल्पसंख्यक समुदायों की मिलिशिया, विशेष रूप से अलावी समुदाय, को, मुख्यधारा में शामिल करने की प्रक्रिया अभी भी अधूरी है।
इसके अलावा, असद की सरकार के गिरने के बाद इज़रायल ने गोलान हाइट्स से आगे अपना सैन्य नियंत्रण बढ़ाया और दक्षिणी सीरिया में नई “फॉरवर्ड डिफेंस” बफ़र ज़ोन रणनीति बनाई, जहा इज़रायली सेनाएं स्थायी रूप से तैनात हैं, जिसके कारण सीरियाई लोगों के साथ झड़पें होती हैं।[xv]
निष्कर्ष
क्रांति और गृहयुद्ध के दौरान पुरानी संस्थाओं को खत्म करना, नई संस्थाएं बनाने की तुलना में कहीं अधिक आसान होता है। हालाँकि, राजनीतिक परिवर्तन के दौर में व्यवस्था बहाल करने एवं सरकार चलाने के लिए सबसे पहले कार्यकारी सत्ता सामने आती है लेकिन संसद और कानून बनाने वाले लोग अलग– अलग समुदायों के प्रतिनिधित्व, संवाद और राजनीतिक पुनर्वास के आधार पर उस अंतरिम सरकार को संवैधानिक रूप से वैध सरकार में बदल देते हैं। सीरिया के नए संसदीय सदस्य आम प्रत्यक्ष चुनावों के माध्यम से नहीं चुने जाते हैं और राष्ट्रपति दवारा एक–तिहाई सदस्यों की नियुक्ति को विधायिका पर कार्यपालिका के नियंत्रण का जोखिम बढ़ गया है जिससे विधायिका की सीमित स्वायत्तता उजागर होती है।
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*डॉ. अरशद, शोध अध्येता, भारतीय वैश्विक परिषद (आईसीडब्ल्यूए)
अस्वीकरण: बताए गए विचार निजी हैं।
डिस्क्लेमर: इस अनुवादित लेख में यदि किसी प्रकार की त्रुटी पाई जाती है तो पाठक अंग्रेजी में लिखे मूल लेख को ही मान्य माने ।
अंत टिप्पण
[i]सीरिया के अंतरिम राष्ट्रपति ने सर्वोच्च संवैधानिक न्यायालय के सदस्यों की नियुक्ति और स्वयं को सशस्त्र बलों का कमांडर घोषित करने वाले आदेश के माध्यम से न्यायपालिका और सेना पर भी नियंत्रण स्थापित कर लिया है। यह आदेश 2025 के संवैधानिक घोषणा–पत्र के तहत जारी किया गया था।
[ii] Aji, A. (2026, July 12). Syria's new parliament holds first session since Assad's ouster. Los Angeles Times. Accessed https://www.latimes.com/world-nation/story/2026-07-12/syrias-new-parliament-holds-first-session-since-assads-ouster, July 13, 2026.
[iii] Anadolu Agency. (2026, July 12). Syria's new parliament elects Abdul Hamid al-Awak speaker. Accessed https://www.aa.com.tr/en/middle-east/syrias-new-parliament-elects-abdul-hamid-al-awak-speaker/3995804, July 13, 2026.
[iv] Al-jnaidi, L., Dincel, S., & Abushamala, R. (2026, July 12). Sharaa calls for ‘new chapter’ in Syria’s history as new parliament convenes. Anadolu Agency. Accessed https://www.aa.com.tr/en/middle-east/sharaa-calls-for-new-chapter-in-syria-s-history-as-new-parliament-convenes/3995695, July 13, 2026.
[v] BBC News. (2026, July 2). Syria's first post-Assad parliament takes shape after president appoints lawmakers. Accessed https://www.bbc.com/news/articles/c1jyk4985xwo, July 4, 2026.
[vi] Rudaw. (2026, June 6). Druze figure backs Suwayda's future within unified Syria. Accessed https://www.rudaw.net/english/categories/syria/1077835, July 5, 2026.
[vii]Haid, H. (2026, July 8). Syria's parliament must now earn its legitimacy. Al Majalla. Accessed https://en.majalla.com/node/331925/politics/syria%E2%80%99s-parliament-must-now-earn-its-legitimacy, July 10, 2026
[viii] Dalati, F. (2026, July 1). Syria's Sharaa appoints lawmakers, paving way for new parliament to convene. Al-Monitor. Accessed https://www.al-monitor.com/originals/2026/07/syrias-sharaa-appoints-lawmakers-paving-way-new-parliament-convene, July 17, 2026
[ix] SyriacPress. (2026, July 13). Syria's parliament convenes for first time, marking new phase in post-Assad political transition. Accessed https://syriacpress.com/blog/2026/07/13/syrias-parliament-convenes-for-first-time-marking-new-phase-in-post-assad-political-transition/, July 17, 2026
[x]Ali, A., & Faour, L. (2026, July 12). Syria's first post-Assad parliament holds inaugural session. The New Arab. Accessed https://www.newarab.com/news/syrias-first-post-assad-parliament-holds-inaugural-session?amp, July 18, 2026.
[xi] Democratic Autonomous Administration of North and East Syria. (n.d.). Homepage. Accessed https://daanes.org/en/homepage/, July 15, 2026.
[xii] Human Rights Watch. (2026, June 22). Syria: Mob violence against groups linked to Assad era. Accessed https://www.hrw.org/news/2026/06/22/syria-mob-violence-against-groups-linked-to-assad-era, July 19, 2026.
[xiii] Fawaz, H., & Gramel, S. (2026, March 19). Rebuilding infrastructure in Syria. KfW Development Bank. Accessed https://www.kfw-entwicklungsbank.de/About-us/News/News-Details_885248-2.html, July 18, 2026.
[xiv] Lister, C. (2026, June 8). The collapse of ISIS in Syria. Middle East Institute. Accessed https://mei.edu/publication/the-collapse-of-isis-in-syria/, July 17, 2026
[xv] Zafirov, M. M. (2026, July 10). Israel and the new reality of buffer zones. Atlantic Council. Accessed https://www.atlanticcouncil.org/dispatches/israel-and-the-new-reality-of-buffer-zones/, July 19, 2026.