सारांश
ट्रांस– आर्कटिक परिवहन गलियारा (TATC) रूस का सबसे महत्वाकांक्षी अवसंरचनात्मक परियोजना है और इसे 2020 के बाद के भू–राजनीतिक और आर्थिक परिवर्तनों के उत्तर के रूप में देखा जा सकता है। यह शोधपत्र मॉस्को द्वारा इस बहुमॉडल कनेक्टिविटी व्यवस्था में निवेश के राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कारणों की पड़ताल करता है। रूस की घरेलू और बाहरी कनेक्टिविटी की आवश्यकताओं का विश्लेषण करते हुए यह शोध पत्र तर्क प्रस्तुत करता है कि टीएटीसी (TATC) केवल व्यापार गलियारा नहीं है बल्कि भू–राजनीतिक साधन भी है जिसका उद्देश्य वैश्विक बाज़ारों तक रूस की स्वतंत्र पहुँच सुनिश्चित करना है।
परिचय
मार्च 2025 में मुरमांस्क में आयोजित छठे अंतरराष्ट्रीय आर्कटिक फोरम में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ट्रांस– आर्कटिक परिवहन गलियारे [TATC] की घोषणा की थी।[i] इस गलियारे का उद्देश्य रूस के अंदरूनी नदी, बंदरगाह और रेलवे नेटवर्क को उत्तरी समुद्री मार्ग [NSR] से जोड़ना है ताकि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी को बेहतर बनाया जा सके। इसमें रूस के उत्तर–पश्चिम से सुदूर पूर्व तक का घरेलू रेल नेटवर्क भी शामिल है, जिसमें बैकाल–अमर मेनलाइन और ट्रांस– साइबेरियन रेलवे भी आते हैं।
इस परियोजना में शामिल मुख्य नदियाँ हैं– लीना, येनिसेई और ओब।[ii] टीएटीसी (TATC), एनएसआर (NSR) के जरिए सेंट पीटर्सबर्ग और व्लादिवोस्तोक को मरमंस्क से जोड़ेगा। बंदरगाह के भावी विकास में उस्त–लुगा, सेंट पीटर्सबर्ग, मरमंस्क, अर्खांगेल्स्क, सबेटा, डिक्सन, डुडिंका, पेवेक, पेट्रोपावलोव्स्क– कामचत्स्की और व्लादिवोस्तोक शामिल हैं।[iii] इस गलियारे का उद्देश्य वैश्विक औद्योगिक, कृषि एवं ऊर्जा उत्पादन केंद्र को उपभोक्ता बाज़ारों से एक छोटे, सुरक्षित और आर्थिक रूप से लाभकारी मार्ग से जोड़ना है।[iv]
गलियारे को विकसित करने के कारण
रूस की बहुमॉडल गलियारा बनाने की योजना जो उसे अंदरूनी रेल और नदी नेटवर्क को NSR के वैश्विक व्यापार मार्ग से जोड़ेगा, उसके लिए दो कारणों पर ध्यान देना आवश्यक है: एक तो देश के अंदरूनी आर्थिक भूगोल से संबंधित है, और दूसरा वैश्विक व्यापार नेटवर्क में उसकी स्थिति से। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहलू अलग– अलग मार्ग नहीं हैं जो 2025 से इस परियोजना के बढ़ते महत्व को उजागर करते हैं।
घरेलू कारक
रूस का टीएटीसी (TATC) का विकास आवश्यकता और मौक़ा, दोनों दर्शाता है। रूस आर्कटिक क्षेत्र का सबसे बड़ा देश है। यहाँ की लगभग 25 लाख की आबादी आर्कटिक प्रदेश में रहती है, जो विश्व की कुल आर्कटिक आबादी का लगभग आधा हिस्सा है।[v] रूस का आर्कटिक प्रदेश रूस की आर्थिक वृद्धि का महत्वपूर्ण हिस्सा है; यह रूस की जीडीपी में लगभग 7 प्रतिशत और उसके निर्यात में करीब 11 प्रतिशत का योगदान देता है।[vi]
टीएटीसी (TATC) को केवल आर्कटिक तट के साथ शिपिंग लेन के तौर पर नहीं बल्कि ऐसे एकीकृत नेटवर्क के रूप में डिज़ाइन किया गया है जो साइबेरियाई और यूराल के औद्योगिक एवं संसाधन बेस को रेल और अंदरूनी जलमार्गों के माध्यम से आर्कटिक बंदरगाहों से जोड़ता है। अधिकारियों का अनुमान है कि 2030 तक इस गलियारे पर कुल कार्गो ट्रैफ़िक 109 मिलियन टन तक पहुँच जाएगा। इस आंकड़े में आर्कटिक बस्तियों तक वर्तमान घरेलू नॉर्दर्न सप्लाई की डिलीवरी के साथ–साथ नए हाइड्रोकार्बन/खनिज निर्यात की मात्रा और अंतरराष्ट्रीय पारगमन माल भी शामिल हैं।[vii]
टीएटीसी (TATC) का उद्देश्य रेलवे लाइनों और नदी मार्गों को जोड़कर साइबेरिया और मध्य रूस से आने वाले कार्गो के लिए अधिक कवरेज और बेहतर पहुँच उपलब्ध कराना है। इसका लक्ष्य आर्थिक उत्पादन बढ़ाना, इलाके के लोगों को रोज़गार देना और बुनियादी ढांचे की कमी को दूर करना है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई स्थिति
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, यह गलियारा एशियाई साझेदार देशों की ओर से व्यापार के लिए वैकल्पिक मार्गों की बढ़ती मांग को पूरा करता है। चीन अभी NSR के माध्यम से भेजे जाने वाले वस्तुओं का मुख्य निर्यातकों में से एक है और रोसाटॉम ने NSR के विकास पर चीन के साथ अपना सहयोग और बेहतर किया है।[viii] भारत और रूस NSR पर अपने आपसी सहयोग को बेहतर करने पर भी सहमत हुए हैं।[ix] अनुमान है कि एनएसआर (NSR), स्वेज नहर मार्ग की तुलना में यूरोप और एशिया के बीच की दूरी को 30-40% तक कम कर देगा।[x]
यह गलियारा, जो अंतरराष्ट्रीय व्यापार का मुख्य मार्ग है, वैश्विक शिपिंग नेटवर्क में रूस की स्वयं को नए सिरे से स्थापित करने की कोशिश को भी दर्शाता है। रूस का परिवहन मंत्रालय टीएटीसी (TATC) को यूरोप और एशिया– प्रशांत के बीच सबसे छोटा समुद्री मार्ग बताता है। यह मार्ग 8,300 नॉटिकल मील लंबा है जिसमें से 3,000 नॉटिकल मील का रास्ता NSR का है।[xi]
वर्ष 2025 के पूर्वी आर्थिक मंच (ईस्टर्न इकोनॉमिक फोरम) में राष्ट्रपति पुतिन ने विदेशी शिपिंग कंपनियों की बढ़ती दिलचस्पी की ओर संकेत किया था।[xii] राष्ट्रपति पुतिन ने 23 अप्रैल 2026 को सरकारी अधिकारी के साथ बैठक के बाद टीएटीसी (TATC) के विकास में मदद के लिए मित्र देशों के साथ आपसी लाभ वाले सहयोग पर आधारित एक अंतरराष्ट्रीय कंसोर्टियम बनाने के निर्देश दिए।[xiii] इससे पता चलता है कि मॉस्को टीएटीसी (TATC) को ऐसे साझा मंच के रूप में देखता है जिसके माध्यम से वह वर्तमान वैश्विक व्यापार व्यवस्था को नया रूप देने की उम्मीद करता है। रोसाटम ने यह भी बताया है कि भारत और चीन की इस गलियारे में दिलचस्पी बढ़ रही है।[xiv]
चुनौतियाँ और संभाव्यता
टीएटीसी (TATC) की व्यावहारिकता और दीर्घकालिक सफलता कई महत्वपूर्ण बातों पर निर्भर करती है। सबसे पहले, इस परियोजना की देखरेख के लिए किसी संगठित संस्थागत ढांचे के न होने को लेकर चिंताएं हैं।[xv] इसमें कई पक्ष शामिल हैं, जैसे रूस का क्षेत्रीय विकास मंत्रालय, मैरीटाइम बोर्ड, स्टेट काउंसिल कमीशन और रोसाटॉम, लेकिन कोई एक व्यवस्थित संगठन नहीं है। एक और बड़ी चुनौती यह है कि जिस मार्ग की कल्पना की गई है उसका जल्द ही मुनाफ़ा देने की संभावना कम है क्योंकि बड़े व्यापारिक देशों के पास अभी भी पर्याप्त आइसब्रेकर बेड़े नहीं हैं।
मास्को ने भारत जैसे एशियाई साझेदारों के लिए आर्कटिक के मार्ग और ज्यादा खोल दिए हैं, फिर भी इस गलियारे पर भारत और रूस के बीच बढ़ते सहयोग के बावजूद, जरूरी प्रत्यक्ष निवेश का स्तर अभी तक सुनिश्चित नहीं हो पाया है और यह सहयोग एनएसआर (NSR) पर द्विपक्षीय सहयोग तक ही सीमित है।
कुल मिलाकर, उपलब्ध प्रमाण बताते हैं कि टीएटीसी (TATC) को मज़बूत राजनीतिक समर्थन हासिल है, लेकिन इसे अभी भी बुनियादे ढांचे– जैसे जहाज़, बंदरगाह और वित्त पोषण, से संबंधित बड़ी व्यावहारिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
निष्कर्ष
टीएटीसी (TATC) केवल अवसंरचनात्मक परियोजना नहीं है, यह तेज़ी से बदल रही दुनिया में रूस की अपनी स्थिति को फिर से मज़बूत करने की बड़ी रणनीतिक कोशिश है। एनएसआर (NSR) को अंतर–महाद्वीपीय रेलवे और देश के अंदरूनी नदी व्यवस्था से जोड़कर, मॉस्को एक ऐसे बहुमॉडल परिवहन नेटवर्क में निवेश कर रहा है जो एक साथ उसके विदेशी व्यापार की दिशा बदलने और आंतरिक कनेक्टिविटी की कमियों को दूर करने में मदद करेगा। टीएटीसी (TATC) को लाभकारी बनाने के लिए रूस को इस मार्ग को बनाए रखने के लिए आवश्यक मूलभूत सुविधाएं और वित्तपोषण की कमियों को दूर करना होगा। हालाँकि, यह परिवहन गलियारा यूरोप और एशिया के बीच कम समय में वस्तुओं को पहुँचाने का वादा करता है और व्यापारिक साझेदारों के साथ बेहतर सहयोग को बढ़ावा देता है लेकिन इसकी असल कामयाबी अभी देखी जानी बाकी है।
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*वेदिका राज, भारतीय वैश्विक परिषद, नई दिल्ली में शोध प्रशिक्षु हैं।
अस्वीकरण : यहां व्यक्त किए गए विचार निजी हैं।
डिस्क्लेमर: इस अनुवादित लेख में यदि किसी प्रकार की त्रुटी पाई जाती है तो पाठक अंग्रेजी में लिखे मूल लेख को ही मान्य माने ।
अंत टिप्पण:
[i] Vladimir Putin, “The Arctic: Territory of Dialogue International Forum” (speech, 6th International Arctic Forum, Murmansk, March 27, 2025), President of Russcentersia, http://en.kremlin.ru/events/president/news/76554;
“Monthly Highlights from the Russian Arctic, March 2025,” Bellona Environmental Transparency Center, May 14, 2025, https://etc.bellona.org/2025/05/14/monthly-highlights-from-the-russian-arctic-march-2025/.
Putin, “The Arctic: Territory of Dialogue.”
[ii] Putin, “The Arctic: Territory of Dialogue.”
[iii] Valery P. Zhuravel and Sergey N. Grinyaev, "Trans-Arctic Transport Corridor: Political, Economic and Strategic Potential for Russia," Arctic and North, no. 60 (2025): 112–125, https://doi.org/10.37482/issn2221-2698.2025.60.135.
[iv] Putin, “The Arctic: Territory of Dialogue.”
[v] “The Russian Federation,” Arctic Council, accessed July 7, 2026, https://arctic-council.org/about/states/russian-federation/; Putin, “The Arctic: Territory of Dialogue.”
Putin, “The Arctic: Territory of Dialogue.” ,
[vi] Putin, “The Arctic: Territory of Dialogue.”
[vii] "Trans-Arctic Transport Corridor Project Becomes Macroregion's Megadriver — Expert," TASS, June 3, 2026, https://tass.com/economy/2140805.
[viii] Northern Sea Route in the Spotlight," Rosatam Newsletter, no. 292, August 25, 2025, https://rosatomnewsletter.com/2025/08/25/northern-sea-route-in-the-spotlight/.
[ix] "Joint Statement following the 23rd India-Russia Annual Summit," Prime Minister's Office, Government of India, December 5, 2025, https://www.pmindia.gov.in/en/news_updates/joint-statement-following-the-23rd-india-russia-annual-summit/.
[x] "Trans-Arctic Corridor Should Ensure the Compr ehensive Development of the Arctic Zone of the Russian Federation," TASS, July 11, 2025, https://tass.ru/ekonmika/24490189; Valentina Averianova, "The Way Through the Ice: How the Transarcic Transport Corridor Is Changing the Global Logistics Map," Izvestia, https://en.iz.ru/en/2118970/valentina-averianova/way-through-ice-how-transarctic-transport-corridor-changing-global-logistics-map.
[xi]“Trans-Arctic Transport Corridor – The Future of Global Maritime Trade,” Ministry of Transport of the Russian Federation, November 14, 2025, https://mintrans.gov.ru/press-center/news/12259.
[xii] "Plenary Session of the 10th Eastern Economic Forum," President of Russia, September 5, 2025, http://en.kremlin.ru/events/president/news/77927.
[xiii] President of Russia, "Instructions Following a Meeting with Government Members," April 23, 2026, http://en.kremlin.ru/acts/assignments/orders/79927.
[xiv] "NSR: International Context," Rosatom Newsletter, April 28, 2025, https://rosatomnewsletter.com/2025/04/28/northern-sea-route-international-context/.
[xv]Alexander Sergunin, quoted in "Trans-Arctic Transport Corridor Project Becomes Macroregion's Megadriver — Expert," TASS, June 3, 2026, https://tass.com/economy/2140805.