भारत और अज़रबैजान के संबंध प्राचीन काल के रेशम मार्ग (सिल्ट रूट) व्यापार युग से चले आ रहे हैं। बाकू में अतेशगाह अग्नि मंदिर जैसी इमारतें इस ऐतिहासिक संबंध की पक्की निशानी हैं। सदियों से चले आ रहे इन सांस्कृतिक और सभ्यतागत मेल–जोल ने अब आधुनिक द्विपक्षीय संबंधों का रूप ले लिया है जिनमें ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार, कनेक्टिविटी, पर्यटन, संस्कृति और बहुपक्षीय कूटनीति जैसे क्षेत्र शामिल हैं। आधुनिक राजनयिक संबंध 1991 में सोवियत संघ के विघटन के बाद स्थापित हुए जब भारत ने अज़रबैजान की स्वतंत्रता को मान्यता दी और आखिरकार मार्च 1999 में अपना रेजिडेंट मिशन स्थापित कर संबंधों को और मजबूत किया। ये संबंध आपसी समझ और एक–दूसरे की संस्कृति के प्रति सम्मान पर आधारित हैं।
बीते तीन दशकों में कभी–कभार होने वाले भू–राजनीतिक मतभेदों के बावजूद दोनों देशों के बीच संबंध लगातार बेहतर हो रहे हैं। आज, भारत अज़रबैजान को दक्षिण काकेशस में महत्वपूर्ण साझेदार और यूरेशियन कनेक्टिविटी में महत्वपूर्ण पक्षकार मानता है जबकि अज़रबैजान भारत को बड़े आर्थिक साझेदार, ऊर्जा के महत्वपूर्ण उपभोक्ता और पर्यटन व निवेश के तेज़ी से बढ़ते स्रोत के रूप में देखता है।
हाल की घटनाएं
व्यापार, आर्थिक, वैज्ञानिक और तकनीकी सहयोग पर भारत– अज़रबैजान अंतर–सरकारी आयोग द्विपक्षीय सहयोग को बढ़ाने के लिए संस्थागत संरचना प्रदान करता है। नियमित विदेश कार्यलय परामर्श (FOC) ने राजनीतिक मामलों, क्षेत्रीय घटनाक्रमों, आर्थिक सहयोग और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा को संभव बनाया है। अप्रैल 2026 में, आपसी हितों से जुड़े क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर विचारों के आदान– प्रदान और द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा के लिए एफओसी (FOC) का छठा (6) दौर आयोजित किया गया। चर्चा किए गए मुद्दों में व्यापार, तकनीक, ऊर्जा, लोगों के बीच आपसी आदान– प्रदान और सीमा–पार आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई आदि शामिल थे। दोनों पक्ष निकट भविष्य में दिल्ली में आगे की बातचीत करने पर सहमत हुए। इसके अलावा, भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 28 मई 2026 को अज़रबैजान के स्वतंत्रता दिवस पर वहाँ के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव को शुभकामनाएं दी थीं।
इन घटनाक्रमों से पता चलता है कि हाल के मतभेदों के बावजूद दोनों देश अपने संबंधों को बेहतर बनाने को इच्छुक हैं।[i] पहलगाम में हुए आतंकी हमले पर अज़रबैजान ने पाकिस्तान के प्रति संवेदना जताते हुए उसका साथ दिया। साथ ही, उसने पाकिस्तान के खिलाफ भारत की सटीक स्ट्राइक पर चिंता जताई थी और आर्मेनिया के साथ बढ़ती साझेदारी को लेकर भी नई दिल्ली को चेतावनी दी थी।
हालाँकि, बदलती भू–राजनीतिक स्थितियों, ऊर्जा सुरक्षा की जटिल स्थिति और आर्थिक एवं कनेक्टिविटी की आवश्यकताओं को देखते हुए, दोनों देश आगे बढ़ने और सहयोग के नए क्षेत्रों जैसे– ऊर्जा, व्यापार, कनेक्टिविटी और पर्यटन, में संभावनाएं तलाशने को उत्सुक हैं।
ऊर्जा: अज़रबैजान विश्व के सबसे पुराने तेल निर्यातक देशों में से एक है। इसकी अर्थव्यवस्था बहुत हद तक हाइड्रोकार्बन पर निर्भर है जो इसके निर्यात का 90% और जीडीपी का बड़ा हिस्सा (33%) है। घरेलू खपत और निर्यात से होने वाली कमाई के लिए गैर–नवीकरणीय स्रोतों पर बहुत अधिक निर्भरता ही अज़रबैजान के नवीकरणीय ऊर्जा का रुख करने की मुख्य वजह है। साथ ही वह राष्ट्रीय जलवायु कार्य योजना के तहत 2050 तक अपने ग्रीनहाउस उत्सर्जन को कम करने का भी प्रयास कर रहा है। [ii]
यह परिवर्तन हाल के आंकड़ों में साफ नज़र आता है। आंकड़ों से पता चलता है कि 2025 में प्राथमिक ऊर्जा की खपत में 4.8% की कमी आई है। कमी का यह रुझान 2023 से ही शुरू हो गया था; जबकि उससे पहले इसमें प्रत्येक वर्ष औसतन 2.2% की वृद्धि दर्ज की जा रही थी।[iii] इस गिरावट का मुख्य कारण 2024 और 2025 में पनबिजली और दूसरे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से अधिक बिजली का उत्पादन है। भारत, अज़रबैजान के ऊर्जा क्षेत्र और उसमें विविधता लाने के प्रयासों में सहयोग करने वाला विश्वसनीय साझेदार है।
भारत और अज़रबैजान के बीच ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग का स्थापित संबंध है; ओएनजीसी (ONGC) विदेश लिमिटेड (OVL) ने एसीजी (ACG) तेल और गैस क्षेत्रों के साथ–साथ बाकू– त्बिलिसी– सेहान पाइपलाइन में 1.2 अरब डॉलर का निवेश किया है। इससे विश्वास का माहौल बनता है और भविष्य में सहयोग का मार्ग प्रशस्त होता है।
भारत का लक्ष्य 2030 तक 500 गीगावाट (GW) की गैर– जीवाश्म ईंधन क्षमता प्राप्त करना और अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं का 50% अक्षय ऊर्जा से पूरा करना है, साथ ही 2070 तक नेट– ज़ीरो उत्सर्जन का अंतिम लक्ष्य भी प्राप्त करना है। वर्तमान में भारत अक्षय ऊर्जा की स्थापित क्षमता के मामले में विश्व में तीसरे स्थान पर है और अपनी बिजली खपत का 51.5% अक्षय स्रोतों से पूरा करता है।[iv]
भारत सौर, पवन और पनबिजली ऊर्जा के क्षेत्र में अपने अनुभव और विशेषज्ञता को साझा कर अज़रबैजान के साथ अक्षय ऊर्जा की संभावनाओं पर सहयोग कर सकता है। भारतीय कंपनियां अज़रबैजान में पवन ऊर्जा संयंत्रों और पनबिजली परियोजनाओं जैसे खिज़ी अबशेरोन विंड फ़ार्म और मिंगाचेविर हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर स्टेशन (जिसे अज़रबैजान के हाइड्रो ग्रिड का क्राउन ज्वेल भी कहा जाता है) में भी निवेश कर सकती हैं। इसके अलावा, भारत ने अज़रबैदान को अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन का हिस्सा बनने के लिए भी आमंत्रित किया है जो सौर ऊर्जा को अपनाने के लिए भारत की वैश्विक पहल है।
इसके अलावा, दोनों देश भू–तापीय ऊर्जा के उत्पादन में सहयोग कर सकते हैं। दोनों देशों में यह क्षेत्र अभी अपने आरंभिक चरण में है लेकिन इसमें उनकी साझेदारी का मुख्य आधार बनने की बहुत क्षमता है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के अनुसार अज़रबैजान में 800 मेगावाट (MW) की क्षमता है[v], जिसका बेहतर इस्तेमाल भारत की मदद से किया जा सकता है क्योंकि भारत 10 भूतापीय स्टेशनों का संचालन करता है जिनकी कुल क्षमता लगभग 10600 मेगावाट (MW) है। हाल ही में, भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के व्यापार प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य रूप से हरित ऊर्जा संक्रांति पर केंद्रित निवेश के मौकों पर चर्चा करने के लिए पर्यावरण उपमंत्री श्री एलुनोर सेल्टोव से मुलाकात की थी।[vi]
कनेक्टिविटी के क्षेत्र में सहयोग: हालाँकि अज़रबैजान कैस्पियन सागर के तट पर बसा देश है लेकिन यह चारों तरफ से ज़मीन से घिरा हुआ है और अंतरराष्ट्रीय व्यापार हेतु अपने पड़ोसी देशों पर निर्भर है। इससे देश के लिए संकट पैदा होता है क्योंकि भूमध्य सागर और काला सागर में किसी भी प्रकार के टकराव की स्थिति में भारी अस्थिरता और आपूर्ति श्रृंखला में बाधा आ सकती है। इसलिए, अज़रबैजान को अपना सामान लाने– ले जाने के लिए व्यापार के वैकल्पिक मार्गों की आवश्यकता है।
इसके दो विकल्प हैं– अंतरराष्ट्रीय उत्तर– दक्षिण परिवहन गलियारा (INSTC) और मध्य गलियारा (ट्रांस– कैस्पियन इंटरनेशनल ट्रांसपोर्ट रूट– TITR)। मध्य गलियारा बहुमॉडल गलियारा है जो दक्षिण काकेशियन क्षेत्र के माध्यम से पूर्व एशिया को यूरोप से जोड़ता है। इस मार्ग के महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, अज़रबैजान भारत को इस पहल का हिस्सा बनने के लिए आमंत्रित कर सकता है और भारत को व्यापार का कुशल माध्यम दे सकता है।
दूसरी ओर, INSTC बहु–मॉडल गलियारा है जिसमें समुद्री, रेल और सड़क मार्ग शामिल हैं, जो ईरान के रास्ते भारत को रूस से जोड़ता है। INSTC पश्चिमी गलियारे के माध्यम से अज़रबैजान को व्यापार का वैकल्पिक रास्ता दे सकता है। अज़रबैजान ने 2005 में आधिकारिक रूप से इस गलियारे में हिस्सा लिया, जिसमें उसने अपने वर्तमान रेलवे प्रणाली और बाकू में मौजूद रणनीतिक बंदरगाह का प्रयोग किया।[vii]
यह गलियारा व्यापार को उन परंपरागत समुद्री रास्तों (जैसे स्वेज नहर और रूस के रास्ते) से बचाता है जहाँ अक्सर टकराव या देरी की समस्या होती है। INSTC न केवल एक वैकल्पिक मार्ग के रूप में काम करता है बल्कि भारत और यूरेशिया के बीच मुख्य कनेक्टिविटी लिंक के रूप में भी काम करता है। इससे यात्रा में लगने वाला समय कम होता है, दक्षिण काकेशस और मध्य एशियाई क्षेत्र में क्षेत्रीय कनेक्टिविटी बढ़ती है, व्यापार में आने वाली तकनीकी बाधाओं को दूर करने के लिए एक एकीकृत संरचना बनाने में मदद मिलती है और अज़रबैजान की रणनीतिक स्वायत्तता मज़बूत होती है।
INSTC का पश्चिमी गलियारा अभी चालू नहीं हुआ है क्योंकि ईरान और अज़रबैजान के बीच ज़रूरी रेलवे लिंक अभी काम नहीं कर रहा है। इसके पूरा होने पर यह 6 से 20 मिलियन टन कार्गो को संभाल सकेगा, जिससे वस्तुओं के परिवहन के लिए सरल मार्ग मिल जाएगा। इस मार्ग का एक और लाभ यह है कि अज़रबैजान हाइड्रोकार्बन के अलावा फार्मास्यूटिकल्स, टेक्नोलॉजी, फूड प्रोसेसिंग और ऑटोमोबाइल जैसे क्षेत्रों में भी अपना व्यापार बढ़ा सकता है। इससे औद्योगिकरण और रोज़गार के अवसर पैदा हो सकते हैं, जिससे टिकाऊ आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा। यह मार्ग भारत– अज़रबैजान संबंधों को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है और इस जटिल भू– राजनीतिक व्यवस्था में स्थिरता लाने में योगदान दे सकता है।
सांस्कृतिक कड़ी: रवीन्द्रनाथ टैगोर और राज कपूर जैसी भारतीय सांस्कृतिक हस्तियों का अज़रबैजान के लोगों पर लंबे समय से गहरा सांस्कृतिक प्रभाव रहा है जिससे दोनों देशों के बीच मजबूत सांस्कृतिक संबंध बने हैं। पर्यटन और शिक्षा जैसे क्षेत्र अज़रबैजान के लिए 'सॉफ्ट पावर' के प्रभावी माध्यम हैं। भारत एक बड़ा बाज़ार होने के नाते ये माध्यम दूरियों को कम करने और लोगों के बीच आपसी मेल–जोल को बढ़ाने में मदद कर सकते हैं।
अज़रबैजान में बड़ी संख्या में भारतीय छात्र रहते हैं जो मुख्य रूप से बाकू स्थित अज़रबैजान मेडिकल यूनिवर्सिटी जैसे संस्थानों में मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हैं। वर्ष 2025 में, अज़रबैजान में भारत से 1.6 लाख से अधिक पर्यटक आए। अज़रबैजान के पर्यटन क्षेत्र में भारत का चौथा सबसे बड़ा योगदान रहा है। दिल्ली और मुंबई से बाकू के लिए सीधी उड़ान सेवाएं उपलब्ध हैं जिससे पर्यटन और यात्रा करना आसान एवं सुविधाजनक हो जाता है।[viii]
निष्कर्ष
भारत और अज़रबैजान जटिल भू–राजनीतिक स्थितियों का सामना कर रहे हैं। हालाँकि, दोनों देशों की क्षेत्रीय स्थिरता में समान रुचि है, इसलिए वे एक स्थिर और संतुलित साझेदारी बना सकते हैं। इसके अलावा, दोनों देश आतंकवाद के प्रति सख्त रवैया अपनाते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मध्यस्थता में आर्मेनिया– अज़रबैजान के बीच हुए शांति समझौते और जंगेज़ुर कॉरिडोर का विकास जैसे कदम इस क्षेत्र में लंबे समय तक शांति और स्थिरता कायम करने की दिशा में सकारात्मक पहल हैं।
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*श्रीश त्रिपाठी, भारतीय वैश्विक परिषद, नई दिल्ली में शोध प्रशिक्षु हैं।
अस्वीकरण : यहां व्यक्त किए गए विचार निजी हैं।
डिस्क्लेमर: इस अनुवादित लेख में यदि किसी प्रकार की त्रुटी पाई जाती है तो पाठक अंग्रेजी में लिखे मूल लेख को ही मान्य माने ।
अंत टिप्पण:
[i] Siddhant Sibbal. India extends Independence Day Greetings to Azarbaijan as Relations Thaw. WION. Accessed June 22, 2026. https://www.wionews.com/world/india-extends-independence-day-greetings-to-azerbaijan-as-relations-thaw-1779982437241
iii Why one of the world’s oldest oil producers is betting big on renewable energy. UNEP. Accessed 23rd June 2026. https://www.unep.org/news-and-stories/story/why-one-worlds-oldest-oil-producers-betting-big-renewable-energy
[iii] Azerbaijan energy Information. Accessed 23rd June 2026.
https://www.enerdata.net/estore/energy-market/azerbaijan/
[iv] India Ranks third in Renewable Energy Capacity. Ministry of New and Renewable Energy. Accessed 23rd June 2026. https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2250039&lang=1®=3
[v] Energy System Transformation. IEA. Accessed 23rd June 2026 https://www.iea.org/reports/azerbaijan-energy-profile/energy-system-transformation
[vi] CII Business Delegation met with H.E. Mr. Elnur Soltanov, Deputy Minister of Ecology of the Republic of Azerbaijan to discuss business opportunities. Indian Embassy Baku. Accessed 23rd June 2026. https://www.indianembassybaku.gov.in/event_detail/?eventid=107
[vii] India’s Strategic Maritime Expansion: Closer look at INSTC, where Azerbaijan is a significant transport hub.
Azer News. Accessed 6th July 2026. https://www.azernews.az/analysis/226003.html
[viii] Bilateral Brief. Embassy of India in Azerbaijan. Accessed 6th July 2026.
https://www.indianembassybaku.gov.in/page/bilateral-brief/