सारांश- यह नज़रिया इस बात का विश्लेषण करता है कि कैसे ड्रोन, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, डिजिटल कमांड सिस्टम के विकास और रक्षा औद्योगिक आधार में हुए व्यापाक परिवर्तन ने यूक्रेन की रक्षा क्षमता को मज़बूत बनाया है। इसमें यह तर्क दिया गया है कि आधुनिक सैन्य शक्ति तेज़ी से नवाचार, औद्योगिक सुदृढ़ता और परिस्थितियों के अनुसार ढलने की क्षमता पर निर्भर करती है, न कि केवल सेना के आकार पर।
परिचय
बीते दशक में यूक्रेन के रक्षा क्षेत्र में जबरदस्त परिवर्तन हुआ है। कभी सोवियत दौर की विरासत, लंबे समय से कम निवेश और युद्ध के लिए कम तैयारी जैसी चुनौतियों से जूझ रहा यूक्रेन, अब तकनीक के लिहाज से स्वयं को ढालने वाले और तेज़ी से आत्मनिर्भर होते रक्षा प्रणाली में बदल चुका है। यूक्रेन के सैन्य क्षेत्र का यह पुनरुत्थान इस बात का बेहतरीन उदाहरण है कि कैसे लंबे समय तक चलने वाला युद्ध किसी देश की रक्षा– योजना को पूरी तरह से बदल सकता है। वर्ष 2022 में रूस द्वारा यूक्रेन पर किए गए हमले ने देश को कई प्रकार के सुधार शुरू करने के लिए प्रेरित किया जिससे यूक्रेनी सेना को बहुत अधिक हथियारों से लैस और शक्तिशाली दुश्मन का सामना करने के लिए आधुनिक तकनीक और मज़बूती मिली।
1990 और 2000 के दशक की शुरुआत में यूक्रेन के रक्षा उद्योग में रक्षा उत्पादन की गति धीमी रही। 1990 के दशक में, जब यूक्रेन सोवियत संघ से आज़ाद हुआ, तो देश के रक्षा क्षेत्र को सोवियत विरासत मिली, जिसमें लगभग 780,000 सैनिक, भारी मात्रा में रक्षा उपकरण और सोवियत सैन्य– औद्योगिक परिसर का 30% हिस्सा शामिल था।[i] हालांकि, बचाव की ये मुद्राएं लाभ के बजाय नुकसानदेह अधिक साबित हुईं क्योंकि पुराने हो रहे उपकरण, कम निवेश और मज़बूरन की गई कटौती के साथ–साथ रूसी आपूर्ति श्रृंखला और तकनीकी मानकों पर भारी निर्भरता ने इसकी सैन्य तैयारी को बहुत कमज़ोर कर दिया। वर्ष 2014 में, केवल 5,000 सैनिक ही उपलब्ध थे, जो रक्षा क्षेत्र की कमियों को उजागर करता है, इस क्षेत्र ने आंतरिक सुरक्षा को प्राथमिकता दी और बाहरी खतरों को कम महत्व दिया।[ii]
वर्ष 2014 में रूस द्वारा क्रीमिया पर कब्ज़ा करने और डोनबास में युद्ध ने यूक्रेन के रक्षा उद्योग के लिए महत्वपूर्ण मोड़ का काम किया, जिसे इसकी पूरी तरह से समीक्षा की आवश्यकता महसूस हुई। साल 2014 में हुई घटनाओं के बाद, यूक्रेन ने रूस को सुरक्षा के लिए बड़ा दुश्मन मानते हुए आंतरिक खतरों की बजाय बाहरी सुरक्षा को प्राथमिकता दी। इसका परिणाम यह हुआ कि यूक्रेन ने कई सैन्य सुधार प्रक्रियाएं शुरू कीं और अपने रक्षा उद्योग को मज़बूत करने की कोशिश की। उसने तेजी से 90,000 सैनिकों को जुटाया, पेशेवर अधीनस्थ सैन्य अधिकारियों की सेना तैयार की, स्पेशल ऑपरेशंस फोर्स बनाई और नागरिकों की निगरानी व्यवस्था को सुदृड़ किया।[iii] स्वैच्छिक सैन्य टुकड़ियों (वॉलंटियर बटालियन) को शामिल करना और क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था बनाकर, 2022 के बाद युद्ध के समय की आवश्यकताओं के हिसाब से स्वयं को ढालने की नींव रखने में बहुत महत्वपूर्ण साबित हुआ।
बाहरी समर्थन से अस्तित्व बनाए रखना
वर्ष 2022 में, दोनों देशों के बीच तनाव तब बड़े युद्ध में बदल गया जब रूस ने कीव पर कब्ज़ा करने के इरादे से उत्तर, पूर्व और दक्षिण से यूक्रेन पर हमला किया। यह हमला आगे चल कर दीर्घकालिक युद्ध में बदल गया, जिससे यूक्रेन की रक्षा और औद्योगिक क्षमताओं में जबरदस्त बदलाव आया। अमेरिका और उसके पश्चिमी सहयोगियों से मिली बाहरी मदद के कारण यूक्रेन युद्ध के शुरुआती वर्षों में टिके रहने में कामयाब रहा। साल 2014 में नाटो के मानकों को अपनाने के लिए किए गए सुधारों के बाद अमेरिका ने अपने प्रशिक्षण कार्यक्रम, संयुक्त अभ्यासों, खुफिया जानकारी को साझे करने और उन्नत हथियार प्रणालियों के माध्यम से यूक्रेन को ठोस और सक्षम सैन्य बल बनने में मदद की।
वर्ष 2018 से अमेरिका द्वारा आपूर्ति किए गए जैवलिन मिसाइल जैसी प्रणालियां कीव की तरफ बढ़ रहे रूसी बख़्तरबंद काफिलों को बर्बाद करने में बहुत महत्व साबित हुईं।[iv] जून 2022 से अमेरिका से मिले हाई मोबिलिटी आर्टिलरी रॉकेट सिस्टम (HIMARS) की मदद से यूक्रेन रूस के खिलाफ सटीक हमले करने में सफल रहा।[v] अमेरिका और उसके सहयोगियों से मिले वायु रक्षा प्रणाली, जैसे कि स्टिंगर मिसाइलें और उन्नत वायु रक्षा प्रणाली ने देश को दुश्मन की ठोस हवाई शक्ति का मुकाबला करने में मदद की।[vi] विशेष रूप से अमेरिका से मिली बाहरी मदद ने यूक्रेन को आवश्यक संसाधन और समय देकर अपना स्वयं का रक्षा उत्पादन बढ़ाने में मदद की।
रक्षा उद्योग में क्रांति
इस युद्ध के प्रभाव से यूक्रेन के रक्षा उद्योग और खरीद प्रणाली में भी बहुत बड़ा परिवर्तन आया। इससे पहले यह उद्योग मुक्य रूप से सरकारी कंपनी उक्रोबोरोनप्रोम (UkrOboronProm) के नियंत्रण में थी लेकिन युद्ध के बदलते हालात को देखते हुए बाद में इसे निजी कंपनियों, रक्षा तकनीक संबंधी स्टार्टअप्स और नवाचार के लिए खोल दिया गया।[vii] साल 2022 में हुए हमले और सैन्य रूप से अधिक शक्तिशाली दुश्मन का सामना करने की रणनीतिक आवश्यकता को महसूस करते हुए यूक्रेन ने रक्षा उत्पादन में निजी कंपनियों को शामिल किया।
हथियार उद्योग में निजी कंपनियों को शामिल करने से नया, लचीला और तेज़ी से प्रतिक्रिया देने वाला सिस्टम बना। वर्ष 2024 तक, कई निजी कंपनियां हथियार बना रही थीं, जिससे रक्षा नवाचार और रोज़गार पैदा करने में मदद मिली। साथ ही सरकार ने यूक्रेन के युद्ध–पूर्व खरीद प्रणाली में लंबे समय से चली आ रही नौकरशाही की बाधाओं को दूर करने के लिए कई सुधार शुरू किए। इन सुधारों से मंजूरी की प्रक्रिया में तेज़ी आई, अफ़सरशाही की वजह से होने वाली देरी कम हुई और विकेंद्रीकृत खरीद आसान हुई, जिससे कमांडरों और निर्माताओं के बीच बेहतर संवाद संभव हो सका। इस युद्ध ने ड्रोन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), रोबोटिक्स, नेविगेशन प्रणाली और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध में माहिर रक्षा–तकनीक स्टार्टअप्स की तेज़ी से वृद्धि को भी बढ़ावा दिया। इस उद्योग ने फ्रंटलाइन यूनिट्स के साथ करीबी तालमेल बनाए रखा, जिससे युद्ध के मैदान से तत्काल प्रतिक्रिया मिल सका और तकनीक में नवाचार की रफ्तार बढ़ी।
इस बदलाव की नींव ब्रेव–1 पहल है, जो सरकार, निजी कंपनियों, निवेशकों और सेना के बीच की खाई को पाटती है जिससे रक्षा तकनीकों का तेज़ी से विकास हो पाता है। कम लागत वाले और असरदार लड़ाकू हथियारों की बढ़ती मांग को देखते हुए यूक्रेन ने घरेलू स्तर पर ड्रोन का उत्पादन बढ़ाने की भी कोशिशें कीं। ऊपर बताए गए सभी सुधारों ने यूक्रेन को ठोस रक्षा–औद्योगिक आधार दिया है जो अत्याधुनिक सैन्य तकनीकें विकसित करने में सक्षम हैं।
रूस की हरकतों ने अनजाने में ही यूक्रेन के रक्षा क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा दे दिया। रूस की तरह से एंटोनोव और मोटर सिच जैसे यूक्रेन के महत्वपूर्ण और सैन्य अवसंरचना पर लगातार मिसाइल हमलों ने यूक्रेन को स्थानीय उत्पादन प्रणाली के माध्यम से अपने रक्षा क्षेत्र को मज़बूत करने और निजी कंपनियों को शामिल कर देश में ही हथियारों के उत्पादन को बढ़ाने के लिए विवश कर दिया।[viii]
रूस की उन्नत इलेक्ट्रिनक युद्ध क्षमताओं का मुकाबला करने के लिए यूक्रेन ने एंटी– जैमिंग तकनीक बनाई, सुरक्षित संचार नेटवर्क स्थापित किए और अपने पूरे डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया।[ix] रूस के लगातार ड्रोन हमलों ने यूक्रेन को अपने देश में ही ड्रोन बनाने के लिए प्रेरित किया। रूस की आक्रामकता और युद्ध के लगातार दबाव के कारण यूक्रेन के रक्षा उद्योग में बदलाव आया और देश को बदलते हुए युद्ध के माहौल के हिसाब से अपने सैन्य ढांचे को ढालने के लिए मजबूर होना पड़ा।
युद्ध के मैदान में हालात के अनुसार ढलना और तकनीकी नवाचार
युद्ध के बाद के वर्षों में, यूक्रेन ने युद्ध के मैदान में तेज़ी से बदलाव करने और तकनीकी नवाचार में नई पहल की। वर्ष 2022 में हुए हमले के बाद यूक्रेन ने व्यावसायिक ड्रोन का प्रयोग शुरू किया, ताकि परंपरागत हथियारों की कमी को पूरा किया जा सके। इस दौरान, यूक्रेन ने ब्रेव1 (Brave1) जैसी पहलों के माध्यम से निजी फर्मों और तकनीकी कंपनियों को शामिल करके पूरी तरह से सरकारी नियंत्रण वाले रक्षा क्षेत्र से हटकर काम करना शुरू किया।[x]
ब्रेव1 (Brave1) यूक्रेन सरकार का रक्षा नवाचार मंच है। यह सेना, निजी कंपनियों और निवेशकों को एक मंच पर लाता है ताकि युद्ध की आवश्यकताओं के हिसाब से नई सैन्य तकनीक के विकास, परीक्षण और तैनाती में तेज़ी लाई जा सके। तकनीकी नवाचार और तरक्की ने ड्रोन की परंपरागत भूमिकाओं से आगे बढ़कर एफपीवी ड्रोन, लंबी दूरी की मारक क्षमता वाली मिसाइलों और समुद्री ड्रोन प्रणाली के प्रयोग को शामिल किया है, ताकि टैंकों, लैजिस्टिक हब और कमांड सेंटर्स पर सटीक हमले किए जा सकें। ये उन्नत ड्रोन प्रणाली किफायती और बहुत कारगर साबित हुए हैं और ये रूस की सैन्य श्रेष्ठता को बेअसर करने में भी सक्षम हैं।
रूस–यूक्रेन युद्ध में इलेक्ट्रॉनिक युद्ध महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। रूस बहुत ही उन्नत तकनीक वाले साधनों का प्रयोग करके इलेक्ट्रोमैग्नेटिक क्षेत्र पर अपना दबदबा बनाए हुए है। रूस के पास क्रासुखा–4 (Krasukha-4), झिटेल (Zhitel), लीर–3 (Leer-3) और मोस्कवा–1 (Moskva-1) जैसे शक्तिशाली इलेक्ट्रॉनिक साधन हैं जो सैन्य संचार में बाधा डाल सकते हैं, जीपीएस सिग्नल को जाम कर सकते हैं, ड्रोन सिस्टम को बेकार कर सकते हैं और यूक्रेन के सैनिकों की गतिविधियों का पता लगातर उनकी संचालन क्षमता को बहुत कमज़ोर कर सकते हैं।[xi]
इस इलाके में रूस की तरफ से कई चुनौतियां मिलने के बावजूद, यूक्रेन ने नाटो और अमेरिका की मदद से अपनी इलेक्ट्रॉनिक रक्षा क्षमताओं को मज़बूत करने की कोशिश की। यूक्रेन ने अपने ड्रोन सॉफ्टवेयर में लगातार बदलाव कर, नेविगेशन के वैकल्पिक तरीकों को अपनाकर और काउंटर–जैमिंग प्रोटोकॉल का प्रयोग कर रूस की दखलअंदाज़ी का मुकाबला किया है।
यूक्रेन के लिए, कमांडरों, ड्रोन ऑपरेटरों और आर्टिलरी यूनिट्स के बीच अभियान में तालमेल बिठाने के लिए सुरक्षित और कारगर संचार प्रणाली बहुत आवश्यक थी। डिजिटल संचार प्रणाली और बेहतर रडार सुरक्षा को शामिल करने से उनके कमांड–एंड– कंट्रोल सिस्टम में बहुत अधिक सुधार हुआ। आखिरकार, रूस के अगली पीढ़ी के इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली कोई कमी या कमज़ोरी बनने की बजाय एक ऐसी कसौटी साबित हुए, जिसने यूक्रेन को युद्ध के मैदान में अपनी फुर्ती और तेज़ी बढ़ाने का रास्ता दिखाया और महत्वपूर्ण तकनीकी आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद की।
ड्रोन, सेंसर, खुफिया और कमांड सिस्टम को एक ही संचालन नेटवर्क में शामिल करना यूक्रेन की सबसे महत्वपूर्ण सैन्य नवाचारों में से एक बन गया है। इस डिजिटल संक्रांति की अगुवाई डेल्टा (DELTA) ने की, जो एक सैन्य डिजिटल नेटवर्क प्रणाली है और यूक्रेन की सेना की सभी शाखाओं को जोड़ने वाले आवश्यक कमांड एंड कंट्रोल प्लेटफॉर्म के रूप में काम करता है।[xii] इस डिजिटल सिस्टम का मुख्य काम ड्रोन, सर्विलांस और खुफिया यूनिट जैसे कई स्रोतों से आवश्यक जानकारी इक्ट्ठा करना, उसे एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाना और युद्ध– क्षेत्र की रियल–टाइम जानकारी उपलब्ध कराना है।
रक्षा आधुनिकीकरण की दिशा में आगे बढ़ते हुए, यूक्रेन ने अपनी पारंपरिक कागज़–आधारित सैन्य प्रक्रियाओं की जगह आधुनिक डिजिटल अवसंरचना को अपनाया। इस परिवर्तन से बेहतर संवाद और तेज़ी से फ़ैसले लेने में मदद मिली, साथ ही संचालन क्षमता में भी सुधार हुआ। तकनीक, उद्योग और सैन्य अभियानों के मेल से ऐसा फुर्तीला रक्षा तंत्र तैयार हुआ है जो बदलते युद्ध–क्षेत्र के माहौल के हिसाब से स्वयं को ढालने में सक्षम है।
निष्कर्ष
वर्ष 2022 से, यूक्रेन का रक्षा उद्योग सोवियत दौर की सीमाओं से बंधे औद्योगिक बेस से बदलकर, हालात के हिसाब से ढलने वाले और नवाचार पर आधारित युद्ध के समय की व्यवस्था में बदल गया है। यूक्रेन के अनुभव दर्शाते हैं कि युद्ध के मैदान में ताकत केवल परंपरागत हथियारों तक ही सीमित नहीं होती, बल्कि इसमें तकनीकी तरक्की, रक्षा उद्योग में सुधार और ठोस अंतरराष्ट्रीय साझेदारी भी शामिल होती है। नतीजतन, यूक्रेन– रूस युद्ध से मिले सबक दूसरे देशों के लिए बहुत कारगर साबित हो सकते हैं और भविष्य की रक्षा योजना व सैन्य आधुनिकीकरण के लिए महत्वपूर्ण जानकारी दे सकते हैं।
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*देविका विजय, भारतीय वैश्विक परिषद, नई दिल्ली में शोध प्रशिक्षु हैं।
अस्वीकरण : यहां व्यक्त किए गए विचार निजी हैं।
डिस्क्लेमर: इस अनुवादित लेख में यदि किसी प्रकार की त्रुटी पाई जाती है तो पाठक अंग्रेजी में लिखे मूल लेख को ही मान्य माने ।
अंत टिप्पण:
[i] Transformation Under Fire – An Analysis of Ukraine’s Security Sector Since 1991.” 2019. IISS. 2019. https://www.iiss.org/research-paper/2025/transformation-under-fire-an-analysis-of-ukraines--security-sector-since-1991/.
[ii] Ibid
[iii] Ibid
[iv] Laird, Robbin. 2025. “How Ukraine Transformed Western Military Aid and Domestic Innovation into a Dynamic Defence Model - Second Line of Defence.” Second Line of Defence. July 24, 2025. https://sldinfo.com/2025/07/how-ukraine-transformed-western-military-aid-and-domestic-innovation-into-a-dynamic-defense-model/.
[v] Ibid
[vi] Ibid
[vii] Bondar, Kateryna. 2025. “How Ukraine Rebuilt Its Military Acquisition System Around Commercial Technology.” Csis.Org. 2025. https://www.csis.org/analysis/how-ukraine-rebuilt-its-military-acquisition-system-around-commercial-technology
[viii] Kuzmuk, Kateryna , and Lorenzo Scarazzato. 2025. “The Transformation of Ukraine’s Arms Industry amid War with Russia.” Sipri. February 21, 2025. https://www.sipri.org/commentary/topical-backgrounder/2025/transformation-ukraines-arms-industry-amid-war-russia.
[ix] Srivastava, VSM (Retd), Maj Gen AK . 2025. “Technological Advancements in Electronic Warfare and ITS Efficacy in Russia-Ukraine Conflict.” Centre For Joint Warfare Studies (CENJOWS). SYNERGY. February 2025. https://cenjows.in/wp-content/uploads/2025/12/Maj-Gen-AK-Srivastava_-Article.pdf.
[x] Matlack, Jon-Wyatt, Sebastian Schwartz, and Oliver Gill. n.d. “Ukraine’s Drone Ecosystem and the Defence of Europe: Lessons Lost Can’t Be Learned About the Authors Acknowledgements.” https://www.lse.ac.uk/ideas/Assets/Documents/Research-Reports/2025-04-05-DRONES-MatlackSchwartzGill-FINAL-WEB.pdf.
[xi] Srivastava, VSM (Retd), Maj Gen AK . 2025. “Technological Advancements in Electronic Warfare and ITS Efficacy in Russia-Ukraine Conflict.” Centre For Joint Warfare Studies (CENJOWS). SYNERGY. February 2025. https://cenjows.in/wp-content/uploads/2025/12/Maj-Gen-AK-Srivastava_-Article.pdf.
[xii] Bondar, Kateryna. 2025. “How and Why Ukraine’s Military Is Going Digital.” Csis.Org. 2025. https://www.csis.org/analysis/how-and-why-ukraines-military-going-digital.