चीन– पाकिस्तान रणनीतिक संबंध
चीन और पाकिस्तान के बीच 1951 में औपचारिक रूप से राजनयिक संबंधों की स्थापना हुई थी, और 1972 से (2015 में विस्तार) उनके बीच रणनीतिक संबंध भी है। चीन और पाकिस्तान की आवाम के बीच भी गहरे संबंध हैं। दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय मुक्त व्यापार समझौता भी है और वित्त वर्ष 2024 में उनका वार्षिक द्विपक्षीय व्यापार 23 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक का रहा था।[i] दोनों देश नियमित रूप से तीनों सेनाओं के संयुक्त सैन्य अभ्यास करते हैं। पाकिस्तान के हथियारों के ज़खीरे में अब 80 प्रतिशत से अधिक हथियार चीनी सैन्य तकनीक और हथियार प्रणालियों की है। इसमें दोहरे प्रयोग वाली इमेजिंग और मार्गदर्शन के लिए पाकिस्तान को बेईदोऊ (BeiDou) सैटेलाइट नेटवर्क का एक्सेस देना भी शामिल है।[ii]
इस संबंध का महत्वपूर्ण हिस्सा 63 अरब डॉलर की लागत से तैयार हो रहा चीन– पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) है। यह गलियारा अरब सागर स्थिर ग्वादर बंगरगाह को चीन के काशगर से जोड़ता है और पाकिस्तान के कब्ज़े वाले जम्मू–कश्मीर के हिस्से, शक्सगाम गलियारे से होकर गुज़रता है जिसे 1963 में गैर–कानूनी तरीके से चीन को सौंप दिया गया था।
बलूचिस्तान के मकरान तट पर स्थित 24 किलोमीटर चौड़ा प्रायद्वीप जिवानी इन दिनों चर्चा में है। यहाँ एक एयरबेस और संभवतः एक नौसैनिक अड्डा बनाए जाने की ख़बरें हैं जिसे चीन की वायु सेना (PLAAF) चीन और पाकिस्तान के संयुक्त इस्तेमाल के लिए विकसित कर रही है।[iii] यह 2018 की उन रिपोर्टों के बाद हुआ है जिनमें इस इलाके में चीन और पाकिस्तान के साझा नौसैनिक अड्डे के बनने का अनुमान लगाया गया था। जिबूती (जो 2017 में चालू हुआ था) के बाद यह चीन का दूसरा विदेशी सैन्य अड्डा होगा। तय की गई जगह पाकिस्तान– ईरान सीमा से लगभग 38 किलोमीटर की दूरी पर है और होर्मुज़ जलडमरूमध्य के मुहाने पर स्थित है। यह जलमार्ग विश्व के लगभग 20% तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस, 30% तक हीलियम, और साथ ही बड़ी मात्रा में ऊर्वरकों के उत्पादन एवं आवाजाही के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है। [iv]
तस्वीर 1: इस इलाके में मौजूद अलग– अलग बंदरगाह और सुविधाएं। मानचित्र लगभग उचित स्केल पर है।
स्रोत: गूगल अर्थ से बेस मैप। इसे लेखक द्वारा तैयार किया गया है।
मूल रूप से दूसरे विश्व युद्ध के समय के हवाई अड्डे, जिवानी के विकास को न तो पाकिस्तान और न ही चीन की सरकार ने आधिकारिक रूप से स्वीकार किया है। हालाँकि, 2018 से ही इस बेस को चीन के संभावित बेस के रूप मे चिन्हित किया गया था और तब से इसे लगातार अपग्रेड किया जा रहा है, ताकि किसी आपातस्थिति में– जैसे कि "यदि अमेरिका और उसके सहयोगी अपनी हिंद–प्रशांत रणनीति को बहुत आगे ले जाएं", प्रयोग किया जा सके।[v]
चीन के कुछ सैन्य जानकारों ने भी इस बेस के पक्ष में अपने तर्क दिए हैं। उनका कहना है कि हिंद महासागर क्षेत्र में काम करने वाले पीएलए (PLA) नौसैनिक पोतों के रखरखाव के लिए यह बेस ज़रूरी था क्योंकि ग्वादर अब "नागरिक बंदरगाह/असैनिक पत्तन" बन गया है।[vi]
दक्षिण एशिया, पश्चिम एशिया और हिंद महासागर क्षेत्र पर प्रभाव
जिवानी चीन को फारस की खाड़ी में रणनीतिक ठिकाना देता है जिससे उसके हवाई और नौसैनिक संसाधन समुद्री संचार मार्गों (SLOCs) के बहुत करीब आ जाते हैं। इसे एक "कमांड हब और निगरानी चौकी के रूप में देखा जा रहा है जिसे विशेष रूप से होर्मुज़ से गुज़रने वाले अमेरिकी 5वें बेड़े (5th Fleet) पर नज़र" रखने के लिए बनाया गया है।[vii] इससे इस क्षेत्र में भारत के नेतृत्व और भागीदारी वाले कनेक्टिविटी परियोजनाओं पर चीन की नज़र बनी रहती है जैसे कि अंतरराष्ट्रीय उत्तर–दक्षिण परिवहन गलियारा (INSTC) जो बंदर अब्बास से होकर गुज़रता है, अफ़गानिस्तान के लिए चाबहार– ज़हेदान रणनीतिक रेल लिंक और संयुक्त अरब अमीरात के साथ I2U2 फ्रेमवर्क। इस बात को भी ध्यान में रखना ज़रूरी है कि भारत का लगभग 30 प्रतिशत तेल और 90 प्रतिशत गैस एवं तरल हीलियम का आयात इसी जलडमरूमध्य से होता है, जिससे आपूर्ति श्रृंखला में बाधा पड़ने की चिंता पैदा होती है।[viii]
1980 के दशक के आखिर में चीन ने 'अपतटीय सक्रिय रक्षा रणनीति' अपनाई। इसका उद्देश्य अपने 'आश्रित' व्यापार मार्गों के पास चीन की सेना की मौजूदगी को मज़बूत करना है।[ix] इसलिए, ऐसा लगता है कि चीन जिवानी को सीपीईसी (CPEC) और ग्वादर बंदरगाह के लिए अतिरिक्त सुरक्षा कवच के रूप में देख रहा है। बीजिंग इस रास्ते को पश्चिम एशिया (विशेषरूप से ईरान) से चीन के तेल आयात को सुरक्षित रखने के लिए बहुत महत्वपूर्ण मानता है क्योंकि वहाँ से होने वाला आयात उसके कुल तेल आयात का दो–तिहाई से अधिक है। इसलिए, विदेश में सैन्य अड्डा बनाने का फ़ैसला ऐसा लगता है कि इस क्षेत्र पर चीन की आर्थिक निर्भरता की वजह से लिया गया है।
इससे मलक्का जलडमरूमध्य से होकर गुज़रने से भी बचा जा सकता है। चीन का आरोप है कि भारत, अंडमान और निकोबार ट्राई– सर्विस कमांड से एक 'मेटल चेन' बनाकर इस मार्ग से होने वाले व्यापार (जिसमें चीन का व्यापार भी शामिल है) में बाधा डालना चाहता है, यह कमांड महत्वपूर्ण 10-डिग्री चैनल के पास स्थित है।[x]
आखिर में, जैसे–जैसे चीन समुद्र और अपने इलाके से बाहर भी अपनी मौजूदगी बढ़ा रहा है, जिवानी में नौसेना और वायु सेना का बेस बनाने से उसे ऐसे इलाके में अपनी मौजूदगी दिखाने का मौका मिलता है जहाँ कई देशों और गैर– सरकारी गुटों की मौजूदगी की वजह से बहुत खींचतान रहती है। हिंद महासागर में "समुद्री डकैती–रोधी" अभियानों के लिए परमाणु–संचालित और संभवतः परमाणु–हथियारों से लैस पनडुब्बियों की तैनाती, जो जिवानी से संचालित होंगी[xi], ने, इस क्षेत्र मं दीर्घकालिक निगरानी और लड़ाकू बल बनाए रखने के चीन की मंशा को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं।[xii] [xiii]
निष्कर्ष
रणनीतिक हलकों में चर्चाओं के बावजूद, इतने बड़े पैमाने की परियोजना के लिए जिवानी के बारे में कोई आधिकारिक बयान न आना असामान्य है। ऐसा माना जा सकता है कि संभावित प्रतिक्रियाओं को नियंत्रित करने के लिए इस परियोजना को गुप्त रखा जा रहा है। हालाँकि, बलूच राजनीतिक पार्टियों, उग्रवादी समूहों और नागर समाज के विरोध पर भी ध्यान देना ज़रूरी है। उनका आरोप है कि ज़मीन पर एकतरफ़ा कब्ज़ा किया जा रहा है, सेना के जवान मानवाधिकारों का उल्लंघन कर रहे हैं और समुद्र से भारी सैन्य मौजूदगी व अवसंरचना बनाने से मुख्य रूप से मछली पकड़ने और आदिवासियों की आजीविका का ऐसा नुकसान हो रहा है जिसकी भरपाई नहीं की जा सकती।[xiv] [xv]
सीपीईसी (CPEC) पर काम कर रहे चीन और पाकिस्तान के इंजीनियरों पर बलूच उग्रवादी संगठनों के लगातार हमलों के कारण, आर्थिक और मानवीय हानि की पक्की आशंका को देखते हुए दोनों पक्ष शायद ही इस प्रकार की परियोजना की सार्वजनिक घोषणा करते। इसलिए, इस परियोजना को लेकर बनी रणनीतिक अस्पष्टता, आंतरिक नागरिक और सशस्त्र विरोध, सेना के दखल की सीमाएं और चीन एवं चीन– पाकिस्तान रणनीतिक साझेदारी की आवश्यकताओं के बीच नाज़ुक संतुलन है।
फिर भी, जिवानी में हो रही गतिविधियों पर नज़र रखना बहुत ज़रूरी है। ये गतिविधियाँ निश्चित रूप से पश्चिमी हिंद महासागर क्षेत्र की सुरक्षा और संकटों के समीकरण में परिवर्तन का संकेत देती हैं जो पहले से ही बहुत संवेदनशील और सैन्यीकृत इलाका है। चीन की 'घेराबंदी की रणनीति'[xvi] के हिस्से के रूप में और पाकिस्तान के साथ उसकी करीबी साझेदारी के कारण, इसका दक्षिण और पश्चिम एशिया के साथ– साथ पश्चिम हिंद महासागर क्षेत्र एवं व्यापक परिदृश्य में आर्थिक, सैन्य और रणनीतिक संतुलन पर गहरा प्रभाव पड़ना तय है।
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*यशोधन देवधर, भारतीय वैश्विक परिषद, नई दिल्ली में शोध प्रशिक्षु हैं।
अस्वीकरण : यहां व्यक्त किए गए विचार निजी हैं।
डिस्क्लेमर: इस अनुवादित लेख में यदि किसी प्रकार की त्रुटी पाई जाती है तो पाठक अंग्रेजी में लिखे मूल लेख को ही मान्य माने ।
अंत टिप्पण:
[i] Ministry of Foreign Affairs. (n.d.). Pakistan. Www.fmprc.gov.cn; Ministry of Foreign Affairs, People’s Republic of China. https://www.fmprc.gov.cn/eng/gjhdq_665435/2675_665437/2757_663518/. Retrieved June 10, 2026.
[ii] SIPRI. (2026, March 9). Global arms flows jump nearly 10 per cent as European demand soars. SIPRI. https://www.sipri.org/media/press-release/2026/global-arms-flows-jump-nearly-10-cent-european-demand-soars. Retrieved June 10, 2026.
[iii] Katoch, Lt. Gen. P. C. (2026). Jiwani PLA base — Major strategic gain for China. Spsnavalforces.com; SP’s Naval Forces. https://www.spsnavalforces.com/experts-speak/?id=209&h=Jiwani-PLA-base-Major-strategic-gain-for-China. Retrieved June 10, 2026.
[iv] Butler, G. (2026, April 8). What Is the Strait of Hormuz and Why Does It Matter? BBC News. https://www.bbc.com/news/articles/c78n6p09pzno. Retrieved June 19, 2026.
[v] Press Trust of India. (2018, January 9). Stop Guessing About Chinese Naval Military Base In Pakistan: China. Press Trust of India via NDTV World. https://www.ndtv.com/world-news/stop-guessing-about-chinese-naval-military-base-in-pakistan-china-1797815. Retrieved 19 June, 2026.
[vi] Chan, M. (2018, January 5). First Djibouti ... now Pakistan port earmarked for a Chinese overseas naval base, sources say. South China Morning Post. https://www.scmp.com/news/china/diplomacy-defence/article/2127040/first-djibouti-now-pakistan-port-earmarked-chinese. Retrieved June 19, 2026.
[vii] India Today Global Desk. (2026, April 7). Is Jiwani airbase the answer to America’s Hormuz crisis that China won’t let it have? India Today. https://www.indiatoday.in/world/story/is-jiwani-airbase-the-answer-to-americas-hormuz-crisis-that-china-wont-let-it-have-2892957-2026-04-07. Retrieved June 19, 2026.
[viii] Press Information Bureau. (2026). Inter-Ministerial Briefing held on Recent Developments in West Asia. Pib.gov.in; Press Information Bureau, Government of India. https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2238525®=3&lang=1. Retrieved June 10, 2026.
[ix] Cole, B. D., & Puska, S. M. (2000). China’s Maritime Strategy. In PEOPLE’S LIBERATION ARMY AFTER NEXT (pp. 279–327). Strategic Studies Institute, US Army War College; JSTOR. https://doi.org/10.2307/resrep12051.10. Retrieved June 10, 2026.
[x] Holmes, J., & Yoshihara, T. (2008). Naval War College Review China and the United States in the Indian Ocean (p. 14). https://digital-commons.usnwc.edu/cgi/viewcontent.cgi?article=1815&context=nwc-review. Volume 61, Number 3 (Summer). Retrieved June 19, 2026.
[xi] Ibid.
[xii] Jin, H. (2025). CMSI Archive Translation: The Biggest Obstacle to Chinese Nuclear Submarines Going Out Into The Indian Ocean . In US Naval War College Digital Commons. US Naval War College. https://digital-commons.usnwc.edu/cgi/viewcontent.cgi?article=1068&context=cmsi-translations. Retrieved June 28, 2026.
[xiii] Singh, A. K. (2025, March 6). China’s Subsurface Presence in the Indian Ocean and India’s Options - MP-IDSA. MP-IDSA; Manohar Parrikar Institute of Defence Studies and Analyses. https://idsa.in/publisher/comments/chinas-subsurface-presence-in-the-indian-ocean-and-indias-options. Retrieved June 28, 2026.
[xiv] Hussain, A. (2024, March 20). Pakistan’s Gwadar port attacked, eight armed fighters killed. Aljazeera.com; Al-Jazeera. https://www.aljazeera.com/news/2024/3/20/pakistans-gwadar-port-attacked-eight-armed-fighters-killed. Retrieved June 19, 2026.
[xv] Bhandari, A., & Shinde, A. (2024). Spiralling violence in Balochistan. Gateway House. https://www.gatewayhouse.in/spiraling-violence-balochistan/. Retrieved June 19, 2026.
[xvi] Prakash, Adm. A. (2017). A Strategic Encirclement. Delhipolicygroup.org; Delhi Policy Group. https://www.delhipolicygroup.org/media/opinion/a-strategic-encirclement. Retrieved June 19, 2026.