सारांश: बीते दशक में भारत के रक्षा उत्पादन और निर्यात में तेज़ी से वृद्धि हुई है। इसी माहौल में, भारत और वियतनाम के बीच रक्षा सहयोग का दायरा भी बढ़ा है, जिसमें सैन्य अभ्यास, जहाजों का दौरा, 2 + 2 वार्ता और हाल ही में हुई ब्रह्मोस मिसाइल का सौदा शामिल हैं।
परिचय
भारत ने ऐतिहासिक रूप से दक्षिण– पूर्वी एशियाई देशों के साथ अपने संबंधों में सक्रिए रवैया अपनाया है जो साझा भाषाई, धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक संबंधों पर आधारित है।[i] वर्ष 1955 के बांडुंग सम्मेलन और गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM) ने आज़ादी के बाद उपनिवेश–विरोधी एकजुटता और तटस्थता के माध्यम से मज़बूत राजनयिक संबंध बनाने की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाया। हालाँकि, शीत युद्ध के दौरान सोवियत संघ के साथ भारत के करीबी राजनीतिक संबंधों को शक की नज़र से देखा जाता था, क्योंकि सोवियत संघ की विचारधारा साम्यवादी थी।[ii]
शीत युद्ध के बाद के दौर में भारत ने 1992 में "लुक ईस्ट पॉलिसी" और आगे चल कर 2014 में "एक्ट ईस्ट पॉलिसी" अपनाकर दक्षिण– पूर्व एशिया के साथ अपने संबंधों की बार– बार पुष्टि की। भारत ने एक्ट ईस्ट पॉलिसी के तहत "आसियान को प्राथमिकता" देने पर ध्यान दिया– यानि द्विपक्षीय संबंधों के बजाय पूरे क्षेत्र के साथ मिल कर काम करने पर अधिक ज़ोर दिया है।[iii] हालाँकि, भारत ने मेकांग–गंगा सहयोग, बिम्सटेक (BIMSTEC) के गठन और कंबोडिया, लाओस व वियतनाम (CLMV) पर ज़ोर देकर कुछ आसियान देशों के साथ क्षेत्रीय और मुद्दे–आधारित सहयोग को भी आगे बढ़ाया है। विशेष रूप से वियतनाम, भारत के लिए महत्वपूर्ण साझेदार के रूप में उभरा है।
बीते कुछ दशकों में, विशेष रूप से भारत और वियतनाम के संबंधों में बहुत सुधार हुए हैं। वर्ष 1958 में वियतनाम के क्रांतिकारी नेता हो ची मिन्ह की भारत की यात्रा ने लंबे समय तक चलने वाली साझेदारी की नींव रखी थी।[iv] भारत उन पहले देशों में से एक था जिन्होंने 1972 में वियतनाम समाजवादी गणराज्य को मान्यता प्रदान की थी।[v] शीतयुद्ध समाप्त होने के बाद, भारत और वियतनाम ने व्यापार, खेती और हाल के समय में रक्षा के क्षेत्र पर ज़ोर दिया है।[vi]
भारत का विस्तार करता रक्षा क्षेत्र
वर्ष 2016 से, भारत के रक्षा उत्पादन और रक्षा निर्यात में बहुत तेज़ी से वृद्धि हुई है। यह मुख्य रूप से "मेक इन इंडिया" और "आत्मनिर्भर भारत" जैसी नीतियों में सुधार और पहलों की वजह से हुआ है। इसेक अलावा, रक्षा बजट और रक्षा अनुसंधान एवं विकास के लिए बजट आवंटन में भी वृद्धि हुई है, साथ ही कारोबार करने में आसानी और रक्षा– उद्योग संबंधों को भी सरल बनाया गया है। भारत ने घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने और रक्षा आयात में मदद करने के लिए सुधार अपनाते हुए रक्षा खरीद और अधिग्रहण पर भी ज़ोर दिया है।[vii] इस प्रकार, क्षेत्रीय संगठनों और मिनिलैटरल्स (कुछ देशों के समूह) के माध्यम से वैश्विक व्यवस्था में अपनी स्थिति का लाभ उठाने के अलावा, भारत ने अपने राष्ट्रीय लक्ष्यों को हासिल करने के लिए अपनी रक्षा क्षमताओं को उत्कृष्ट बनाने का भी प्रयास किया है।
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वित्त वर्ष |
रक्षा उत्पादन (करोड़ ₹ में) |
रक्षा निर्यात (करोड़ ₹ में) |
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2016-17 |
74,054 |
1521.86 |
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2017-18 |
78,820 |
4682.36 |
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2018-19 |
81,120 |
10745.77 |
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2019-20 |
79,071 |
9115.55 |
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2020-21 |
84,643 |
8434.83 |
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2021-22 |
94,845 |
12814.52 |
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2022-23 |
1,08,684 |
15918.16 |
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2023-24 |
1,27,265 |
21083.38 |
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2024-25 |
1,50,590 |
23,622 |
|
2025-26 |
1,78,000 |
38,424 |
स्रोत- Data.gov.in और प्रेस सूचना ब्यूरो की मदद से लेखक द्वारा संकलित
भारत– वियतनाम रक्षा संबंध
बीते दशक में भारत और वियतनाम के बीच रक्षा और सुरक्षा संबंध तेज़ी से बेहतर हुए हैं। कई प्रकार के नौसैनिक अभ्यास, जहाजों का दौरा, मानवीय मदद और रक्षा निर्यात आदि भारत– वियतनाम रक्षा संबंधों के बढ़ते महत्व को दिखाते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी[viii] के अनुसार, वियतनाम को "आपसी रक्षा सहयोग को बढ़ावा देने" के लिए भारत द्वारा 500 मिलियन डॉलर की क्रेडिट लाइन की पेशकश से संबंधों को नए सिरे से आकार देने की आपसी इच्छा का संकेत मिला। इसने दक्षिण–पूर्व एशियाई क्षेत्र में निष्पक्ष राष्ट्र के रूप में भारत की छवि को और मजबूत बनाया।
वियतनाम के लिए भारत के साथ रक्षा संबंध बेहतर बनाना दक्षिण चीन सागर में चीन की बढ़ती मौजूदगी के खिलाफ रणनीतिक संतुलन बनाने जैसा है। इससे वियतनाम को 200 नॉटिकल मील के विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र (EEZ) को मज़बूत करने के प्रयासों में मदद मिलती है।[ix] रक्षा मंत्रियों की बैठक, सेनाओं के बीच संवाद और रणनीतिक 2 + 2 वार्ता को अपनाना, ये सभी दोनों देशों के बीच व्यापक रक्षा और सुरक्षा साझेदारी के मुख्य आधार हैं। वर्ष 2016 और वर्ष 2017 में सेना– से–सेना और नौसेना– से– नौसेना के बीच बातचीत हुई, जिससे दोनों देशों की सेनाओं के बीच सहयोग और बढ़ा। इसके बाद PASSEX- नाम से एक पैसेज अभ्यास हुआ जिसका उद्देश्य क्षमता बढ़ाना और दक्षिण चीन सागर में भारत की व्यावहारिक उपस्थिति को बेहतर बनाना था।
वर्ष 2022 से, नई दिल्ली और हनोई ने मंत्रियों के दौरों और कई समझौतों के माध्यम से अपने रक्षा सहयोग को बेहतर बनाया है। आईएनएस कृपाण एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है– यह भारत की ओर से किसी विदेशी नौसेना को तोहफ़े में दिया गया पहला सक्रिए युद्धपोत है।[x] यह स्वदेशी मिसाइल से लैस छोटा योद्धपोत भारत– वियतनाम के बेहतर होते संबंधों का प्रतीक है। इसके अलावा भारतीय नौसेना के पूर्वी बेड़े ने कई सद्भावना यात्राएं भी की हैं– हालिया यात्रा जून 2026 में की गई थी[xi]।
इस प्रकार, नई दिल्ली और हनोई ने मंत्रियों के दौरों और उच्च– स्तरीय समझौतों के माध्यम से रक्षा सहयोग को और बेहतर बनाया है। इसका एक उदाहरण "ब्रह्मोस सौदा" है जिस पर भारत और वियतनाम के बीच हस्ताक्षर होने की पुष्टि भारत के रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने की। उन्होंने यह भी कहा कि इंडोनेशिया के साथ सौदा अपने "अंतिम चरण" में है।[xii]
इससे आसियान (ASEAN) देशों के साथ भारत की रक्षा प्रतिबद्धताओं की पुष्टि होती है। साथ ही, यह भारत और वियतनाम के बीच रक्षा साझेदारी को बेहतर होना भी दर्शाता है। यह सौदा हिंद– प्रशांत क्षेत्र में भारत के बढ़ते रणनीतिक प्रभाव को भी दिखाती है– क्योंकि इंडोनेशिया के साथ भी जल्द ही सौदा होने वाली है। इससे नई दिल्ली को दूसरे कई क्षेत्रों में भी रणनीतिक प्रभाव बढ़ाने में मदद मिलती है, क्योंकि थाईलैंड, सऊदी अरब, मिस्र, चिली और ब्राज़ील जैसे देशों ने ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने में दिलचस्पी दिखाई है।[xiii]
नीचे दी गई तालिका कोविड-19 के बाद भारत– वियतनाम रक्षा संबंधों की प्रमुख घटनाओं की समय–रेखआ दिखाती है-
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वर्ष |
भारत– वियतनाम रक्षा सहयोग में प्रमुख घटनाएं |
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2022 |
i) रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का हनोई दौरा ii) 500 मिलियन डॉलर की रक्षा लाइन ऑफ क्रेडिट को अंतिम रूप दिया गया iii) आपसी रसद सहयोग के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए iv) वर्ष 2030 तक भारत– वियतनाम रक्षा साझेदारी पर संयुक्त विज़न स्टेटमेंट पर हस्ताक्षर किए गए। |
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2023 |
i) वियतनाम के रक्षा मंत्री फान वान जियांग ने रक्षा सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ बातचीत की।
ii) भारत ने वियतनाम को आईएनएस कृपाण तोहफ़े में दिया– यह पहला मौका है जब भारत ने किसी विदेशी नौसेना को सक्रिए युद्धपोत तोहफ़े में दिया है। |
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2024 |
i) वियतनाम की नौसेना भारत के मल्टीनेशलन मिलन (MILAN) अभ्यास में हिस्सा लेती है ii) आईएनएस क्लिटन वियतनाम के कैम रान बे पहुँचा iii) भारतीय और वियतनामी नौसेना ने समुद्री साझेदारी अभ्यास में हिस्सा लिया। iv) यागी चक्रवात के बाद मानवीय सहायता और आपदा राहत प्रदान करने के लिए भारत द्वारा ऑपरेशन सद्भाव शुरू किया गया। |
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2025 |
i) पनडुब्बी की संयुक्त खोज, बचाव में मदद और सहयोग के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए ii) रक्षा उद्योग में सहयोग को मज़बूत करने के लिए आशय पत्र पर हस्ताक्षर किए गए iii) पूर्वी बेड़े के कई भारतीय जहाज़ वियतनाम के दा नांग बंदरगाह पर पहुँचे |
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2026 |
i) वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम भारत के दौरे पर आए ii) भारत और वियतनाम सामरिक कूटनीति– रक्षा संवाद स्थापित करने पर सहमत हुए (2 + 2) iii) भारत– वियतनाम साझेदारी को "बेहतर व्यापक रणनीतिक साझेदारी" का दर्जा दिया गया– यह द्विपक्षीय संबंधों में भारत का सर्वोच्च स्तर है। iv) भारत ने वियतनाम को ब्रह्मोस क्रूज़ मिसाइल की आपूर्ति करने के लिए समझौता किया। |
स्रोत- लेखक द्वारा विभिन्न स्रोतों से संकलित
प्रभाव
भारत और वियतनाम के बीच बढ़ते रक्षा संबंधों का प्रभाव केवल दोनों देशों के आपीस संबंधों तक ही सीमित नहीं है बल्कि इसका विस्तार पूरे दक्षिणपूर्व एशिया क्षेत्र तक हो गया है। जहाँ एक ओर हनोई किसी एक देश पर अत्यधिक निर्भरता से बचने के लिए अपने साझेदारों का दायरा बढ़ाना चाहता है, वहीं दूसरी ओर भारत दक्षिण–पूर्व एशिया क्षेत्र में अपना प्रभाव बढ़ाना, अपनी तटस्थता को दोहराना और रक्षा निर्यात व विनिर्माण के ज़रिए अपने रक्षा क्षेत्र को मज़बूत करना चाहता है। फिलीपींस को ब्रह्मोस मिसाइल सौंपने और वियतनाम के साथ सौदा पक्का करने के बाद, भारत दक्षिण–पूर्व एशिया में महत्वपूर्ण रक्षा साझेदार और हथियारों का निर्यातक बनकर उभरा है।[xiv]
यह साझेदारी दोनों पक्षों के लिए लाभकारी है। हनोई के लिए, यह अपने रक्षा संपत्तियों में विविधता लाने और रूस पर अत्यधिक निर्भरता से बचने का नज़रिया है। दूसरी ओर, नई दिल्ली को अपने रक्षा विशेषज्ञ के लिए महत्वपूर्ण साझेदार मिलता है, जिससे रक्षा उत्पादन को बढ़ावा मिला है। इसके अलावा, यह दक्षिण–पूर्व एशिया क्षेत्र में भारत की उपस्थिति को मज़बूत करता है। भारत पहले से ही आसियान फोरम, जैसे कि आसियान रक्षा मंत्रियों को मीटिंग– प्लस (ADMM-Plus) और आसियान क्षेत्रीय फ़ोरम (ARF) में अहम भूमिका निभा रहा है और अब इस क्षेत्र देशों के साथ भी करीबी द्विपक्षीय संबंध बढ़ा रहा है।
निष्कर्ष
दक्षिण–पूर्व एशिया में भारत की रक्षा और सुरक्षा कूटनीति, एडीएमएम– प्लस (ADMM-Plus) या एआरएफ(ARF) जैसे बहुपक्षीय मंचों से कहीं आगे तक फैली हुई है। फिलीपींस, वियतनाम और इंडोनेशिया जैसे देशों के साथ द्विपक्षीय रक्षा निर्यात बढ़ाने और संयुक्त नौसैनिक व सैन्य अभ्यास करने के माध्यम से नई दिल्ली उन दक्षिण–पूर्वी एशियाई देशों के लिए विकल्प के रूप में उभरी है जो अपनी सुरक्षा संबंधी आवश्यकताओं के लिए अलग– अलग देशों पर निर्भर रहना चाहते हैं। इस क्षेत्र की पहचान ऐतिहासिक रूप से बड़ी शक्तियों के बीच प्रतिस्पर्धा से रही है, इसलिए देश अत्यधिक निर्भरता से बचने और एक से अधिक देशों के साथ संबंध बनाए रखने की कोशिश करते हैं।
पिछले दशक में सक्रिए कूटनीति के माध्यम से भारत और वियतनाम ने ठोस रक्षा और सुरक्षा साझेदारी बनाई है। यह परिवर्तन बताता है कि भारत विश्व में रक्षा उपकरणों के प्रमुख निर्माता और निर्यातक के रूप में उभरा है, इस बदलाव के पीछे निर्यात का स्वदेशीकरण, बाज़ार का विस्तार और आधुनिक सैन्य तकनीकों पर ध्यान देना जैसे कारण हैं। इस प्रकार, भारत का बढ़ता हुआ रक्षा क्षेत्र और उसकी रणनीतिक कूटनीति, नई दिल्ली की क्षेत्रीय आकांक्षाओं और बढ़ती क्षमता को उजागर करती है।
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*आदित्य अमोनकर, भारतीय वैश्विक परिषद, नई दिल्ली में शोध प्रशिक्षु हैं।
अस्वीकरण : यहां व्यक्त किए गए विचार निजी हैं।
डिस्क्लेमर: इस अनुवादित लेख में यदि किसी प्रकार की त्रुटी पाई जाती है तो पाठक अंग्रेजी में लिखे मूल लेख को ही मान्य माने ।
अंत टिप्पण:
[i] Shreya Singh. Mapping India’s Historical Ties with Southeast Asia. Indian Council of World Affairs. 27 December 2023. /show_content.php?lang=1&level=1&ls_id=10322&lid=6583. Accessed on 12 June 2026
[ii] Suyash Desai. Revisiting ASEAN-India Relations. The Diplomat. November 18 2017. https://thediplomat.com/2017/11/revisiting-asean-india-relations/. Accessed on 22 June 2026.
[iii] Premesha Saha. Prioritizing the “ASEAN” In India’s Act East Policy and Minilateral Partnerships. Asia Society Australia. September 5 2025. https://asiasociety.org/australia/prioritizing-asean-indias-act-east-policy-and-minilateral-partnerships. Accessed on 20 June 2026
[iv] Jawaharlal Nehru. Tribute to Ho Chi Minh. Selected Works of Jawaharlal Nehru, Second Series, Vol. 41, pp. 720. 7 February 1958 https://nehruarchive.in/documents/tribute-to-ho-chi-minh-7-february-1958-ln2x7. Accessed on June 18 2026.
[v] Embassy of India, Hanoi. India-Viet Nam Relations. n.d. https://www.indembassyhanoi.gov.in/page/bilateral-relations/. Accessed on June 21 2026
[vi] Ravi Neelakantan. “India-Vietnam Relations: From Foundation to Superstructure”. Paper presented at the International Scientific Conference, Hanoi, 20-21 March 2017. https://www.icwa.in/WriteReadData/L45218/1505731071.pdf. Accessed on June 13 2026.
[vii] Press Information Bureau. The Defence Decade. 17 June 2026. https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2273854®=48&lang=2. Accessed on June 23 2026.
[viii] Ho Binh Minh. India offers $500 million defence credit as Vietnam seeks arms boost. Reuters. September 3 2016. https://www.reuters.com/article/world/india-offers-500-million-defence-credit-as-vietnam-seeks-arms-boost-idUSKCN11905X/. Accessed on June 17 2026.
[ix] India Writes Network. India, Vietnam to step up energy ties. August 26 2014. https://indiawrites.org/diplomacy/india-vietnam-to-step-up-energy-ties/. Accessed on June 21 2026.
[x] Press Information Bureau. INS KIRPAN SETS SAIL TO VIETNAM. June 28 2023. https://www.pib.gov.in/PressReleaseIframePage.aspx?PRID=1936047®=48&lang=2. Accessed on June 17 2026.
[xi] People’s Army Newspaper. Indian naval ships visit Ho Chi Minh City. June 23 2026. https://en.qdnd.vn/military/intl-relations-and-cooperation/indian-naval-ships-visit-ho-chi-minh-city-592314. Accessed on June 23 2026
[xii] Brahmos Aerospace. India delivers first batch of BRAHMOS missiles to Philippines. April 19 2024. https://www.brahmos.com/brahmos-in-media/114. Accessed on June 22 2026.
[xiii] TOI News Desk. India’s BrahMos widens global reach with fresh interest from six countries: Report. The Times of India. June 30 2026. https://timesofindia.indiatimes.com/defence/news/indias-brahmos-widens-global-reach-with-fresh-interest-from-six-countries-report/articleshow/132093662.cms. Accessed on June 30 2026.
[xiv] TOI News Desk. Vietnam BrahMos deal in final stages, only minor clearances remain: BrahMos Aerospace chief. The Times of India. June 18 2026. https://timesofindia.indiatimes.com/defence/news/vietnam-brahmos-deal-in-final-stages-only-minor-clearances-remain-brahmos-aerospace-chief/articleshow/131826445.cms. Accessed on June 18 2026.