सारांश: राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो के नेतृत्व में, कोलंबिया अमेरिकी परछाई से निकलकर अपनी विदेश नीति को नया रूप दे रहा है, जो वैचारिक बदलावों, मध्य-शक्ति की स्थिति हासिल करने की आकांक्षाओं और घरेलू राजनीतिक आकलन को दर्शाता है। वाशिंगटन के सामने इस कारण जुड़ाव और अलगाव के बीच एक रणनीतिक दुविधा है।
प्रस्तावना
तीन दशकों से भी अधिक समय से, कोलंबिया-अमेरिका साझेदारी पश्चिमी गोलार्ध में सबसे स्थिर और रणनीतिक संबंधों में से एक रही है, जिसकी जड़ें मादक पदार्थों के विरुद्ध सहयोग, व्यापार एवं सुरक्षा सहयोग पर टिकीं हैं। हालाँकि, कोलंबिया के पहले वामपंथी नेता, राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो के शासन में, इस संबंध में अब अशांति आ गई है। पेट्रो द्वारा अमेरिकी विदेश नीतियों की खुली आलोचना, चीन के साथ उनके जुड़ाव और बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) और न्यू डेवलपमेंट बैंक (एनडीबी) जैसे मंचों में शामिल होने के उनके प्रयासों ने, दोनों देशों के बीच अलगाव की भावना को बढ़ावा दिया है। फिर भी, इस वैचारिक टकराव के पीछे एक गहरा राजनीतिक समीकरण निहित है: जो है बदलते घरेलू राजनीतिक परिदृश्य के बीच कोलंबिया की विदेश नीति की पहचान को नए सिरे से परिभाषित करने का पेट्रो का प्रयास। वाशिंगटन के सामने जुड़ाव या अलगाव की स्पष्ट दुविधा है।
जुड़ाव की बदलती नींव
पारंपरिक अमेरिका-कोलंबिया गठबंधन विषमता पर आधारित था। वाशिंगटन, कोलंबिया को नशीली दवाओं और उग्रवाद के खिलाफ लड़ाई में अपना सबसे करीबी सहयोगी मानता था, जबकि बोगोटा अमेरिकी सहायता, खुफिया जानकारी और बाजार तक पहुँच पर निर्भर था। 2000 में लॉन्च किए गए प्लान कोलंबिया ने इस रिश्ते को संरचित बनाया और कोलंबिया की आंतरिक सुरक्षा एवं आर्थिक विकास को अमेरिकी प्राथमिकताओं से जोड़ दिया।
पेट्रो का 2022 का चुनाव इस पैटर्न में पहले बड़े बदलाव का संकेत था, जिसके कारण कोलंबिया-अमेरिका संबंधों और व्यापक अंतरराष्ट्रीय समुदाय में देश की भूमिका का फिर से आकलन किया जाने लगा। पूर्व गुरिल्ला और अमेरिकी हस्तक्षेपवाद के मुखर आलोचक रहे पेट्रो ने कोलंबिया के वर्तमान संघर्ष को साम्राज्यवाद के प्रतिरोध के एक बड़े ऐतिहासिक नैरेटिव के भीतर ढालने के लिए, अमेरिका समर्थित 1973 के चिली तख्तापलट[i] से लेकर शीत युद्ध के प्रति-विद्रोह तक, ऐतिहासिक शिकायतों का बार-बार हवाला दिया है।
राष्ट्रपति पेट्रो एक 'प्रगतिशील' विदेश नीति के ज़रिए कोलंबिया की स्थिति को महत्वाकांक्षी मध्य शक्ति के रूप में ऊँचा उठाना चाहते हैं, जिसमें जीवन, जलवायु कार्रवाई और सामाजिक न्याय को प्राथमिकता दिया जाए और साथ ही पारंपरिक अमेरिका-केंद्रित ढाँचे से परे साझेदारियों में विविधता लाया जाए। यह बात पिछले साल भारत स्थित थिंक टैंक, भारतीय वैश्विक परिषद (आईसीडब्ल्यूए) की अपनी यात्रा के दौरान कोलंबिया के पूर्व उप-मंत्री जॉर्ज रोजास रोड्रिग्ज की टिप्पणियों में दिखाई दी थी। उन्होंने कहा था कि पहले की अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था उत्तर (विशेषकर अमेरिका) के इर्द-गिर्द घूमती थी, जबकि एशिया और अफ्रीका हाशिए पर रहे और यूरोपीय संघ काफी हद तक वाशिंगटन के दायरे में ही काम करता रहा। उनकी टिप्पणियों ने पेट्रो सरकार के इस विश्वास को दर्शाया कि उभरती बहुध्रुवीय दुनिया की वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित करने हेतु कोलंबिया को एशिया, अफ्रीका और वैश्विक दक्षिण में व्यापक साझेदारों के साथ जुड़ना चाहिए।[ii]
हालांकि, वाशिंगटन के लिए, यह बहुध्रुवीय आकांक्षा इस चिंता को जन्म देती है कि कोलंबिया, जो कभी अमेरिकी प्रभाव का एक स्तंभ था, चीन के बढ़ते क्षेत्रीय नेटवर्क में एक और केंद्र और अमेरिका के नेतृत्व वाली विश्व व्यवस्था को चुनौती देने वाले एक व्यापक समूह का हिस्सा बन सकता है। हालाँकि राष्ट्रपति बाइडेन ने पेट्रो की स्थिति को असहजता से देखा, फिर भी वे संबंधों को अक्षुण्ण बनाए रखने में सफल रहे। हालाँकि, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के शासनकाल में तनाव बढ़ गया है, जो कोलंबिया के आक्रामक बयानों के जवाब में कठोर उपायों के पक्षधर हैं।
प्रवासन और व्यापार संबंधी मुद्दे
यह कूटनीतिक अलगाव 26 जनवरी 2025 को तब शुरू हुआ, जब राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो ने डोनाल्ड ट्रम्प की निर्वासन नीति की निंदा करते हुए उन्हें 'फासीवादी', 'नस्लवादी' और 'धमकी देने वाला' बताया और वाशिंगटन पर पूरी आबादी का अपराधीकरण करने का आरोप लगाया। बोगोटा ने शुरू में इस कदम को सम्मान एवं मानवाधिकारों की रक्षा बताते हुए अवैध कोलंबियाई प्रवासियों को ले जाने वाली डिपोर्टेशन फ्लाइट्स को अपने यहाँ उतारने से इनकार कर दिया। जवाब में, ट्रम्प ने कोलंबियाई निर्यात पर 25% टैरिफ लगाने की धमकी दी—इस धमकी का पेट्रो ने भी जवाब टैरिफ लगाने की चेतावनी देकर दिया। हालाँकि दोनों पक्षों के बीच अंततः समझौता हो गया, जिससे कोलंबिया को अपनी वायु सेना का उपयोग करके अपने नागरिकों को वापस लाने की अनुमति मिल गई, लेकिन इस घटना ने दोनों के बीच मूल्यों के गहरे टकराव को उजागर कर दिया। कोलंबिया के नज़रिए से, प्रवासन के प्रति वाशिंगटन का दृष्टिकोण कठोर है और इसमें पीछे के मानवीय पहलू की अनदेखी की जाती है। हालाँकि, ट्रम्प के लिए, यह सीमा नियंत्रण, अपने चुनावी वादों को पूरा करने का विषय था—और पुराने सहयोगी की वफादारी की परीक्षा भी थी, जिसने दशकों में पहली बार अमेरिकी सत्ता को खुले तौर पर चुनौती देने का साहस किया था।
व्यापारिक तनाव ने बढ़ते तनाव को और बढ़ा दिया है। ऊर्जा के मोर्चे पर, पेट्रो की पर्यावरण नीतियों ने अमेरिका के साथ संबंधों को तनावपूर्ण बना दिया है, क्योंकि वह कोलंबिया की जीवाश्म ईंधन और निष्कर्षण उद्योगों पर निर्भरता कम करना चाहते हैं। 2023 से, पेट्रो के प्रशासन ने तेल, कोयला और गैस अन्वेषण हेतु नए लाइसेंस निलंबित कर दिए हैं और हाइड्रोकार्बन अनुबंधों को पूरी तरह से समाप्त करने का संकल्प लिया है, आधिकारिक तौर पर हाइड्रोलिक फ्रैक्चरिंग या फ्रैकिंग पर प्रतिबंध लगा दिया है। पेट्रो ने पर्यावरण संबंधी चिंताओं का हवाला देते हुए सरकारी तेल कंपनी इकोपेट्रोल को एक अमेरिकी स्वामित्व वाली कंपनी के साथ संयुक्त उद्यम रद्द करने का आदेश दिया, जिससे प्रतिदिन लगभग 90,000 बैरल तेल उत्पादन की उम्मीद थी। उन्होंने अमेरिका में इकोपेट्रोल के फ्रैकिंग परिचालन को बेचने की योजना की भी घोषणा की,[iii] यह तर्क देते हुए कि इस तरह के उपक्रम कोलंबिया की 'न्यायसंगत ऊर्जा परिवर्तन' की प्रतिबद्धता के विपरीत हैं। पेट्रो का नज़रिया ट्रम्प के दृष्टिकोण से बिल्कुल अलग है, जिन्होंने जलवायु परिवर्तन को एक "धोखा" और "धोखाधड़ी" करार दिया है, अमेरिका को पेरिस समझौते से हटा लिया है, और लगातार जीवाश्म ईंधन के विस्तार पर जोर दिया है।
पेट्रो ने अपने चुनाव अभियान के दौरान और कई अन्य मौकों पर 2012 के अमेरिका-कोलंबिया मुक्त व्यापार समझौते पर फिर से बातचीत करने की इच्छा जताई थी। उनका तर्क था कि इस समझौते से कुछ कोलंबियाई उत्पादों को लेकर अनुचित प्रतिस्पर्धा बढ़ती है, जिससे किसान मुश्किल में पड़ जाते हैं और कई लोग अवैध क्षेत्रों या अनियमित प्रवास पर निर्भर रहने को मजबूर हो जाते हैं।[iv] पेट्रो की इच्छाएँ ट्रम्प प्रशासन की दुनिया भर में सभी विदेशी सहायता और मुक्त व्यापार समझौतों की समीक्षा करने की नीति से मेल खाती हैं। इसके परिणामस्वरूप, दोनों देशों के बीच आर्थिक सामंजस्य कमज़ोर हुआ है।
नशीले पदार्थों के विरुद्ध उपायों संबंधी मुद्दे
नशीले पदार्थों के विरुद्ध उपायों में सबसे स्पष्ट खामियाँ अभी भी मौजूद हैं। पेट्रो ने अमेरिका के 'वॉर ऑन ड्रग्स' को, जिसमें आपूर्ति पक्ष (मुख्य रणनीति, हवाई धूम्रीकरण एवं जबरन उन्मूलन) को प्राथमिकता दी जाती है, 'पूरी तरह से विफल' बताया है। उनका तर्क है कि दशकों से चल रहे अमेरिका समर्थित उन्मूलन अभियानों ने कोकीन उत्पादन में कमी लाए बिना ही ग्रामीण आजीविका को तबाह कर दिया है। उन्होंने इस रणनीति की निंदा अमेरिका द्वारा गरीब देशों पर नियंत्रण करने के एक साधन के रूप में की। उनके विचार में, वाशिंगटन का दृष्टिकोण समस्या के मूल कारणों को दूर करने में विफल रहा है और कोलंबिया की विकास की प्राथमिकताओं के प्रति बहुत कम संवेदनशीलता दिखाई है।
इसके बाद पेट्रो की सरकार ने अपना ध्यान स्वैच्छिक फसल प्रतिस्थापन, वैकल्पिक आजीविका और नुकसान कम करने के उपायों पर केंद्रित कर दिया और देश के दशकों पुराने संघर्ष को समाप्त करने हेतु 'टोटल पीस' की भी पहल की है, जिसमें विद्रोही, अर्धसैनिक और शहरी सशस्त्र समूहों के साथ शांति वार्ता शामिल है। पेट्रो के लिए, यह एक नैतिक सुधार और राजनीतिक आवश्यकता दोनों का प्रतिनिधित्व करता है। उनका तर्क है कि अमेरिका की सैन्यीकृत नशा-विरोधी रणनीति ने कोलंबिया के हाशिए पर पड़े इलाकों में असमानता और निरंतर हिंसा को गहरा किया है, और इस बात पर निराशा व्यक्त की है कि वाशिंगटन नशीली दवाओं के व्यापार के मांग पक्ष को संबोधित करने या उसकी ज़िम्मेदारी लेने से इनकार कर रहा है।
इसके विपरीत, वाशिंगटन कोलंबिया के इस बदलाव को द्विपक्षीय सहयोग के एक प्रमुख स्तंभ को कमज़ोर करने वाला मानता है। अमेरिकी अधिकारियों को चिंता है कि पेट्रो का 'टोटल पीस' दृष्टिकोण कार्टेलों को बढ़ावा दे सकता है, खासकर जब पेट्रो के शासन में कोका की खेती लगातार[v] (यह डेटा 2025 यूएनओडीसी वर्ल्ड ड्रग रिपोर्ट[vi] द्वारा समर्थित है) बढ़ रही है। परिणामस्वरूप, वाशिंगटन ने 16 सितंबर 2025 को कोलंबिया को मान्यता रद्द कर दी।[vii] यह 30 वर्षों में उस देश के खिलाफ पहला ऐसा कदम भी है जो कभी नशीली दवाओं के खिलाफ युद्ध में अमेरिका का एक प्रमुख सहयोगी और अमेरिकी विदेशी सहायता के सबसे बड़े प्राप्तकर्ताओं में से एक था। इसके जवाब में, कोलंबिया ने अपने सबसे बड़े सैन्य साझेदार, अमेरिका से हथियारों की खरीद रोक दी।[viii]
रणनीतिक नज़रिए से, कोलंबिया को मान्यता रद्द करने का वाशिंगटन का निर्णय प्रतिकूल प्रतीत होता है। हालांकि, यह काफी हद तक प्रतीकात्मक है और इसका उद्देश्य अस्वीकृति को दिखाना मात्र है, क्योंकि कोलंबिया को राष्ट्रीय सुरक्षा छूट के साथ सहायता जारी रखने की अनुमति देने के साथ ही उसे अमान्य घोषित कर दिया गया है, इससे लैटिन अमेरिका में अमेरिका के सबसे करीबी लोकतांत्रिक सहयोगियों में से एक के अलग होने और दशकों के सुरक्षा और खुफिया सहयोग को कमजोर करने का जोखिम है।
विदेश नीति के विकल्पों से तनाव बढ़ा
हाल ही में विदेश नीति के विकल्पों के कारण अमेरिका-कोलंबिया संबंध भी बिगड़े हैं।
पेट्रो की विदेश नीति नैतिकता, शांति, मानवीय विवेक, गरिमा और मानवाधिकारों के सिद्धांतों पर आधारित है। उनका प्रशासन तर्क देता है कि कोलंबिया के शांति-सृजन के सिद्धांत को सैन्यीकरण के बजाय बातचीत को बढ़ावा देकर वैश्विक संघर्षों तक बढ़ाया जाना चाहिए, जिससे एक अलग रास्ता तैयार हो सके।
पेट्रो ने गाजा में इज़राइल की कार्रवाइयों को 'नरसंहार' बताया है, तेल अवीव के साथ राजनयिक संबंध तोड़ लिए हैं और अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर इज़राइल को अमेरिका द्वारा राजनयिक संरक्षण दिए जाने की निंदा की है। संयुक्त राष्ट्र महासभा की अपनी हालिया अमेरिका यात्रा के दौरान, पेट्रो ने संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के बाहर एक विरोध प्रदर्शन के दौरान अमेरिकी सैनिकों से गाजा में ट्रम्प की नीतियों का पालन न करने का अनुरोध किया था - जिसके कारण उनका अमेरिकी वीज़ा रद्द कर दिया गया था।[ix]
इसी तरह, रूस-यूक्रेन संघर्ष के संबंध में, पेट्रो ने प्रस्तावित अमेरिका-यूक्रेन खनिज सौदे को 'मूर्खतापूर्ण'[x] बताते हुए निंदा की और चेतावनी दी कि इससे यूक्रेन की संप्रभुता कम होती है और युद्ध संसाधनों को पाने के लिए किये जाने वाले संघर्ष में बदल देता है। उन्होंने तर्क दिया कि वाशिंगटन और उसके सहयोगी मास्को के साथ सीधी बातचीत हेतु दबाव डालने के बजाय कीव को हथियार देकर युद्ध को लम्बा खींच रहे हैं। पेट्रो ने पश्चिमी शक्तियों के पाखंड की भी आलोचना की, क्योंकि वे रूस द्वारा यूक्रेन पर आक्रमण की निंदा करते हुए फ़िलिस्तीन के मुद्दे के प्रति उदासीन बने रहे। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि कोलंबिया को 'शांति के पक्ष' में खड़ा होना चाहिए।
पेट्रो ने कैरिबियन में कथित नशीली दवाओं की तस्करी करने वाली नौकाओं पर हाल ही में अमेरिका द्वारा की गई बमबारी की भी आलोचना की और इस बात पर ज़ोर दिया कि यह अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवीय गरिमा के प्रति अनादर है, खासकर जब पीड़ित गरीब लैटिन अमेरिकी हों।[xi] पेट्रो इन कार्रवाइयों को सुरक्षा और मादक पदार्थ विरोधी अभियानों की आड़ में अमेरिका द्वारा गैर-जवाबदेह वैश्विक शक्ति का प्रयोग करने के एक बड़े पैटर्न का हिस्सा मानते हैं। इसी तरह, पेट्रो ने वेनेजुएला और क्यूबा जैसे देशों पर अमेरिकी प्रतिबंधों की निंदा करते हुए तर्क दिया है कि ये मानवीय संकटों को और गहरा करते हैं।
पेट्रो का पारंपरिक गठबंधनों से नाता नाटो[xii] तक भी है, जिसे वे इस वैश्विक शक्ति संरचना का केंद्र मानते हैं। वे नाटो को ऐसा मंच मानते हैं जो गैर-जवाबदेह सत्ता के ज़रिए मानवता के विरुद्ध अपराधों को बढ़ावा देता है या अनदेखा करता है, और इसलिए उन्होंने कोलंबिया के नाटो वैश्विक भागीदार का दर्जा छोड़ने का इरादा व्यक्त किया है।
संबंधों में मौजूदा खटास का सबसे महत्वपूर्ण, और शायद कम महत्व दिया गया, आयाम चीन है। विगत एक दशक में कोलंबिया में बीजिंग की उपस्थिति धीरे-धीरे बढ़ी है, लेकिन पेट्रो के प्रशासन ने इस जुड़ाव को और तेज़ कर दिया है।
अक्टूबर 2023 में राष्ट्रपति पेट्रो की चीन की पहली आधिकारिक यात्रा के बाद दोनों देशों ने अपने संबंधों को रणनीतिक साझेदारी तक बढ़ा दिया, जो एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक बदलाव का प्रतीक है। इस यात्रा के दौरान, बोगोटा और बीजिंग ने बुनियादी ढाँचे, व्यापार एवं प्रौद्योगिकी से जुड़े 12 सहयोग समझौतों पर हस्ताक्षर किए, जबकि कोलंबिया ने विकास एवं कनेक्टिविटी पर केंद्रित चीन की वैश्विक पहलों में शामिल होने में रुचि दिखाई।[xiii] मई 2025 में पेट्रो की दूसरी यात्रा ने इस साझेदारी को और गहरा किया, जिसमें कोलंबिया औपचारिक रूप से बीआरआई में शामिल हो गया और ब्रिक्स विकास बैंक में शामिल होने हेतु आवेदन किया, जिसे बाद में जुलाई 2025 में मंजूरी दे दी गई। दोनों सरकारें नवीकरणीय ऊर्जा, परिवहन अवसंरचना, डिजिटल तकनीकी और कृषि जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमत हुईं, जो कोलंबिया की बाहरी साझेदारियों में विविधता लाने और अमेरिका पर निर्भरता कम करने की पेट्रो की व्यापक रणनीति को दर्शाता है।
बोगोटा के नज़रिए से, यह विविधीकरण वैचारिक के बजाय व्यावहारिक है, जो वित्तीय सहायता, तकनीकी हस्तांतरण, बुनियादी ढाँचे के विकास और ऋण के नए रास्ते खोलता है। चीन बड़े पैमाने पर बुनियादी ढाँचे और नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के लिए बिना किसी शर्त के वित्तपोषण देता है, जो आमतौर पर अमेरिका, विश्व बैंक या आईएमएफ समर्थित कार्यक्रमों पर लागू होती हैं। पेट्रो के लिए, यह कदम उनके 'ग्रीन रि इंडस्ट्रलाइज़ेशन' के दृष्टिकोण के अनुरूप है, जो नवीकरणीय तकनीकों में चीन के वैश्विक नेतृत्व और कोलंबिया में स्थायी बुनियादी ढाँचे के सृजन की उसकी क्षमता का लाभ उठाता है, जिससे देश के कार्बन-मुक्त बनने लक्ष्यों को आगे बढ़ाया जा सके। वह प्रशांत एवं अटलांटिक महासागरों को रेलवे और अंतर-महासागरीय फाइबर-ऑप्टिक नेटवर्क के माध्यम से जोड़ने की अपनी योजना को साकार करने हेतु भी धन तलाश रहे हैं, ऐसी परियोजना जिसे वह कोलंबिया के दीर्घकालिक आर्थिक परिवर्तन हेतु महत्वपूर्ण मानते हैं।[xiv] अंत में, यह बदलाव अमेरिकी नीतियों, विशेष रूप से ट्रम्प के कार्यकाल, के प्रति निराशा को दर्शाता है, क्योंकि यूएसएआईडी ने विकास सहायता में कटौती की और वाशिंगटन ने मादक पदार्थों के खिलाफ प्रयासों में कथित कमियों और व्यापार संबंधी तनावों के कारण कोलंबिया को दी जाने वाली सहायता में कमी की।
अमेरिका के लिए, चीनी परियोजनाओं में कोलंबिया की बढ़ती भागीदारी लैटिन अमेरिका में उसके प्रभाव से दूर होने की चिंता पैदा करती है। वाशिंगटन को चिंता है कि चीन की बढ़ती उपस्थिति पारदर्शिता को कम कर सकती है, ऋण निर्भरता को बढ़ा सकती है, और एंडीज़ पर्वतमाला में बीजिंग की रणनीतिक पहुँच को बढ़ा सकती है, जिसे लंबे समय से अमेरिकी प्रभाव क्षेत्र में माना जाता रहा है। यह चिंता इस बात से और बढ़ जाती है कि चीन अब 11 दक्षिण अमेरिकी देशों[xv] में से 10 के साथ रणनीतिक साझेदारी बनाए हुए है, और कोलंबिया हाल ही में लैटिन अमेरिका और कैरिबियन में बीआरआई में शामिल होने वाला 22वाँ देश बन गया है।[xvi]
पेट्रो के घरेलू समीकरण और वाशिंगटन की दुविधा
वाशिंगटन के प्रति पेट्रो की मुखर बयानबाजी केवल कोलंबियाई विदेश नीति को फिर से तय करने तक ही सीमित नहीं है; यह घरेलू राजनीतिक उद्देश्यों की पूर्ति भी करती है। मुद्रास्फीति, रुके हुए सुधारों और बढ़ते जन विरोध के बीच उनकी अप्रुवल रेटिंग में गिरावट आई है, [xvii] और अमेरिका का सामना करने से उन्हें राष्ट्रीय संप्रभुता और नैतिक नेतृत्व के मुद्दों पर ध्यान खिंचने में मदद मिलती है।
राष्ट्रपति पेट्रो ने अमेरिका पर कोलंबिया के दक्षिणपंथी गुटों का समर्थन करने का आरोप लगाया है, और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो द्वारा पूर्व राष्ट्रपति अल्वारो उरीबे वेलेज़,[xviii] जो कोलंबियाई दक्षिणपंथ के एक प्रमुख व्यक्ति और मादक पदार्थों के खिलाफ सहयोग में अमेरिका के एक करीबी सहयोगी हैं, के खिलाफ न्यायिक फैसलों की आलोचना से इस रुख को बल मिला है। पेट्रो ने अमेरिका पर उनकी वामपंथी सरकार को अस्थिर करने का भी आरोप लगाया है, और 2025 की शुरुआत में हुए 'नैनीगेट'[xix] घोटाले[xx] जैसे घरेलू घटनाक्रमों का हवाला दिया है। कोलंबिया को बाहरी दबावों से अपनी स्वतंत्रता का दावा करने वाले देश के रूप में स्थापित करके, पेट्रो अपने वामपंथी आधार को एकजुट और 2026 के चुनावों से पहले पैक्टो हिस्टोरिको-वामपंथी गठबंधन को मज़बूत करना चाहते हैं।
इसके अलावा, बीआरआई और ब्रिक्स विकास बैंक में शामिल होकर, पेट्रो को रुकी हुई अवसंरचना और विकास परियोजनाओं को आगे बढ़ाने हेतु धन हासिल करने की उम्मीद है, जिससे सरकार को अपने चुनावी वादों को पूरा करने और 2026 के चुनावों से पहले पार्टी की चुनावी संभावनाओं को मज़बूत करने में मदद मिल सके।
हालाँकि, पेट्रो की ऐसी रणनीति में कई जोखिम हैं। आने वाली कोलंबियाई सरकारों की अनिश्चितता को देखते हुए, चीन रणनीतिक संपत्तियों या क्षेत्रों से जुड़े दीर्घकालिक समझौतों को हासिल करने हेतु मौजूदा अवसर का लाभ उठाने की कोशिश कर सकता है। इसके बाद, पेट्रो के लिए ऐसे दबावों का विरोध करना और देश की मौजूदा विकास ज़रुरतों को देश के दीर्घकालिक हितों के साथ संतुलित करके कोलंबिया की रणनीतिक स्वायत्तता की रक्षा करना अहम होगा। पेट्रो को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि ये व्यवस्थाएँ आम कोलंबियाई लोगों को ठोस लाभ पहुँचाएँ, न कि केवल व्यापक अर्थव्यवस्था या चीन के हितों को। दूसरी ओर, कोलंबिया को अमेरिका को अलग-थलग नहीं करना चाहिए या केवल एक ही साझेदार पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। व्यापार, धन प्रेषण और निवेश कोलंबिया की अर्थव्यवस्था को वाशिंगटन के साथ गहराई से जोड़ते हैं, जो इसका सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बना हुआ है। इसलिए, पेट्रो के सामने चुनौती आर्थिक और रणनीतिक स्थिरता बनाए रखते हुए कोलंबिया की स्वायत्तता को बनाए रखना है, जिसके लिए ब्राज़ील के वामपंथी राष्ट्रपति लूला के कार्यकाल की तरह ही एक नाज़ुक संतुलन की आवश्यकता है।
अमेरिका के लिए, पेट्रो के नेतृत्व में कोलंबिया का विकास एक चेतावनी है कि शीत युद्ध के बाद का गोलार्ध साझेदारी का मॉडल अब टिकाऊ नहीं रहा। वाशिंगटन को अब उन लैटिन अमेरिकी सरकारों से निपटना होगा जो विविध संबंध चाहती हैं। वाशिंगटन के लिए, चुनौती अपने दृष्टिकोण का फिर से आकलन करने की है, ताकि लैटिन अमेरिकी साझेदारों के साथ बहुध्रुवीय दुनिया में समान व्यवहार किया जा सके, न कि पदानुक्रमित क्रम में ग्राहकों के रूप में। इसके लिए आपसी सम्मान पर आधारित संबंध की ज़रुरत है, न कि प्रभुत्व और अधीनता पर, जिसमें कोलंबिया की विकास से जुड़ी आवश्यकताओं और आकांक्षाओं पर ध्यान केंद्रित किया जाए। टकराव का रुख अपनाने से क्षेत्रीय साझेदार अलग-थलग पड़ सकते हैं, उन्हें बीजिंग के करीब ला सकते हैं और अमेरिकी प्रभाव को कमज़ोर कर सकते हैं। कोलंबिया के लिए चुनौती यह है कि वह अपनी नई स्वायत्तता का जिम्मेदारी से इस्तेमाल करे, तथा यह सुनिश्चित करे कि संप्रभुता रणनीतिक रूप से कमजोर न हो जाए या किसी प्रतिद्वंद्वी खेमे से जुड़कर कर न रह जाए।
निष्कर्ष
गुस्तावो पेट्रो की अमेरिका के प्रति टकरावपूर्ण बयानबाजी दृढ़ विश्वास एवं सोच समझ पर आधारित समीकरण, दोनों को दर्शाती है। उनका मानना है कि कोलंबिया को किसी की निर्भरता से मुक्त होकर बहुध्रुवीय सहयोग को अपनाना चाहिए, साथ ही अपनी घरेलू वैधता को मज़बूत करने हेतु आधिपत्य-विरोधी भाषा का भी इस्तेमाल करना चाहिए। वाशिंगटन के लिए, निराशा इस बात की है कि कभी विश्वसनीय सहयोगी रहा देश, अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था में उसकी भूमिका पर सवाल उठा रहा है और उसे पुनर्परिभाषित करने की कोशिश कर रहा है।
कोलंबिया-अमेरिका संबंध टूट नहीं रहे हैं, बल्कि एक जटिल बदलाव के दौर से गुज़र रहे हैं। वाशिंगटन को लैटिन अमेरिका के साथ तालमेल बिठाना होगा जिसके लिए कई विकल्प उपलब्ध हैं, जबकि पेट्रो को यह सुनिश्चित करना होगा कि कोलंबिया की स्वायत्तता की तलाश किसी अन्य शक्ति पर अत्यधिक निर्भरता का कारण न बने। इस साझेदारी का भविष्य पुराने गठबंधनों की यादों पर नहीं, बल्कि इस बात पर निर्भर करेगा कि दोनों देश बदलते वैश्विक परिदृश्य में कितने अच्छे तरीकों से आगे बढ़ते हैं, जहाँ शक्ति अधिक बिखरी हुई है और वफादारी को अब हल्के में नहीं लिया जा सकता। फिर भी, अगर दोनों पक्ष मानते हैं कि एक-दूसरे की माँगों के आगे झुकने से उनका प्रभाव कम हो जाएगा और दूसरों को भी ऐसा ही व्यवहार करने हेतु प्रोत्साहित किया जाएगा, तो वास्तविक सहयोग के टूटने का जोखिम है।
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*डॉ. गिरिसंकर एस. बी., रिसर्च एसोसिएट, विश्व मामलों की भारतीय परिषद, नई दिल्ली
अस्वीकरण: व्यक्त किए गए विचार व्यक्तिगत हैं।
डिस्क्लेमर: इस अनुवादित लेख में यदि किसी प्रकार की त्रुटी पाई जाती है तो पाठक अंग्रेजी में लिखे मूल लेख को ही मान्य माने ।
संदर्भ
[i] YouTube. https://www.youtube.com/watch?v=ym2QNKZ7jUM. Accessed October 15, 2025.
[ii] Transcript of Talk by H.E. Mr. Jorge Rojas Rodriguez, Vice Minister of Foreign Affairs of Colombia on ‘Colombia’s Foreign Policy: Strategic Global Goals and Advancing Partnership with India’, October 17, 2024 - Indian Council of World Affairs (Government of India). /show_content.php?lang=1&level=1&ls_id=11953&lid=7248. Accessed October 17, 2025.
[iii] Feb 05, APLast Updated: “Colombia’s President Orders National Oil Company to Cancel US Venture over Environmental Concerns.” The Economic Times, 5 February, 5 2025. The Economic Times - The Times of India, https://economictimes.indiatimes.com/news/international/world-news/colombias-president-orders-national-oil-company-to-cancel-us-venture-over-environmental-concerns/articleshow/117931247.cms?from=mdr.
[iv] Ghiotto, Luciana. Not Far Enough – the State of the Free Trade Agreement between Colombia and the United States | Transnational Institute. September 17, 2025, https://www.tni.org/en/article/not-far-enough-the-state-of-the-free-trade-agreement-between-colombia-and-the-united-states.
[v] “Presidential Determination on Major Drug Transit or Major Illicit Drug Producing Countries for Fiscal Year 2026.” United States Department of State, https://www.state.gov/releases/office-of-the-spokesperson/2025/09/presidential-determination-on-major-drug-transit-or-major-illicit-drug-producing-countries-for-fiscal-year-2026/. Accessed October 15, 2025.
[vi] United Nations Office on Drugs and Crime. World Drug Report 2025: Key Findings (WDR25 B1). 2025. https://www.unodc.org/documents/data-and-analysis/WDR_2025/WDR25_B1_Key_findings.pdf.
[vii] United Nations Office on Drugs and Crime. World Drug Report 2025: Key Findings (WDR25 B1). 2025. https://www.unodc.org/documents/data-and-analysis/WDR_2025/WDR25_B1_Key_findings.pdf.
[viii] United Nations Office on Drugs and Crime. World Drug Report 2025: Key Findings (WDR25 B1). 2025. https://www.unodc.org/documents/data-and-analysis/WDR_2025/WDR25_B1_Key_findings.pdf.
[ix] AP. “US Revokes Visa for Colombia’s President after He Urges American Soldiers to Disobey Trump.” The Hindu, September 27, 2025. World. www.thehindu.com, https://www.thehindu.com/news/international/us-revokes-visa-for-colombias-president-after-he-urges-american-soldiers-to-disobey-trump/article70102450.ece.
[x] Colombian President Blasts Ukraine-US Minerals Deal as “Stupidity.” February 27, 2025, https://www.intellinews.com/colombian-president-blasts-ukraine-us-minerals-deal-as-stupidity-369534/
[xi] Colombian President Blasts Ukraine-US Minerals Deal as “Stupidity.” February 27, 2025, https://www.intellinews.com/colombian-president-blasts-ukraine-us-minerals-deal-as-stupidity-369534/
[xii] Colombian President Blasts Ukraine-US Minerals Deal as “Stupidity.” February 27, 2025, https://www.intellinews.com/colombian-president-blasts-ukraine-us-minerals-deal-as-stupidity-369534/
[xiii] “China-Colombia Relations Are Growing, If Slowly.” United States Institute of Peace, https://www.usip.org/publications/2023/11/china-colombia-relations-are-growing-if-slowly. Accessed October 15,. 2025.
[xiv] “China-Colombia Relations Are Growing, If Slowly.” United States Institute of Peace, https://www.usip.org/publications/2023/11/china-colombia-relations-are-growing-if-slowly. Accessed October 15,. 2025.
[xv] “China-Colombia Relations Are Growing, If Slowly.” United States Institute of Peace, https://www.usip.org/publications/2023/11/china-colombia-relations-are-growing-if-slowly. Accessed October 15,. 2025.
[xvi] “China-Colombia Relations Are Growing, If Slowly.” United States Institute of Peace, https://www.usip.org/publications/2023/11/china-colombia-relations-are-growing-if-slowly. Accessed October 15,. 2025.
[xvii] Falah, Natalia. “Colombia’s Petro Struggles with High Disapproval Rating.” Colombia One: News from Colombia and the World, September 3,. 2025, https://colombiaone.com/2025/09/03/colombia-gustavo-petro-disapproval/.
[xviii] Falah, Natalia. “Colombia’s Petro Struggles with High Disapproval Rating.” Colombia One: News from Colombia and the World, September 3,. 2025, https://colombiaone.com/2025/09/03/colombia-gustavo-petro-disapproval/.
[xix] Falah, Natalia. “Colombia’s Petro Struggles with High Disapproval Rating.” Colombia One: News from Colombia and the World, September 3,. 2025, https://colombiaone.com/2025/09/03/colombia-gustavo-petro-disapproval/.
[xx] Falah, Natalia. “Colombia’s Petro Struggles with High Disapproval Rating.” Colombia One: News from Colombia and the World, September 3,. 2025, https://colombiaone.com/2025/09/03/colombia-gustavo-petro-disapproval/.