'विश्व व्यवस्था की पुनर्कल्पनाः बहुध्रुवीय हिंद– प्रशांत में भारत और कोरिया गणराज्य (RoK)’ विषय पर तीसरे भारत– कोरिया (आईसीडब्ल्यूए– आरआईएस और केएनडीए– केआईईपी) 2+2 संवाद पर मीडिया विज्ञप्ति, 7 अप्रैल 2026
भारतीय वैश्विक परिषद (आईसीडब्ल्यूए/ ICWA) ने भारत की ओर से विकासशील देशों के लिए अनुसंधान और सूचना प्रणाली (आरआईएस) के साथ मिलकर और कोरिया की ओर से कोरिया नेशनल डिप्लोमैटिक एकेडमी (KNDA) के साथ मिलकर 7 अप्रैल 2026 को नई दिल्ली के सप्रू हाउस में तीसरे भारत– कोरिया गणराज्य (RoK) 2+2 संवाद का आयोजन किया। इस संवाद का विषय था– “विश्व व्यवस्था की पुनर्कल्पनाः बहुध्रुवीय हिंद– प्रशांत में भारत और कोरिया गणराज्य (RoK)”।
चार मुख्य सत्रों और समापन सत्र में हुई बातचीत में भू– राजनीतिक, भू– आर्थिक और तकनीकी परिवर्तनों के बीच भारत – दक्षिण कोरिया की 'विशेष रणनीतिक साझेदारी' (जो 2015 में शुरू हुई थी) की समीक्षा की गई। मुख्य निष्कर्ष यह निकला कि हालांकि यह साझेदारी संरचना के लिहाज से मज़बूत है, लेकिन व्यवस्था के स्तर पर इसका पूरा इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है और वर्तमान माहौल इसे निर्णायक रूप से सक्रिए करने का दुर्लभ अवसर प्रदान करता है।
उद्घाटन भाषण आईसीडब्ल्यूए के कार्यवाहक उप निदेशक जनरल राजदूत एन.जे. गंगटे; आरआईएस के महानिदेशक प्रो. सचिन कुमार शर्मा; केआईईपी (KIEP) के दिल्ली कार्यालय के निदेशक डॉ. चूंगजे चो और आईएफएएनएस (IFANS), केएनडीए (KNDA) के वरिष्ठ कार्यकारी निदेशक श्री म्योंगिल कांग ने दिए। कोरिया गणराज्य में भारत के राजदूत गौरांगलाल दास ने वर्चुअल रूप से हिस्सा लिया और विशेष संबोधन दिए। मुख्य भाषण भारत में कोरिया गणराज्य के राजदूत महामहिम ली सियोंग– हो ने दिया।
पहले सत्र का विषय “भारत– कोरिया रणनीतिक तालमेल और रक्षा– सुरक्षा साझेदारी” था। इसकी अध्यक्षता कोरिया गणराज्य में भारत के पूर्व राजदूत, राजदूत स्कंद तयाल ने की। प्रस्तुति देने वालों में आईसीडब्ल्यूए के शोध अध्येता डॉ. तुनचिनमांग लैंगेल और आईएफएएनएस (IFANS), केएनडीए (KNDA) के सेंटर फॉर आसियान– इंडिया स्टडीज़ के निदेशक डॉ. वोंड्यूक चो शामिल थे। आरआईएस के विजिटिंग फेलो कमोडोर सुजीत समाद्दार (सेवानिवृत्त) और केआईईपी (KIEP) की भारत एवं दक्षिण एशिया टीम के प्रमुख डॉ. क्युंगहून किम ने चर्चा में हिस्सा लिया।
दूसरे सत्र का विषय रहा– "समुद्री सुरक्षा, शिपिंग और आपूर्ति श्रृंखला की मज़बूती।" इसकी अध्यक्षता आईएफएएनएस (IFANS), केएनडीए (KNDA) के वरिष्ठ कार्यकारी निदेशक श्री म्योंगिल कांग ने की। प्रस्तोताओं में आरआईएस के प्रोफेसर डॉ. प्रबीर डे और केआईईपी (KIEP) के डॉ. क्युनघून किम रहे। जबकि, आईसीडब्ल्यूए की शोध अध्येता डॉ. प्रज्ञा पांडे और आसियान– इंडिया स्टडी सेंटर, आईएफएएनएस (IFANS), केएनडीए (KNDA) के निदेशक डॉ. वोंड्यूक चो चर्चाकर्ता थे।
तीसरे सत्र का विषय था “सामरिक सहयोग में उन्नत एवं महत्वपूर्ण प्रौद्योगी”। इसकी अध्यक्षता केआईईपी (KIEP) के दिल्ली कार्यालय के निदेशक डॉ. चूंगज़े चो ने की। प्रस्तुतकर्ताओं में केआईईपी (KIEP) के शोध अध्येता डॉ. यूं जे रो और आरआईएस (RIS) के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. प्रियदर्शी डैश शामिल थे। वहीं केएनडीए (KNDA) के सेंटर फॉर इकोनॉमिक एंड टेक्नोलॉजी सिक्योरिटी स्टडीज़ की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. जी योंग यू और आईसीडब्ल्यूए की वरिष्ठ शोध अध्येता डॉ. स्तुति बनर्जी चर्चा में शामिल हुईं।
चौथा सत्र “ग्लोबल साउथ में भारत– कोरिया सहयोग” विषय पर आयोजित किया गया था। इस सत्र की अध्यक्षता आरआईएस के महानिदेशक जनरल प्रो. सचिन कुमार शर्मा ने की। प्रस्तुत देने वालों में केएनडीए (KNDA) की एसोसिएट प्रो. जिसुन सॉन्ग और आईसीडब्ल्यूए के वरिष्ठ शोध अध्येता डॉ. संजीव कुमार शामिल थे। वहीं केआईईपी (KIEP) के शोध अध्येता डॉ. यूं जे रो (चर्चाकर्ता); और आरआईएस के एसोसिएट प्रो. डॉ. सब्यसाची साहा ने चर्चाकर्ता के रूप में इस सत्र में हिस्सा लिया।
समापन सत्र को आरआईएस के प्रो. सचिन कुमार शर्मा, केआईईपी (KIEP) के डॉ. चूंगजे जो, केएनडीए (KNDA) के श्री म्योंगिल कांग और आईसीडब्ल्यूए के राजदूत एन.जे.गंगटे ने संबोधित किया।
इस वार्ता से कई अहम और अमल में लाए जा सकने वाले सुझाव सामने आए जो संस्थागत, रक्षा, समुद्री, प्रौद्योगिकी और ग्लोबल साउथ जैसे क्षेत्रों से संबंधित हैं। इनमें शामिल हैं: 2015 में सैद्धांतिक रूप से तय हुई 2+2 उप– मंत्री स्तरीय विदेश और रक्षा मंत्रालय वार्ता को आरंभ करना; रणनीतिक शर्तों पर सीईपीए (CEPA) अपग्रेड को पूरा करना; डीआरडीओ– डीएपीए (DRDO-DAPA) फ्रेमवर्क के तहत रक्षा तकनीक के संयुक्त विकास हेतु गलियारा बनाना; चेन्नई और बुसान के बीच ग्रीन और डिजिटल समुद्री कॉरिडोर बनाना एवं ग्लोबल साउथ में त्रिकोणीय विकास सहयोग फ्रेमवर्क का विस्तार करना।
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