एमजीआईएमओ के साथ हमारे समझौता ज्ञापन का नवीनीकरण पिछले वर्ष (3 फ़रवरी 2024) किया गया था। नवीनीकरण के बाद यह हमारी पहली बैठक है और यह अच्छी बात है कि आज हम सार्थक चर्चा कर पाए।
हमारी चर्चाओं से स्पष्ट है कि भारत-रूस संबंधों की मजबूत बुनियाद है, जो एक-दूसरे के दृष्टिकोण की साझा समझ पर आधारित है। हम राष्ट्रपति पुतिन के दौरे का इंतजार कर रहे हैं। यह यात्रा असाधारण होने वाली है। वर्तमान भू-राजनीतिक उथल-पुथल, बढ़ते संघर्षों, तनावपूर्ण परिस्थितियों और आज व्याप्त विभाजनकारी बयानबाज़ी के मद्देनज़र, हमें आशा है कि इस यात्रा से ऐसे परिणाम निकलेंगे जो न केवल भारत-रूस संबंधों को तार्किकता, पूर्वानुमान और दिशा प्रदान करेंगे, बल्कि क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता को बढ़ावा देने में उनकी भूमिका को भी मज़बूत करेंगे।
जबकि भारत सक्रिय रूप से विविधतापूर्ण विदेशी संबंधों की तलाश करता है, वह रूस के साथ अपने संबंधों की स्थायी मजबूती से भी अवगत है, जो हमारे द्वारा एक-दूसरे के प्रति दिखाए जाने वाले सम्मान से स्पष्ट है।
आज बहुध्रुवीयता पर हुई चर्चाओं में हमारी राय में समानता और बारीकियाँ दोनों ही सामने आईं। हम दोनों का मानना है कि बहुध्रुवीयता अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में अधिक स्थिरता और पूर्वानुमेयता लाने में योगदान देगी और यही आगे बढ़ने का रास्ता है। हालांकि, रूस के लिए बहुध्रुवीयता का अर्थ अमेरिका की घटती शक्ति, अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था का गैर-अमेरिकीकरण, वैश्विक शासन संस्थाओं का विकास तथा एक प्रमुख ध्रुव के रूप में अपनी स्थिति को मजबूत करना भी है। भारत के लिए, बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था का अर्थ है वितरित शक्ति और अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था को बनाए रखने के लिए वितरित ज़िम्मेदारियाँ। यह प्रभाव से ज़्यादा साझा ज़िम्मेदारियों और कर्तव्यों के बारे में है। बेशक, हम बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था को अपने उत्थान और विकास के लिए भी अनुकूल मानते हैं।
चर्चाओं में जो महत्वपूर्ण बात उभर कर आई, वह यह थी कि परिवर्तन के दौर से गुजर रहे विश्व के कथानकों में परिवार की संरचना, जनसांख्यिकी, प्रवासन, स्वास्थ्य, शिक्षा जैसे मुद्दों से संबंधित सामाजिक विचारों को सामने रखना महत्वपूर्ण है। हम इस बात पर सहमत हुए कि नई विश्व व्यवस्था केवल भू-राजनीति या भू-आर्थिक ही नहीं होगी, बल्कि उतनी ही, यदि उससे भी अधिक, सामाजिक परिवर्तन के बारे में भी होगी।
यूरेशिया पर चर्चा उल्लेखनीय रही। रूस एक महाशक्ति है जो द्विपक्षीय संबंधों और बहुपक्षीय मंचों पर भागीदारी के माध्यम से यूरेशियाई क्षेत्र की सुरक्षा, स्थिरता और समृद्धि में योगदान दे रहा है, जिसमें रूस अग्रणी भूमिका निभा रहा है। भारत का यूरेशियाई जुड़ाव बढ़ रहा है, जिसमें बहुपक्षीय संगठन भी शामिल हैं, लेकिन अफ़ग़ान-पाक क्षेत्र में आतंकवाद और कट्टरपंथ जैसे खतरों और ज़मीनी संपर्क की कमी से उसे गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हुए कि भारत-रूस साझेदारी उनके यूरेशियाई दृष्टिकोण का एक प्रमुख स्तंभ है।
हमने सुधारित बहुपक्षवाद पर विचारों का आदान-प्रदान किया। एससीओ और सीआईसीए जैसे क्षेत्रीय संस्थाओं के एजेंडा को नवीनीकृत करने के महत्व पर बल दिया गया। ईएईयू के साथ भारत के सहयोग को मज़बूत करने पर चर्चा हुई। ब्रिक्स की भारत की आगामी अध्यक्षता और इस संदर्भ में भारत-रूस सहयोग के संभावित अवसरों पर भी चर्चा हुई।
हिंद-प्रशांत क्षेत्र की स्थिति पर चर्चा हुई। इस बात पर ज़ोर दिया गया कि इस क्षेत्र में संभावित संघर्ष की तैयारी की जा रही है। परमाणु पहलू लगातार महत्वपूर्ण होता जा रहा है। अमेरिका और चीन के बीच प्रतिद्वंद्विता तेज़ हो रही है और सैन्य-राजनीतिक अस्थिरता की आशंका है। इस स्थिति में अमेरिका और चीन के अलावा अन्य शक्तियों के बीच सहयोग आवश्यक है। इस संदर्भ में, पारंपरिक समुद्री सुरक्षा और समुद्री डकैती, आईयूयू मछली पकड़ने जैसी गैर-पारंपरिक चुनौतियों से निपटने में भारत-रूस सहयोग पर प्रकाश डाला गया ताकि समुद्र में सुव्यवस्था बनाए रखने में योगदान दिया जा सके। एक सहयोगात्मक प्रयास के रूप में समुद्री क्षेत्र जागरूकता के विषय पर भी चर्चा की गई।
दोनों पक्षों ने राज्य के आचरण और अंतर-राज्यीय संबंधों को निर्देशित करने, विश्वास-निर्माण उपायों में संलग्न होने और अंतर्राष्ट्रीय कानून की साझा व्याख्याओं को बनाए रखने के लिए पारस्परिक रूप से स्थापित समझौतों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई, साथ ही आज विश्व में मौजूद काफी विभाजनों के बावजूद इनके लिए दरवाजे खुले रखे।
इसके अलावा, मैं इस बात पर प्रकाश डालना चाहूंगी कि आज की हमारी चर्चाओं ने हमारे दीर्घकालिक और मैत्रीपूर्ण संबंधों के मूल्य को रेखांकित किया है, साथ ही सहयोग के स्थापित और उभरते दोनों क्षेत्रों में, विशेष रूप से क्षेत्रीय और वैश्विक दोनों स्तरों पर चल रही भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच, इस संबंध को लगातार आगे बढ़ाने की हमारी दृढ़ इच्छा को भी रेखांकित किया है।
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