भारतीय वैश्विक परिषद (आईसीडब्ल्यूए) ने मॉस्को स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल रिलेशंस (एमजीआईएमओ यूनिवर्सिटी) के सहयोग से 11 नवंबर 2025 को नई दिल्ली में भारत-रूस थिंक-टैंक के प्रमुखों (एचओटीटी) फोरम के चौथे संस्करण की मेजबानी की।
उद्घाटन सत्र में आईसीडब्ल्यूए की कार्यवाहक महानिदेशक एवं अपर सचिव सुश्री नूतन कपूर महावर; एमजीआईएमओ विश्वविद्यालय में अंतर्राष्ट्रीय अध्ययन संस्थान (आईएफआईएस) के निदेशक डॉ. मैक्सिम ए. सुचकोव; भारत सरकार के विदेश मंत्रालय में संयुक्त सचिव (यूरेशिया) श्री मयंक कुमार; और भारत में रूसी संघ के राजदूत महामहिम श्री डेनिस अलीपोव ने अपने विचार व्यक्त किए।
उद्घाटन सत्र में हुई वार्ताओं ने भारत-रूस संबंधों की मजबूत नींव को उजागर किया, जो एक-दूसरे के दृष्टिकोण की साझा समझ पर आधारित है। दोनों पक्षों ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत के आगामी दौरे के महत्व को नोट किया, क्योंकि यह दौरा वर्तमान वैश्विक भू-राजनीतिक उथल-पुथल, बढ़ते संघर्षों, तनावपूर्ण परिस्थितियों और आज की दुनिया में ध्रुवीकरण करने वाली बयानबाजी के बीच हो रहा है। वक्ताओं ने राष्ट्रपति पुतिन की आगामी यात्रा के बारे में सकारात्मक पूर्वानुमान व्यक्त किया तथा विश्वास व्यक्त किया कि भारत-रूस शिखर सम्मेलन के समापन से न केवल भारत-रूस संबंधों को बल्कि क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता के एक कारक के रूप में भारत-रूस संबंधों को भी तर्कसंगतता, पूर्वानुमान और दिशा मिलेगी। भारत सरकार ने इस बात पर जोर दिया कि यद्यपि राष्ट्र बहुपक्षीय विदेश नीति का पालन करता है, फिर भी वह भारत-रूस संबंधों की मजबूती से अवगत है, जो एक-दूसरे के प्रति पारस्परिक सम्मान में परिलक्षित होता है।
बैठक का पहला सत्र "भू-राजनीतिक अशांति और बहुध्रुवीयता: भारत और रूस के परिप्रेक्ष्य" विषय पर केंद्रित था। इसकी अध्यक्षता राजदूत अजय बिसारिया, पूर्व संयुक्त सचिव (यूरेशिया) एवं कनाडा, पाकिस्तान, पोलैंड और लिथुआनिया में भारतीय दूत तथा ऑब्ज़र्वर रिसर्च फ़ाउंडेशन (ओआरएफ) के विशिष्ट फ़ेलो ने की। सत्र में वक्ताओं में प्रोफेसर संजय पांडे, प्रोफेसर, रूसी और मध्य एशियाई अध्ययन केंद्र, स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज (एसआईएस), जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू); डॉ. मैक्सिम ए. सुचकोव, निदेशक, आईएफआईएस, एमजीआईएमओ विश्वविद्यालय; डॉ. संजीव कुमार, वरिष्ठ अनुसंधान फेलो, आईसीडब्ल्यूए; डॉ. लिडिया कुलिक, वरिष्ठ अनुसंधान फेलो, इंस्टीट्यूट ऑफ ओरिएंटल स्टडीज, रूसी विज्ञान अकादमी और भारत अध्ययन प्रमुख, मॉस्को स्कूल ऑफ मैनेजमेंट स्कोल्कोवो; और डॉ. हिमानी पंत, अनुसंधान फेलो, आईसीडब्ल्यूए शामिल थे।
बहुध्रुवीयता पर बहस ने भारत और रूस के दृष्टिकोणों में समानताओं और भिन्नताओं, दोनों को उजागर किया। दोनों देशों का मानना है कि बहुध्रुवीयता अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में स्थिरता और पूर्वानुमेयता को बढ़ाएगी, और इसे भविष्य की दिशा के रूप में देखते हैं। रूस के लिए, बहुध्रुवीयता की अवधारणा में अमेरिका के घटते प्रभाव और वैश्विक व्यवस्था का अमेरिकीकरण कम होना शामिल है; यह अंतरराष्ट्रीय शासन में अपने प्रमुख ध्रुव के रूप में अपनी स्थिति को मजबूत करने का प्रयास करना चाहता है। भारत के लिए, बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था का अर्थ है वितरित शक्ति और अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था को बनाए रखने के लिए वितरित ज़िम्मेदारियाँ। यह प्रभाव से अधिक साझा जिम्मेदारियों और कर्तव्यों के बारे में है। साथ ही, भारत एक बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था को अपने उत्थान और विकास के लिए अनुकूल मानता है। चर्चाओं में जो एक महत्वपूर्ण बिंदु उभर कर आया, वह था संक्रमणकालीन विश्व के कथानकों में परिवार की संरचना, जनसांख्यिकी, प्रवासन, स्वास्थ्य, शिक्षा जैसे मुद्दों से जुड़े सामाजिक विचारों को प्रमुखता देना। वक्ताओं ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि नई विश्व व्यवस्था केवल भू-राजनीति या भू-अर्थशास्त्र के बारे में ही नहीं होगी, बल्कि उतनी ही, यदि उससे भी अधिक, सामाजिक परिवर्तन के बारे में होगी।
दोनों पक्षों के वक्ताओं ने सुधारित बहुपक्षवाद पर भी विचार साझा किए। एससीओ और सीआईसीए जैसे क्षेत्रीय निकायों के एजेंडा को नवीनीकृत करने के महत्व पर ज़ोर दिया गया। ईएईयू के साथ भारत के सहयोग को मज़बूत करने पर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने इस संदर्भ में भारत-रूस सहयोग के एक संभावित मार्ग के रूप में ब्रिक्स की भारत की आगामी अध्यक्षता पर भी चर्चा की। भारतीय पक्ष ने यह विचार व्यक्त किया कि बहुपक्षवाद बहुध्रुवीयता को सुदृढ़ करता है।
दूसरे सत्र का विषय था "स्थिरता और समृद्धि के लिए यूरेशियन दृष्टिकोण: साझा दृष्टिकोण।" इसकी अध्यक्षता डॉ. मैक्सिम ए. सुचकोव, निदेशक, आईएफआईएस, एमजीआईएमओ विश्वविद्यालय ने की। सत्र में वक्ताओं में शामिल थे प्रोफेसर राजन कुमार, प्रोफेसर, रूसी और मध्य एशियाई अध्ययन केंद्र, स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज, एसआईएस, जेएनयू; डॉ. इरिना बोलगोवा, उप निदेशक, आईएफआईएस, एमजीआईएमओ विश्वविद्यालय; डॉ. अतहर जफर, वरिष्ठ शोध अध्येता, आईसीडब्ल्यूए; डॉ. जूलिया मेलनिकोवा, कार्यक्रम प्रबंधक, रूसी अंतर्राष्ट्रीय मामलों परिषद (आरआईएसी); और डॉ. अन्वेषा घोष, शोध अध्येता, आईसीडब्ल्यूए। यूरेशिया पर चर्चा में इस बात पर प्रकाश डाला गया कि किस प्रकार रूस एक महान शक्ति के रूप में द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ बहुपक्षीय मंचों में भागीदारी के माध्यम से यूरेशियाई क्षेत्र की सुरक्षा, स्थिरता और समृद्धि में योगदान दे रहा है, जिसमें रूस अग्रणी भूमिका निभा रहा है। इस बीच, भारत की यूरेशियाई भागीदारी बढ़ रही है, जिसमें बहुपक्षीय संगठन भी शामिल हैं, लेकिन इसे अफगानिस्तान-पाक क्षेत्र में आतंकवाद और कट्टरपंथ जैसे खतरों तथा जमीनी संपर्क की कमी जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हुए कि भारत-रूस साझेदारी उनके यूरेशियाई दृष्टिकोण का एक प्रमुख स्तंभ है।
तीसरा सत्र "हिंद-प्रशांत एवं समुद्री सुरक्षा" विषय पर केंद्रित था। इसकी अध्यक्षता सामरिक एवं रक्षा अनुसंधान परिषद (सीएसडीआर) के विशिष्ट फेलो कैप्टन सरबजीत एस. परमार ने की। वक्ताओं में शामिल थे डॉ. वसीली काशिन, निदेशक, यूरोपीय और अंतर्राष्ट्रीय अध्ययन केंद्र, हायर स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स (एचएसई) विश्वविद्यालय, मॉस्को, रूस; कमोडोर अभय कुमार सिंह, शोध अध्येता, मनोहर पर्रिकर रक्षा अध्ययन और विश्लेषण संस्थान (एमपी-आईडीएसए); डॉ. पावेल गुदेव, कार्य समूह के प्रमुख, उत्तर अमेरिकी अध्ययन केंद्र, आईएमईएमओ, रूसी विज्ञान अकादमी, रूस; और डॉ. प्रज्ञा पांडे, शोध अध्येता, आईसीडब्ल्यूए।
हिंद-प्रशांत क्षेत्र की स्थिति पर नज़र डालने से यह विचार सामने आया कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में तनाव बढ़ रहा है। इस क्षेत्र में भविष्य में संघर्ष की स्थिति के लिए तैयारियाँ चल रही हैं। वक्ताओं ने इस बात पर ज़ोर दिया कि परमाणु आयाम प्रमुखता प्राप्त कर रहा है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि कैसे बढ़ती अमेरिका-चीन प्रतिद्वंद्विता हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सैन्य-राजनीतिक अस्थिरता का कारण बन सकती है। वक्ताओं ने इस बात पर ज़ोर दिया कि इस बदलते हालात के लिए अमेरिका और चीन के अलावा अन्य शक्तियों के बीच सहयोग ज़रूरी है। इस संदर्भ में समुद्र में व्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए पारंपरिक समुद्री सुरक्षा के साथ-साथ समुद्री डकैती और अवैध, असूचित और अनियमित (आईयूयू) मछली पकड़ने जैसे गैर-पारंपरिक खतरों से निपटने में भारत और रूस के बीच सहयोग पर जोर दिया गया। सहयोग के एक क्षेत्र के रूप में समुद्री डोमेन जागरूकता पर भी चर्चा की गई। दोनों पक्षों ने राज्य के आचरण और अंतर-राज्यीय संबंधों को निर्देशित करने, विश्वास-निर्माण उपायों में संलग्न होने और अंतर्राष्ट्रीय कानून की साझा व्याख्याओं को बनाए रखने के लिए पारस्परिक रूप से स्थापित समझौतों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई, साथ ही आज विश्व में मौजूद महत्वपूर्ण विभाजनों के बावजूद इनके लिए दरवाजे खुले रखे।
एचओटीटी फोरम के समापन भाषण आईसीडब्ल्यूए की कार्यवाहक महानिदेशक एवं अतिरिक्त सचिव सुश्री नूतन कपूर महावर और एमजीआईएमओ विश्वविद्यालय के आईएफआईएस के निदेशक डॉ. मैक्सिम ए. सुचकोव द्वारा दिए गए।
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