भारतीय वैश्विक परिषद (आईसीडब्ल्यूए/ICWA) और रशन इंटरनेशनल अफेयर्स काउंसिल (आरआईएसी/ RIAC) ने 20 मार्च 2025 को सप्रू हाउस, नई दिल्ली में अपना आठवां वार्षिक संवाद आयोजित किया। इस संवाद में विश्व व्यवस्था में बदलती गतिशीलता के साथ– साथ भारत और रूस के बीच सहयोग की नई और वर्तमान सीमाओं पर भारतीय एवं रूसी नज़रिए को साझा करने पर ध्यान दिया गया।
उद्घाटन भाषण आईसीडब्ल्यूए की अपर सचिव सुश्री नूतन कपूर महावर; रशन इंटरनेशल अफेयर्स काउंसिल (आरआईएसी) के महानिदेश डॉ. इवान टिमोफीव; भारत में रूसी दूतावास के मिशन के उप प्रमुख श्री रोमन बाबुश्किन और रूस में भारतीय दूतावास के मिशन उपप्रमुख श्री निखिलेश गिरी ने दिया। वक्ताओं ने कहा कि भारत– रूस का आपसी विश्वास एवं लचीलापन अनुकरणीय है। भू– राजनीतिक उतार– चढ़ाव के बावजूद भारत और रूस ने अपने द्विप६य संबंधों का दायरा बढ़ाना जारी रखा है।
भारतीय पक्ष ने अपने पड़ोस में राजनीतिक, सुरक्षा और आर्थिक स्थिति के बारे में आकलन साझा किया; रूसी पक्ष ने यूक्रेन की स्थिति और शांति की संभावनाओं, ट्रम्प की राजनीति और अमेरिका– चीन सामरिक प्रतिस्पर्धा के बारे में आकलन साझा किए।
पहला सत्र “वैश्विक व्यवस्था में बदलती गतिशीलता" विषय पर केंद्रित था। इसकी अध्यक्षता जेएनयू के स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज़ के सेंटर फॉर रशन एंड सेंट्रल एशियन स्टडीज़ के प्रो. संजय पांडे ने की। वक्ताओं में आईसीडब्ल्यूए के सीनियर फेलो डॉ. संजीव कुमार; एमजीआईएमओ यूनिवर्सिटी के इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल स्टडीज़ के निदेशक डॉ. मैक्सिम सुचकोव; आईसीडब्ल्यूए की निदेशक (अनुसंधान) डॉ. निवेदिता रे; आरआईएसी के महानिदेशक डॉ. इवान टिमोफीव और आईसीडब्ल्यूए की रिसर्च फेलो डॉ. हिमानी पंत रहीं। वक्ताओं ने बदलती विश्व व्यवस्था पर अपने विचार साझा किए और इस बात पर सहमति जताई कि विश्व पहले से ही बहुध्रुवीय है और यह एक बढ़ती हुई प्रवृति है। विश्व व्यवस्था महाशक्ति समीकरणों के बदलने के साथ पुनर्संतुलन का अनुभव कर रही है।
बहुपक्षवाद के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई गई और संयुक्त राष्ट्र समेत वैश्विक शासन की संस्थाओं में सुधार को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला गया। उभरती हुई नई विश्व व्यवस्था की वांछनीय विशेषताओं पर चर्चा की गई। बहुपक्षीय सहयोग को बढ़ाने में ब्रिक्स, एससीओ, जी20 जैसी बहुपक्षीय संस्थाओं की भूमिका पर ज़ोर दिया गया। दोनों पक्षों ने यह भी कहा कि यूरेशिया साझा हितों वाला क्षेत्र है और इस क्षेत्र में सुरक्षा एवं विकास को बढ़ावा देने के लिए दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया।
संवाद का दूसरा सत्र "भारत– रूस सहयोग के आयाम: आर्थिक, ऊर्जा और संपर्क संबंधों को सामिल करना", विषय पर था। इसकी अध्यक्षता आरआईएसी की एशिया एंड यूरेशिया प्रोग्राम की प्रमुख सुश्रू जूलिया मेलनिकोवा ने की। वक्ताओं में थे– आरआईएसी के महानिदेशक डॉ. इवान टिमोफीव; श्री अमित भंडारी, सीनियर फेलो, गेटवे हाउस; मॉस्को स्कूल ऑफ मैनेजमेंट की इंडिया स्टडीज़ की प्रमुख और इंस्टीट्यूट ऑफ ओरिएंटल स्टडीज़ आरएएस की सीनियर रिसर्च फेलो डॉ. लिडिया कुलिक; आईसीडब्ल्यूए की रिसर्च फेलो डॉ. हिमानी पंत; एचएसई यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ वर्ल्ड इकोनॉमी के प्रमुख श्री इगोर मकारोव और आईसीडब्ल्यूए के रिसर्च एसोसिएट श्री अमन कुमार।
वक्ताओं ने द्विपक्षीय व्यापार में बाधाओं को संबोधित करते हुए दोनों देशों के बीच आर्थिक जुड़ाव के दायरे को बढ़ाने पर विचार– विमर्श किया। द्विपक्षीय व्यापार में हाल की वृद्धि को बनाए रखने की जरूरत पर बल दिया गया। दोनों पक्षों ने भारत– ईएईयू एफटीए की संभावनाओं पर अपने विचार साझा किए और राष्ट्रीय मुद्राओं में निपटान एवं संयुक्त निवेश समेत वित्तीय सहयोग की संभावनाओं पर भी चर्चा की। अमेरिकी प्रतिबंधों के प्रभाव पर चर्चा हुई। भारत के पक्ष में रूसी आपूर्ति श्रृंखलाओं के पुनर्गठन में हाल के रुझानों पर ध्यान दिया गया। कृषि क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग और खाद्य सुरक्षा बढ़ाने के अवसरों पर चर्चा की गई।
तीसरा सत्र "भारत– रूस द्विपक्षीय सहयोग की उभरती हुई सीमाएं" विषय पर था। इसकी अध्यक्षता कलिंगा इंस्टीट्यूट ऑफ इंडो– पैसिफिक स्टडीज़ के संस्थापक और मानद अध्यक्ष एवं इंडिया क्वार्टरली के संपादक प्रो. चिंतामणि माहापात्रा ने की। वक्ताओं में शामिल थे– आईसीडब्ल्यूए के सीनियर रिसर्च फेलो डॉ. अतहर ज़फर; आरआईएसी के एशिया एंड यूरेशिया प्रोग्राम की प्रमुख डॉ. जूलिया मेलनिकोवा;आईसीडब्ल्यूए की सीनियर रिसर्च फेलो डॉ. स्तुति बनर्जी; आईएमईएमओ, आरएएस के सेंटर ऑफ द इंडो– पेसिफिक रीज़न के प्रमुख डॉ. एलेक्सी कुप्रियनोव; आईसीडब्ल्यूए की रिसर्च फेलो डॉ. प्रज्ञा पांडे; एचएसई यूनिवर्सिटी की एसोसिएट प्रोफेसर और आरएएस के इंस्टीट्यूट ऑफ चाइना एंड कॉन्टेम्पोरेरी एशिया की सीनियर रीसर्चर डॉ. इरीना स्ट्रेलनिकोवा और आईसीडब्ल्यूए के रिसर्च एसोसिएट श्री अमन कुमार।
वक्ताओं ने भारत– रूस द्विपक्षीय सहयोग को बढ़ाने के साथ– साथ यूरेशिया में क्षेत्रीय संपर्क को बेहतर बनाने हेतु संपर्क संबंधों को मजबूत करने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया। वक्ताओं ने पारस्परिक लाभ एवं पर्यावरणीय स्थिरता हेतु आर्कटिक एवं रूसी सुदूर पूर्व में सहयोग की संभावनाओं पर भी प्रकाश डाला। दोनों पक्षों ने हिंद– प्रशांत पर अपने विचार साझा किए और अपने नज़रिए में समानताओं की खोज की।
समापन भाषण आईसीडब्ल्यूए की अपर सचिव श्रीमती नूतन कपूर महावर और आरआईएसी के महानिदेशक डॉ. इवान टिमोफीव ने दिया।
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