7वाँ भारतीय वैश्विक परिषद (आईसीडब्ल्यूए) - एशिया न्यूजीलैंड फाउंडेशन (एएनजेडएफ) और न्यूजीलैंड भारत अनुसंधान संस्थान (एनजेडआईआरआई) संवाद 30 जनवरी 2025 को क्राइस्टचर्च, न्यूजीलैंड में आयोजित किया गया। संवाद के दौरान तीन प्रमुख विषयों पर चर्चा हुई: बदलती वैश्विक भू-राजनीति, संबंधित क्षेत्रों में विकास पर परिप्रेक्ष्य; तथा भारत-न्यूजीलैंड द्विपक्षीय संबंध।
उद्घाटन सत्र में न्यूजीलैंड में भारतीय उच्चायुक्त नीता भूषण और भारत में न्यूजीलैंड के उच्चायुक्त पैट्रिक राटा ने वार्ता को संबोधित किया। इस बात पर गौर किया गया कि भारत-न्यूजीलैंड संबंध उन्नति की ओर अग्रसर हैं। दोनों देशों के बीच पिछले सात दशकों से अधिक समय से मैत्रीपूर्ण संबंध रहे हैं, 2024 एक ऐसा मील का पत्थर वर्ष रहा है जिसमें सभी क्षेत्रों में सहभागिता हुई, इस दौरान एक सकारात्मक प्रवृत्ति रही जिसके 2025 में भी जारी रहने की उम्मीद है। विश्व भू-राजनीति और विश्व अर्थव्यवस्था में भारत का महत्व बढ़ रहा है। ट्रैक II संवाद द्विपक्षीय संबंधों और लोगों से लोगों के बीच संबंधों के लिए चुनौतियों और अवसरों दोनों पर स्वतंत्र और स्पष्ट चर्चा के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करता है।
न्यूजीलैंड की ओर से एएनजेडएफ की मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुश्री सुजाना जेसप और भारत की ओर से जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के पूर्व प्रोफेसर, प्रोफेसर चिंतामणि महापात्रा ने प्रतिनिधिमंडल के प्रमुखों के रूप में वार्ता को संबोधित किया। इस बात पर गौर किया गया कि हाल ही में भारत और न्यूजीलैंड के बीच अभूतपूर्व उच्च स्तरीय संपर्क स्थापित हुए हैं। क्षेत्रीय और वैश्विक भू-राजनीति में चल रहे बदलावों पर चर्चा की गई और स्वतंत्र एवं खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र की आवश्यकता पर बल दिया गया।
प्रथम सत्र, बदलती वैश्विक भू-राजनीति: भारत और न्यूजीलैंड के दृष्टिकोण विषय पर केन्द्रित था । इस सत्र का संचालन एएनजेडएफ की मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुश्री सुज़ाना जेसप ने किया। इस सत्र के मुख्य चर्चाकर्ता न्यूज़ीलैंड इंडिया रिसर्च इंस्टीट्यूट के निदेशक प्रोफ़ेसर डेविड कैपी और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफ़ेसर, प्रोफ़ेसर चिंतामणि महापात्रा थे। सत्र के दौरान चर्चा में इस बात पर प्रकाश डाला गया कि वर्तमान में विश्व उथल-पुथल और अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है, तथा इसमें कुछ परिवर्तन बिंदु स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं जो नई विश्व व्यवस्था के उभरने के समय महत्वपूर्ण साबित होंगे। न्यूजीलैंड पक्ष ने बताया कि विश्व स्तर पर उभरता राष्ट्रवाद, विशेषकर व्यापार और आर्थिक, टैरिफ, निर्यात नियंत्रण, प्रतिबंध, संरक्षणवाद स्पष्ट दिखाई दे रहा है। दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हुए कि बहुपक्षीय संस्थाएं और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग तनाव में हैं। समुद्री पूर्वी एशिया, दक्षिण चीन सागर और दक्षिण प्रशांत क्षेत्र में चीन के आक्रामक रुख पर चर्चा की गई। वैश्विक दक्षिण में भारत के नेतृत्व को स्वीकार किया गया। यह उल्लेख किया गया कि विश्व मामलों में भारत हमेशा से एक भूमिका निभाता आया है ।
दूसरे सत्र का विषय था हमारे क्षेत्रों में विकास के परिप्रेक्ष्य। सत्र का संचालन प्रोफेसर चिंतामणि महापात्रा ने किया। सत्र के मुख्य चर्चाकर्ताओं में कैंटरबरी विश्वविद्यालय की प्रोफेसर ऐनी-मैरी ब्रैडी और भारतीय नौसेना के (सेवानिवृत्त) कैप्टन (डॉ.) गुरप्रीत एस खुराना शामिल थे। चर्चा के दौरान इस बात पर प्रकाश डाला गया कि वर्तमान में हिंद-प्रशांत क्षेत्र स्पष्ट रूप से सुर्खियों में है, यहाँ जो कुछ भी घटित होगा, उसका प्रभाव दुनिया भर में होगा। न्यूजीलैंड के लिए चुनौती पेश करने के दृष्टिकोण से प्रशांत क्षेत्र के छोटे द्वीप देशों के साथ चीन के संबंधों पर चर्चा की गई। न्यूजीलैंड पक्ष ने अंटार्कटिका की सुरक्षा और रणनीतिक दृष्टिकोण पर ध्यान देने की आवश्यकता पर बल दिया। भारतीय पक्ष ने इस बात पर प्रकाश डाला कि हिंद महासागर क्षेत्र में भारत सूक्ष्म पड़ोस नीति और ‘सागर’ (क्षेत्र में सबकी सुरक्षा और वृद्धि) भावना पर ध्यान केंद्रित करता है तथा भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल इस क्षेत्र में प्रथम प्रत्युत्तरदाता और प्रमुख सुरक्षा साझेदार के रूप में देखे जाना चाहेंगे।
तीसरा सत्र 'भारत-न्यूजीलैंड द्विपक्षीय संबंध: आगे की राह' विषय पर था। सत्र का संचालन एएनजेडएफ की निदेशक (अनुसंधान एवं सहभागिता) डॉ. जूलिया मैकडोनाल्ड ने किया। सत्र के मुख्य चर्चाकर्ताओं में सॉन्डर्स अन्सवर्थ के पार्टनर श्री चार्ल्स फिन्नी और आईसीडब्ल्यूए की रिसर्च फेलो डॉ. प्रज्ञा पांडे शामिल थीं। सत्र के दौरान चर्चा में इस बात पर प्रकाश डाला गया कि लोकतंत्र, स्वतंत्रता और कानून के शासन तथा नियम आधारित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था के प्रति हमारी साझा प्रतिबद्धता के मद्देनजर भारत और न्यूजीलैंड के बीच अधिक सहयोग के लिए मजबूत तालमेल है। इस बात पर जोर दिया गया कि हमें सभी स्तरों पर गहन सहभागिता के लिए और अधिक संवाद करना चाहिए। पर्यटन, शिक्षा, खेल, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, ऊर्जा, स्वास्थ्य विज्ञान, कृषि प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, फिन-टेक ऐसे क्षेत्र हैं जो सहयोग को आगे बढ़ाने के अवसर प्रदान करते हैं।
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