आईसीडब्ल्यूए की कार्यवाहक महानिदेशक सुश्री नूतन कपूर महावर,
माननियों, राजदूतगण,
सहकर्मीगण,
देवियों और सज्जनों,
सबसे पहले मैं भारतीय वैश्विक परिषद के प्रति आभार व्यक्त करना चाहता हूँ, जिसने मुझे विशेषज्ञों को ऐसी प्रतिष्ठित सभा को संबोधित करने का अवसर प्रदान किया।
साथ ही, मैं भारत के 76वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर आप सभी को शुभकामनाएं देना चाहती हूँ।
ऐसे महत्वपूर्ण विचार मंच पर आना मेरे लिए बहुत सम्मान की बात है।
मेरे आज के भाषण का विषय है "एससीओ और भारत: यूरेशिया में सहयोग हेतु क्षेत्रीय तालमेल को बेहतर करना"। यह मुद्दा एससीओ और पूरे यूरेशियाई महाद्वीप के भावी विकास हेतु बहुत प्रासंगिक और अत्यंत महत्वपूर्ण है। एससीओ स्वयं यूरेशियाई देशों का एक संगठन है।
अपने संबोधन में मैं एससीओ की बहुआयामी गतिविधियों पर प्रकाश डालने का प्रयास करूँगी, बहुपक्षीय संबंधों के विकास में भारत के महत्वपूर्ण योगदान पर ज़ोर दूंगी, साथ ही सहयोग के प्रगतिशील विस्तार की वर्तमान संभावनाओं के बारे में भी बताऊंगी।
आज, विश्व राजनीति से लेकर अर्थव्यवस्था तक, अंतरराष्ट्रीय संबंधों के सभी पहलुओं को प्रभावित करने वाले महत्वपूर्ण और गहन परिवर्तनों के दौर से गुज़र रही है। इन परिवर्तनों की पृष्ठभूमि में एक नई विश्व व्यवस्था उभर रही है जो देशों के विकास और साझेदारी को सुदृढ़ करने के व्यापक अवसर दे रही है।
इन परिस्थितियों में शंघाई सहयोग संगठन की भूमिका विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। 21वीं सदी की शुरुआत में एससीओ सदस्य देशों द्वारा किया गया चुनाव अच्छे– पड़ोसी और सहकारी संबंधों के सामंजस्य का एक ज्वलंत उदाहरण बन गया है और यह "शंघाई भावना" की शक्ति और दृढ़ता का प्रमाण है।
हम अक्सर शंघाई भावना की बात करते हैं लेकिन इसका मतलब क्या है? मेरे विचार से इसमें पारस्परिक समानता, परामर्श और परामर्श हेतु सम्मान आदि शामिल हैं। यही कारण है कि एससीओ असाध्य प्रतीत होने वाली समस्याओं को हल करने के लिए एक अच्छा मंच है।
एससीओ क्षेत्रीय और वैश्विक चुनौतियों जैसे सुरक्षा, आर्थिक विकास एवं सांस्कृतिक संपर्क से निपटने के लिए एक अनूठा मंच प्रदान करता है। बहुपक्षीय प्रारूपों के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा के संदर्भ में, एससीओ स्थिरता का समर्थन करने और देशों के बीच आपसी विश्वास को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यहाँ प्रतिस्पर्धा शब्द का प्रयोग सकारात्मक अर्थ में किया जा रहा है। इसका मतलब यह है कि एससीओ बदलती परिस्थितियों के अनुसार जल्दी से खुद को ढाल लेता है।
बदले में, प्रत्येक भाग लेने वाले देश को अपनी पहल और प्रभाव दिखाने का अवसर मिलता है, जो पूरे क्षेत्र के अधिक संतुलित और पारस्परिक रूप से लाभकारी विकास में योगदान देता है।
यह समझना महत्वपूर्ण है कि एससीओ अन्य देशों और क्षेत्रों के साथ टकराव पर केंद्रित गठबंधन नहीं है। इसके विपरीत, हम खुलेपन के सिद्धांत का दृढ़ता से पालन करते हैं, संस्कृतियों की विविधता का सम्मान करते हुए इच्छुक देशों के साथ– साथ अन्य अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय संगठनों के साथ विभिन्न रूपों में सहयोग को विकसित करने और गहरा करने के अवसर प्रदान करते हैं। एससीओ एक रचनात्मक संगठन है।
लोगों के लिए अपने राजनीतिक और सामाजिक– आर्थिक विकास का मार्ग स्वतंत्र रूप से चुनना, साथ ही समानता, आंतरिक मामलों में अहस्तक्षेप, संप्रभुता और देशों की क्षेत्रीय अखंडता के आधार पर संघर्षों का शांतिपूर्ण समाधान करना मौलिक रूप से महत्वपूर्ण है।
एससीओ ने हमेशा इस सिद्धांत का पालन किया है कि द्विपक्षीय विवादों पर इसके संस्थानों में चर्चा नहीं की जानी चाहिए। असताना शिखर सम्मेलन में इस सिद्धांत की फिर से पुष्टि की गई, जिसके दौरान अच्छे पड़ोसी, विश्वास और साझेदारी के सिद्धांतों पर राष्ट्राध्यक्षों की परिषद के वक्तव्य को अपनाया गया। एससीओ उन क्षेत्रों में संयुक्त सहयोग को बढ़ावा देने पर ध्यान देता है जो इसके सभी सदस्य देशों के लिए महत्वपूर्ण हैं।
एससीओ को प्रमुख घटनाओं, विशेष रूप से अपने सदस्यों के क्षेत्र में, पर, तुरंत प्रतिक्रिया देने में अधिक सक्रिए भूमिका निभाने के लिए कहा जाता है। यही कारण है कि एससीओ देशों के नेताओं ने सुधार और आधुनिकीकरण की प्रक्रिया शुरू की। क्षेत्र में हो रही घटनाओं को अनदेखा नहीं किया जा सकता है और संगठन के समयबद्ध, समन्वित कदम न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत करने की कुंजी होंगे, बल्कि वैश्विक और स्थानीय समस्याओं को एक साथ हल करने के लिए सदस्य देशों की तत्परता का स्पष्ट प्रमाण भी होंगे, जो पूरे क्षेत्र की स्थिरता और भावी विकास को सुनिश्चित करेगा।
वर्तमान भू– राजनीतिक तनावों के संदर्भ में, एससीओ वैश्विक संदर्भ में शांति और स्थिरता बनाए रखने के उद्देश्य से सक्रिए पहल करता है।
इनमें से एक पहल एससीओ की पहल थी "न्यायपूर्ण शांति, सद्भाव और विकास के लिए विश्व एकता", जिसे असताना में शिखर सम्मेलन में प्रस्तावित किया गया था। यह पहल एक अधिक प्रतिनिधि, लोकतांत्रिक, न्यायपूर्ण और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था के निर्माण हेतु एससीओ की अटूट प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।
इसके अलावा, मैं हमारे देशों के नेताओं द्वारा प्रस्तुत दो और वैश्विक विचारों का उल्लेख करना चाहूंगा, जिन्हें 2024 में असताना शिखर सम्मेलन की घोषणा में भी प्रतिबिंबित किया गया है।
एससीओ, सदस्य देशों के विचारों को ध्यान में रखते हुए, आपसी सम्मान, न्याय, समानता और पारस्परिक रूप से लाभकारी सहयोग की भावना में एक नए प्रकार के अंतरराष्ट्रीय संबंधों के निर्माण में सहयोग को बढ़ावा देने की पहल की प्रासंगिकता की पुष्टि करता है।
मैं इस विचार पर आना चाहूँगी– मानव जाति के लिए साझा भविष्य वाले समुदाय के निर्माण के विचार की एक साझा नजरिए का निर्माण। इसके अलावा, वसुधैव कुटुम्बकम– "एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य" का विचार भी विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जिसे भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने व्यक्त किया है, जो साझा समृद्धि प्राप्त करने में वैश्विक एकजुटता और आपसी सम्मान के महत्व पर ज़ोर देता है।
हम स्थिरता, अखंडता, जिम्मेदारी और समावेशन के आधार पर दुनिया के सभी देशों के लिए निष्पक्ष एवं न्यायसंगत विकास हेतु प्रयास करने के भारत के संदेश की सराहना करते हैं। यह अनूठा भारतीय नज़रिया एससीओ चार्ट और एससीओ सदस्य देशों की दीर्घकालिक अच्छे पड़ोसी, मित्रता और सहयोग पर संधि के प्रावधानों के साथ आदर्श रूप से संयुक्त है।
भारत 2005 में एससीओ में पर्यवेक्षक बनकर यूरेशिया में शांति और सुरक्षा को मजबूत करने में एक महत्वपूर्ण भागीदार के रूप में स्थापित हुआ है। एससीओ के साथ नई दिल्ली की सक्रिए भागीदारी को देखते हुए, भारत को 2017 में एक सदस्य देश के रूप में शामिल किया गया था।
साल 2020 में भारत की अध्यक्षता में, एससीओ के शासनाध्यक्षों की परिषद की बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग प्रारूप में आयोजित की गई थी और 2022-2023 में, भारत ने संगठन की अध्यक्षता की और सुरक्षित (SECURE) का नारा दिया। अपनी अध्यक्षता के दौरान, भारत ने संगठन की रचनात्मक क्षमता को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किए।
आज, भारत आपसी सम्मान के सिद्धांतों और सभी प्रतिभागियों के हितों के विचार के आधार पर क्षेत्रीय सहयोग विकसित करने के उद्देश्य से नए विचारों और पहलों को पेश करना जारी रखता है। यह निश्चित रूप से एससीओ में एक विश्वसनीय और रणनीतिक भागीदार के रूप में भारत की भूमिका की पुष्टि करता है।
देवियों और सज्जनों,
हर साल, एससीओ परंपरागत और गैर– परंपरागत चुनौतियों एवं सुरक्षा के लिए खतरों का मुकाबला करने के लिए अपने प्रयासों को मजबूत करता है, क्षेत्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सहयोग को प्रगाढ़ करता है।
आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद के खिलाफ लड़ाई के प्रति प्रतिबद्धता अपरिवर्तित बनी हुई है। आतंकवादियों को पनाह देने या आतंकवादी गतिविधियों को सुविधाजनक बनाने के किसी भी प्रयास की एससीओ द्वारा कड़ी निंदा की जाती है।
इन परिस्थितियों में, ताशकंद में एससीओ क्षेत्रीय आतंकवाद– रोधी संरचना, आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद का मुकाबला करने पर शंघाई कन्वेंशन, आतंकवाद के खिलाफ एससीओ कन्वेंशन, उग्रवाद का मुकाबला करने पर एससीओ कन्वेंशन 2025- 2027 के लिए आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद का मुकाबला करने में एससीओ सदस्य देशों के सहयोग के कार्यक्रम द्वारा उपलब्ध कराए गए उपायों के व्यावहारिक कार्यान्वयन पर विशेष ध्यान देती है।
एससीओ सदस्य देशों के क्षेत्रों में प्रतिबंधित आतंकवादी, अलगाववादी और चरमपंथी संगठनों की सूची नियमित रूप से अपडेट की जाती है। आज इसमें 200 से ज्यादा संगठन शामिल हैं। एससीओ सदस्य देशों के एकीकृत खोज रजिस्टर में 10,000 से ज्यादा लोग हैं।
एससीओ आतंकवाद विरोधी अभ्यास हर साल आयोजित किए जाते हैं। साल 2024 में, चीन ने विशेष सेवाओं के संयुक्त अभ्यास की मेज़बानी की। अभ्यासों का सफल आयोजन न केवल एससीओ सदस्य देशों के सक्षम अधिकारियों के बीच सहयोग की गुणवत्ता का परीक्षण था जो वर्षों के सहयोग से संचित हुआ है बल्कि इसने आतंकवाद विरोधी बलों की तकनीकी एवं सामरिक क्षमताओं को बढ़ाने में भी योगदान दिया है।
एससीओ सुरक्षा चुनौतियों एवं खतरों का मुकाबला करने के लिए व्यवस्था को बेहतर बनाने हेतु सक्रिए रूप से काम कर रहा है जिसमें ताशकंद में एससीओ सदस्य देशों की सुरक्षा चुनौतियों एवं खतरों का मुकाबला करने का सार्वभौमिक केंद्र बनाया जाना शामिल है। इसमें आरएटीएस (RATS) के आधार पर बिश्केक में सूचना सुरक्षा केंद्र और संगठित अपराध का मुकाबला करने के लिए केंद्र शामिल है। दोनों पक्ष की योजना दुशांबे में एक स्वतंत्र निकाय के रूप में एससीओ एंटी– ड्रग सेंटर बनाने की भी है।
मानव तस्करी समेत अंतरराष्ट्रीय अपराध से निपटने की प्रक्रिया को बेहतर बनाया जा रहा है। ये अपराध मानव अधिकारों का उल्लंघन करते हैं, जीवन को नष्ट करते हैं और इनके लिए अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया की जरूरत होती है। ऐसे प्रयासों का एक उदाहरण अभियोजक जनरल की 19वीं बैठक थी, जिसमें मानव तस्करी, विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों की तस्करी के खिलाफ जंग को मुख्य कार्य बताया गया था।
यूरेशिया क्षेत्र के लिए विशेष चिंता का विषय गोल्डन क्रिसेंट और गोल्डन ट्राइंगल क्षेत्रों में नशीली दवाओं के उत्पादन और तस्करी की समस्याएं हैं, साथ ही नशीली दवाओं की तस्करी के लिए डार्कनेट और क्रिप्टोकरेंसी का बढ़ता उपयोग भी है।
इस संदर्भ में, विश्व में ड्रग्स के उत्पादन को समाप्त करने, अवैध फसलों को नष्ट करने और नई सिंथेटिक दवाओं के उद्भव पर अनुक्रिया हेतु संयुक्त रूप से उपाय विकसित करने में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका है।
इस क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम 2024-2029 के लिए एससीओ ड्रग– रोधी रणनीति एवं इसके कार्यान्वयन हेतु कार्य योजना को अपनाना था।
एक अन्य महत्वपूर्ण तंत्र सर्वोच्च न्यायालयों के अध्यक्षों की बैठक है। मार्च 2023 में, एससीओ सदस्य देशों के सर्वोच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों की XVIII बैठक भारत की अध्यक्षता में नई दिल्ली में सफलतापूर्वक आयोजित की गई थी।
देवियों और सज्जनों,
आज, हम वैश्विक अर्थव्यवस्था में हो रहे बड़े बदलावों को देख रहे हैं जो सूचना प्रौद्योगिकी, डिजिटलीकरण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, आभासी संपत्तियों, ई– कॉमर्स आदि के क्षेत्रों में उपलब्धियों एवं अंतर्संबंधों में तेजी से हो रही वृद्धि की विशेषता है। संरक्षणवादी उपायों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में अन्य बाधाओं ने विभिन्न चुनौतियों को बढ़ा दिया है, जिसके कारण निवेश प्रवाह में कमी आई है, आपूर्ति श्रृंखला बाधित हुई है और वैश्विक वित्तीय बाज़ारों में अनिश्चितता है।
माल, पूंजी और सेवाओं की मुक्त आवाजाही के लिए क्रमिक परिवर्तन एससीओ के लक्ष्यों में से एक है। यहां हम मुक्त व्यापार क्षेत्रों के बारे में नहीं, बल्कि माल की आवाजाही एवं उनके व्यापार को सुविधाजनक बनाने के बारे में बात कर रहे हैं।
विभिन्न स्थानों पर, सदस्य देशों के बाज़ारों एवं आर्थिक संरचनाओं, पारगमन अवसरों, विशाल प्राकृतिक एवं मानव संसाधनों की पूरकता के कारण, आर्थिक क्षेत्र में एससीओ के पारस्परिक रूप से लाभकारी सहयोग की बहुत बड़ी संभावना है। हमारे सभी देश एक दूसरे से मानसिक एवं भौतिक रूप से संबद्ध हैं। आपसी व्यापार में लगातार वृद्धि (सचिवालय द्वारा 2023 में 650 अरब डॉलर पहुँचने का अनुमान, 2022 की तुलना में 29% अधिक), उत्साहजनक है और एससीओ क्षेत्र में आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने के लिए एक ठोस आधार के अस्तित्व का संकेत देता है।
हाल के वर्षों में ही, कई नए प्रासंगिक क्षेत्रों में सहयोग को नई गति मिली है। सदस्य देशों के प्रयास डिजिटल परिवर्तन, अर्थव्यवस्था के डीकार्बोनाइज़ेशन, राष्ट्रीय मुद्राओं में आपसी समझौतों के विस्तार, स्टार्टअप एवं नवाचारों को बढ़ावा देने के लिए नई चुनौतियों को संयुक्त रूप से हल करने पर केंद्रित थे।
साल 2030 तक की अवधि के लिए एससीओ आर्थिक विकास रणनीति को क्रियान्वित किया जा रहा है जो आर्थिक सहयोग के विस्तार को इच्छुक सदस्य देशों के समन्वित नज़रिए को दर्शाता है।
अब, परियोजना गतिविधियों के वित्तीय समर्थन हेतु व्यवस्था बनाए जाने पर बातचीत जारी है, विशेष रूप से, एससीओ की रूपरेखा में विकास बैंक, विकास कोष (विशेष खाता) और निवेश कोष की स्थापना के विकल्प मौजूद हैं।
आपसी समझौतों में राष्ट्रीय मुद्राओं की हिस्सेदारी में क्रमिक वृद्धि के लिए एससीओ सदस्य देशों के रोडमैप को लागू करने हेतु व्यवस्थित काम चल रहा है। यह संबंधित विशेषज्ञ समूह के ढांचे में चर्चा के अधीन है। इस रोडमैप की रूपरेखा में इच्छुक हितधारकों के प्रयासों का उद्देश्य एससीओ के सदस्य देशों के बीच राष्ट्रीय मुद्राओं में आपसी समझौतों को प्रोत्साहित करना है।
उपर्युक्त तीन परियोजनाएं “इच्छुक देशों” के प्रारूप में कार्यान्वित की जा रही हैं।
पिछले वर्ष एससीओ असताना शिखर सम्मेलन के दौरान हमारे राष्ट्राध्यक्षों ने लोगों के कल्याण और जीवन स्तर को बेहतर बनाने हेतु जन– केंद्रित सहयोग को और बेहतर करने की बात की थी। इस संबंध में, आज हमारे लिए सबसे महत्वपूर्ण काम बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे, औद्योगिक, ऊर्जा, तकनीकी और मानवीय परियोजनाओं में किए गए समझौतों को पूरी तरह से बदल देना है। ऐसा करने के लिए, व्यापार और आर्थिक सहयोग का एक अधिक प्रभावी और व्यावहारिक मॉडल बनाना आवश्यक है जो उभरते जोखिमों के प्रति प्रतिरोधी हो, साथ ही हमारे देशों को ठोस लाभांश एवं लाभ दिलाने में सक्षम हो, किसी भी द्विपक्षीय विवाद या मुद्दों पर निर्भर न हो।
इस संबंध में, व्यापार परिषद और इंटरबैंक एसोसिएशन के संसाधनों का अधिकतम उपयोग, निवेशक संघ, एससीओ सदस्य देशों के बंदरगाह एवं रसद केंद्रों के प्रमुखों की बैठक, सीमापार सहयोग के अलग– अलग केंद्रो, पायलट क्षेत्रों, परिवहन एवं रसद केंद्रों और मेलों एवं प्रदर्शनियों की क्षमता का उपयोग आशाजनक प्रतीत होता है।
उदाहरण के लिए, हमारे पास चीन के किंगदाओ में व्यापार और सहयोग हेतु एससीओ– चीन प्रदर्शन क्षेत्र एवं चीन के यांगलिंग शहर में कृषि प्रौद्योगिकी के अध्ययन और सूचना के आदान– प्रदान हेतु एससीओ प्रदर्शन आधार है।
एससीओ अपने तत्वाधान में सदस्य देशों के उद्यमों और नागरिकों के लिए लक्षित प्रोत्साहन, व्यवस्था और टैरिफ स्थापित करके प्रभावी सहयोग के विकास को भी प्रोत्साहित कर सकता है।
मुझे पूरा विश्वास है कि भारत अपने स्वयं के विकासात्मक लाभ के साथ अपनी विशाल जनसांख्यिकीय, आर्थिक, बौद्धिक और तकनीकी संसाधनों के साथ एससीओ में बहुत सारे उपयोगी और नए प्रकार के सहयोग प्रदान कर सकता है। उदाहरण के लिए, यह कृषि पर लागू होता है, कृषि– औद्योगिक समूह के पैमाने को ध्यान में रखते हुए, सूखे और सीमित जल संसाधनों में फसलों जैसे बाजरा, को उगाने में भारत के शानदार अनुभव को ध्यान में रखते हुए। आधुनिक दवा उत्पादन, सूचना और संचार सेवाओं के क्षेत्र में पारस्परिक रूप से लाभकारी सहयोग की अपार संभावनाएं दिखाई दे रही हैं, जहाँ भारत वैश्विक स्तर पर अग्रणी स्थानों में से एक है। पूर्व और पश्चिम के संगम पर स्थित भारत की भागीदारी के बिना एससीओ क्षेत्र की परिवहन कनेक्टिविटी को पूर्ण रूप से सुदृढ़ करना भी मुश्किल है।
3-4 जुलाई 2024 को असताना शिखर सम्मेलन के दौरान 2030 तक की अवधि के लिए एससीओ सदस्य देशों की ऊर्जा सहयोग के विकास के लिए रणनीति को अपनाने के संबंध में ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग को एक नई गति मिली है। भारत, जो नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के विस्तार को बढ़ावा देता है, इस रणनीति के सफल कार्यान्यन में बहुत बड़ा योगदान देगा।
हम स्वीकार करते हैं कि एससीओ देशों के बीच द्विपक्षीय संबंध तेज़ी से विकसित हो रहे हैं। लेकिन हम स्वीकार करते हैं कि कम– से– कम 3 देशों द्वारा बनाए गए एससीओ के तत्वाधान में किसी भी प्रमुख आर्थिक परियोजना को लागू नहीं किया गया है। अब तक, इस क्षेत्र में ठोस उपलब्धियाँ बहुत मामूली हैं और वांछित व्यावहारिक परिणाम प्राप्त करने के लिए अभी भी बहुत कुछ किया जाना बाकी है।
एससीओ बहुत तेजी से सांस्कृतिक और मानवीय सहयोग विकसित कर रहा है और भारत इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सांस्कृतिक विविधता के संरक्षण और संवर्धन एवं क्षेत्र की सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत के संरक्षण में सक्रिए रूप से योगदान देता है।
इसके अलावा 12-13 अप्रैल, 2023, को नई दिल्ली में एससीओ सदस्य देशों के युवा लेखकों का सम्मेलन सफलतापूर्वक आयोजित किया गया था। अगल सम्मेलन 2025 में आयोजित करने की योजना है जिसमें विभिन्न दार्शनिक नज़रियों एवं विश्व दर्शन के सम्मान के आधार पर एससीओ सदस्य देशों के बीच अंतर– सांस्कृतिक सहयोग, सभ्यताओं के संवाद और वैज्ञानिक संबंधों के विकास जैसे प्रासंगिक विषयों पर चर्चा जारी रहेगी।
सिनेमास्कोप परियोजना और 2023 में एससीओ मुंबई फिल्म महोत्सव सांस्कृतिक आदान– प्रादन के क्षेत्र की महत्वपूर्ण घटनाएं थीं। प्रस्तुत कार्यों ने एससीओ देशों के दर्शकों को भारतीय संस्कृति, इतिहास और सामाजिक गतिशीलता के अनूठे पहलुओं से अवगत कराया, जिससे उन्हें भाषाओं और परंपराओं में अतंर के बावजूद लोगों को एक साथ लाने वाले सामान्य विषयों और अवधारणाओं का पता लगाने में मदद मिली। साल 2025 में, एससीओ फिल्म महोत्सव चीन में आयोजित किया जाएगा। मुझे पूरा विश्वास है कि हम भारत समेत एससीओ देशों के फिल्म निर्दैशकों के काम की भी सराहना कर पाएंगे।
सफल सहयोग का एक उदाहरण एससीओ की एक पर्यटक और सांस्कृतिक राजधानी बनाने की परियोजना थी। वाराणसी में कई कार्यक्रम आयोजित किए गए जो 2022-2023 के लिए एससीओ क्षेत्र की पहली सांस्कृतिक और पर्यटन राजधानी बनी।
एससीओ में ग्रामीण, गैस्ट्रोनॉमिक, मेडिकल और पारिस्थितिक पर्यटन के विकास की महत्वपूर्ण क्षमता है जो बुनियादी ढांचे में सुधार हेतु आधुनिक तकनीकों को सक्रिए रूप से प्रस्तुत कर रहा है। एक महत्वपूर्ण कदम वीज़ा व्यवस्था को सरल बनाने की संभावना का पता लगाना है जो सदस्य देशों और विश्व भर से आने वाले पर्यटकों को आकर्षित करने के नए द्वार खोलेगा।
एससीओ की पर्यटन क्षमता को पूरा तरह से खोलने के लिए, वीज़ा सुविधा पर एक बहुपक्षीय समझौते पर पहुंचना उपयोगी होगा। वर्तमान में, यह काम किया जा रहा है, लेकिन ज्यादातर द्विपक्षीय आधार पर।
हमारी तरफ से, हमारा मानना है कि प्रवासन क्षेत्र में अनुकूल परिस्थितियों को बनाने पर विचार करना संभव है, विशेष रूप से, सीमा चौकियों पर "ग्रीन कॉरिडोर्स (हरित गलियारे)" की शुरूआत। इससे प्रशासनिक बाधाओं में उल्लेखनीय कमी आएगी, विश्वास बढ़ेगा और पर्यटन एवं व्यापार संबंधों के विकास हेतु नए अवसर मिलेंगे। इसके अलावा, ऐसा उपाय एक अधिक एकीकृत और मुक्त क्षेत्र की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा, जहाँ नागरिक एससीओ में भागीदारी के लाभों का पूरी तरह से उपयोग करने में सक्षम होंगे।
स्वास्थ्य एक और महत्वपूर्ण क्षेत्र है जिस पर सदस्य देश बहुत ध्यान देते हैं। साल 2010 से, स्वास्थ्य मंत्रियों की बैठक की व्यवस्था काम कर रही है, जो उचित योजनाओं को अपनाकर स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग के विकास की दिशा निर्धारित करता है।
स्वास्थ्य सेवा के डिजिटलीकरण के क्षेत्र में सहयोग बनाने के लिए संयुक्त प्रयासों की मांग बनी हुई है। एससीओ के ढांचे में एक नया आशाजनक क्षेत्र खोला गया– टेलीमेडिसिन के क्षेत्र में सहयोग। यह क्षेत्र हमारे समय की चुनौतियों का जवाब देता है और चिकित्सा देखभाल की गुणवत्ता में सुधार के अवसर पैदा करता है। इस क्षेत्र को विकसित करने के लिए, टेलीमेडिसिन के क्षेत्र में एससीओ सदस्य देशों के अधिकृत निकायों के बीच सहयोग की अवधारणा को अपनाया गया था।
भारत ने परंपरागत चिकित्सा के क्षेत्र में सहयोग के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। एक प्रासंगिक कार्य समूह की स्थापना भारत की पहल थी। साल 2022 में, समरकंद शिखर सम्मेलन के दौरान परंपरागत चिकित्सा पर एक विशेषज्ञ कार्य समूह बनाया गया था।
वर्ष 2008 से, आबादी की स्वच्छता एवं महामारी विज्ञान संबंधी भलाई सुनिश्चित करने के लिए उत्तरदायी एससीओ सदस्य देशों के सेवा प्रमुखों की बैठकें आयोजित की गई हैं। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि असताना एससीओ शिखर सम्मेलन के बाद, राष्ट्राध्यक्षों ने सुरक्षित पेयजल और स्वच्छता पर एक वचन दिया। इस संदर्भ में, पानी बचाने वाली तकनीकों को लाने और उन्हें विकसित करने को बढ़ावा देने के लिए एससीओ प्रारूप में एक व्यवस्था बनाना आशाजनक प्रतीत होता है जो क्षेत्र में जलापूर्ति की गंभीर समस्याओं को हल करने में योगदान देगा।
भारत द्वारा एससीओ में किया गया एक और उल्लेखनीय योगदान स्टार्टअप और नवाचार के क्षेत्र में है। साल 2022 से, स्टार्टअप और नवाचार पर विशेष कार्य समूह एससीओ में काम कर रहा है।
वर्ष 2020 से भारतीय पक्ष द्वारा आयोजित वार्षिक स्टार्टअप फोरम संयुक्त परियोजनाओं के विकास हेतु अद्वितीय अवसर प्रदान करते हैं। मैं विशेष रूप से नवीनतम एससीओ स्टार्टअप फोरम का उल्लेक करना चाहूँगा, जो मार्च 2024 में महाकुंभ स्टार्टअप के हिस्से के रूप में नई दिल्ली में आयोजित किया गया था। इसमें मास्टर क्लास आयोजित की गईं और प्रदर्शनी कियोस्क ने प्रतिभागियों को अपने नवाचारों का प्रदर्शन करने की अनुमति दी।
भारत एससीओ के रूपरेखा में आपातकालीन स्थितियों की रोकथाम और उन्मूलन के क्षेत्र में सक्रिए रहा है। हम 2019 और 2023 में भारतीय पक्ष की अध्यक्षता में आपातकालीन स्थितियों की रोकथाम और उन्मूलन से निपटने वाले एससीओ सदस्य देशों के विभागाध्यक्षों की पिछली दो बैठकों के आयोजन की अत्यधिक सराहना करते हैं। यह प्राकृति आपदाओं और अन्य आपात स्थितियों से निपटने की व्यवस्था पर चर्चा करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण तंत्र है।
साथ ही, हम एससीओ सहायात कोष (यह मात्र कार्यशील नाम है) बनाने की संभावना पर विचार करना उचित समझते हैं, जिसे आपात स्थिति में सदस्य देशों और वार्ता भागीदारों को मानवीय मदद प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। ऐसा कोष एससीओ के काम की दक्षता को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाने में सक्षम होगा, प्रभावित देशों को मदद देगा।
एससीओ में पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में सहयोग से महत्वपूर्ण परिणाम सामने आए हैं, जिसमें एक साझा पारिस्थितिकी नीति एजेंडा बनाना और विनियामक रूपरेखा का विस्तार शामिल है। साल 2024 में पारिस्थितिकी और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में सहयोग पर अनुबंध पर हस्ताक्षर किए गए और 2025 को चीनी अध्यक्षता द्वारा एससीओ सतत विकास का वर्ष घोषित किया गया। ये प्रयास पर्यावरण के लिए जीवनशैली (मिशन लाइफ) आंदोलन को वैश्विक पर्यावरण एजेंडे का एक प्रमुख तत्व बनाने के लिए महामहिम नरेन्द्र मोदी के आह्वान को प्रतिबिंबित करता है।
संगठन की संरचना में, गरीबी उन्मूलन पर एससीओ सदस्य देशों के विशेष कार्य समूह, जिसकी पहल पाकिस्तानी सहयोगी द्वारा की गई है, ने, 2023 में अपनी गतिविधियाँ शुरू कीं, जिसका उद्देश्य एसडीजी सं. 1– “हर जगह से सभी रूपों में गरीबी को मिटाना”, के कार्यान्वय को बढ़ावा देना है। इस साल मई में, चीन के यांगलिंग में सतत विकास और गरीबी उन्मूलन पर संगोष्ठी आयोजित की जाएगी।
यह खुशी की बात है कि इस दिशा में विशेषज्ञों का काम चल रहा है जिसमें मौलिक वैज्ञानिक शोध भी शामिल हैं। गरीबी के कारणों का विश्लेषण करने के लिए सेमिनार, गोलमेज सम्मेलन और संगोष्ठियों का आयोजन किया जाता है।
शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग सक्रिए रूप से विकसित हो रहा है और एससीओ विश्वविद्यालय, जिसमें 6 देशों (कज़ाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताज़िकिस्तान, चीन, रूस और बेलारूस) के 75 विश्वविद्यालय शामिल हैं, इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। हम एक बार फिर भारत को एससीओ विश्वविद्यालय की रूपरेखा में शामिल होने के लिए आमंत्रित करते हैं। साल 2010 से 2023 की अवधि में, 800 से अधिक छात्रों ने एससीओ विश्वविद्यालय के संयुक्त शैक्षिक कार्यक्रमों में सफलतापूर्वक मास्टर्स की पढ़ाई पूरी की। यह विश्वविद्यालयों का एक आभासी नेटवर्क है।
एससीओ सदस्य देशों के विश्वविद्यालयों के बीच सहयोग को और विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम अलग– अलग शैक्षणिक कार्यक्रमों का आयोजन था जैसे शिक्षा सप्ताह, विश्वविद्यालय प्राचार्यों की संगोष्ठी और सिविल सेवा अकादमियों के प्राचार्यों की संगोष्ठी।
साल 2025 में, चीन एससीओ सदस्य देशों के XV शिक्षा सप्ताह की मेजबानी करेगा जिसे "सीमा मुक्त शिक्षा" कहा जाता है। हमें आशा है कि यह आयोजन न केवल शैक्षिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित होगा बल्कि भारत, ईरान, पाकिस्तान और उज़्बेकिस्तान के विश्वविद्यालयों को शामिल कर एससीओ प्रतिभागियों की सूची का विस्तार करने में भी योगदान देगा।
एससीओ उन खेल आयोजनों का समर्थन करता है जो दोस्ती को मजबूत करने और स्वस्थ जीनवशैली को बढ़ावा देने में योगदान देते हैं। इसमें भारत की भूमिका पर ध्यान दिया जाना चाहिए जो 2018 से संगठन के मुख्यालय में नियमित रूप से योग सत्र आयोजित कर रहा है, एससीओ देशों के बीच खेल और आध्यात्मिक संबंधों को मज़बूत कर रहा है।
लोगों, विशेषकर महिलाओं एवं युवाओं, लोक कूटनीति संस्थानों एवं सांस्कृतिक केंद्रों एवं मीडिया के बीच संपर्क क्षेत्र में सहयोग को मजबूत किया जा रहा है।
सार्वजनिक कूटनीति के महत्वपूर्ण साधनों में से एक "एससीओ सद्भावना राजदूत" की मानद उपाधि है जिसका उद्देश्य संगठन के प्रमुख कार्यों और मूल्यों की ओर ध्यान देना है। हमें आशा है कि भारत एससीओ सद्भावना राजदूत के लिए अपनी उम्मीदवारी पेश करेगा, इससे इसकी समृद्ध संस्कृति, संगीत की विरासत और खेल उपलब्धियों के बारे में अधिक जानने का एक अनूठा अवसर मिलेगा। हम एससीओ सद्भावना राजदूतों के नियम और शर्तों को बेहतर बनाने पर काम कर रहे हैं।
ये उदाहरण सांस्कृतिक और मानवीय सहयोग के प्रगतिशील विकास में भारत के योगदान को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं और मुझे विश्वास है कि सदस्य देश एससीओ देशों के बीच आपसी समझ को बढ़ावा देने एवं अंतर– सभ्यतागत संवाद के विकास के लिए मिलकर काम करना जारी रखेंगे।
मैं इस बात का उल्लेख करना चाहती हूँ कि निश्चित रूप से सुरक्षा संबंधी मुद्दे एससीओ की आधारशिला हैं। लेकिन हम व्यापक सुरक्षा नज़रिए पर ज़ोर देते हैं। सामाजिक– आर्थिक चुनौतियों का स्थायी समाधान किए बिना सुरक्षा संबंधी मुद्दों को हल नहीं किया जा सकता है। यही कारण है कि हमने एससीओ में सहयोग को इतने अलग– अलग क्षेत्रों में विस्तारित किया है।
प्रिय साथियों,
एससीओ परिवार लगातार बढ़ रहा है और इसमें 2 पर्यवेक्षक देश और 14 वार्ता साझेदार शामिल हैं। इनमें से 8 देश बीते 3 वर्षों, 2022 से 2024 तक, में ही शामिल हुए हैं। इसके अलावा, सदस्य देश एससीओ में शामिल होने या संगठन में अपनी स्थिति को बेहतर बनाने के लिए अन्य देशों के आवेदनों पर सक्रिए रूप से विचार कर रहे हैं।
संयुक्त राष्ट्र के साथ सहयोग एससीओ की अंतरराष्ट्रीय गतिविधियों में से एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। संयुक्त राष्ट्र सचिवालय और इसकी विशेष एजेंसियों के साथ हमारे संबंध मजबूत और बहुआयामी हैं। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कहा कि एससीओ और संयुक्त राष्ट्र दो सबसे बड़े अंतरराष्ट्रीय संगठन हैं, उन्होंने क्षेत्र में स्थिरता और सतत विकास सुनिश्चित करने में एससीओ की भूमिका की प्रशंसा की।
इसके अलावा, एससीओ नियमित रूप से क्षेत्रीय संगठनों के साथ बैठकें करता है जिनके साथ साझेदारी संबंध बनाए गए हैं, इनमें सीएसटीओ (CSTO), सीआईएस (CIS), ईएईयू (EAEU), सीआईसीए (CICA), ईसीओ (ECO) और अरब लीग शामिल हैं। यूएनईसीई (UNECE), यूएनसीटीएडी (UNCTAD), सीएआरआईसीसी (CARICC), आईएनसीबी (INCB), यूएनआईडीओ (UNIDO), डब्ल्यूएचओ (WHO) और इंटरपोल के साथ आधिकारिक संबंध स्थापित करने पर काम चल रहा है।
अंतरराष्ट्रीय क्षेत्र में "एससीओ के विचारों" का महत्व बढ़ता जा रहा है जिसकी पुष्टि बीते वर्ष आसियान और ब्रिक्स शिखर सम्मेलनों में भाग लेने के लिए एससीओ को दिए गए निमंत्रण से होती है। इन शिखर सम्मेलनों में एससीओ के प्रमुख लक्ष्यों और उद्देश्यों को प्रस्तुत किया गया था।
खैर, यह सब शांति और स्थिरता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से हमारी व्यापक और बहुमुखी गतिविधियों का एक छोटा सा अंश है।
तेजी से हो रहे वैश्विक परिवर्तन को देखते हुए यह बेहद जरूरी है कि एससीओ लचीला और प्रभावशाली बना रहे। एक महत्वपूर्ण पहलू सदस्य देशों के नेताओं की पहलों का क्रियान्वयन, एक संरचित और पारदर्शी प्रबंधन प्रणाली का निर्माण, साथ ही संवाद भागीदारों, पर्यवेक्षकों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ साझेदारी को मजबूत करना, कानूनी रूपरेखा का अनुकूलन, साथ ही कार्मिक, वित्तीय और भाषाई सहयोग को बेहतर बनाना है। इन सभी मुद्दों पर सुधार और आधुनिकीकरण की प्रक्रिया के तहत चर्चा की जा रही है।
इस संदर्भ में, एससीओ फोरम एक विशेष भूमिका निभा सकता है, जिसकी रूपरेखा में वैज्ञानिकों एवं विशेषज्ञों की भागीदारी के साथ महत्वपूर्ण पहलों पर विचार किया जा सकता है। एससीओ संगोष्ठी में इस वर्ष भारतीय वैश्विक परिषद की अध्यक्षता एससीओ सदस्य देशों, पर्यवेक्षकों और संवाद साझीदारों के अनुसंधान एवं राजनीति विज्ञान केंद्रों के बीच सहयोग विकसित करने का अनूठा अवसर प्रदान कर रहा है।
मुझे विश्वास है कि भारतीय वैश्विक परिषद (आईसीडब्ल्यूए/ ICWA) इस व्यवस्था को संयुक्त प्रयासों के व्यावहारिक प्रभाव को बेहतर बनाने के लिए वास्तव में प्रभावी साधन बनाएगी।
हम एससीओ के स्थानिक शोधकर्ताओं के लिए एक कार्यक्रम आयोजित करने हेतु आईसीडब्ल्यूए के प्रति अपनी हार्दिक कृतज्ञता व्यक्त करते हैं। इस अनूठी पहल ने एससीओ सदस्य देशों के युवा वैज्ञानिकों को भारत में एक महीना बिताने का अवसर दिया जहाँ उन्होंने प्रमुख विशेषज्ञों से मुलाकात की और शैक्षणिक एवं शोध संस्थानों का दौरा किया।
आईसीडब्ल्यूए द्वारा तैयाक किया गया संग्रह "सुरक्षित शंघाई सहयोग संगठन की ओर" इस बात का उदाहरण है कि कैसे काम करना है और संगठन की भावी विकास संभावनाएं, चुनौतियां और तरीकों को समझने में एक महत्वपूर्ण योगदान का प्रतिनिधित्व करता है। हमें विश्वास है कि इसी प्रकार के प्रयासों को अन्य देशों द्वारा भी समर्थन दिया जाना चाहिए और हमें आशा है कि आईसीडब्ल्यूए इस मूल्यवान प्रयास को जारी रखेगा।
दोस्तों,
एससीओ अंतरराष्ट्रीय संबंधों की प्रणाली में केंद्रीय भूमिका में है जो शांति एवं स्थिरता को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण उपकरण है। इसकी क्षमता वैश्विक चुनौतियों का कारगर तरीके से जवाब देने और मैत्रीपूर्ण सहयोग को सक्रिए रूप से बढ़ावा देने में सक्षम बनाती है।
जैसा कि आप जानते हैं, चीन इस वर्ष एससीओ की अध्यक्षता कर रहा है और उसने अपनी अध्यक्षता का ध्येय वाक्य रखा है: "शंघाई भावना को आगे ले जाना: अभियान में एससीओ"। यह संचालन शक्ति से परिपूर्ण ध्येय वाक्य है। इस वर्ष कुल मिलाकर लगभग 200 कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनमें अध्यक्षता करने वाले पक्ष के कार्यक्रम और अन्य सदस्य देशों द्वारा प्रस्तावित कार्यक्रम शामिल हैं।
मुझे पूरा विश्वास है कि अध्यक्ष और अन्य सदस्य देश निश्चित रूप से एससीओ के विकास और वैश्विक प्रक्रियाओं में इसके योगदान को मजबूत करने के उद्देश्य से रचनात्मक प्रस्ताव पेश करना जारी रखेंगे। सचिवालय, बदले में, हमारे सहयोग को एक नए गुणात्मक स्तर पर लाने हेतु हर संभव प्रयास करेगा, जिससे क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों में एससीओ की भागीदारी बढ़ेगी।
हम भारतीय वैश्विक परिषद समेत वैज्ञानिक समुदाय के साथ सहयोग को प्रगाढ़ करने पर अपने प्रयासों पर फोकस करने की मंशा रखते हैं।
मुझे आशा है कि आज की बैठक हमारे संयुक्त सहयोग के पहले कदम के रूप में नए विचारों और प्रस्तावों को तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी, साथ ही आपसी संबंधों को मजबूत करने हेतु हमारे लिए नए क्षितिज खोलेगी।
आखिर में, मैं एक बार फिर सभी को मेरे विचारों को ध्यान से सुनने और मुझे आपसे बात करने का मौका देने के लिए अपनी कृतज्ञता व्यक्त करना चाहती हूँ।
आप सभी का बहुत– बहुत धन्यवाद!
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