परिचय
बीते तीन दशकों में, सैन्य सहभागिता विदेश नीति के महत्वपूर्ण साधन के रूप में उभरी है। यह रुझान मुख्य रूप से बढ़ती रणनीतिक अनिश्चितता, बदलते सुरक्षा संकटों और गैर–राष्ट्रीय अभिकर्ताओं (non-state actors) की संख्या में वृद्धि के कारण देखा गया है।[i] समय के साथ गठबंधन बदल रहे हैं और खतरे भी अनिश्चित प्रकृति के होते चले जा रहे हैं, ऐसी स्थिति में देशों ने आपसी साझेदारी को बेहतर बनाने और द्विपक्षीय व क्षेत्रीय स्तर पर तैयारी बढ़ाने के लिए संयुक्त सैन्य प्रशिक्षण पर निर्भरता को बढ़ाया है।[ii]
परंपरागत रूप से, सैन्य संबंधों का प्रयोग सशस्त्र बलों को युद्ध के लिए तैयार करने और विरोधियों को रोकने के लिए किया जाता है। हालाँकि, आज के सुरक्षा माहौल में, इसका दायरा बढ़कर शासन–कला के व्यापक साधनों तक फैल गया है। देश अब इस जुड़ाव का प्रयोग रक्षा सहयोग को बेहतर बनाने, सहयोगियों को प्रभावित करने और प्रतिद्वंद्वियों को अपने इरादों का संकेत देने के लिए करते हैं।[iii] इस प्रकार के संबंधों का मुख्य सिद्धांत “साथ मिलकर लड़ने के लिए साथ मिलकर प्रशिक्षण प्राप्त करना” है, जो साझा सामरिक माहौल या साझा खतरों के खिलाफ संयुक्त कार्रवाई की आवश्यकता को दर्शाता है।[iv]
सैन्य सहयोग: नज़रिया और भारतीय संदर्भ
अंतरराष्ट्रीय सैन्य अभियानों का मुख्य उद्देश्य इसमें शामिल सेनाओं के बीच आपसी तालमेल और मिलकर काम करने की क्षमता को बढ़ाना है।[v] इससे सेनाओं को वास्तविक स्थिति में परिचालन संबंधी तालमेल, संचार प्रणाली और संयुक्त कमांड संरचना को परखने का मौका मिलता है।[vi] जैसे– जैसे सैन्य अभियानों में गठबंधन–आधारित तरीकों का प्रयोग बढ़ रहा है, संकट और टकराव की स्थितियों में बेहतर तालमेल के लिए अंतरसक्रियता आवश्यक हो गई है।
अंतरराष्ट्रीय सैन्य गतिविधियाँ भाग लेने वाले देशों के बीच आपसी विश्वास बढ़ाने का काम भी करती हैं। सशस्त्र बलों के बीच नियमित बातचीत से विश्वास बढ़ता है और परिचालन संबंधी तौर–तरीकों की समझ बेहतर होती है और गलतफहमियां कम होती हैं।[vii] समय के साथ इन गतिविधियों से रक्षा संबंध मज़बूत होते हैं और साझेदारों के बीच सुरक्षा संबंधी चिंताओं को कम करने में मदद मिलती है।
इसके अलावा, सैन्य गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण संकेत भी दिए जाते हैं। इसमें शामिल होने की जगह, स्तर और तरीके से सहयोगियों और विरोधियों, दोनों को रणनीतिक इरादों के बारे में पता चल सकता है।[viii] परंपरागत सुरक्षा भूमिकाओं के अलावा, सैन्य गतिविधियाँ मानवीय सहायता और आपदा राहत (HADR) अभियानों में भी मदद करती हैं।[ix] भाग लेने वाली सेनाओं के बीच जान–पहचान से आपातकालीन स्थितियों में कम समय में आवश्यक कदम उठा लिए जाते हैं और आपदा प्रभावित क्षेत्रों में तालमेल भी अच्छा होता है।[x] परिणामस्वरूप, आज सैन्य अभ्यास कई प्रकार की भूमिका निभाते हैं, जिनमें परिचालन संबंधी तैयारी, कूटनीतिक जुड़ाव और क्षेत्रीय स्थिरता शामिल हैं।
इस संदर्भ में, भारतीय सेना ने विदेश नीति के महत्वपूर्ण साधन के रूप में द्विपक्षीय और बहुपक्षीय सहयोग पर तेजी से विश्वास बढ़ाया है। वर्तमान में भारत लगभग 26 देशों के साथ करीब 47 संयुक्त सैन्य अभ्यास करता है और विश्व में पांच से अधिक बहुराष्ट्रीय अभ्यासों में हिस्सा लेता है।[xi]
इसी प्रकार, भौगोलिक निकटता और थल एवं जल, दोनों ही क्षेत्रों में बदलती सुरक्षा स्थितियों के कारण दक्षिण एशिया भारत की सैन्य गतिविधियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में से एक बना हुआ है। हिंद महासागर क्षेत्र इस इलाके की रणनीतिक अहमियत को और बढ़ा देता है। भारत के तेल व्यापार का लगभग 80 प्रतिशत और कुल व्यापार का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा इसी क्षेत्र में होता है, जो भारत की आर्थिक स्थिरता और ऊर्जा सुरक्षा के लिए इसके महत्व को रेखांकित करता है।[xii] साथ ही हिन्द महासागर क्षेत्र को कई गैर–परंपरागत सुरक्षा संकटों का भी सामना करना पड़ रहा है, जैसे– ड्रग्स की तस्करी, अवैध रूप से मछली का पकड़ना और समुद्री अपराध।[xiii]
दक्षिण एशिया में आतंकवाद भी सुरक्षा के लिए बड़ी चिंता बना हुआ है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आतंकवाद–रोधी समिति के अनुसार, इस क्षेत्र में अल– कायदा और आईएसआईएल (ISIL) से जुड़े कई आतंकवादी संगठन (जिनमें आईएसआईएल– के (ISIL-K) और अल– कायदा शामिल हैं) सक्रिए हैं जिससे पूरे क्षेत्र में लगातार अस्थिरता बनी हुई है।[xiv] इसके अलावा, दक्षिण एशिया में लगभग 123 सक्रिए आतंकवादी और विद्रोही समूह मौजूद हैं और विश्व भर की आतंकवादी घटनाओं में से 27 प्रतिशत से अधिक घटनाएं यहीं होती हैं, जो इस क्षेत्र में आतंकवाद के व्यापक पैमाने को दिखाता है।[xv]
परंपरागत और गैर–परंपरागत सुरक्षा चिंताओं के अलावा दक्षिण एशिया जलवायु–जनित आपदाओं के प्रति भी बहुत ही संवेदनशील है। इस क्षेत्र की घनी आबादी, कमज़ोर पारिस्थितिकी तंत्र और प्राकृतिक संकट के प्रति भौगोलिक जोखिम, इसे मानवीय संकटों के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील बनाते हैं।[xvi] बीते दो दशकों में, दक्षिण एशिया में 750 मिलियन से अधिक लोग जलवायु से संबंधित आपदाओं से प्रभावित हुए हैं, जिससे क्षेत्रीय स्थिरता के लिए एचएडीआर सहयोग आवश्यक हो गया है।[xvii]
दक्षिण एशिया में भारत की सैन्य भागीदारी उसकी 'पड़ोस प्रथम नीति' से भी निर्देशित होती है जो अपने करीबी पड़ोसी देशों के साथ सुरक्षा सहयोग को बेहतर बनाने और क्षमता निर्माण को प्राथमिकता देती है।[xviii] इसके अलावा, भारत का सुरक्षा एवं विकास के लिए आपसी एवं समग्र प्रगति (महासागर/MAHASAGAR) नज़रिया हिन्द महासागर क्षेत्र में समुद्री सहयोग, क्षेत्रीय स्थिरता और साझा चुनौतियों से सामूहिक रूप से निपटने पर ज़ोर देता है।[xix]
दक्षिण एशिया में भारत की सैन्य भागीदारी के कारक
स्रोत: लेखक द्वारा तैयार किया गया
इस संदर्भ में, यह शोधपत्र नियमित सैन्य अभ्यासों के माध्यम से दक्षिण एशियाई देशों के साथ भारत की सैन्य संलग्नता पर केंद्रित हैं, विशेष रूप से हिमालय क्षेत्र के देश जैसे नेपाल, बंगाल की खाड़ी में स्थित पड़ोसी बांग्लादेश एवं भारत के दक्षिण में स्थित श्रीलंका के साथ जो हिन्द महासागर क्षेत्र के महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर स्थित है।
नेपाल
नेपाल के साथ भारत का संयुक्त सैन्य अभ्यास के माध्यम से सैन्य सहयोग तब शुरू हुआ जब भारत ने 14 मार्च से 27 मार्च 2011 तक मिज़ोरम में “सूर्य किरण” सैन्य अभ्यास की शुरूआत की थी।[xx] इस अभ्यास का उद्देश्य संयुक्त राष्ट्र के आदेश के अध्याय VII के तहत परंपरागत युद्ध से अलग तरह के अभियान करने का संयुक्त रूप से अभ्यास करना था।[xxi]
इस अभ्यास का उद्देश्य जंगल में लड़ाई, पहाड़ी इलाकों में आतंकवाद–विरोधी अभियान, मानवीय मदद और आपदा राहत (HADR) एवं ज़मीनी एवं हवाई सेना के मिले–जुले अभियानों में बटालियन–स्तर पर तालमेल को बेहतर बनाना था।[xxii] दोनों सेनाओं के बीच आपसी समझ और तालमेल को बढ़ावा देने के साथ–साथ यह दोनों देशों की सेनाओं के संबंधों को और मजबूत बनाने में भी मदद करता है। मार्च 2011 में हुए पहले संस्करण के बाद, इसके अगले संस्करण बारी–बारी से नेपाल और भारत में आयोजित किए गए। अब तक, भारत और नेपाल ने “सूर्य किरण” अभ्यास के कुल उन्नीस (19) संस्करण आयोजित किए हैं और हर संस्करण 14 दिनों का था।
भारत– नेपाल अभ्यास सूर्य किरण
|
संस्करण |
अवधि |
स्थान |
|
प्रथम |
14 मार्च से 27 मार्च 2011 |
मिज़ोरम, भारत |
|
दूसरा |
9 दिसंबर से 22 दिसंबर 2011 |
अमेलखगंज़, नेपाल |
|
तीसरा |
15 जून से 28 जून 2012 |
हिमालयी क्षेत्र, भारत– नेपाल सीमा |
|
चौथा |
3 से 6 दिसंबर 2012 |
हिमालयी क्षेत्र, भारत– नेपाल सीमा |
|
पांचवां |
23 सितंबर से 6 अक्टूबर 2013 |
उत्तराखंड, भारत |
|
छठा |
5 मार्च से 18 मार्च 2014 |
शालझंडी, नेपाल |
|
सातवां |
18 अगस्त से 31 अगस्त 2014 |
उत्तराखंड, भारत |
|
आठवां |
23 फरवरी से 8 र्च 2015 |
शालझंडी, नेपाल |
|
नौवां |
8 फरवरी से 21 फरवरी 2016 |
उत्तराखंड, भारत |
|
दसवां |
31 अक्टूबर से 13 नवंबर 2016 |
शालझंडी, नेपाल |
|
ग्यारहवां |
7 मार्च से 20 मार्च 2017 |
उत्तराखंड, भारत |
|
बारहवां |
3 सितंबर से 16 सितंबर 2017 |
शालझंडी, नेपाल |
|
तेरहवां |
30 मई से 12 जून 2018 |
उत्तराखंड, भारत |
|
चौदहवां |
3 दिसंबर से 16 दिसंबर 2019 |
शालझंडी, नेपाल |
|
पंद्रहवां |
20 सितंबर से 3 अक्टूबर 2021 |
उत्तराखंड, भारत |
|
सोलहवां |
16 दिसंबर से 29 दिसंबर 2022 |
शालझंडी, नेपाल |
|
सत्रहवां |
24 नवंबर से 7 दिसंबर 2023 |
उत्तराखंड, भारत |
|
अठारहवां |
31 दिसंबर से 13 जनवरी 2025 |
शालझंडी, नेपाल |
|
उन्नीसवां |
25 नवंबर से 8 दिसंबर 2025 |
उत्तराखंड, भारत |
स्रोत: विभिन्न स्रोतों का प्रयोग कर लेखक द्वारा तैयार किया गया है
“सूर्य किरण" अभ्यास का 19वां और नवीनतम संस्करण भारत के उत्तराखंड राज्य के पिथौरागढ़ में 25 नवंबर 2025 से 8 दिसंबर 2025 तक आयोजित किया गया था।[xxiii] इस संस्करण का फोकस विशेष एवं नई तकनीकों को शामिल करने पर था जिनमें मानवरहित हवाई प्रणाली (UAS), ड्रोन आधारित आईएसआर (ISR), एआई–सक्षम निर्णय लेने में मदद करने वाले साधन, बिना चालक वाले रसद वाहन और बख़्तरबंद सुरक्षा मंच शामिल थे।[xxiv] इससे दोनों सेनाओं को आतंकवाद–विरोधी माहौल में काम करने के लिए अपनी रणनीतियों, तकनीकों और प्रक्रियाओं को बेहतर बनाने में मदद मिली।[xxv]
इसका उद्देश्य संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन के दौरान जान–माल के नुकसान के जोखिम को कम करने के लिए सैनिकों के बीच आपसी तालमेल और सहयोग को बेहतर बनाना भी था।[xxvi] इस 19वें संस्करण में भारतीय सेना के 334 जवान (मुख्य रूप से असम रेजिमेंट से) और नेपाली सेना के 334 जवान (मुख्य रूप से देवी दत्त रेजिमेंट से) शामिल हुए।[xxvii] अभ्यास के दौरान, दोनों पक्षों ने अपने विचार साझा किए और युद्ध कौशल से जुड़ी कई प्रकार की संयुक्त गतिविधियों का अभ्यास किया जिससे प्रतिभागियों को एक–दूसरे से सीखने में मदद मिली।[xxviii]
अभ्यास सूर्य किरण का 19वां संस्करण
स्रोत: प्रेस सूचना ब्यूरो, भारत सरकार[xxix]
भारत और नेपाल के बीच सैन्य सहयोग, विशेषरूप से सूर्य किरण अभ्यास के माध्यम से, साझा सुरक्षा चिंताओं और आपसी क्षमता–निर्माण की आवश्यकताओं पर आधारित है। इसमें एचआरडीए (मानवीय मदद और आपदा राहत) सहयोग के सबसे प्रमुख क्षेत्रों में से एक बन कर उभरा है। नेपाल में कई प्रकार की प्राकृतिक आपदाओं विशेष रूप से बाढ़, भूस्खलन और भूकंप का संकट बहुत अधिक है।[xxx] भूकंप और कई प्रकार की आपदाओं के जोखिम के मामले में यह विश्व में क्रमशः 11वें और 16वें स्थान पर है। भौगोलिक रूप से भी नेपाल उस स्थान पर स्थित है जहाँ भारतीय उपमहाद्वीप और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटें आपस में टकराती हैं जिसकी वजह से यहाँ बार– बार बड़े पैमाने पर भूकंप आते हैं।[xxxi]
इस संदर्भ में, अभ्यास सूर्य किरण नेपाल को आपदा से निपटने की अपनी क्षमताओँ को बढ़ाने, तालमेल के तरीकों को बेहतर बनाने और भारतीय सेना के साथ मिलकर काम करने की क्षमता विकसित करने में मदद करता है जिससे बड़े पैमाने की आपात स्थितियों के लिए नेपाल की तैयारी मजबूत होती है। भारत और नेपाल को संयुक्त एचएडीआर (HADR) प्रयासों का बड़ा उदाहरण तब देखने को मिला जब 25 अप्रैल 2015 को काठमांडू शहर के पास नेपाल में 7.8-तीव्रता का ज़बरदस्त भूकंप आया। इसमें 9,000 लोगों की मौत हो गई और 28 लाख लोग बेघर हो गए।[xxxii] अपने संयुक्त सैन्य अभ्यासों से मिले अनुभवों के आधार पर, दोनों देशों ने भारतीय पक्ष द्वारा शुरू किए गए "ऑपरेशन मैत्री" के तहत सामूहिक एचएडीआर (मानवीय सहायता और आपदा राहत) अभियान चलाया। [xxxiii]
आपदा प्रबंधन के अलावा भारत– नेपाल की खुली सीमा पर लूटपाट, अवैध व्यापार और मानव तस्करी जैसी आपराधिक गतिविधियां भी होती हैं।[xxxiv] अनुमानों की मानें तो, हर साल भारत– नेपाल सीमा के रास्ते लगभग 7,000 महिलाओं की तस्करी की जाती है[xxxv], जबकि उत्तर प्रदेश–नेपाल और बिहार–नेपाल के रास्ते से भारी मात्रा में नशीले पदार्थों की तस्करी होती है।[xxxvi] इन गैर–कानूनी गतिविधियों से निपटने के लिए दोनों पक्षों ने लगातार मिलकर कोशिशें की हैं और 7 अप्रैल 2026 को, भारत एवं नेपाल ने 3,300 ड्रग्स की शीशियां ले जा रहे तीन लोगों को पकड़ा था।[xxxvii]
इस प्रकार, जहाँ नेपाल को बेहतर आपदा प्रतिक्रिया क्षमताओं, परिचालन प्रशिक्षण और सीमा सुरक्षा सहयोग से लाभ होता है वहीं सूर्य किरण अभ्यास में भारत की भागीदारी उसके व्यापक लक्ष्यों के अनुरूप है जैसे क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित करना, पड़ोसी देशों के साथ साझेदारी को मज़बूत करना और दक्षिण एशिया में सहकारी सुरक्षा को बढ़ाना।
व्यापक अर्थों में, भारत और नेपाल के बीच सैन्य और सुरक्षा सहयोग एक संस्थागत ढांचे के अधीन आता है जिसे भारत– नेपाल द्विपक्षीय सुरक्षा मुद्दों पर परामर्श समूह (INBCGSI) कहा जाता है और इसे 2003 में स्थापित किया गया था।[xxxviii] INBCGSI दोनों देशों के बीच रक्षा और सुरक्षा सहयोग में समन्वय के लिए मुख्य संस्थागत तंत्र के रूप में काम करता है और अब तक दोनों देशों द्वारा इसके 16 संस्करण सफलतापूर्वक आयोजित किए जा चुके हैं।[xxxix]
श्रीलंका
भारत और श्रीलंका के बीच सैन्य सहयोगी की औपचारिक शुरुआत 2012 में संयुक्त सैन्य अभ्यास "मित्र शक्ति" के पहले संस्करण के साथ हुई थी।[xl] इस अभ्यास का उद्देश्य संयुक्त राष्ट्र के आदेश के अध्याय VII के तहत उप–परंपरागत अभियान चलाने का संयुक्त रूप से अभ्यास करना है और इसके दायरे में आतंकवाद–रोधी अभियानों दौरान संयुक्त प्रतिक्रियाओं में तालमेल बिठाना भी शामिल है।[xli] यह अभ्यास 12 दिनों तक और चार चरणों में किया जाता है।[xlii]
पहले चरण में हथियारों का प्रदर्शन और प्रशिक्षण शामिल है; दूसरे चरण में रात्रि प्रशिक्षण होती है, इसके बाद तीसरा चरण आता है और फिर चौथे चरण में खेल प्रतिस्पर्धा के साथ यह अभ्यास पूरा हो जाता है।[xliii] वर्ष 2012 में अपने पहले संस्करण के बाद से, भारत और श्रीलंका ने अब तक “मित्र शक्ति” अभ्यास के 11 संस्करण आयोजित किए हैं।
भारत– श्रीलंका अभ्यास मित्र शक्ति
|
संस्करण |
अवधि/ वर्ष |
स्थान |
|
प्रथम |
2012 |
भारत |
|
दूसरा |
2014 |
श्रीलंका |
|
तीसरा |
29 सितंबर से 12 अक्टूबर 2015 |
पुणे, भारत |
|
चौथा |
24 अक्टूबर से 6 नवंबर 2016 |
अम्बेपुस्सा, श्रीलंका |
|
पांचवां |
13 अक्टूबर से 26 अक्टूबर 2017 |
पुणे, भारत |
|
छठा |
26 मार्च से 8 अप्रैल 2019 |
बदुल्ला, श्रीलंका |
|
सातवां |
1 दिसंबर से 14 दिसंबर 2019 |
पुणे, भारत |
|
आठवां |
4 अक्टूबर से 15 अक्टूबर 2021 |
अम्पारा, श्रीलंका |
|
नौवां |
16 नवंबर से 29 नवंबर 2023 |
पुणे, भारत |
|
दसवां |
12 से 25 अगस्त 2024 |
मदुरु ओया, श्रीलंका |
|
ग्यारहवां |
10 नवंबर से 23 नवंबर 2025 |
कर्नाटक, भारत |
स्रोत: अलग– अलग स्रोतों का प्रयोग कर लेखक द्वारा तैयार किया गया है
इस अभ्यास का 11वां संस्करण 10 नवंबर से 23 नवंबर 2025 तक भारत के कर्नाटक राज्य के बेलगावी में आयोजित किया गया।[xliv] भारत की तरफ से, भारतीय थल सेना और वायु सेना के 190 कर्मियों ने इसमें हिस्सा लिया जबकि श्रीलंकाई पक्ष ने उनकी थल और वायु सेना के 155 कर्मियों ने इस 11वें संस्करण में भाग लिया।[xlv] इस संस्करण में आतंकवाद–रोधी अभियानों के दौरान हेलीपैड को सुरक्षित करने के लिए हेलीकॉप्टर और ड्रिल के अलावा ड्रोन और काउंटर– मानवरहित वायु प्रणाली के प्रयोग पर ध्यान दिया गया।[xlvi]
अभ्यासों के अलावा, दोनों पक्षों ने अपने विचार और उत्कृष्ट कार्यप्रणालियों को भी साझा किया जिससे भारतीय और श्रीलंका की सेनाओं के बीच रक्षा सहयोग और मज़बूत हुआ।[xlvii]
मैत्री शक्ति अभ्यास का 11वां संस्करण
स्रोत: प्रेस सूचना ब्यूरो, भारत सरकार [xlviii]
इस अभ्यास के महत्व को साझा सुरक्षा चुनौतियों के संदर्भ में समझा जाना चाहिए, विशेषरूप से आईएसआईएस जैसे अंतरराष्ट्रीय चरमपंथी नेटवर्क से जुड़े आतंकवाद के खतरे के संदर्भ में जो श्रीलंका और भारत दोनों को प्रभावित करता है।[xlix] श्रीलंका में 21 अप्रैल 2019 को हुए ईस्टर रविवार बम धमाकों ने इस खतरे को साफ तौर पर उजागर किया, इन सुनियोजित हमलों में 300 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी।[l] आईएसआईएस से जुड़े तत्वों की संलिप्तता ने इस क्षेत्र में कट्टरपंथी नेटवर्क की उपस्थिति को उजागर किया और भारत की आंतरिक सुरक्षा, विशेष रूप से दक्षिणी तटीय राज्यों के लिए, गंभीर चिंताएं भी पैदा कीं।[li]
इस संदर्भ में, मित्र शक्ति जैसे अभ्यास दोनों देशों को आतंकवाद–रोधी स्थितियों के लिए संयुक्त रूप से तैयारी करने, खुफिया जानकारी साझा करने और अपनी त्वरित प्रतिक्रिया क्षमताओं को मज़बूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
भारत और श्रीलंका के बीच सैन्य सहयोग के तहत दूसरा द्विपक्षीय अभ्यास एक नौसैनिक अभ्यास है जिसका नाम “SLINEX” है। इसीक शुरुआत 2005 में हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सहयोग और सुरक्षा को बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू किया गया था।[lii] इस अभ्यास को दो चरणों में बांटा गया है, हार्बर चरण में पेशेवर आदान–प्रदान एवं संयुक्त योजना बनाने पर ध्यान दिया जाता है और समुद्री चरण में संयुक्त परिचालन अभ्यास, बंदूक चलाने एवं हेलीकॉप्टर अभियान शामिल होते हैं।[liii] वर्ष 2005 में इसके पहले संस्करण के बाद से, भारत और श्रीलंका ने हिंद महासागर के अलग– अलग बंदरगाहों पर स्लिनेक्स ( SLINEX ) अभ्यास 12 बार किया है।
भारत– श्रीलंका नौसेना अभ्यासः स्लिनेक्स (SLINEX)
|
संस्करण |
अवधि |
स्थान |
|
प्रथम |
12 दिसंबर से 16 दिसंबर 2005 |
बंगाल की खाड़ी |
|
दूसरा |
19 सितंबर से 23 सितंबर 2011 |
त्रिंकोमाली, श्रीलंका |
|
तीसरा |
4 नवंबर से 7 नवंबर 2013 |
गोवा तट, भारत |
|
चौथा |
27 अक्टूबर से 1 नवंबर 2015 |
त्रिंकोमाली, श्रीलंका |
|
पांचवां |
7 सितंबर से 14 सितंबर 2017 |
विशाखापत्तनम, भारत |
|
छठा |
7 सितंबर से 13 सितंबर 2018 |
त्रिंकोमाली, श्रीलंका |
|
सातवां |
7 सितंबर से 12 सितंबर 2019 |
विशाखापत्तनम, भारत |
|
आठवां |
19 अक्टूबर से 21 अक्टूबर 2020 |
त्रिंकोमाली, श्रीलंका |
|
नौवां |
7 मार्च से 10 मार्च 2022 |
विशाखापत्तनम, भारत |
|
दसवां |
3 अप्रैल से 8 अप्रैल 2023 |
कोलंबो, श्रीलंका |
|
ग्यारहवां |
17 दिसंबर से 20 दिसंबर 2024 |
विशाखापत्तनम, भारत |
|
बारहवां |
14 अगस्त से 18 अगस्त 2025 |
कोलंबो, श्रीलंका |
स्रोत: अलग– अलग स्रोतों का प्रयोग कर लेखक द्वारा तैयार किया गया है
“SLINEX” अभ्यास का सबसे हालिया और 12वां संस्करण 14 अगस्त से 18 अगस्त 2025 तक श्रीलंका के कोलंबो तट पर आयोजित किया गया।[liv] इस संस्करण के हार्बर चरण में विषय विशेषज्ञ (SME) के साथ संवाद और एचएडीआर सिम्युलेटर पर ध्यान दिया गया जिसके बाद समुद्री चरण आयोजित किया गया। समुद्री चरण में सतह से गोली चलाना, हेलीकॉप्टर अभियान, क्रॉस– डेक फायरिंग और रणनीतिक चालें शामिल थीं।[lv] भारत की तरफ से आईएनएस ज्योति और आईएनएस राणा और श्रीलंका की तरफ से एसएलएनएस विजयबाहु और एसएलएनएस सयुरा के साथ–साथ श्रीलंका की वायु सेना के अनेक हेलीकॉप्टरों ने अभ्यास में हिस्सा लिया।[lvi]
अभ्यास SLINEX 12वां संस्करण
स्रोत: प्रेस सूचना ब्यूरो, भारत सरकार[lvii]
हिंद महासागर क्षेत्र में उभरती सुरक्षा चुनौतियों एवं मानवीय संकटों के संदर्भ में “SLINEX” अभ्यास के महत्व को समझा जा सकता है क्योंकि इनका भारत एवं श्रीलंका पर सीधा प्रभाव पड़ता है। हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री डकैती, समुद्र में सशस्त्र डकैती, नशीले पदार्थों की तस्करी और गैर– कानूनी, रिपोर्ट न की गई और अनियमित रूप से मछली पकड़ने जैसी गैर– परंपरागत सुरक्षा चुनौतियां देखने को मिलती हैं।[lviii]
वर्ष 2025 में, भारतीय उपमहाद्वीप में समुद्री डकैती और हथियारों के साथ लूटपाट के 13 मामले, प्रतिबंधित वस्तुओं की तस्करी के 317 मामले, लोगों के अवैध प्रवास के 14 मामले और अवैध, बिना रिपोर्ट किए गए एवं अनियमित रूप से मछली पकड़ने के 148 मामले दर्ज किए गए।[lix] इसके अलावा, हिंद महासागर नशीले पदार्थों की तस्करी का भी मुख्य मार्ग है। इसी संदर्भ में 29 नवंबर 2024 को भारत और श्रीलंका की नौसेना टुकड़ियों ने अंडमान सागर में एक नाव से 500 किलोग्राम नशीला पदार्थ जब्त किया था।[lx]
समुद्री अपराधों से निपटने में सहयोग के अलावा, “SLINEX” ने दोनों देशों के बीच HADR सहयोग को भी मजबूत बनाया है। इसका एक बड़ा उदाहरण तब देखने को मिला जब 28 नवंबर 2025 को श्रीलंका में “दित्वा” चक्रवात आया और दोनों देशों ने भारत द्वारा शुरू किए गए अभियान "सागर बंधु" के तहत मिलकर राहत कार्य किए।[lxi]
दोनों देशों ने अप्रैल 2025 में रक्षा और सैन्य सहयोग पर ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए जो आगामी पांच वर्षों तक लागू रहेगा।[lxii] यह समझौता अब दोनों देशों के लिए व्यापक ढांचे के रूप में काम कर रहा है और उच्च–स्तरीय सैन्य आदान–प्रदान, संयुक्त अभ्यास, क्षमता निर्माण और नौसैनिक बंदरगाहों के दौरों के माध्यम से संस्थागत सैन्य सहयोग को बढ़ावा दे रहा है।[lxiii]
बांग्लादेश
भारत और बांग्लादेश ने 2009 में भारत के असम राज्य में “संप्रीति” नाम के अभ्यास के पहले संस्करण के साथ अपना सैन्य सहयोग शुरू किया।[lxiv] यह अभ्यास संयुक्त राष्ट्र के आदेश के अध्याय VII के तहत उप–परंपरागत अभियान करने पर केंद्रित है जो भारत और बांग्लादेश के बीच ठोस द्विपक्षीय सहयोग को दर्शाता है।[lxv] इस अभ्यास में दो उप–अभ्यास शामिल हैं– कमांड पोस्ट एक्सरसाइज़ (CPX), जो निर्णय लेने पर केंद्रित है और फील्ड ट्रेनिंग एक्सरसाइज़ जिसमें ज़मीनी स्तर के अभियान शामिल हैं।[lxvi] वर्ष 2009 में अपने पहले संस्करण के बाद से इस अभ्यास के 11 संस्करण सफलतापूर्वक आयोजित किए जा चुके हैं जिन्हें दोनों देशों ने बारी– बारी से आयोजित किया है।
भारत– बांग्लादेश अभ्यासः संप्रीति
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संस्करण |
अवधि/ वर्ष |
स्थान |
|
प्रथम |
2009 |
जोरहाट, भारत |
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दूसरा |
8 अक्टूबर से 23 अक्टूबर 2011 |
सिलहट, बांग्लादेश |
|
तीसरा |
2013 |
भारत |
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चौथा |
2014 |
बांग्लादेश |
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पांचवां |
2015 |
पश्चिम बंगाल, भारत |
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छठा |
6 नवंबर से 20 नवंबर 2016 |
बांग्लादेश |
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सातवां |
6 नवंबर से 11 नवंबर 2017 |
मेघालय, भारत |
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आठवां |
2 मार्च से 15 मार्च 2019 |
टंगाइल, बांग्लादेश |
|
नौवां |
3 फरवरी से 16 फरवरी 2020 |
मेघालय, भारत |
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दसवां |
5 जून से 16 जून 2022 |
जशोर, बांग्लादेश |
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ग्यारहवां |
3 अक्टूबर से 16 अक्टूबर 2023 |
मेघालय, भारत |
स्रोत: अलग– अलग स्रोतों का प्रयोग कर लेखक द्वारा तैयार किया गया है
भारत के मेघालय में 3 अक्टूबर 2023 से "संप्रीति" अभ्यास का 11वां संस्करण आयोजित किया गया।[lxvii] इस संस्करण में दोनों पक्षों के लगभग 350 सैनिकों ने हिस्सा लिया। उन्होंने आतंकवाद–रोधी अभियानों के लिए कई प्रकार के संयुक्त अभ्यास किए, जैसे बंधकों को छुड़ाना, भीड़ को नियंत्रित करना और आतंकवाद–रोधी अभियानों में हेलीकॉप्टर का प्रयोग करना।[lxviii] इस संस्करण के दौरान प्रतिभागियों को भारत की “आत्मनिर्भर भारत” पहल के तहत बनाए गए उपकरणों की क्षमता देखने का भी मौका मिला।[lxix]
अभ्यास– संप्रीति, 11वां संस्करण
स्रोत: अतिरिक्त महानिदेशालय, जन सूचना, भारतीय सेना [lxx]
"संप्रीति" अभ्यास के महत्व को भारत– बांग्लादेश सीमा पर साझा सुरक्षा चुनौतियों के संदर्भ में समझा जाना चाहिए, विशेष रूप से असम मुक्ति मोर्चा (उल्फा), बोडोलैंड राष्ट्रीय लोकतांत्रिक मोर्चा (एनडीएफबी) और यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ बराक वैली (यूएलएफबीवी) जैसी विद्रोही और आतंकवादी संगठनों से जुड़ी चुनौतियों के संदर्भ में।[lxxi] इन समूहों ने ऐतिहासिक रूप से भारत और बांग्लादेश के बीच आसानी से पार किए जा सकने वाले और घनी आबादी वाले सीमावर्ती इलाकों का प्रयोग कर विद्रोही गतिविधियां की हैं।[lxxii] इन साझा खतरों से निपटने के लिए दोनों देशों ने मिलकर आतंकवाद–रोधी प्रयास किए हैं जिसके परिणामस्वरूप विद्रोही समूहों के शिवरों को खत्म किया गया और उनके मुख्य नेताओं को गिरफ्तार किया गया।[lxxiii]
समुद्री क्षेत्र में, भारत और बांग्लादेश दो संयुक्त नौसैनिक अभ्यास करते हैं– अभ्यास "बोंगोसागर" और भारत– बांग्लादेश कोऑर्डिनेटेड पेट्रोल (IN-BN CORPAT)। भारत– बांग्लादेश “CORPAT” की शुरुआत 2018 में हुई थी,[lxxiv] इसके बाद 2019 में "बोंगोसागर" का पहला संस्करण आयोजित किया गया,[lxxv] और तब से दोनों अभ्यास एक ही समय पर साथ– साथ किए जा रहे हैं। इन अभ्यासों का उद्देश्य समुद्री अभ्यास के माध्यम से आपसी तालमेल और संयुक्त अभियान की क्षमता को बढ़ाना है, साथ ही बंगाल की खाड़ी में गैर–कानूनी गतिविधियों को रोकने के लिए दोनों नौसेनाओं के बीच समझ को मज़बूत करना है।[lxxvi] अब तक, दोनों देशों ने “बोंगोसागर” के पांच और “IN-BN CORPAT” के छह संस्करणों का सफलतापूर्वक आयोजन किया है।
भारत और बांग्लादेश का समुद्री अभ्यास– बोंगोसागर
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संस्करण |
अवधि/ वर्ष |
स्थान |
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प्रथम |
2019 |
कोई रिकॉर्ड नहीं |
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दूसरा |
3 अक्टूबर 2020 |
बंगाल की खाड़ी के उत्तर में |
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तीसरा |
24 मई से 27 मई 2022 |
बंगाल की खाड़ी के उत्तर में |
|
चौथा |
7 नवंबर से 9 नवंबर 2023 |
भारत और बांग्लादेश के बीच अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा रेखा |
|
पांचवां |
10 मार्च से 12 मार्च 2025 |
भारत और बांग्लादेश के बीच अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा रेखा |
स्रोत: अलग– अलग स्रोतों का प्रयोग कर लेखक द्वारा तैयार किया गया है
भारत और बांग्लादेश समन्वित गश्त (कॉर्पैट/ CORPAT)
|
संस्करण |
अवधि/ वर्ष |
स्थान |
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प्रथम |
जून, 2018 |
चटगांव, बांग्लादेश |
|
दूसरा |
10 अक्टूबर से 12 अक्टूबर 2019 |
भारत और बांग्लादेश के बीच पश्चिमी समुद्री सीमा |
|
तीसरा |
4 अक्टूबर से 5 अक्टूबर 2020 |
उत्तरी बंगाल की खाड़ी |
|
चौथा |
22 मई से 23 मई 2022 |
उत्तरी बंगाल की खाड़ी |
|
पांचवां |
7 नवंबर से 9 नवंबर 2023 |
भारत और बांग्लादेश के बीच अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा रेखा |
|
छठा |
10 मार्च से 12 मार्च 2025 |
भारत और बांग्लादेश के बीच अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा रेखा |
स्रोत: अलग– अलग स्रोतों का प्रयोग कर लेखक द्वारा तैयार किया गया है
“IN-BN CORPAT” और “बोंगोसागर” अभ्यास का नवीनतम संस्करण 10 मार्च 2025 से 12 मार्च 2025 तक बंगाल की खाड़ी में आयोजित किया गया था। [lxxvii] इस संस्करण में भारतीय नौसेना के आईएनएस रणवीर और बांग्लादेश नौसेना के बीएनएस अबू उबैदाह ने हिस्सा लिया।[lxxviii] अभ्यास के दौरान, दोनों नौसेनाओं ने कई जटिल अभियानों का अभ्यास किया, जिनमें सतह से फायरिंग, रणनीतिक चालें, चलते–फिरते रसद लेना (अंडरवे रिप्लेनिशमेंट); विज़िट, बोर्ड, सर्च और सीज़र (VBSS) और क्रॉस– बोर्डिंग शामिल थे।[lxxix] इन अभ्यासों से नौसेनों को रणनीतिक नियोजन में मजबूत संबंध बनाने के साथ– साथ आपसी तालमेल और आत्मविश्वास बढ़ाने का मौका मिला। इस विकास से समुद्र में उभरते खतरों का तेज़ी एवं प्रभावी तरीके से सामना करने एवं संयुक्त अभियान चलाने की उनकी क्षमता में सुधार हुआ।
बोंगोसागर अभ्यास, 5वां संस्करण, और IN-BN CORPAT, 6वां संस्करण
स्रोत: प्रेस सूचना ब्यूरो, भारत सरकार[lxxx]
बंगाल की खाड़ी के इलाके में समुद्री चुनौतियों से निपटने के लिए भारत और बांग्लादेश के बीच संयुक्त समुद्री अभ्यास दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने का एक माध्यम हैं। भारत के उत्तर पश्चिमी हिंद महासागर क्षेत्र, विशेष रूप से बंगाल की खाड़ी में अवैध रूप से मछली पकड़ने, ड्रग्स की तस्करी, मानव तस्करी और हथियारों के साथ लूटपाट जैसी समस्याएं देखने को मिलती हैं।[lxxxi] यह इलाका चक्रवात, बाढ़, कटाव और पानी की कमी जैसी प्राकृतिक आपदाओं के प्रति भी संवेदनशील हैं, जिससे तटीय इलाकों के बेहतर प्रबंधन की आवश्यकता स्पष्ट होती है।[lxxxii]
इसलिए, बोंगोसागर और IN-BN CORPAT जैसे अभ्यास समुद्री क्षेत्र की जागरूकता बढ़ाने, दोनों नौसेनाओं के बीच आपसी तालमेल को बेहतर बनाने और परंपरागत व गैर– परंपरागत सुरक्षा संकटों का मिलकर सामना करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। साथ ही, ये अभ्यास इस क्षेत्र में एचएडीआर (मानवीय मदद और आपदा राहत) अभियानों के लिए तैयारी को भी मजबूत करते हैं।
वर्ष 2017 में बांग्लादेश के प्रधानमंत्री की राजकीय यात्रा के दौरान भारत और बांग्लादेश के बीच रक्षा क्षेत्र में कई समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए थे।[lxxxiii] इनमें से एक समझौते ने रक्षा सहयोग की संरचना तैयार कर दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को बढ़ाया।[lxxxiv] बांग्लादेश और भारत के रक्षा संस्थानों के बीच हुए अन्य समझौतों ने राष्ट्रीय सुरक्षा, विकास और रणनीतिक अध्ययन के क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ाया और क्षमता– निर्माण के साधन के रूप में काम किया है।[lxxxv]
मालदीव
मालदीव के साथ भारत का रक्षा सहयोग द्विपक्षीय सैन्य अभ्यासों के माध्यम से 2009 में कर्नाटक, भारत के “एकुवेरिन” सैन्य अभ्यास के पहले संस्करण के साथ शुरू हुआ।[lxxxvi] इस अभ्यास का उद्देश्य संयुक्त राष्ट्र के जनादेश के तहत आतंकवाद–रोधी अभियानों के दौरान भारत और मालदीव की सेनाओं के बीच आपसी तालमेल को बेहेतर बनाना है।[lxxxvii] साथ ही, इसका ध्यान दोनों देशों की सेनाओं के बीच उत्कृष्ट कार्यप्रणालियों को साझा करने और आपसी तालमेल व सहयोग को बढ़ाने पर भी है।[lxxxviii]
वर्ष 2009 में इसके पहले संस्करण के बाद से, भारत और मालदीव दोनों ने इस सैन्य अभ्यास के चौदह (14) संस्करण आयोजित किए हैं।
भारत – मालदीव अभ्यास एकुवेरिन
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संस्करण |
अवधि/ वर्ष |
स्थान |
|
प्रथम |
19 अक्टूबर से 1 नवंबर 2009 |
कर्नाटक, भारत |
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दूसरा |
2010 |
कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं |
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तीसरा |
15 दिसंबर से 18 दिसंबर 2011 |
मालदीव |
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चौथा |
12 नवंबर से 25 नवंबर 2012 |
भारत |
|
पांचवां |
2013 |
मालदीव |
|
छठा |
31 अगस्त से 13 सितंबर 2015 |
तिरुवनंतपुरम, भारत |
|
सातवां |
15 दिसंबर से 28 दिसंबर 2016 |
लामू एटोल, मालदीव |
|
आठवां |
15 दिसंबर से 28 दिसंबर 2017 |
कर्नाटक, भारत |
|
नौवां |
2018 |
माफ़िलाफुशी, मालदीव |
|
दसवां |
7 अक्टूबर से 20 अक्टूबर 2019 |
महाराष्ट्र, भारत |
|
ग्यारहवां |
6 दिसंबर से 19 दिसंबर 2021 |
कधधू द्वीप, मालदीव |
|
बारहवां |
11 जून से 24 जून 2023 |
उत्तराखंड, भारत |
|
तेरहवां |
2 फरवरी से 15 फरवरी 2025 |
मालदीव |
|
चौहदवां |
2 दिसंबर से 15 दिसंबर 2025 |
केरल, भारत |
स्रोत: अलग– अलग स्रोतों का प्रयोग कर लेखक द्वारा तैयार किया गया है
भारत के केरल में 2 दिसंबर से 15 दिसंबर 2025 तक एकुवेरिन अभ्यास का 14वां संस्करण आयोजित किया गया।[lxxxix] इस संस्करण में भारतीय सेना की गढ़वाल राइफल्स और मालदीव नेशनल डिफेंस फोर्स के कुल 90 सैनिकों ने हिस्सा लिया।[xc] इस संस्करण में जंगल, अर्ध–शहरी और तटीय इलाकों में उग्रवाद–विरोधी और आतंकवाद विरोधी अभियानों के दौरान आपसी तालमेल और परिचालन संबंधी सहयोग पर ज़ोर दिया गया।[xci] ज़मीनी अभ्यास के अलावा, दोनों सेनाओं ने इलाके में सुरक्षा से जुड़ी आम चुनौतियों का सामना करने की अपनी क्षमता को मज़बूत करने के लिए परिचालन संबंधी नियोजन का भी अभ्यास किया।[xcii]
एकुवेरिन अभ्यास, 14वां संस्करण
स्रोत: प्रेस सूचना ब्यूरो, भारत सरकार[xciii]
एकुवेरिन अभ्यास के महत्व को भारत और मालदीव के बीच साझा सुरक्षा चिंताओं और रणनीतिक परस्पर निर्भरता के संदर्भ में समझा जाना चाहिए। मालदीव के लिए सुरक्षा से संबंधित नए और गैर–परंपरागत संकट, विशेषरूप से कट्टरपंथ और आतंकवाद, चिंता का विषय बनते जा रहे हैं।[xciv] इस देश की पहचान इस्लामिक स्टेट से जुड़े संचालनों के लिए संभावित केंद्र के रूप में की गई है। साथ ही यहाँ लश्कर–ए– तैयबा (LeT) से जुड़े ऐसे तत्व भी मौजूद हैं, जिन्होंने पहले इस इलाके में अपनी पैठ बनाने की कोशिश की है।[xcv]
इस संदर्भ में, एकुवेरिन अभ्यास मालदीव नेशनल डिफेंस फोर्स (MNDF) को संयुक्त परिचालन प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण के माध्यम से आतंकवाद– विरोधी क्षमताओं को बढ़ाने का महत्वपूर्ण मंच प्रदान करती है जिससे आंतरिक और बाहरी सुरक्षा संकटों से निपटने की उनकी शक्ति बढ़ती है। इस संदर्भ में भारत और मालदीव ने हिंसक चरमपंथ का मुकाबला करने और कट्टरता से मुक्ति के लिए 2021 में आतंकवाद– रोधी मामलों पर एक संयुक्त कार्य समूह भी गठित किया।[xcvi]
भारत, मालदीव में अपने रणनीतिक और वहाँ रहने वाले भारतीयों से जुड़े हितों के लिए एकुवेरिन (EKUVERIN) को बहुत महत्वपूर्ण मानता है। मालदीव में बड़ी संख्या में भारतीय रहते हैं, वहाँ लगभग 100,000 भारतीय रहते हैं और काम करते हैं और प्रत्येक वर्ष करीब 10,000 भारतीय पर्यटक भी मालदीव घूमने जाते हैं।[xcvii] इसलिए, भारत के लिए मालदीव की सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित करना सीधे तौर पर भारतीय नागरिकों की सुरक्षा से जुड़ा है। भारत ने 2017 में शुरू हुए नौसैनिक अभ्यास "एकता" केक माध्यम से समुद्री क्षेत्र में मालदीव के साथ अपना सैन्य सहयोग बनाए रखा है।[xcviii]
यह भारतीय नौसेना और मालदीव नेशनल डिफेंस फोर्सेज़ (MNDF) के बीच आपसी तालमेल और सहयोग को बेहतर बनाने के लिए हर साल होने वाला समुद्री अभ्यास है।[xcix] वर्ष 2017 में पहली बार आयोजित किए जाने के बाद से, दोनों देशों ने इस अभ्यास के आठ सफल संस्करणों का आयोजन किया है।
भारत– मालदीव नौसैनिक अभ्यास– एकता
|
संस्करण |
अवधि/ वर्ष |
स्थान |
|
प्रथम |
2017 |
मालदीव |
|
दूसरा |
28 अप्रैल से 15 मई 2018 |
मालदीव |
|
तीसरा |
2019 |
मालदीव |
|
चौथा |
30 जून से 10 जुलाई 2021 |
मालदीव |
|
पांचवां |
5 सितंबर से 3 अक्टूबर 2022 |
मालदीव |
|
छठा |
4 जून से 3 जुलाई 2023 |
मालदीव |
|
सातवां |
31 अक्टूबर से 20 नवंबर 2024 |
माफ़िलाफ़ुशी, मालदीव |
|
आठवां |
18 नवंबर से 17 दिसंबर 2025 |
कधधू द्वीप, मालदीव |
स्रोत: अलग– अलग स्रोतों का प्रयोग कर लेखक द्वारा तैयार किया गया है
मालदीव में 15 दिसंबर से 17 दिसंबर 2025 तक आयोजित “एकता” अभ्यास के नवीनतम और आठवें संस्करण में दोनों देशों की सेनाओं ने कई प्रकार के अभ्यास किए। इसमें तनकीनी और सैन्य गोताखोरी, बोर्डिंग अभियान और फायरिंग ड्रिल शामिल थे।[c] अभ्यासों के अलावा, दोनों नौसेनाओं के बीच समुद्री जानकारी साझा करने की प्रक्रिया को और बेहतर बनाने के तरीकों पर भी चर्चा हुई।[ci]
इस अभ्यास के समापन पर, भारतीय नौसेना के डिप्टी चीफ ऑफ नेवल स्टाफ (DCNS) ने एनएनडीएफ (MNDF) तटरक्षक को परिचालन अतिरिक्त पुर्जों की एक खेप सौंपी, जिससे भारत और मालदीव के बीच मज़बूत रक्षा और समुद्री संबंधों को बल मिला।[cii]
अभ्यास एकता– 8वां संस्करण
स्रोत: प्रेस सूचना ब्यूरो, भारत सरकार [ciii]
भारत और मालदीव के बीच एकता (EKATHA) अभ्यास, हिंद महासागर क्षेत्र में गैर– परंपरागत सुरक्षा संकटों से निपटने के लिए समुद्री सहयोग के बढ़ते महत्व को दर्शाता है। मालदीव प्रमुख समुद्री मार्गों पर रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्थिति में है और गोल्डन क्रिसेंट– अरब सागर ड्रग तस्करी मार्ग के पास स्थित है, इस मार्ग का प्रयोग अक्सर पूर्वी अफ़्रीका से यूरोप और दक्षिण एशिया तक नशीले पदार्तों की तस्करी के लिए किया जाता है।[civ] इस भौगोलिक स्थिति के कारण मालदीव के समुद्री इलाके अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स तस्करी नेटवर्क के लिए विशेष रूप से संवेदनशील है, जिससे देश की आंतरिक सुरक्षा और समुद्री प्रशासन के सामने चुनौतियां पैदा होती हैं।
इस संदर्भ में यह अभ्यास मालदीव की समुद्री निगरानी, रोकने की क्षमताओं और समन्वित प्रतिक्रिया तंत्र को बेहतर बनाने में योगदान देता है। भारत के लिए इस सहयोग का महत्व स्पष्ट रूप से उसकी अपनी ड्रग तस्करी की समस्या से जुड़ा है। गोल्डन क्रिसेंट मार्ग भारत में तस्करी की जाने वाली हेरोइन का मुख्य स्रोत बना हुआ है, जिससे नशीले पदार्थों की तस्करी एक निरंतर बनी रहने वाली चुनौती है।[cv] इसलिए, एकता (EKATHA) अभ्यास के माध्यम से भारत मालदीव के साथ परिचालन संबंधी तालमेल, खुफिया जानकारी के साझाकरण और समुद्री सुरक्षा की संयुक्त तैयारियों को मजबूत करता है जिससे दोनों देश ड्रग तस्करी के बदलते नेटवर्क का अधिक प्रभावी तरीके से सामना कर पाते हैं।
द्विपक्षीय अभ्यासों के अलावा, भारत मालदीव की सेना को क्षमता बढ़ाने में भी मदद करता है जिसमें रक्षा से जुड़े बुनियादी ढांचे का विकास और आवश्यक रक्षा उपकरण उपलब्ध कराना शामिल है। वर्ष 1992 से 2023 के बीच, भारत ने मालदीव को 13 से अधिक रक्षा उपकरण सौंपे हैं जिनमें बख़्तरबंद लड़ाकू वाहन, ध्रुव हेलीकॉप्टर, सी एम्बुलेंस और तेज़ गश्ती करने वाली नौकाएं शामिल हैं।[cvi] भारत ने मालदीव में लगभग पांच डिफेंस संरचनाओं के निर्माण में भी मदद की है जैसे कि सेनाहिया MNDF सैन्य अस्पताल, MNDF की कंपोज़िट प्रशिक्षण केंद्र और रक्षा मंत्रालय का मुख्यालय।[cvii]
निष्कर्ष
दक्षिण एशिया में भारत की सैन्य भागीदारी उसकी पड़ोस प्रथम की नीति से बनी और महासागर (MAHASAGAR –क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास के लिए पारस्परिक और समग्र प्रगति) जैसी व्यापक समुद्री सोच से जुड़ी सुसंगत और विकसित होती रणनीतिक सोच को दर्शाती है। सूर्य किरण, मित्र शक्ति, स्लिनेक्स (SLINEX), संप्रीति (SAMPRITI), एकुवेरिन (EKUVERIN) और एकता (EKATHA) जैसे द्विपक्षीय और बहुपक्षीय अभ्यासों के नेटवर्क के माध्यम से भारत ने रक्षा सहयोग को संस्थागत बनाने, आपसी तालमेल को बढ़ाने और अपने पड़ोसी देशों के साथ विश्वास कायम करने की कोशिश की है। ये गतिविधियां केवल दिखावे के लिए नहीं हैं। ये इस क्षेत्र में सुरक्षा से जुड़ी वास्तविक और उभरती चुनौतियों से निपटने के प्रयासों से गहराई से जुड़ी हुई हैं।
इस सहयोग का एक महत्वपूर्ण पहलू समुद्री अपराधों से निपटना है, जिसमें समुद्री डकैती, नशीले पदार्थों की तस्करी, अवैध रूप से मछली पकड़ना और तस्करी शामिल हैं, विशेष रूप से हिंद महासागर क्षेत्र में। साथ ही, संयुक्त अभ्यासों ने आतंकवाद– रोधी क्षमताओँ को बेहतर बनाया है, जिससे आईएसआईएस से संबंधित नेटवर्क और क्षेत्रीय चरमपंथी समूहों जैसे अंतरराष्ट्रीय संकटों का मिलकर मुकाबला करना संभव हुआ है। दक्षिण एशिया में जलवायु–जनित आपदाओं के प्रति संवेदनशीलता को देखते हुए, मानवीय मदद और आपदा राहत (एचएडीआर) की तैयारियों को बेहतर बनाने में इन गतिविधियों की भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
कुल मिलाकर, दक्षिण एशिया में भारत की सैन्य गतिविधियाँ क्षेत्रीय स्थिरता के लिए एक रणनीतिक साधन का काम करती हैं। ये गतिविधियाँ सहयोग सुरक्षा, क्षमता निर्माण और साझा लचीलेपन को बढ़ावा देते हुए, सुरक्षा प्रदाता के रूप में भारत की भूमिका को मजबूत करती हैं। ऐसा करके भारत अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करता है और अधिक सुरक्षित, स्थिर और एकीकृत दक्षिण एशियाई क्षेत्र के निर्माण में योगदान देता है।
*****
*सचिन यादव, भारतीय वैश्विक परिषद, नई दिल्ली में शोध प्रशिक्षु हैं।
अस्वीकरण : यहां व्यक्त किए गए विचार निजी हैं।
डिस्क्लेमर: इस अनुवादित लेख में यदि किसी प्रकार की त्रुटी पाई जाती है तो पाठक अंग्रेजी में लिखे मूल लेख को ही मान्य माने ।
टिप्पणियाँ
[i]Wolfley, Kyle. “Military Statecraft and the Use of Multinational Exercises in World Politics.” Foreign Policy Analysis 17, no. 2 (January 29, 2021). https://doi.org/10.1093/fpa/oraa022.
[ii] Ibid.
[iii] Khera, Kishore. “International Military Exercise: An Indian Perspective.” Journal of Defence Studies 11, no. 3 (2017). https://idsa.in/system/files/jds/jds_11_3_2017_international-military-exercises.pdf.
[iv] Ibid.
[v] Ibid.
[vi] Ibid.
[vii] Ibid.
[viii] Ibid.
[ix] Ibid.
[x] Ibid.
[xi] Press Information Bureau, Government of India. “Joint Military Exercises,” July 18, 2018. https://www.pib.gov.in/Pressreleaseshare.aspx?PRID=1539020®=3&lang=2.
[xii] Yadav, Sachin. “India’s Trilateral Agreements in South Asia: An Assessment.” Indian Council of World Affairs, January 16, 2026. /show_content.php?lang=1&level=1&ls_id=14134&lid=8576#_ednref15.
[xiii] Anto, Marshall. “Addressing the Intersection of Drug Trafficking, Piracy, and Illicit Fishing in the Indian Ocean Region.” Electronic Journal of Social and Strategic Studies 6, no. 7 (July 31, 2025): 51–75. https://www.ejsss.net.in/article_html.php?did=15883&issueno=0.
[xiv] United Nations Security Council. “South Asia | Security Council - Counter-Terrorism Committee (CTC),” n.d. https://www.un.org/securitycouncil/ctc/content/south-asia.
[xv] Meng , Chang , and Noorulhaq Ghafoori. “The Economic Impact of Terrorism in South Asia.” Socio-Economic Planning Sciences 96 (December 2024). https://www.sciencedirect.com/science/article/pii/S0038012124002842?via%3Dihub.
[xvi] United Nations Economic and Social Commission for Asia and the Pacific. “The Disaster Riskscape across South and South-West Asia,” 2019. https://www.unescap.org/sites/default/files/IDD-APDR-Subreport-SSWA.pdf#page=2.84.
[xvii] World Bank Group. “Climate and Development in South Asia,” n.d. https://www.worldbank.org/en/region/sar/brief/integrating-climate-and-development-in-south-asia/integrating-climate-and-development-in-south-asia-region.
[xviii] Behuria, Ashok. “India’s Neighbourhood First Policy: Navigating Power, Trust, and Rivalry in South Asia.” Strategic Analysis 49, no. 3 (September 9, 2025): 355–70. https://doi.org/10.1080/09700161.2025.2545143.
[xix] Deka , Bidisha . “The Indian Ocean as a Community: Rethinking Security through the MAHASAGAR Vision.” Center for Joint Warfare Studies, November 17, 2025. https://cenjows.in/publications/the-indian-ocean-as-a-community-rethinking-security-through-the-mahasagar-vision/.
[xx] Ministry of Defence, Government of India. “Annual Report 2011-2012,” 2012. https://www.mod.gov.in/sites/default/files/AR1112.pdf.
[xxi] Press Information Bureau, Government of India. “India - Nepal Joint Exercise Suryakiran XIX – 2025 Commences Today,” November 25, 2025. https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2194129®=3&lang=2.
[xxii] Ibid.
[xxiii] Ibid.
[xxiv] Ibid.
[xxv] Ibid.
[xxvi] Ibid.
[xxvii] Ibid.
[xxviii] Ibid.
[xxix] Ibid.
[xxx] United Nations International Children’s Emergency Fund. “Nepal - Emergency,” n.d. https://www.unicef.org/nepal/emergency.
[xxxi] Ibid.
[xxxii] NDTV. “A Look Back at the 2015 Nepal Earthquake When 9,000 People Died,” March 5, 2026. https://www.ndtv.com/world-news/2015-nepal-earthquake-when-9-000-people-died-in-one-of-worlds-worst-disasters-11139720.
[xxxiii] Press Information Bureau, Government of India. “Army Launches Operation Maitri,” April 26, 2015. https://www.pib.gov.in/newsite/PrintRelease.aspx?relid=118739®=3&lang=2.
[xxxiv] Global Initiative Against Transnational Organized Crimes. “Global Organized Crime Index - Nepal ,” 2023. https://ocindex.net/assets/downloads/2023/english/ocindex_profile_nepal_2023.pdf.
[xxxv] Patel , Sneha . “View of Trafficking through Indo-Nepal Border- a Gendered Phenomenon.” Journal of Polity & Society 17, no. 1 (2025): 85–98. https://journalspoliticalscience.com/index.php/i/article/view/479/148.
[xxxvi] Das, Pushpita. “Drug Trafficking in India: A Case for Border Security.” Manohar Parrikar Institute of Defence and Studies and Analysis, May 2012. https://www.idsa.in/system/files/OP_DrugTraffickinginIndia.pdf.
[xxxvii] The Tribune. “2 Indian Nationals Accused of Drug Trafficking Arrested in Nepal - the Tribune,” April 7, 2026. https://www.tribuneindia.com/news/world/2-indian-nationals-accused-of-drug-trafficking-arrested-in-nepal/.
[xxxviii] Press Information Bureau, Government of India. “Sixteenth Meeting of the India-Nepal Bilateral Consultative Group on Security Issues,” June 24, 2025. https://www.mea.gov.in/press-releases.htm?dtl/39713/Sixteenth_Meeting_of_the_IndiaNepal_Bilateral_Consultative_Group_on_Security_Issues_June_2324_2025.
[xxxix] Ibid.
[xl] Sri Lankan Army. “10th Exercise Mitra Shakthi” n.d. https://www.army.lk/exercise-mitra-shakthi.
[xli] Press Information Bureau, Government of India. “India - Sri Lanka Joint Exercise Mitra Shakti XI – 2025 Commenced Today,” November 10, 2025. https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2188370®=3&lang=2.
[xlii] Sri Lankan Army. “10th Exercise Mitra Shakthi” n.d. https://www.army.lk/exercise-mitra-shakthi.
[xliii] Ibid.
[xliv] Press Information Bureau, Government of India. “India - Sri Lanka Joint Exercise Mitra Shakti XI – 2025 Commenced Today,” November 10, 2025. https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2188370®=3&lang=2
[xlv] Ibid.
[xlvi] Ibid.
[xlvii] Ibid.
[xlviii] Ibid.
[xlix] Solanki, Viraj. “Sri Lanka and India Address Shared CT Challenge.” International Institute for Strategic Studies, December 20, 2019. https://www.iiss.org/online-analysis/online-analysis/2019/12/sri-lanka-and-india-address-shared-ct-challenge/.
[l] The Hindu. “Sri Lanka Easter Bombings,” n.d. https://www.thehindu.com/topic/sri-lanka-easter-bombings/.
[li] Mihindukulasuriya, Regina. “ISIS Influence Growing in South India, Particularly Kerala: Social Media Monitoring Firms.” The Print, May 20, 2019. https://theprint.in/india/isis-influence-growing-in-south-india-particularly-kerala-social-media-monitoring-firms/234953/.
[lii] Kingston et al. “View of Indo- Sri Lankan Nexus under SLINEX (India and Sri Lanka Naval Exercise).” International Journal of Environmental Sciences 11, no. 2 (2025). https://theaspd.com/index.php/ijes/article/view/6959/5015.
[liii] Ibid.
[liv] High Commission of India, Colombo, Sri Lanka. “Indian Navy-Sri Lanka Navy Maritime Exercise SLINEX-2025,” August 12, 2025. https://www.hcicolombo.gov.in/section/press-releases/indian-navy-sri-lanka-navy-maritime-exercise-slinex-2025/.
[lv] Ibid.
[lvi] Ibid.
[lvii] https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2159316®=3&lang=2.
[lviii] Information Fusion Centre, Indian Ocean Region. “IFC-IOR Annual Report 2025,” 2025. https://ifcior.indiannavy.gov.in/sites/default/files/2026-02/IFC-IOR-ANNUAL-REPORT-2025.pdf.
[lix] Ibid.
[lx] Peri, Dinakar. “Indian and Sri Lankan Navy Seized 500 Kg of Narcotics in Arabian Sea.” The Hindu, November 29, 2024. https://www.thehindu.com/news/national/in-a-joint-op-by-indian-and-sri-lankan-navies-500-kg-of-narcotics-seized-in-arabian-sea/article68926123.ece.
[lxi] Yadav, Sachin . “India’s Trilateral Agreements in South Asia: An Assessment.” Indian Council of World Affairs, January 16, 2026. /show_content.php?lang=1&level=1&ls_id=14134&lid=8576#_ednref15.
[lxii] Tamil Guardian. “Explained: The New India–Sri Lanka Defence Agreement,” April 7, 2025. https://www.tamilguardian.com/content/explained-new-india-sri-lanka-defence-agreement.
[lxiii] Ibid.
[lxiv] Press Information Bureau, Government of India. “India and Bangladesh Armies Begin Joint Exercise,” October 3, 2023. https://www.pib.gov.in/PressReleaseIframePage.aspx?PRID=1963629®=3&lang=2.
[lxv]Ibid.
[lxvi] Ibid.
[lxvii] Ibid
[lxviii] Ibid
[lxix] Ibid
[lxx] https://x.com/adgpi/status/1713848117811122544.
[lxxi] Priyadarshini. “Threats Emanating from India-Bangladesh Border for Indian National Security.” Forum of Integrated National Security, December 16, 2022. https://www.finsindia.org/threats-emanating-from-india-bangladesh-border-for-indian-national-security.html.
[lxxii] Ibid.
[lxxiii] Islam, Saiful, and Anika Mahjabin. “Did Bangladesh Play Major Role in Closing ULFA Chapter?” Bonikbarta, March 9, 2024. https://www.bonikbarta.com/home/news_description/376185/Did-Bangladesh-play-major-role-in-closing-ULFA-chapter.
[lxxiv] Bangladesh Navy. “CORPAT History,” n.d. https://navy.mil.bd/News%20And%20Event/CORPATHistory.html.
[lxxv] Press Information Bureau, Government of India. “Indian Navy (IN) - Bangladesh Navy (BN) Bilateral Exercise BONGOSAGAR and IN-BN CORPAT,” October 2, 2020. https://www.pib.gov.in/Pressreleaseshare.aspx?PRID=1661064®=3&lang=2.
[lxxvi] Ibid.
[lxxvii] Press Information Bureau, Government of India. “INS Ranvir Participates in Exercise BONGOSAGAR 25 and Indian Navy - Bangladesh Navy CORPAT,” March 13, 2025. https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2111292®=3&lang=2.
[lxxviii] Ibid.
[lxxix] Ibid.
[lxxx] Ibid.
[lxxxi] Benson, Jay. “Stable Seas: Bay of Bengal.” Stable Seas, January 2020. https://www.stableseas.org/post/stable-seas-bay-of-bengal.
[lxxxii] Ibid
[lxxxiii] Press Information Bureau, Government of India. “List of Agreements/MoUs Exchanged during the State Visit of Prime Minister of Bangladesh to India,” April 8, 2017. https://www.mea.gov.in/bilateral-documents.htm?dtl/28360/List+of+AgreementsMoUs+exchanged+during+the+State+Visit+of+Prime+Minister+of+Bangladesh+to+India+April+0710+2017.
[lxxxiv] Ibid
[lxxxv] Ibid
[lxxxvi] Press Information Bureau, Government of India. “India- Maldives Joint Military Exercise EKUVERIN Commences in Kerala,” December 2, 2025. https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2197611®=3&lang=2.
[lxxxvii] Press Information Bureau, Government of India. “Indo-Maldives Joint Military Exercise ‘EKUVERIN’ Commenced at Chaubatia, Uttarakhand,” June 12, 2023. https://www.pib.gov.in/PressReleaseIframePage.aspx?PRID=1931728®=3&lang=2.
[lxxxviii] Ibid
[lxxxix] Press Information Bureau, Government of India. “India- Maldives Joint Military Exercise EKUVERIN Commences in Kerala,” December 2, 2025. https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2197611®=3&lang=2.
[xc] Ibid.
[xci] Ibid.
[xcii] Ibid.
[xciii] Ibid.
[xciv] South Asia Terrorism Portal. “Terrorism Assessment, Maldives,” 2025. https://www.satp.org/terrorism-assessment/maldives.
[xcv] Ibid.
[xcvi] Ministry of External Affairs, Government of India. “Joint Press Release on First Meeting of India-Maldives Joint Working Group on Counter Terrorism, Countering Violent Extremism and De-Radicalisation,” April 8, 2021. https://www.mea.gov.in/press-releases.htm?dtl/33782/joint+press+release+on+first+meeting+of+indiamaldives+joint+working+group+on+counter+terrorism+countering+violent+extremism+and+deradicalisation.
[xcvii] ETV Bharat News. “Maldivian Marks 18 Years in India, Eyes Growth amid Strong Tourism, Diaspora Links,” March 28, 2026. https://www.etvbharat.com/en/bharat/maldives-aims-to-attract-more-indian-tourists-plans-to-expand-flight-services-from-india-enn26032803525.
[xcviii] Press Information Bureau, Government of India. “DCNS Visit to Maldives Closing Ceremony of Exercise EKATHA - 2025,” December 15, 2025. https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2204321®=3&lang=1.
[xcix] Ibid.
[c] Ibid.
[ci] Ibid.
[cii] Ibid.
[ciii] Ibid.
[civ] Anto I, Marshall. “Addressing the Intersection of Drug Trafficking, Piracy, and Illicit Fishing in the Indian Ocean Region.” Electronic Journal of Social and Strategic Studies 06, no. 07 (July 2025): 51–75. https://www.ejsss.net.in/uploads/172/15883_pdf.pdf.
[cv] ETV Bharat News. “NCB, Navy, NTRO Intensify Vigil off Shore the Indian Ocean Region to Detect Trafficking of Contraband Drugs from the ‘Golden Crescent,’” April 14, 2026. https://www.etvbharat.com/en/bharat/ncb-navy-ntro-intensify-vigil-off-shore-the-indian-ocean-region-to-detect-trafficking-of-contraband-drugs-from-the-golden-crescent-enn26041405465.
[cvi] Gowdara Shivamurthy, Aditya. “India-Maldives Defence Cooperation: Partnership and Partisanship.” Observer Research Foundation, May 18, 2023. https://www.orfonline.org/expert-speak/india-maldives-defence-cooperation.
[cvii] Ibid.