परिचय
बंदरगाह संचालन और जहाजरानी, जो नीली अर्थव्यवस्था के लिए अनिवार्य हैं, उनमें तेल रिसाव और कचरा डालने, जिससे हवा और समुद्री प्रदूषण भी होता है, की वजह से समुद्री पर्यावरण के लिए संभावित जोखिम भी हैं।[i] दूसरे उद्योग जो नीली अर्थव्यवस्था में योगदान देते हैं, जैसे महासागरीय अन्वेषण, फार्मास्यूटिकल्स, कॉस्मेटिक अनुसंधान और अपतटीय ऊर्जा, ये जोखिम को बढ़ाती हैं और समुद्रीय पर्यावरण पर दबाव बढ़ाती हैं। एक संवहनीय नीली अर्थव्यवस्था का प्रयोग करना जो पर्यावरणीय जोखिम को संतुलित करते हुए आर्थिक आवश्यकताओं को एकीकृत करती है, बहुत आवश्यक है।
विश्व बैंक के हिसाब से, नीली अर्थव्यवस्था का अर्थ है– 'समुद्र के पारितंत्र को बनाए रखते हुए, आर्थिक विकास, बेहतर आजीविका और नौकरियों के लिए समुद्र के संसाधनों का निरंतर प्रयोग’।[ii] हिंद महासागर क्षेत्र (आईओआर/ IOR) में, नीली अर्थव्यवस्था ने तटीय देशों के बीच अधिक ध्यान आकर्षित किया है, और यह हिंद महासागर रिम एसोसिएशन (आईओआरए/IORA) के दो मुख्य साझा क्षेत्रों में से एक है।
हालाँकि, आईओआर में समुद्री क्षेत्र को भी कई चुनौतियों का सामाना करना पड़ रहा है, जिसमें जलवायु परिवर्तन के प्रभाव की वजह से समुद्र के जलस्तर का बढ़ना, समुद्र के तापमान का बढ़ना, समुद्र का अम्लीय होना, तटीय कटाव आदि शामिल हैं। पर्यावरण में ये परिवर्तन समुद्री पारितंत्र को ऐसा नुकसान पहुंचा रहे हैं जिसे ठीक नहीं किया जा सकता और नीली अर्थव्यवस्था के संवहनीय विकास को संकट में भी डाल रहे हैं।[iii]
भारत सरकार ने 2019 में जिस ‘2030 तक नए भारत की परिकल्पना’ की घोषणा की थी, उसमें ‘नीली अर्थव्यवस्था’ को विकास के दस प्रमुख क्षेत्रों में से एक बताया गया था।[iv] इससे साफ़ पता चलता है कि नीली अर्थव्यवस्था भारत की आर्थिक विकास रणनीति का एक अनिवार्य हिस्सा है। इसके अलावा, भारत ने 100 अरब की महासागर– आधारित अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य भी रखा है, जो जीडीपी में 9 प्रतिशत की हिस्सेदारी रखेगी,[v] आज यह लगभग 4 प्रतिशत की हिस्सेदारी रखता है।[vi]
वर्ष 2021 में पक्षकारों के सम्मेलन (सीओपी) के 26वें सत्र में, भारत ने अपने 'पंचामृत वादे' के अंश के तौर पर 2070 तक शुद्ध शून्य का लक्ष्य हासिल करने की घोषणा की थी।[vii] इस प्रतिबद्धता में कई क्षेत्रों का डीकार्बनाइज़ेशन (कार्बन उत्सर्जन को कम करना) करना और समुद्री डीकार्बनाइज़ेशन पर विशेष रूप से ज़ोर देना शामिल था।[viii] भारत का वर्ष 2070 तक शुद्ध शून्य (नेट ज़ीरो) का लक्ष्य जहाजरानी क्षेत्र को 2030 तक प्रति टन कार्गो पर कार्बन उत्सर्जन में 30 प्रतिशत की कमी और अपने बड़े बंदरगाहों पर अक्षय ऊर्जा की कुल मांग में 60 प्रतिशत की वृद्धि हासिल करने के लिए विवश करता है।[ix] इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय (MoPSW) ने 2023 में ‘हरित सागर हरित बंदरगाह दिशानिर्देश’ जारी किए,[x] जो भारतीय बंदरगाहों को अलग– अलग हरित पहल शुरू करने के लिए मौलिक रूपरेखा प्रदान करती है।[xi]
समुद्री डीकार्बनाइज़ेशन के विशेष तत्व में से एक है हरित समुद्री परिवहन को अपनाना। इसमें नौपरिवहन के लिए हरित हाइड्रोजन, अमोनिया और जैव–ईंधन जैसे दूसरे ईंधन का प्रयोग करना, हरित गलियारा बनाना और बंदरगाह पर हरित अवसंरचनाओं का निर्माण करना शामिल है। हरित समुद्री परिवहन मछली पालन और पर्यटन जैसे दूसरे विशेष क्षेत्रों के लिए भी लाभकारी होगा जो भारत की नीली अर्थव्यवस्था के मुख्य चालक हैं।
इसके अलावा, संवहनीय तरीकों को बढ़ावा देकर वे जलवायु लचीलेपन को बनाने और पर्यावरण से जुड़ी आपदाओं को कम करने में भी मदद करते हैं। इस शोधपत्र का उद्देश्य यह समझाना है कि कैसे हरित समुद्री परिवहन समुद्री क्षेत्र को 2070 तक भारत के नेट ज़ीरो के लक्ष्य की ओर योगदान करने में मदद करता है और विश्लेषण करता है कि यह कैसे भारत और आईओआर में नीली अर्थव्यवस्था को अधिक संवहनीय बनाता है।
हरित समुद्री परिवहन 2070 तक नेट ज़ीरो के लक्ष्यों को बढ़ावा दे रहा है
भारत का 95 प्रतिशत से अधिक व्यापार समुद्री मार्ग से होता है, इसलिए हरित समुद्री परिवहन के लिए भारत की कोशिश समुद्री डीकार्बनाइज़ेशन को बहुत बढ़ा सकती है, जिससे इस क्षेत्र को नेट– ज़ीरो लक्ष्य में मदद मिलेगी।[xii] बंदरगाहों पर हरित अवसंरचनाओं को बनाने में अपटतीय पवनचक्कियों और सौर पैनल आदि से अक्षय ऊर्जा का प्रयोग करना शामिल है। इसके अलावा, इसमें बंकरिंग टर्मिनल और तटीय ऊर्जा एकीकरण का प्रयोग भी शामिल है। बंकरिंग टर्मिनल तटवर्ती अवसंरचनाओं या नाव,[xiii] के माध्यम से बंदरगाह पर हरित ईंधन का भंडार करते हैं जबकि तटीय ऊर्जा एकीकरण में डॉक किए गए जहाजों को स्थानीय ग्रिड से जोड़ा जाता है जिससे जहाज अपने इंजन बंद कर सकते हैं।
दूसरी तरफ, हरित जहाजरानी गलियारों में कम उत्सर्जन वाले ईंधन और ऊर्जा की बचत करने वाली दूसरी तकनीकों जैसे पवन– सहायता प्राप्त प्रणोदन, उन्नत पतवार कोटिंग्स और अनुकूलित ईंजन प्रणालियों का प्रयोग होता है।[xiv] इसके अलावा, आईओटी–प्रेरित सेंसर, एआई– चालित एनालिटिक्स और प्रदर्शन निगरानी प्रणालियां (PMS) जैसी डिजिटल तकनीक से जहाज़ सख्त पर्यावरणीय मानकों का पालन कर पाते हैं और अभियान के दौरान अपने उत्सर्जन की डिजिटल निगरानी कर पाते हैं।[xv]
भारत का पहला हरित जहाजरानी गलियारा कांडला और तूतीकोरिन के बीच बन रहा है।[xvi] इसके अलावा, तीन बड़े बंदरगाह– पारादीप, कोच्चि और तूतीकोरिन हरित संक्रमण का नेतृत्व कर रहे हैँ। इन तीनों बंदरगाह को हरित हाइड्रोजन हब भी बनाया गया है जहाँ भारत के राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के तहत हाइड्रोजन का उत्पादन, भंडारण और निर्यात आवश्यक है।[xvii] पारादीप बंदरगाह, जिसने 30 किलोमीटर की रेल लाइन के विद्युतीकरण का काम पूरा कर लिया है,[xviii] तटीय विद्युत एकीकरण [xix] और सौर संयंत्रों को लगाने का काम भी शुरू कर रहा है।[xx]
दूसरी तरफ, तूतीकोरिन बंदरगाह ने ईवी चार्जिंग स्टेशन लगाए हैं और इस प्रकार वस्तुओं के परिवहन के लिए इलेक्ट्रिक गाड़ियों का प्रयोग किया जा रहा है। कोच्चि बंदरगाह में स्मार्ट पोर्ट टेक्नोलॉजी (जैसे गाड़ियों पर इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) सेंसर लगाना) को शामिल करने से[xxi] समय पर जहाज के रख–रखाव संबंधी सूचना भेजने और गाड़ियों से होने वाले उत्सर्जन को कम करने में मदद मिली है क्योंकि ये सेंसर एक समय में कुछ ही गाड़ियों के प्रवेश की अनुमति देते हैं जिससे भीड़ नहीं लगती। इसके अलावा, आज सभी बड़े भारतीय बंदरगाहों ने अक्षय ऊर्जा का प्रयोग करने की क्षमता निर्मित कर ली है ताकि जहाजरानी क्षेत्र को उनके निर्धारित नेट–ज़ीरो उत्सर्जन लक्ष्यों के साथ तालमेल बिठाने में मदद मिल सके।
नीचे दी गई तालिका में भारतीय बंदरगाहों पर अक्षय क्षमता की स्थिति बतायी गई है।
|
बंदरगाह का नाम |
अक्षय ऊर्जा क्षमता (मेगावाट/ MW में) |
|
कांडला बंदरगाह |
20 मेगावाट (सौर + पवन) (2025) |
|
विशाखापत्तनम बंदरगाह |
10 मेगावाट (सौर) (2023) |
|
न्यू मैंगलोर बंदरगाह |
5.2 मेगावाट (सौर) (2023) |
|
तूतीकोरिन बंदरगाह |
9 मेगावाट (सौर + पवन+ छत पर लगाए जाने वाली सौर प्रणाली + 1 मेगावाट भूमि– आधारित सौर सुविधा का निर्माण) (2025) |
|
कोचीन बंदरगाह |
100 kWp और 150 kWp ग्रिड– कनेक्टेड सौर संयंत्र (2024) |
|
चेन्नई बंदरगाह |
2 MWp रूफटॉप सौर ऊर्जा उत्पादित करने वाले पीवी यूनिट्स लगाने का प्रस्ताव (2025) |
|
पारादीप बंदरगाह |
10 मेगावाट सौर ऊर्जा संयंत्र (2025) |
|
मोरमुगाओ बंदरगाह |
3 मेगावाट पावर |
|
मुंबई बंदरगाह |
रूफ टॉप सौर ऊर्जा उत्पादन क्षमता – 1500 केवीए (2024–2025) |
|
जवाहलाल नेहरू बंदरगाह प्राधिकरण (JNPA) |
छत और भूमि पर लगी सौर ऊर्जा संयंत्र की कुल क्षमता 4.10 मेगावाट (2023) |
|
हल्दिया बंदरगाह |
2मेगावाट (AC) सौर पीवी ग्रिड बिजली संयंत्र (2025) |
|
कामराजार बंदरगाह |
स्थापित अक्षय ऊर्जा क्षमता: 320 KW S |
(स्रोत: लेखक ने इंडियाज़ ग्रीन मैरिटाइम ओडेसी, एजेंडा फॉर ए सस्टेनेबल ओशन इकॉनमी, प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो, 15 दिसंबर 2025 की रिपोर्ट से आंकड़े लेकर रिपोर्ट तैयार की है)
भारत के हरित समुद्री परिवहन के पहलुओं के माध्यम से संवहनीय नीली अर्थव्यवस्था की ओर:
क. हरित बंदरगाह
बंदरगाह, आर्थिक विकास और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी के लिए आवश्यक होने के साथ– साथ संवहनीय विकास और नवाचार के लिए भी प्रेरक हो सकते हैं।[xxii] हरित बंदरगाह भारत की नीली अर्थव्यवस्था के लिए प्रेरक का काम करते हैं। ये बंदरगाहों में आधुनिक, पर्यावरण के अनुकूल अवसंरचनाओं और तकनीकी नवाचार को अपनाकर संवहनीय विकास को बढ़ावा देते हैं।[xxiii] ये तरीके नए निवेश को आकर्षित करने और तटीय समुदाय के लिए रोज़गार बढ़ाने में गुणक प्रभाव पैदा करते हैं।[xxiv] हरित बंदरगाहों से मिलने वाले आकर्षक निवेश में हरित वित्त पोषण और ब्लू बॉन्ड्स शामिल हैं जो सख़्त पर्यावरणीय, सामाजिक और शासन (ईएसजी) मानकों का पालन करते हैं। ये मानक कोष का तीसरे– पक्ष से सत्यापन और उनका प्रयोग केवल पर्यावरण संबंधी अच्छे कामों के लिए किया जाना सुनिश्चित करते हैं।[xxv]
हरित अवसंचरना को शामिल करने से परंपरागत बंदरगाहों के मुकाबले रोज़गार के अधिक मौके मिलते हैं और इसलिए कर्मचारियों को कुशल बनाना और उन्हें प्रशिक्षण देने की आवश्यकता बढ़ी है। ‘हरित सागर’ दिशानिर्देशों में हरित बंदरगाहों के लिए स्थानीय युवाओं को विशेष बंदरगाह– संचालन संबंधी नौकरियों के लिए प्रशिक्षित करने संबंधी नियम शामिल हैं।[xxvi] इस संबंध में, मुंबई में जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह प्राधिकरण के ‘बहु– कौशल एवं विकास केंद्र’ ने 2000 से अधिक स्थानीय युवाओं को समुद्र और रसद से संबंधित क्षेत्रों में प्रशिक्षण प्रदान किया है।[xxvii]
इसके अलावा, हरित बंदरगाह समुद्री क्षेत्र में स्थायी करिअर के मार्ग बना रहे हैं। उदाहरण के लिए, वधावन बंदरगाह परियोजना लिमिटेड वधावन क्षेत्र के स्थानीय लोगों को समुद्री केटरिंग में शिक्षण पाठ्यक्रम उपलब्ध करा रहा है, जिससे उन्हें नाविक के रूप में करिअर बनाने में मदद मिल रही है।[xxviii] इसके अलावा, बंदरगाहों पर आमतौर पर ऐसे कार्यस्थल के रूप में देखा जाता है जहाण अधिक श्रमिकों की आवश्यकता वाले कामों की वजह से अधिक पुरुष कार्यबल होता है। हरित बंदरगाहों में कई कार्यों में बढ़ता डिजिटलाइजेशन, जिसमें लोगों में एआई और कोडिंग में कुशलता चाहिए होती है, अब महिला कार्यबल की अधिक भागीदारी की अनुमति देता है –जिससे सबको साथ लेकर चलने वाले और रोज़गार के समान अवसर को बढ़ावा मिलता है।
हरित बंदरगाह, अंदरूनी इलाकों में अक्षय ऊर्जा को अपनाने को भी बढ़ावा दे रहे हैं। हरित बंदरगाह पर परिवहन के इलेक्ट्रिक तरीकों का बढ़ता प्रयोग, बंदरगाहों और अंदरूनी इलाकों के बीच चलने वाली ट्रेनों और ट्रकों के लिए भी हरित विकल्प अपनाने की संभावना को बढ़ाता है। बंदरगाहों को बड़े शहरों से जोड़ने वाले बहुमॉडल रसद गलियारों में हरित ईंधन को और अपनाने से आपूर्ति श्रृंखला भी कार्बन उत्सर्जन कम कर सकती है। [xxix]

यह तस्वीर दिखाती है कि कैसे भारत के हरित बंदरगाहों के लिए किए गए प्रयार नीली अर्थव्यवस्था को प्रेरित करते हैं
(स्रोत: यह तस्वीर लेखक ने नैपकिन एआई का प्रयोग कर बनायी है)
‘हरित सागर’ दिशानिर्देश में बंदरगाहों को अपने कार्यों के लिए पर्यावरणीय प्रबंधन रूपरेखा (EMF) और पर्यावरणीय प्रदर्शन संकेतकों (EPF) जैसे पर्यावरणीय रूपरेखा अपनाने के लिए भी कहा गया है।[xxx] ये रूपरेखा, अच्छे विश्लेषण के लिए उत्सर्जन, ऊर्जा की खपत, हवा की गुणवत्ता, अपशिष्ट निपटान मात्रा आदि के आंकड़ों को अधिक संरचित तरीके से तैयार करती है।[xxxi] इससे बंदरगाह आम चुनौतियों को पहचान पाएंगे और उन्हें कम करने के विशेष उपायों को लागू कर पाएंगे।[xxxii] इन रूपरेखा को समय– समय पर जारी करने से, तटीय समुदायों और दूसरे हितधारकों के लिए फीडबैक मिल सकता है ताकि वे समुदाय की चिंताओं को बंदरगाह के अधिकारियों तक पहुँचा सकें। [xxxiii]

तस्वीर में पर्यावरण प्रदर्शन संकेतक का नमूना दिखाया गया है
(स्रोत: ‘हरित सागर’ हरित बंदरगाह दिशानिर्देश, पत्तन, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय, भारत सरकार)
कई भारतीय बंदरगाह, विशेष रूप से बंगाल की खाड़ी में, चक्रवात, तूफ़ान और बाढ़ जैसे प्राकृतिक संकटों का सामना करते हैं जिससे उनके संचालन और आस– पास के पारितंत्र को नुकसान होता है।[xxxiv] भारत में हरित बंदरगाहों ने निर्माण के दौरान पर्यावरण के अनुकूल डिजाइन अपनाए हैं ताकि इन जलवायु जोखिम से जलवायु लचीलेपन को और सुदृढ़ किया जा सके। जैसे, पारादीप बंदरगाह ने आईओटी सेंसर का प्रयोग करके वास्तविक समय में निगरानी को सरल बनाया और बाद में बंदरगाह के आस– पास हरित कवर विकसित कर चक्रवात और समुद्र के बढ़ते जलस्तर के प्रभाव को कम किया है।[xxxv] वायु प्रदूषण और पार्टिकुलेट मैटर के उत्सर्जन को बंदरगाह क्षेत्र से बाहर फैलने से रोकने के लिए पारादीप बंदरगाह ने पूरे बंदरगाह के चारों ओर नेट बैरियर लगाए हैं और वस्तुओं के रख–रखाव को मशीनीकृत किया है।[xxxvi]
हरित बंदरगाहों ने भूजल को रिचार्ज करने, पेड़ लगाने और बारिश के पानी को जमा करने जैसे स्थायी तरीकों का प्रयोग करके समुद्री पर्यावरण पर दबाव भी कम किया है।[xxxvii] बांस, लकड़ी या पुनःचक्रित की गई वस्तुओं जैसे स्थानीय और संवहनीय वस्तुओं को अपनाकर एवं स्मार्ट एलईडी लाइटिंग, हीटिंग और कूलिंग (एचएवीसी) अवसंरचना आदि जैसे ऊर्जा की बचत करने वाले उपकरणों का प्रयोग करके वे क्षेत्र के स्थायी विकास में मदद करते हैं।[xxxviii]
ख. हरित नौवहन
यह स्पष्ट है कि हरित नौवहन गलियारे में हरित ईंधन के प्रयोग से समुद्री प्रदूषण कम होता है क्योंकि हरित ईंधन परंपरागत ईंधन की तुलना में पानी में बेहतर तरीके से घुलते हैं और तेल रिसाव की घटनाओं को कम करते हैं।[xxxix] हरित गलियारा अवसंरचना को आधुनिक बनाकर और कर– आधारित प्रलोभन देकर हरित पोतों के लिए[xl] एक पारितंत्र बनाने पर सरकार का बढ़ता ध्यान, अंतर्देशीय जलमार्ग की तरफ आम बदलाव को बढ़ावा दे रहा है। इस तरह, हरित नौवहन के लिए भारत के प्रयासों में अंदरूनी जलमार्गों का उचित प्रयोग शामिल है जिसका उद्देश्य टियर II और III शहरों से कनेक्टिविटी को बढ़ाना है। इसके अलावा, इन मार्गों में डिजिटल नेविगेशन टूल्स का प्रयोग होता है जिससे सुरक्षा और कुशलता बेहतर होती है और जल्दी खराब होने वाले सामान और दूसरे ज़रूरी व्यापार के लिए समय पर रास्ता मिल जाता है।
इसके अलावा, आईओआर में हरित जहाजरानी गलियारा की मांग बढ़ रही है। इसका अर्थ है, नए मार्ग, साझेदारी और इस प्रकार अंतरराष्ट्रीय सहयोग, तकनीक का साझाकरण और व्यापार के बेहतर नए अवसर। भारत हरित नौवहन के क्षेत्र में एक जैसी सोच वाले देशों के साथ भी सहयोग कर रहा है। इसके लिए उसने हरित ईंधन के विकास को बढ़ाने के लिए डेनमार्क और नॉर्वे के साथ समझौता किया है।[xli] भारत ने हरित नौवहन गलियारा बनाने के लिए माल्टा, नीदरलैंड्स और श्रीलंका के साथ भी सहयोग को बढ़ाया है।[xlii] इससे भी ज़रूरी बात यह है कि भारत और रूस ने हरित ईंधन का प्रयोग कर उत्तरी समुद्री मार्ग पर सहयोग को बेहतर करने का निर्णय लिया है, जिससे आर्कटिक क्षेत्र में उत्सर्जन कम होगा। [xliii]

भारत के हरित नौवहन के पहलुओं को दर्शाती तस्वीर जो नेट ज़ीरो लक्ष्य को मज़बूत करेगी और नीली अर्थव्यवस्था के स्थायी प्रयोग में मदद मिलेगी
(स्रोत: लेखन ने नैपकिन AI का प्रयोग कर तस्वीर बनाई है)
आईओआर में स्थायी नीली अर्थव्यवस्था बनाने की राह
हरित बंदरगाह और नौवहन के विकास एवं उचित तरीके से लागू करने में कई चुनौतियां हैं जिन्हें हरित ईंधन के लिए अवसंरचना की सीमित उपलब्धता, वित्त पोषण तक सीमित पहुँच और स्थायी तकनीक अपनाने की अधिक लागत शामिल है। आईओआर में, कई देशों को ऐसी ही मुश्किलों का सामना करना पड़ता है और वे जलवायु जोखिम के प्रति भी संवेदनशील हैं जो किसी भी पर्यावरणीय लक्ष्य को पूरा करने की उनकी क्षमता में बाधा डालते हैं।
हरित समुद्री परिवहन, भारत की नीली अर्थव्यवस्था को और स्थायी बनाने के साथ– साथ आईओआर के आसपास भी एक संवहनीय नीली अर्थव्यवस्था को बढ़ावा दे सकता है। ग्लोबल साउथ के कई देशों में पहले से ही नीली अर्थव्यवस्था की क्षमता बहुत अधिक है, और यदि इसका उचित प्रयोग किया जाए, तो यह उनके आर्थिक विकास को बढ़ा सकता है। इसलिए आईओआर के देशों के लिए यह ज़रूरी है कि वे सामाजिक– आर्थिक विकास के लिए नीली अर्थव्यवस्था की क्षमता का लाभ उठाने के लिए सूचना और प्रौद्योगिकी के साझाकरण समेत मज़बूत साझेदारी करें। इससे सूचना और प्रौद्योगिकी साझाकरण एवं वित्तपोषण के अधिक अवसर मिलेंगे।
भारत समुद्री अनुसंधान को बढ़ाने के लिए समुद्र पर आधारित शिक्षा और प्रौद्योगिकी के पाठ्यक्रम में इज़ाफा कर रहा है। जैसे, भारतीय समुद्री विश्वविद्यालय (IMU) इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी डिज़ाइन एंड मैन्युफैक्चरिंग कांचीपुरम (IIITDM-K) के बीच सहयोग समुद्री क्षेत्र में क्षमता निर्माण में मदद कर रहा है।[xliv] इसके अलावा, भारत समुद्र– केंद्रित पाठ्यक्रम शुरू करने के लिए विभिन्न आईओआर देशों के शैक्षणिक संस्थानों के साथ साझेदारी कर सकता है, जिससे क्षेत्र में नवाचार और विकास को बढ़ावा देने के लिए कुशल कार्यबल का निर्माण हो सके।
हरित बंदरगाह पर हरित ईंधन बनाने से यह स्पष्ट है कि हरित समुद्री परिवहन की सुविधा से हरित ईंधन, हरित बंदरगाह और हरित नौवहन के बीच पूरे लिंक मज़बूत होते हैं।[xlv] इसके अलावा, इससे जहाज़ मालिकों, ईंधन आपूर्तिकर्ताओं और बंदरगाह संचालकों के बीच नवाचार होगा और उस इलाके में रसद, बंदरगाह प्रबंधन और समुद्री यात्रा का प्रशिक्षण मिलेगा।
*****
*जीशान अली, भारतीय वैश्विक परिषद, नई दिल्ली में शोध प्रशिक्षु हैं।
अस्वीकरण : यहां व्यक्त किए गए विचार निजी हैं।
डिस्क्लेमर: इस अनुवादित लेख में यदि किसी प्रकार की त्रुटी पाई जाती है तो पाठक अंग्रेजी में लिखे मूल लेख को ही मान्य माने ।
संदर्भ
[i]Surging blue economy, increasing conflict risks and mitigation strategies, U Rashid, Frontiers in Marine Science, May 14, 2025, https://www.frontiersin.org/journals/marine-science/articles/10.3389/fmars.2025.1499386/full
[ii] Blue Economy Definitions, World Bank, https://www.un.org/regularprocess/sites/www.un.org.regularprocess/files/rok_part_2.pdf
[iii] Impact of Climate Change on the Blue Economy of the Indian Ocean Region: Case Study of the Fisheries Sector, Anagha P, Vivekananda International Foundation, September 9, 2022, https://www.vifindia.org/print/10656?slide=%24slideshow%24#:~:text=Extreme%20weather%20events%20will%20also,be%20out%20of%20their%20capacities.
[iv] India’s Blue Economy, A Draft Policy Framework, Economic Advisory Council to the Prine Minister of India, September 2020, https://incois.gov.in/documents/Reports/Others/Report_2020_20251023100635.pdf
[v] India Aims to Target over 100 Billion “Blue Economy” Through Deep Ocean Mission and Ocean Resources – Minister Dr. Jitendra Singh, Press Information Bureau, Ministry of Earth Sciences, July 12, 2021, https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=1734881®=3&lang=2
[vi] Navigating India's blue economy landscape: Tapping the tide of innovation and transformation, KMPG India, July 2025, https://assets.kpmg.com/content/dam/kpmgsites/in/pdf/2025/07/navigating-indias-blue-economy-landscape
[vii] Net zero emissions target, Press Information Bureau, Ministry of Environment, Forest and Climate Change, August 03, 2023, https://www.pib.gov.in/PressReleaseIframePage.aspx?PRID=1945472®=3&lang=2
[viii] India’s Maritime Decarbonization, Directorate General of Shipping, October 27, 2025, https://betadgs.dgshipping.gov.in/download/1762776115_6911d433e9d6c_speaker-note-for-abb-decarbonization-event-dt271025.pdf
[ix] GREEN PORTS & SHIPPING CHARTERING SUSTAINABLE MARITIME FUTURE, ORGANISED BY: THE V. O. C. PORT AUTHORITY & BHARAT PRAVAH ONE, https://www.vocport.gov.in/api/files/news-media/newsletter/newsletter-1765534607960-336332823.pdf
[x] "Harit Sagar" Green Port Guidelines, Ministry of Ports, Shipping & Waterways, Government of India, May 11, 2023, https://shipmin.gov.in/sites/default/files/Harit%20Sagar%20-%20Green%20Port%20Guidelines%20.pdf
[xi] Ibid
[xii] India Maritime Week 2025 Showcases Green Growth, Port Modernisation, and Defence Shipbuilding Partnerships, Press Information Bureau, Ministry of Ports, Shipping and Waterways, October 28, 2025, https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2183509®=3&lang=2#:~:text=Sonowal%20noted%20that%20India's,key%20driver%20of%20climate%20action.
[xiii] ARE BUNKERING TERMINALS KEEPING PACE WITH THE LOW-CARBON TRANSITION?, Marine and Offshore, February 13, 2024, https://marine-offshore.bureauveritas.com/magazine/are-bunkering-terminals-keeping-pace-low-carbon-transition#:
[xiv] Key considerations for establishing a green shipping corridor, DNV, March 25, 2024, https://www.dnv.com/expert-story/maritime-impact/key-considerations-for-establishing-a-green-shipping-corridor/#:~:text=A%20green%20shipping%20corridor%20is,participate%20in%20the%20corridor%20partnerships.
[xv] Montaser N.A. Ramadan, Mohammed A.H. Ali, Shin Yee Khoo, Mohammad Alkhedher, Mohammad Alherbawi, Real-time IoT-powered AI system for monitoring and forecasting of air pollution in industrial environment, Ecotoxicology and Environmental Safety, Volume 283, 2024, ISSN 0147-6513, https://doi.org/10.1016/j.ecoenv.2024.116856.
[xvi] Green Shipping Corridors: Charting Zero-Emission Maritime Trade, Dr Shishir Shrotriya, Research and Information System for Developing Countries, August 04, 2024, https://ris.org.in/sites/default/files/Publication/PB-4-Dr-Shishir-Shrotriya_0.pdf
[xvii] Three Major Ports Recognised as Green Hydrogen Hubs under National Green Hydrogen Mission, Press Information Bureau, Ministry of Ports, Shipping and Waterways, October 10, 2025, https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2177591®=3&lang=2#:~:text=The%20Ministry%20of%20New%20and%20Renewable%20Energy,*%20**Paradip%20Port%20Authority**%20Located%20in%20Odisha
[xviii] GREEN PORTS & SHIPPING CHARTERING SUSTAINABLE MARITIME FUTURE, ORGANISED BY: THE V. O. C. PORT AUTHORITY & BHARAT PRAVAH ONE, https://www.vocport.gov.in/api/files/news-media/newsletter/newsletter-1765534607960-336332823.pdf
[xix] Ibid.
[xx] Ibid.
[xxi] Navigating India's blue economy landscape: Tapping the tide of innovation and transformation, KMPG India, July 2025, https://assets.kpmg.com/content/dam/kpmgsites/in/pdf/2025/07/navigating-indias-blue-economy-landscape
[xxii] GREEN PORTS & SHIPPING CHARTERING SUSTAINABLE MARITIME FUTURE, ORGANISED BY: THE V. O. C. PORT AUTHORITY & BHARAT PRAVAH ONE, https://www.vocport.gov.in/api/files/news-media/newsletter/newsletter-1765534607960-336332823.pdf
[xxiii] Blue Economy Imperatives for Global South with reference to India, Swati Prabhu, Observer Research Foundation, October 2025, https://www.orfonline.org/public/uploads/upload/20251028200039.pdf#:~:text=Developing%20Sustainable%20Ports%20Incorporating%20green%20building%20principles%2C,minimising%20emissions%20from%20idling%20vessels%20and%20trucks.
[xxiv] The advantage in pushing for green ports is that it creates a multiplier effect on India’s blue economy, Girish Aggarwal, ET Government, November 17, 2024, https://government.economictimes.indiatimes.com/blog/green-ports-policy-push-tech-integration-infra-advancement-for-sustainable-operations/115376219
[xxv] Blue bonds: Sustainable financing for the Blue Economy around the Indian Ocean. Rogge, E. Jindal Global Law Review 16, 155–177 (2025). https://doi.org/10.1007/s41020-025-00263-5
[xxvi] ‘Harit Sagar" Green Port Guidelines, Ministry of Ports, Shipping & Waterways, Government of India, May 11, 2023, https://shipmin.gov.in/sites/default/files/Harit%20Sagar%20-%20Green%20Port%20Guidelines%20.pdf
[xxvii] TRAINING AND SKILL DEVELOPMENT, Jawaharlal Nehru Port Authority, https://www.jnport.gov.in/page/training-and-skill-development/aDVGek9CVFEyYVp6MzIvMkdEVmJ0QT09
[xxviii] MoU Signed Between Vadhvan Port Project Ltd. and DVET, Maharashtra to Expand Skill Development in Vadhvan Region, Press Information Bureau, Ministry of Ports, Shipping and Waterways, October 10, 2025
[xxix] Blue Economy Imperatives for Global South with reference to India, Swati Prabhu, Observer Research Foundation, October 2025, https://www.orfonline.org/public/uploads/upload/20251028200039.pdf#:~:text=Developing%20Sustainable%20Ports%20Incorporating%20green%20building%20principles%2C,minimising%20emissions%20from%20idling%20vessels%20and%20trucks.
[xxx] Ibid.
[xxxi] Smart Green Ports: A Sustainable Solution for the Maritime Industry in a Changing Climate, Mohamed Elhussieny, Journal of Multidisciplinary Adaptive Climate Insights
(MACI), June 2025, http://dx.doi.org/10.21622/MACI.2025.02.1.1162
[xxxii] Environmental management of ports and harbours — implementation of policy through scientific monitoring, C Wooldridge, Marine Policy, July 30, 1999, https://doi.org/10.1016/S0308-597X(98)00055-4
[xxxiii] Smart Green Ports: A Sustainable Solution for the Maritime Industry in a Changing Climate, Mohamed Elhussieny, Journal of Multidisciplinary Adaptive Climate Insights
(MACI), June 2025, http://dx.doi.org/10.21622/MACI.2025.02.1.1162
[xxxiv] World Economic Forum, Nature Positive: Role of the Port Sector, Insight Report, January 2025,
World Economic Forum,
https://reports.weforum.org/docs/WEF_Nature_Positive_Role_of_the_Ports_Sector.pdf
[xxxv] GREEN PORTS & SHIPPING CHARTERING SUSTAINABLE MARITIME FUTURE, ORGANISED BY: THE V. O. C. PORT AUTHORITY & BHARAT PRAVAH ONE, https://www.vocport.gov.in/api/files/news-media/newsletter/newsletter-1765534607960-336332823.pdf
[xxxvi] Ibid
[xxxvii] India’s Green Maritime Odyssey, Agenda for a Sustainable Ocean Economy, Press Information Bureau, December 15, 2025. https://www.pib.gov.in/PressNoteDetails.aspx?id=156496&NoteId=156496&ModuleId=3®=6&lang=1
[xxxviii] ‘Harit Sagar" Green Port Guidelines, Ministry of Ports, Shipping & Waterways, Government of India, May 11, 2023, https://shipmin.gov.in/sites/default/files/Harit%20Sagar%20-%20Green%20Port%20Guidelines%20.pdf
[xxxix] Chandra Prakash Garg, Vishal Kashav, Jasmine Siu Lee Lam, Evaluation of value creating factors in green shipping corridors, Transportation Research Part D: Transport and Environment, Volume 145, 2025, https://doi.org/10.1016/j.trd.2025.104790.
[xl] Harit Nauka, Inland Vessels Green Transition Guidelines, Ministry of Ports, Shipping and Waterways, Government of India, https://shipmin.gov.in/sites/default/files/harit.pdf
[xli] India’s Green Maritime Odyssey, Agenda for a Sustainable Ocean Economy, Press Information Bureau, December 15, 2025. https://www.pib.gov.in/PressNoteDetails.aspx?id=156496&NoteId=156496&ModuleId=3®=6&lang=1
[xlii] Ibid.
[xliii] Ibid.
[xliv] Indian Maritime University and IIITDM – Kancheepuram sign MoU for Academic Collaboration, Press Information Bureau, Special Service and Features, July 29, 2024, https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2038663®=3&lang=2
[xlv] Peričin L, Grbić L, Vučetić Š, Šundov M. Green Port Policy: Planning and Implementation of Environmental Projects—Case Study of the Port of Gaženica. Sustainability. 2025; 17(21):9557. https://doi.org/10.3390/su17219557