परिचय
5 फरवरी 2026 को, अमेरिका और रूस के बीच हुआ नया रणनीतिक हथियार नियंत्रण समझौता (न्यू स्टार्ट/ New START) समाप्त होने वाला है। वर्ष 2011 में लागू होने के बाद से, न्यू स्टार्ट ने विश्व के दो सबसे बड़े परमाणु– हथियार संपन्न देशों के बीच रणनीतिक परमाणु नियंत्रण की नींव का काम किया है। सामरिक शस्त्र सीमा वार्ता (एसएएलटी । और ।।) जैसी पिछले समझौते, जो हथियारों या विस्तृत सत्यापन प्रणालियां बनाने की बजाय केवल मिसाइल लॉन्चर पर संख्याओं की सीमा पर ध्यान देते थे, के उलट, न्यू स्टार्ट (New START) ने सत्यापन, आंकड़ों का हस्तांतरण और निरीक्षण का एक नियमित तरीका आरंभ किया, जिससे दोनों महाशक्तियों के पास मौजूद परमाणु हथियारों के बारे में अंदाज़ा लगाया जा सका और गलतफ़हमियां कम हुईं।[i] इसका समाप्त होना वैश्विक परमाणु अप्रसार व्यवस्था के लिए असुरक्षा का पल है, विशेष रूप से ऐसे समय में जब भू– राजनीतिक प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है, बड़ी शक्तियों के बीच विश्वास कम हुआ है और परमाणु हथियारों का ज़खीरा तेज़ी से आधुनिक होता जा रहा है। सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि क्या नियंत्रण और पारदर्शिता का संस्थागत अवसंरचना– जिस पर अप्रसार व्यवस्था निर्भर करती है– इस परिवर्तन के बाद भी टिक पाएगी।
न्यू स्टार्ट ( New START) का हासिल
न्यू स्टार्ट (New START) समझौते के समाप्त होने का अर्थ समझने के लिए यह जानना ज़रूरी है कि इसमें विशेष रूप से क्या दिया गया था। न्यू स्टार्ट (New START), जिस पर 2010 में हस्ताक्षर किया गया था और फरवरी 2011 में लागू हुआ, कानूनी रूप से आवश्यक रूपरेखा थी जिसने सटीक संख्या की सीमा लगाई, संस्थागत पारदर्शिता बनाई और अमेरिका एवं रूस के बीच रणनीतिक परमाणु संबंधों में नियमित सत्यापन प्रणाली को शामिल किया।[ii]
इस समझौते का मुख्य उद्देश्य रणनीतिक परमाणु बल पर मात्रात्मक सीमा निर्धारित करना था। समझौते ने हर पक्ष को अधिकतम 1,550 परिनियोजित किए गए रणनीतिक परमाणु हथियारों तक सीमित कर दिया जो शीत युद्ध के समय के स्तर से बहुत कम था, जब दोनों पक्षों में 10,000 हथियारों से अधिक थे। इन हथियारों को केवल कुछ ही डिलीवरी सिस्टम पर परिनियोजित किया जा सकता था, जैसे अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (ICBMs), सबमरीन लॉन्च बैलिस्टिक मिसाइल (SLBMs), और भारी बमवर्षक विमानों में। ये सीमाएं केवल संख्या को कम करने के लिए नहीं बनाई गई थीं बल्कि बल संरचना को इस तरह से बनाने के लिए भी बनाई गई थीं जिससे अस्थिर करने वाली स्थिति और बहुत अधिक तनाव को रोका जा सके।[iii]
विशेष बात यह है कि न्यू स्टार्ट (START) ने गिनती का एक सरल और पारदर्शी नियम प्रस्तुत कियाः हर नियुक्त भारी बमवर्षक विमान को एक हथियार माना जाएगा, चाहे वह असल में कितने भी परमाणु हथियार ले जा सके। इस नियम ने अनिश्चितता को कम किया और तकनीकी कमियों का लाभ उठाने के लिए मिलने वाले प्रोत्साहन को भी हतोत्साहित किया जिससे अनुपालन की सत्यतता को जांचना और समझना सरल हो गया।[iv] फरवरी 2018 तक, अमेरिका और रूस दोनों ने आधिकारिक रूप से इन सीमाओं को पूरा कर लिया था, इस तथ्य की पुष्टि समझौता– अनिवार्य आंकड़ों के आदान– प्रदान से हुई।
समझौते का स्थिरता पैदा करने वाला दूसरा योगदान सत्यापन और पारदर्शी व्यवस्था थी। न्यू स्टार्ट (START) के तहत, दोनों देशों को साल में दो बार अपने सामरिक बल के बारे में सभी आंकड़ों को साझा करना अनिवार्य था, जिसमें तैनात हथियार और डिलीवरी सिस्टम की सटीक संख्या, प्रकार और स्थान का साझा किया जाना शामिल था। इसके अलावा समझौता के तहत हर एक पक्ष के लिए प्रत्येक वर्ष 18 कार्यस्थल का प्रत्यक्ष मुआयना करना ज़रूरी था।[v] इन मुआयनों के साथ– साथ अधिसूचनाओं का एक सघन नेटवर्क भी था, जिसमें प्रत्येक वर्ष 1,600 से अधिक संदेशों का आदान– प्रदान किया जाता था। इन संदेशों में मिसाइलों और लॉन्चर के गतिविधि, परिवर्तन या उन्मूलन जैसी घटनाओं को कवर किया जाता था।[vi]
निरीक्षण और अधिसूचना ने मिलकर प्रत्येक पक्ष को दूसरे की सामरिक शक्तियों की करीब– करीब वास्तविक तस्वीर उपलब्ध कराई जिससे अनिश्चितता बहुत कम हो गई। इस समझे का महत्व इस बात में है कि इसने अंदाज़ों और खुफिया अनुमानों पर निर्भरता को किस तरह से कम किया जो एक साझा, सत्यापित डेटासेट पर आधारित जानकारी थी, जिसे सुविधाओं का भौतिक निरीक्षण करने के अधिकार से समर्थन मिला। इस नियमित बातचीत से कुछ हद तक अंदाज़ा लगाया जा सकता था जो बहुत अधिक राजनीतिक तनाव के समय में भी बना रहा, जिसमें 2014 के बाद का समय भी शामिल है जब यूक्रेन संकट और रूस के क्रीमिया पर कब्ज़े के बाद अमेरिका और रूस के बीच संबंध खराब हो गए थे।[vii]
अपने द्विपक्षीय प्रभावों के अलावा, न्यू स्टार्ट (START) ने वैश्विक परमाणु व्यवस्था में भी एक आवश्यक मानक भूमिका निभाई। अपनी मर्जी से आवश्यक सीमा और दखल देने वाले सत्यापन को स्वीकार कर, दो सबसे बड़ी परमाणु शक्तियों ने इस उसूल को ठोस बनाया कि परमाणु अप्रसार मुमकिन भी है और लागू भी किया जा सकता है।
तालिका 1: न्यू स्टार्ट (START) के तहत अमेरिका और रूस के परिनियोजित सामरिक परमाणु हथियारों के रुझान (2011–2026)
स्रोत: शस्त्र नियंत्रण संघ
न्यू स्टार्ट (START) के समाप्त होने के परिणाम और प्रभाव
फरवरी 2023 में, रूस ने न्यू स्टार्ट (START) को लागू करने में अपनी भागीदारी को समाप्त करने की घोषणा की थी जो इस समझौते के परिचालनात्मक जीवन का अहम मोड़ था। हालाँकि मॉस्को आधिकारिक रूप से पीछे नहीं हटा और कहा कि वह परिनियोजित सामरिक परमाणु हथियारों और डिलीवरी सिस्टम पर समझौते की संख्या सीमा का पालन करना जारी रखेगा लेकिन उसने आंकड़ों के द्विपक्षीय आदान– प्रदान और कार्यस्थल के प्रत्यक्ष मुआयने रोक दिए, जिससे सत्यापन व्यवस्था वास्तव में बेकार हो गयी।[viii] इसके बाद अमेरिका ने भी अपने मुआयने रोक दिए, यह मानते हुए कि आपसी मुआयने अब संभव नहीं थे।
यह विकास विश्लेषणात्मक रूप से आवश्यक है क्योंकि यह दिखाता है कि न्यू स्टार्ट (START) की स्थिर करने का मूल्य इसके सांख्यिकीय सीमाओं से कम, उन सत्यापन प्रणालियों से अधिक मेल खाती हैं जिन्होंने उन सीमाओं को विश्वसनीय बनाया।[ix] पारदर्शिता व्यवस्था के बंद होने से, दोनों पक्षों को राष्ट्रीय तकनीकी तरीकों और खुफिया मूल्यांकन पर अधिक निर्भर रहना पड़ा है जिससे अनिश्चितता बढ़ी है और सबसे बुरी स्थिति के लिए नियोजन को मज़बूती मिली है। इस लिहाज़ से, समझौते को इसके औपचारिक रूप से समाप्त होने से बहुत पहले ही कुछ सीमा तक कमज़ोर बना दिया गया था जिससे शस्त्र नियंत्रण में लगातार कमी को दर्शाया गया है।
न्यू स्टार्ट (New START) के समाप्त होने का सबसे स्पष्ट परिणाम यह हो सकता है कि अमेरिका और रूस के बीच संरचित पारदर्शिता समाप्त हो जाएगी। आंकड़ों के आदान– प्रदान और मुआयने के लिए निर्धारित रूपरेखा के अभाव में दोनों पक्ष खुफिया और रिमोट मॉनिटरिंग पर अधिक निर्भर रहेंगे जो वास्तव में अधूरे और राजनीतिक रूप से विवादित तरीके हैं।[x] बहुत अधिक भू– राजनीतिक तनाव के माहौल में, जब दोनों देश बड़े भंडार और तेज़ी से आधुनिकीकरण पर विचार कर रहे हैं तो सत्यापन रूपरेखा की कमी से सबसे बुरी स्थिति के नियोजन को बढ़ावा मिलेगा और गलत गणना का संकट बढ़ जाएगा।
स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट के एक अध्ययन में बताया गया है कि अक्सर, परमाणु हथियार न बनाने का फैसला जितना तकनीकी होता है उतना ही राजनीतिक और निर्देशात्मक भी होता है। यदि सबसे बड़ी परमाणु शक्तियां सीमा बनाए रखने को तैयार नहीं हैं तो अप्रसार के खिलाफ राजनीतिक बहस को जारी रखना मुश्किल हो जाएगा। न्यू स्टार्ट (New START) अकेले समाप्त नहीं हुआ है बल्कि यह तेज़ी से बढ़ते बहुध्रुवीय परमाणु माहौल की पृष्ठभूमि में हुआ है। चीन का जारी और तेज़ी से हो रहा परमाणु आधुनिकीकरण यह दर्शाता है कि परमाणु प्रतिस्पर्धा अब अमेरिका एवं रूस के बीच द्विध्रुवीय मुकाबला नहीं रहा।[xi]
चीन अपनी परमाणु शक्ति का आकार और अलग– अलग प्रकार के प्रयोग बढ़ा रहा है और जिंदा रहने एवं दूसरे हमले की क्षमताओं पर ज़ोर दे रहा है। यह रवैया शीत युद्ध के समरूपता मॉडल से बहुत अलग है। बीजिंग के लिए न्यू स्टार्ट (New START) पर आधारित द्विपक्षीय समझौते में शामिल होना तुलनात्मक रूप से हानिकारक होगा जिससे सामरिक कमियों को दूर किए बिना तेज़ी से बढ़ते हथियारों के ज़खीरे पर रोक लगेगी। इसके उलट, वाशिंगटन और मॉस्को के लिए, बीजिंग के अयन को नज़रअंदाज करने से दीर्घकालिक स्थिरता और निवारण गतिशीलता को लेकर रणनीतिक दुविधाएं पैदा होती हैं।
यह संरचनात्मक असममिति एक ‘नए’ न्यू स्टार्ट (New START) या सभी बड़ी परमाणु शक्तियों को एक ही रूपरेखा में शामिल करने की सरल मांगों को और जटिल बना देती है।[xii] इसलिए, आवश्यक राजनयिक प्रश्न यह नहीं है कि चीन को समता– आधारित समझौते के लिए विवश किया जाना चाहिए या नहीं बल्कि यह है कि क्या सहयोग की नई संरचना संकट की स्थिरता और पारदर्शिता को बनाए रखते हुए असममित प्रोत्साहन को समायोजित कर सकती है।
SIPRI के अध्ययन में यह भी बताया गया है कई देशों में परमाणु आधुनिकीकरण पर नए सिरे से ज़ोर दिए जाने के साथ– साथ द्विपक्षीय समझौते का खत्म होना भी हुआ है। यह शीत युद्ध के बाद के समय में परमाणु हथियारों में कमी के दीर्धकालिक रुझान के उलट होने के संकेतों को भी दिखाता है। न्यू स्टार्ट (New START) का नुकसान एक संदेश देता है, विशेष रूप से उन देशों को जो तकनीक में पीछे हैं (परमाणु हथियार बना सकते हैं लेकिन बनाना नहीं चाहते), कि रोक पर संवाद संभव है।[xiii]
अस्थिर क्षेत्रीय सुरक्षा माहौल वाले देशों के लिए बड़ी शक्तियों के बीच अनुशासन और संयम का समाप्त होना, रोकने वाले विकल्पों के पक्ष में तर्कों के लिए राजनीतिक स्थल बना सकता है। अप्रसार के निर्णय केवल तकनीकी गणना ही नहीं होते बल्कि राजनीतिक भी होते हैं, जो अंतरराष्ट्रीय मानकों की सोच और बड़ी शक्तियों के व्यवहार के बारे में उम्मीदों से प्रभावित होते हैं।[xiv]
जब समझौते समाप्त हो जाते हैं, तो मानकों को बनाए रखना मुश्किल हो जाता है। आईएईए (IAEA) की सुरक्षा व्यवस्था अनिवार्य बनी हुई है लेकिन शक्तिसंपन्न देशों के संयम बरते के स्पष्ट उदाहरण न होने पर बहुपक्षीय साधनों का लाभ कम हो जाता है।
निष्कर्ष
न्यू स्टार्ट (New START) का समाप्त होना वैश्विक परमाणु व्यवस्था के लिए अहम मोड़ है। इसका तात्कालिक प्रभाव यह होगा कि अमेरिका और रूस के बीच बनी–बनाई सीमा और सत्यापन दस्तूर समाप्त हो जाएंगे। इसके अलावा, इसके व्यावहारिक परिणाम भी हैं जिसमें अप्रसार प्रणाली की नैतिक अधिकार कमज़ोर होने का खतरा है, ऐसे समय में जब अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था पहले से ही भू– राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और असममित परमाणु आधुनिकीकरण के दबाव में है। वास्तविक जोखिम इसके तुरंत बाद बड़े पैमाने पर विस्तार नहीं है बल्कि उन तरीकों और उम्मीदों का धीरे– धीरे समाप्त हो जाना है जिन्होंने बीते तीन दशकों में परमाणु प्रतिस्पर्धा को रोके रखा है। इसलिए, प्रतिक्रिया नीति रचनात्मक, अनुकूलनात्मक और इस समझ पर आधारित होना चाहिए कि स्थिरता के लिए पारदर्शिता एवं राजनीतिक वैधता दोनों आवश्यक है।
भले ही समझौता अपने औपचारिक अंत के करीब है लेकिन कानूनी रूप से आवश्यक समझौता न रह जाने का यह अर्थ नहीं है कि परमाणु नियंत्रण पूरी तरह से समाप्त हो जाएगा। अमेरिका, रूस और चीन के बीच लगातार जानकारी साझा करना राजनीतिक रूप से अधिक सही रास्ता है जिसका उद्देश्य हथियारों के विकास को रोकने की बजाय गलत अंदाज़ों को कम करना है। परमाणु ज़खीरों, सेना की स्थिति में बदलाव और बड़े आधुनिक गतिविधियों पर नियमित बातचीत से आधारभूत स्तर की पारदर्शिता बनी रह सकती है, बिना नए समझौते की आवश्यकता के जो संख्या की सीमा निर्धारित करते हैं।
ऐसा तरीका आज के परमाणु माहौल और औपचारिक शस्त्र नियंत्रण की घटती संभावना के बीच संरचनात्मक अंतर को दिखाता है। जोखिम को कम करने और संकट प्रबंधन को प्राथमिकता देकर– उन्नत अधिसूचना, व्यावसायिक रिमोट सेंसिंग से समर्थित चुनिंदा डेटा साझाकरण एवं कार्यात्मक संकट– संचार चैनल के माध्यम से– परमाणु कूटनीति अनिश्चितता और गलतफ़हमी को कम कर सकती है जो प्रसार जोखिम के मुख्य कारण हैं। इन कोशिशों के साथ बहुपक्षीय अप्रसार संरचना के लिए लगातार समर्थन मिलना चाहिए, जिसमें एक ठोस आईएईए (IAEA) और न्यू स्टार्ट (New START) के बाद के माहौल में वैश्विक परमाणु स्थिरता बनाए रखने के लिए निरंतर राजनीतिक प्रतिबद्धता शामिल है।
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*तृप्ति नेव, भारतीय वैश्विक परिषद, नई दिल्ली में शोध प्रशिक्षु हैं।
अस्वीकरण : यहां व्यक्त किए गए विचार निजी हैं।
डिस्क्लेमर: इस अनुवादित लेख में यदि किसी प्रकार की त्रुटी पाई जाती है तो पाठक अंग्रेजी में लिखे मूल लेख को ही मान्य माने ।
अंत टिप्पण:
[i] US Department of State, "New START Treaty," Bureau of Arms Control, Deterrence, and Stability, https://www.state.gov/new-start-treaty.
[ii] Nuclear Threat Initiative, "Treaty between the United States of America and the Russian Federation on Measures for the Further Reduction and Limitation of Strategic Offensive Arms (New START),"https://www.nti.org/education-center/treaties-and-regimes/treaty-between-the-united-states-of-america-and-the-russian-federation-on-measures-for-the-further-reduction-and-limitation-of-strategic-offensive-arms/
[iii] The Center for Arms Control and Non-Proliferation, "Understanding New START," fact sheet, https://armscontrolcenter.org/wp-content/uploads/2017/01/NewSTARTFactsheet.pdf.
[iv] Arms Control Association, "New START at a Glance," fact sheet, last modified December 2024, https://www.armscontrol.org/factsheets/new-start-glance.
[v] US Department of State, "New START Treaty," Bureau of Arms Control, Deterrence, and Stability, https://www.state.gov/new-start-treaty.
[vi] Amy F. Woolf, The New START Treaty: Central Limits and Key Provisions, CRS Report No. R41219 (Washington, DC: Congressional Research Service) https://www.congress.gov/crs_external_products/R/PDF/R41219/R41219.61.pdf
[vii] Robert Grenier, "Analysis: US-Russia Relations Drop to New Low," Al Jazeera, March 6, 2014, https://www.aljazeera.com/features/2014/3/6/analysis-us-russia-relations-drop-to-new-low
[viii] Shannon Bugos, "Russia Suspends New START," Arms Control Today, March 2023, https://www.armscontrol.org/act/2023-03/news/russia-suspends-new-start.
[ix] Steven Pifer, Victor Mizin, and Patricia Jaworek, "The Uncertain Future of the New START Treaty," policy brief, Center for International Security and Cooperation, https://cisac.fsi.stanford.edu/publication/uncertain-future-new-start-treaty.
[x] Amy Woolf, "Beyond New START: What Happens Next in Nuclear Arms Control?," Royal United Services Institute, https://www.rusi.org/explore-our-research/publications/commentary/beyond-new-start-what-happens-next-nuclear-arms-control
[xi] Joseph Rodgers and Heather Williams, "Parading China’s Nuclear Arsenal Out of the Shadows," Center for Strategic and International Studies, https://www.csis.org/analysis/parading-chinas-nuclear-arsenal-out-shadows
[xii] Mrityunjay Goswami, "Navigating the Nuclear Balance: The US—China's Evolving Strategic Posture," issue brief, The Indo-Pacific Studies Center, https://www.indo-pacificstudiescenter.org/briefs/us-china-nuclear-strategy-balance
[xiii] Hans M. Kristensen and Matt Korda, "World Nuclear Forces," in SIPRI Yearbook 2025: Armaments, Disarmament and International Security (Stockholm: Stockholm International Peace Research Institute, 2025), 177–213, https://www.sipri.org/sites/default/files/SIPRIYB25c06%266A.pdf.
[xiv] Mike Albertson, "Life After New START: Navigating a New Period of Nuclear Arms Control," Arms Control Today, https://www.armscontrol.org/act/2025-01/features/life-after-new-start-navigating-new-period-nuclear-arms-control.