सारांश: पेरिस समझौते के अनुच्छेद 6 के तहत कार्बन क्रेडिट का व्यापार करने वाला पहला अफ़्रीकी देश बनकर घाना ने वैश्विक जलवायु सहयोग के क्षेत्र में अहम मुकाम हासिल किया है। शमन पहलों को हरित संपत्तियों की एक नई श्रेणी में बदलकर घाना ने विकास वित्त की रूपरेखा तैयार की है। यह पहल भारत, जो तकनीक प्रदाता और परियोजना साझीदार दोनों के रूप में काम करेगा, को वैश्विक दक्षिण– केंद्रित कार्बन बाज़ार के सह–वास्तुकार के रूप में जुड़ने का रणनीतिक मौका प्रदान करता है। यह लेख घाना के कार्बन बाज़ार व्यवस्था एवं भारत– अफ़्रीकी दक्षिण– दक्षिण सहयोग की संभावना की पड़ताल करता है।
परिचय
घाना ने पेरिस समझौते के अनुच्छेद 6.2 के तहत कार्बन क्रेडिट का आधिकारिक हस्तांतरण पूरा कर लिया है, इसके साथ ही ऐसा करने वाला यह अफ़्रीका का पहला और विश्व का दूसरा देश बन गया है। वर्ष 2020 में हस्ताक्षरित द्विपक्षीय समझौते के अनुसार इसने 8 जुलाई 2025 को स्विट्ज़रलैंड को 11,000 टन से अधिक सत्यापित उत्सर्जन कटौती का हस्तांतरण किया।[i] ये कार्बन क्रेडिट एक क्लीन कुकस्टोव (स्वच्छ चूल्हा) पहल से बने हैं जो पेड़ों की कटाई और कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) उत्सर्जन को कम करने के लिए परंपरागत लकड़ी के चूल्हों की जगह लेता है। घाना के कार्बन– बाज़ार पहल से 2030 तक हरित नौकरियों के पैदा होने और लगभग 1.1 अरब डॉलर के निवेश की उम्मीद है।[ii] ये विकास घाना को उन्मूलन क्रियाओं को स्थायी राजस्व धारा में बदलने हेतु क्षेत्रीय मॉडल बनाता है।
व्यवस्था को समझना: कार्बन बाज़ार कैसे काम करता है
कार्बन बाज़ार एक वित्तीय व्यवस्था है जो कारोबार, सरकारों और/या लोगों को कार्बन क्रेडिट का व्यापार करने की इजाज़त देता है। हर क्रेडिट एक टन कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) या दूसरी ग्रीनहाउस गैसों की बराबर मात्रा से बचने, हटाने या कम करने को दर्शाता है।[iii] बाज़ार दो प्रकार के होते हैं– स्वैच्छिक बाज़ार, जिसमें कारोबार बिना किसी कानून के अपनी मर्ज़ी से ऑफसेट खरीदते हैं, और अनुपालन बाज़ार, जो सरकारी नियमों से बना बाज़ार होता है। पेरिस समझौता का अनुच्छेद 6.2 विशेष रूप से ‘अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थांतरित शमन परिणाम ( ITMOs)' के हस्तांतरण के माध्यम से देशों के बीच स्वैच्छिक सहयोग को सरल बनाता है,[iv] जो कार्बन डाइऑक्साइड के बराबर टन में मापे गए उत्सर्जन में मापनीय कमी या कमी होता है, जो वास्तव में नए वैश्विक कार्बन बाज़ार की मुद्रा है।
वास्तव में, कार्बन बाज़ार कार्बन उत्सर्जन कम करने के प्रयासों को व्यापार करने लायक इकाईयों में बदल देते हैं, जैसे कि अच्छे चूल्हे बांटना, जंगलों को फिर से लगाना, औद्योगिक दक्षता बढ़ाना या स्वच्छ गतिशीलता लागू करना। जहाँ बेचने वाले इस पैसे का इस्तेमाल और अधिक शमन एवं स्थायी विकास के कार्यों में करते हैं, वहीं खरीदने वाले (देश या बिज़नेस) इन इकाईयों का प्रयोग अपनी जलवायु से संबंधी ज़िम्मेदारियों को पूरा करने के लिए करते हैं। इससे घाना जैसे देश अपने अधिक उत्सर्जन में कमी को खरीदने वालों (जैसे स्विट्ज़रलैंड) को बेच पाते हैं जो इसका प्रयोग अपने राष्ट्रीय जलवायु लक्ष्य को पूरा करने के लिए करते हैं।
वर्ष 2022 में, घाना ने अपना कार्बन बाज़ार रूपरेखा प्रकाशित किया, जिससे 'घाना कार्बन रजिस्ट्री' तैयार की गई। यह कार्बन रजिस्ट्री उत्सर्जन में कमी की डबल काउंटिंग को रोकने के लिए योग्य शमन कार्यप्रणालियों और एकीकृत मानक बताती है। यह ग्रीन प्रोजेक्ट्स की जांच और निगरानी के लिए पारदर्शी प्रक्रिया और आईटीएमओ के लिए राष्ट्रीय डेटाबेस प्रबंध भी करता है। यह रूपरेखा अपने राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (एनडीसी) के तहत बिना शर्त शमन कार्यक्रमों को भी परिभाषित करता है। इन प्रोग्राम को 'लाल सूची' वस्तुओं के तौर पर सूचीबद्ध किया गया है, जिसका अर्थ है कि इनके लिए कार्बन ऑफसेटिंग की अनुमति नहीं है। देश ने पहले से अधिकृत तकनीक की एक 'श्वेत सूची' भी बनाई है, जिन्हें घाना की एनडीसी बेसलाइन के लिए स्वतः अतिरिक्त माना जाता है।
स्रोत: केस स्टडी - स्पार्क+ अफ़्रीका फंड ने घाना में स्वच्छ रसोई को मुमकिन बनाने के लिए पेरिस समझौते के तहत कार्बन क्रेडिट सिस्टम का लाभ उठाया, एनवायरोफिट[v]
घाना का अनुच्छेद– 6 द्विपक्षीय साझेदारियां
स्विट्ज़रलैंड, स्वीडन, सिंगापुर और दक्षिण कोरिया के साथ अनुच्छेद 6 के आधार पर घाना[vi] का द्विपक्षीय समझौता है। घाना– स्विट्ज़रलैंड द्विपक्षीय समझौते के तहत घाना ने स्वच्छ चूल्हे, धान की संवहनीय खेती, कम्पोस्टिंग और न्यून– कार्बन गतिशीलता जैसी कई शमन गतिविधियों को मंज़ूरी दी है। यह सौदा लगभग 11,700 टन आईटीएमओ (ITMOs) के आरंभिक हस्तांतरण के साथ शुरू हुआ।[vii] स्विट्ज़रलैंड को अपने जलवायु लक्ष्य प्राप्त करने के लिए हाई– इंटीग्रिटी क्रेडिट्स देने के अलावा, इन प्रयासों को सह–विकास के बड़े लाभ मिलने की उम्मीद है, साथ ही दशकों के मध्य तक 100,000 से अधिक आईटीएमओ भी बनेंगे।
इसी तरह, घाना और स्वीडन ने ऐसी परियोजनाओं के लिए एक सहकारी रूपरेखा तैयार की है जो ऊर्जा अक्ष, शहरी गतिशीलता और अपशिष्ट प्रबंधन जैसे सामाजिक लाभ के साथ शमन को जोड़ते हैं। घाना ने सिंगापुर के साथ एक कार्यान्वयन समझौता भी किया है और दक्षिण कोरिया के साथ भी उसकी बातचीत जारी है। ये पहल अपशिष्ट, परिवहन, भवन और प्राकृतिक समाधानों जैसे क्षेत्र से हाई– इंटीग्रिटी क्रेडिट पर फोकस करती है जो उत्तर– दक्षिण ऊर्जा और जलवायु सहयोग को रेखांकित करती है।
घाना की कार्बन पॉज़िटिव गतिविधियां
उत्सर्जन को कम करने की अपनी रणनीति के तहत, घाना ने कई ऐसे कार्यों में हिस्सा लिया है जिनसे कार्बन क्रेडिट मिलते हैं और जिन्हें ITMOs के रूप में हस्तांतरित किया जा सकता है।[viii] स्वच्छ रसोई और घरेलू ऊर्जा सबसे विशेष रहे हैं। बड़े पैमाने पर अच्छे चूल्हे बांटे जा रहे हैं, जिसमें विश्व बैंक आउटकम बॉन्ड से समर्थित परियोजना भी शामिल हैं। इन प्रयासों से बायोमास का प्रयोग और घर के भीतर वायु प्रदूषण कम होता है, साथ ही स्विट्ज़रलैंड में हस्तांतरण हेतु ITMOs भी मिलते हैं।
घाना जलवायु– स्मार्ट धान की खेती पर आधारित और ITMOs तैयार कर रहा है जैसे अच्छा पानी और ऊर्वरक प्रबंधन, बारी– बारी से गीला करने और सुखाने की तकनीकें और दूसरी कार्यप्रणाली जो मीथेन उत्सर्जन को कम करती हैं और अच्छे परिणाम देती हैं।[ix] इसने जैविक अपशिष्ट कम्पोस्टिंग और बेहतर अपशिष्ट प्रबंधन पर भी ध्यान दिया है। इन गतिविधियों को शमन कार्रवाई के रूप में तैयार करने से दीर्घकालिक क्रेडिट फ्लो बनता है, शहर– स्तर के अपशिष्ट प्रणाली को समर्थन मिलता है और चक्रीय अर्थव्यवस्था के उद्यमों के विकास को बढ़ावा मिलता है।
इसके अलावा, घाना ने कई इलेक्ट्रिक साइकिल मार्गदर्शक परियोजनाएं शुरू की हैं और गैर– मोटरीकृत परिवहन को व्यापक स्तर पर बढ़ावा दिया है,[x] जिससे पता चलता है कि न्यून– कार्बन परिवहन देश के ITMO पोर्टफोलिया का एक अनिवार्य हिस्सा बन गया है। कोको परिदृश्य में घाना के REDD+ (जंगलों की कटाई और जंगल कम होने के कारण होने वाले उत्सर्जन को कम करना) कार्यक्रम को भी बहुपक्षीय साझीदार से परिणामों के आधार पर भुगतान मिला है।[xi]
ये प्रोग्राम कार्बन राजस्व को संवहनीय निवेश और सामुदायिक लाभ– साझाकरण व्यवस्था के साथ मिलाकर एक ऐसा मॉडल बनाते हैं जो जलवायु वित्त, कृषि और जंगल बचाने को एकीकृत करता है। घाना का स्वदेशी कार्बन– बाज़ार संरचना इस बात की गारंटी देने की उसकी दृढ़ता को दर्शाता है कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार घरेलू जलवायु महत्वाकांक्षा को अशक्त न बनाए।
घाना ने सार्वजनिक– निजी भागीदारी (पीपीपी/ PPP) मॉडल के अंतरराष्ट्रीय कार्यों में भी हिस्सा लिया है जैसे घाना का जोस्पॉन्ग ग्रुप और भारत की ईकेआई एनर्जी (EKI Energy) साझेदारी, जो अपशिष्ट, स्वच्छ रसोई और परिवहन जैसे क्षेत्र में तकनीकी मदद देती है। उनका लक्ष्य कार्बन– क्रेडिट–लिंक्ड वित्त में लगभग 1 अरब डॉलर जुटाना है। मई 2024 तक, ईकेआई (EKI) ने घाना में लगभग 300,000 चूल्हे बांटे हैं, जिससे कार्बन क्रेडिट मिलते हैं, जिन्हें ITMOs के रूप में बेचा जाता है और राजस्व दो साझीदारों के बीच बंटता है।[xii]
ईकेआई (EKI) इंडियन ऑयल के साथ मिलकर ‘सूर्य नूतन’ जैसे सौर रसोई उपकरण पर काम कर रहा है और स्थानीय रोजगार का सृजन कर रहा है। इसके अलावा, भारतीय स्टार्टअप बेटर प्लैनेट फुटप्रिंट्स ने घाना के ऊर्जा मंत्रालय के साथ घाना में 10 लाख उन्नत चूल्हे बनाने और बांटने के लिए एक समझौता किया है।[xiii] इस पहल से 1.25–1.5 करोड़ कार्बन क्रेडिट मिलने का अनुमान है। यह परियोजना के सह–निर्माण और द्विपक्षीय जलवायु वित्त के विकल्प के रूप में नए हरित वित्त के विकास को दर्शाता है।
चित्र 2.: भारत और घाना के बीच सार्वजनिक– निजी भागीदारी सहयोग मॉडल
स्रोत: लेखक
अफ़्रीकी हरित वित्त के लिए घाना के दृष्टिकोण का महत्व:
वर्तमान में, अफ़्रीका का हरित संक्रांति अपनी वित्तीय कमियों को देखते हुए गंभीर संकट का सामना कर रहा है, 2021 और 2022 के बीच केवल 17.8% शमन और अनुकूलन वित्त की 20% आवश्यकताएं हीं पूरी हो पाई हैं। 76% लोक निधि द्विपक्षीय और बहुपक्षीय संसाधनों पर निर्भर होने की वजह से, विशेष रूप से भू– राजनीतिक परिवर्तनों, जैसे अमेरिका का पेरिस समझौते से बाहर निकल जाना, को देखते हुए, अफ़्रीका का हरित वित्त अनिश्चित बना हुआ है।[xiv]
इस संदर्भ में, अफ़्रीका को जलवायु वित्त को आकर्षित करने के लिए कार्बन कर के बारे में विचार करना होगा और अपने कार्बन बाज़ार का विस्तार करना होगा। वर्तमान स्थिति में, जहाँ यह महाद्वीप वैश्विक उत्सर्जन का 4% से भी कम उत्सर्जन करता है लेकिन जलवायु परिवर्तन से बहुत अधिक प्रभावित है, घाना का कार्बन बाज़ार शुरू करना उचित दिशा में उठाया गया ज़रूरी कदम है।
देश एनडीसी (NDC) को राजस्व अर्जित करने वाली संपत्ति में बदलने के लिए व्यावहारिक मॉडल बनाता है। ऐसा करके घाना ने इस इलाके में एक गति बनायी है और दिखाया है कि कैसे कार्बन बाज़ार, संप्रभुता को कमज़ोर किए बिना कृषि और वानिकी जैसे कमज़ोर क्षेत्रों में भी जलवायु अनुकूलन को वित्तपोषित कर सकते हैं।
फिर भी, अफ़्रीका के कुछ हिस्सों में वैश्विक कार्बन बाज़ार में हिस्सा लेने को लेकर शंका बनी हुई है, क्योंकि इससे ‘कार्बन उपनिवेशवाद’ हो सकता है, परियोजना के प्रभाव पर शंका हो सकती है और स्थानीय समुदाय तक लाभ कम पहुँच सकते हैं। इन तथ्यों के बावजूद अफ़्रीकी देशों ने अपनी हिस्सेदारी तेज़ी से बढ़ायी है और अक्सर कार्यक्रम के अनुच्छेद 6 के नियमों के हिसाब से बढ़ने से पूर्व स्वैच्छिक बाज़ार पर विश्वास किया है।
इस मामले में, सेनेगल और कोटे डी आइवर प्रकृति– आधारित समाधान में सबसे आगे हैं। जैसे सेनेगल ने मैंग्रोव पुनरुद्धार परियोजनाएं, जो विश्व बैंक के बायोकार्बन कोष से 10 लाख (1 मिलियन) क्रेडिट्स से अधिक क्रेडिट पैदा करते हैं। इसी तरह, दक्षिण अफ्रीका अपने कार्बन टैक्स एक्ट (2019 से) के माध्यम से अफ़्रीका का सबसे उन्नत अनुपालन बाज़ार चलाता है। केन्या और ज़ाम्बिया स्वच्छ ऊर्जा परियजोनाओं पर ध्यान देते हैं, जिसमें केन्या का इलेक्ट्रिक मोबिलिटी पायलट और ज़ाम्बिया के वानिकी REDD+ पहल शामिल हैं। नाइजीरिया और मिस्र ने अपने कार्बन बाज़ार को नियमित करने के लिए कार्बन रजिस्ट्री बनाई हैं।
इसके साथ ही, अफ़्रीकन कार्बन मार्केट्स इनिशिएटिव (एसीएमआई/ACMI), जो 2022 में COP27 में शुरू किया गया था, एक सहयोगी प्रयास है, यह 15 से अधिक अफ़्रीकी देशों को मानकों में तालमेल बैठाने के लिए एक मंच पर लाता है और इसका उद्देश्य 10 अरब डॉलर का निवेश लक्ष्य प्राप्त करना है। ये प्रयास प्रगति को दिखाती हैं, लेकिन रजिस्ट्री पारस्परिकता और लाभ– साझाकरण जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं। इसके बहाने घाना का कार्बन बाज़ार रूपरेखा एक विश्वसनीय आदर्श प्रस्तुत करता है क्योंकि यह अपनी लाल और श्वेत सूची के माध्यम से एनडीसी से संबंधित गतिविधियों और ऑफसेट व्यवस्था के बीच स्पष्ट अंतर दर्शाता है जो इसके पारदर्शी नज़रिए का प्रतीक है।
यह तरीका दूसरे देशों के लिए एक आदर्श की तरह काम कर सकता है जिससे उन्हें ग्रीनवाशिंग जैसी चुनौतियों से निपटने और बाज़ारों में पारस्परिकता को मज़बूत करने में मदद मिलेगी। इसके अलावा, घाना का कार्बन बाज़ार कार्यालय बड़े डेटाबेस को बनाए रखने और हाई– इंटिग्रिटी कार्बन क्रेडिट का मूल्यांकन करने के लिए संस्थागत दक्षता का संकेत देता है। इससे दूसरे देशों के साथ सीखने और अनुभव को साझा करने के अवसर प्राप्त होते हैं और वैश्विक कार्बन व्यापार में एक सामूहिक बल के रूप में अफ़्रीका की स्थिति मज़बूत होती है।
भविष्य की राह
घाना की कार्बन बाज़ार पहल को विकसित करने में सफलता ने दक्षिण– दक्षिण सहयोग को बढ़ाने का मार्ग प्रशस्त किया है, विशेष रूप से भारत जैसे देशों के साथ। भारत और घाना ने नवंबर 2025 में ऊर्जा संक्रांति और औद्योगीकिकरण के लिए एक रूपरेका को आधिकारिक रूप से अपनाया जो भारत को घाना के न्यून– कार्बन आर्थिक मार्ग को समर्थन करने के प्रति प्रतिबद्ध है।[xv] इस संदर्भ में, दो देशों के बीच जलवायु साझेदारी गहन सहयोग के लिए एक मज़बूत आधार देती है क्योंकि दोनों देशों के अपने– अपने कार्बन बाज़ार रूपरेखा प्रतिपूरक सिद्धांतों पर बने हैं।
लैंड–यूज़–लिंक्ड क्रेडिटिंग के लिए घाना का तरीका भारत के ग्रीन क्रेडिट कार्यक्रम जैसा ही है जो एक नियामक रजिस्टर व्यवस्था के माध्यम से बेकार ज़मीन पर पेड़ लगाने और दूसरे पर्यावरणीय कार्यों के लिए क्रेडिट देता है। इसके अलावा, भारत का मात्रा– आधारित कार्बन बाज़ार पूरी तरह से बाज़ार– संचालित मॉडल की बजाय एक विकास नज़रिया दिखाता है जो घाना के कार्बन वित्त रूपरेखा से मेल खाता है।
दोनों देशों के बीच प्रगाढ़ संबंधों को देखते हुए, वे रक्षोपाय, लाभ साझा करने के तरीके, अतिरिक्त नियम और रजिस्ट्री व्यवस्था बनाने में विशेषज्ञता साझा कर सकते हैं। सहयोगियों से सीखने के मंच और मिल कर काम करने वाली क्षमता– निर्माण पहल करने की गुंजाइश है। इस रूपरेखा में, भारत कम लागत वाली तकनीक और कार्यान्वयन अनुभव के माध्यम से घाना को समर्थन दे सकता है और उन्हें परियोजना पाइपलाइन एवं संस्थागत रूपरेखा में शामिल कर सकता है।
इसके अलावा, भारत– घाना साझेदारी वैश्विक कार्बन बाज़ार के ऐसे नियमों की वकालत कर सकती है जो मेज़बान– देश की विकास प्राथमिकताओं की रक्षा करें, समुदायों के साथ लाभ का बराबर साझा किया जाना सुनिश्चित करे और ग्लोबल साउथ की वास्तविकता दिखाएं। इस प्रकार की साझेदारी में यह क्षमता है कि यह ऑफ़सेट को केवल अनुपालन साधन से बदलकर ग्लोबल साउथ के लिए सहयोगी जलवायु कार्रवाई की ओर ले जाए, जिससे हरित वित्त और सतत विकास की नए मानक स्थापित हों।
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*रुहीन ख़ातून, भारतीय वैश्विक परिषद, नई दिल्ली में शोध प्रशिक्षु हैं।
अस्वीकरण : यहां व्यक्त किए गए विचार निजी हैं।
डिस्क्लेमर: इस अनुवादित लेख में यदि किसी प्रकार की त्रुटी पाई जाती है तो पाठक अंग्रेजी में लिखे मूल लेख को ही मान्य माने ।
अंत टिप्पण:
[i] Albert Oppong-Ansah. (2025, July 9). Ghana’s cookstoves fuel Africa-first carbon offset deal. SciDev.net. https://www.scidev.net/global/news/ghanas-cookstoves-fuel-africa-first-carbon-offset-deal/
[ii] Ghana’s progress report on engagements in international carbon markets 2024. (2025, March). https://cmo.epa.gov.gh/wp-content/uploads/2025/03/2024-Annual-Progress-Report_final-version_21325.pdf
[iii] UNDP. (2022, May 18). What are carbon markets and why are they important? UNDP Climate Promise. https://climatepromise.undp.org/news-and-stories/what-are-carbon-markets-and-why-are-they-important
[iv] UNEP. (2023, October 31). Carbon Markets. UNEP - UN Environment Programme. https://www.unep.org/topics/climate-action/climate-finance/carbon-markets
[v] (https://enabling.ch/media/attachments/2025/04/29/article-6-case-study-20-03-25.pdf)
[vi] Ghana’s Carbon Registry. (2022). Ghana-Swiss Cooperative Approach under Article 6.2 of the Paris Agreement – Carbon Markets Office. Epa.gov.gh. https://cmo.epa.gov.gh/ghana-swiss-cooperative-approach-under-article-6-2-of-the-paris-agreement/
[vii] Ibid.
[viii] Tutu Benefoh, D., & Kofi Ackom, E. (2016). Energy and low carbon development efforts in Ghana: institutional arrangements, initiatives, challenges and the way forward. AIMS Energy, 4(3), 481–503. https://doi.org/10.3934/energy.2016.3.481
[ix] Group, W. B. (2025, December 8). Cooking up Change: How Financial Innovation Can Help Transform Lives. World Bank; World Bank Group. https://www.worldbank.org/en/news/feature/2025/12/05/cooking-up-change-how-financial-innovation-can-help-transform-lives
[x] Klik Foundation. (May 21, 2025). Electric bicycles mitigation activity authorized by Switzerland and Ghana. Klik.ch. https://www.klik.ch/en/news/news-article/wahu-electric-bicycles-mitigation-activity-authorized
[xi] World Bank Group. (January 24,2024). Ghana Begins Receiving Payments for Reducing Carbon Emissions in Forest Landscapes. World Bank. https://www.worldbank.org/en/news/press-release/2023/01/24/ghana-begins-receiving-payments-for-reducing-carbon-emissions-in-forest-landscape
[xii] Ghana carbon Market Office. (January 20, 2024). Jospong Group signs MoU for carbon credits development. Cmo.epa.gov.gh. https://cmo.epa.gov.gh/jospong-group-signs-mou-for-carbon-credits-development/
[xiii] Albert Oppong-Ansah. (2024, July 31). Government to distribute million efficient cookstoves nationwide. Ghana News Agency. Ghana News Agency. https://gna.org.gh/2024/07/government-to-distribute-million-efficient-cookstoves-nationwide/
[xiv] Africa Climate Insights. (August 6, 2025). A Growing Gap: Investment for Climate Adaptation in Africa - African Climate Insights. African Climate Insights. https://africaclimateinsights.org/a-growing-gap-investment-for-climate-adaptation-in-africa/
[xv] Stephen Asante. ( November 3, 2025). India, Ghana embrace framework for energy transition, industrialisation | Ghana News Agency. Ghana News Agency. https://gna.org.gh/2025/11/india-ghana-embrace-framework-for-energy-transition-industrialisation/