13वें राष्ट्रीय चुनाव और संवैधानिक जनमत संग्रह, जिसे “जुलाई घोषणापत्र” के नाम से जाना जाता है, 12 फरवरी 2026 को होंगे और आशा है कि ये बांग्लादेश की राजनीतिक दिशा को बदलने में अहम भूमिका निभाएंगे। जहाँ राष्ट्रीय चुनावों में 2,000 उम्मीदवारों के बीच मुकाबला होगा, वहीं संवैधानिक जनमत संग्रह का उद्देश्य बांग्लादेश में एक नया संवैधानिक ढांचा स्थापित करना एवं चुनावी सुधारों को लागू करना है।[i]
जब से मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने आवामी लीग (एएल/AL) पर प्रतिबंध लगाया है तब से बांग्लादेश नेशनल पार्टी (बीपीएन/BNP) को देश की बागडोर संभालने वाली सबसे बड़ी राजनीतिक शक्ति के रूप में देखा जा रहा है। देश की राजनीति परंपरागत रूप से एएल और बीएनपी के बीच दो– ध्रुवीय रही है। हालांकि, जमात– ए– इस्लामी (जेईएल/JeI), जो देश की सबसे बड़ी इस्लामी पार्टी है, ने, युवाओं और समाज के दूसरे वर्गों के बीच धीरे– धीरे अपना राजनीतिक प्रभाव बढ़ाया है।
बांग्लादेश के बड़े विश्वविद्यालयों में सितंबर और अक्टूबर 2025 के बीच हुए विश्वविद्यालय केंद्रीय संघ चुनावों के नतीजों से मतदाताओं के बीच जेईएल (JeI) का बढ़ता प्रभाव स्पष्ट नज़र आता है। इन विश्वविद्यालयों में ढाका विश्वविद्यालय (डीयू), जहांगीरनगर विश्वविद्यालय (जेयू), चटगांव विश्वविद्यालय (सीयू), राजशाही विश्वविद्यालय (आरयू) और हाल ही में जगन्नाथ विश्वविद्यालय, शामिल हैं।[ii] जेईएल (JeI) का छात्र विंग, इस्लामी छात्र शिविर ने चुनावों में शानदार जीत हासिल की औऱ महत्वपूर्ण कार्यकारी पदों पर कब्ज़ा कर लिया।[iii] जैसे, डीयू में, जहाँ छात्र शिविर ने “ओइक्कोबोध्धो शिक्खार्थी जोते” बैनर के तले चुनाव लड़ा, वहाँ उसने 28 में से 23 सीटों पर जीत हासिल की, जिसमें उपाध्यक्ष, महासचिव और सहायक महासचिव के पद शामिल हैं। [iv]
"ये नतीजे जमात– ए– इस्लामी की संगठनात्मक शक्ति और युवाओं के बीच उसकी लोकप्रियता को दिखाते हैं" जो बांग्लादेश छात्र लीग, यानी एएल के छात्र संगठन की गैरमौजूद़गी में सामने आई है। इस संगठन पर वर्तमान सरकार ने अक्टूबर 2024 में प्रतिबंध लगा दिया था।[v] बांग्लादेश मुक्ति युद्ध के बाद से धर्मनिरपेक्ष और समावेशी राजनीति का गढ़ माने जाने वाला डीयू, अब इस्लामी प्रभाव का नया अखाड़ा बन कर उभरा है, जो पहले देश की चुनावी राजनीति के हाशिए पर था। इसलिए छात्र संघ की जीत कोई राजनीतिक अनियमितता नहीं है बल्कि बांग्लादेश की राष्ट्रीय राजनीति में एक रणनीतिक परिवर्तन है।
इसके अलावा, इंटरनेशनल रिपब्लिकन इंस्टीट्यूट (आईआरआई) द्वारा अक्टूबर– नवंबर 2025 में किए गए जनमत सर्वेक्षण से पता चला कि आने वाले चुनावों में बीएनपी और जेईएल के बीच कड़ी टक्कर होगी।[vi] सर्वेक्षण के अनुसार, इसके उलट, नेशनल सिटिजन्स पार्टी (एनसीपी/ NCP), जिसका गठन फरवरी 2025 में एएल सरकार को हटाने वाले हिंसक छात्र विरोध प्रदर्शन के बाद बनी थी, वह विरोध प्रदर्शनों के दौरान मिले समर्थन को एक ठोस चुनावी आधार में बदलने में नाकाम रही है। [vii] इस पृष्ठभूमि में, आज बांग्लादेश में जेईएल के उदय को समझना ज़रूरी है, जिसमें आज़ादी के बाद के सालों में एक पार्टी के रूप में उसकी भूमिका को भी ध्यान में रखा जाए।
राजनीति में भूलने की बीमारी और जेईएल का उदय
वर्ष 1971 के बांग्लादेश मुक्ति युद्ध के दौरान पाकिस्तानी सेना के साथ जेईएल का सहयोग, जिसमें अल्पसंख्यकों का नरसंहार किया गया और उनके साथ हिंसा हुई, दस्तावेज़ों में दर्ज है। बांग्लादेश की आज़ादी पर इसके विवादित रुख, जो संयुक्त इस्लामिक राज्य की अवधारणा के साथ इसके जुड़ाव की वजह से था और आज़ादी के बाद बांग्लादेश में धर्मनिरपेक्ष और समावेशी राजनीति के खिलाफ इसकी बाद की स्थिति ने पार्टी को कई वर्षों तक राजनीतिक चर्चा से हाशिए पर धकेल दिया था।
हालाँकि, “रज़ाकार” होने का द़ाग लगने और शेख हसीना सरकार की कार्रवाई के बावजूद, विशेष रूप से 2009 और 2014 के बीच, जब 1971 के युद्ध के दौरान किए गए युद्ध अपराधों और मानवता के खिलाफ अपराधों के लिए शीर्ष नेताओं को दोषी ठहराया गया और फाँसी दी गई– जेईएल (JeI) वर्षों तक अपना अस्तित्व बनाए रखने में कामयाब रही।[viii] जेईएल कई वर्षों तक बीएनपी के साथ राजनीतिक गठबंधन में रहा, जिसे बांग्लादेश की राजनीतिक इतिहास में, “सुविधा के गठबंधन” के नाम से जाना गया, जब एएल सरकार सत्ता में थी।[ix]
इसके अलावा, जेईएल ने केवल एक राजनीतिक संगठन के रूप में ही नहीं बल्कि दानी संस्था, स्वयंसेवी संगठन, फाउंडेशन और कारोबार से जुड़े सामाजिक संगठन के रूप में भी काम करके अपनी छवि को बदलने में कामयाबी हासिल की है।[x] इनमें हेल्थकेयर कैंप, शिक्षण कार्यक्रम और गरीबी उन्मूलन परियोजनाओं जैसी पहल शामिल हैं, जो ग्रामीण और पिछले इलाकों में सामुदायिक पहुँच का हिस्सा हैं, जैसे कि इस्लामिक बैंक फाउंडेशन, डेल नया दिगंता, इंटरनेशनल इस्लामिक यूनिवर्सिटी चटगांव और सेंटर फॉर स्ट्रैटेजी एंड पीस स्टडीज़ आदि द्वारा चलाए जा रहे हैं।[xi] इस वजब से कई विश्लेषकों ने जेईएल के सामाजिक पहुँच को “देश के भीतर देश” और “अर्थव्यवस्था के भीतर अर्थव्यवस्था” जैसी समानांतर सरकारी संरचना बताया है।[xii]
जुलाई 2024 के विद्रोह के बाद पार्टी एक महत्वपूर्ण राजनीतिक शक्ति के रूप में फिर से उभरी। बांग्लादेश के सुप्रीम कोर्ट ने जून 2025 में जेईएल पर से प्रतिबंध हटा दिया और पार्टी को चुनाव आयोग में फिर से पंजीकरण करने की अनुमति दे दी। ऐसा शेख हसीना सरकार के कार्यकाल में 2013 में चुनाव आयोग द्वारा इसे एक राजनीतिक पार्टी के रूप में डी– रजिस्टर किए जाने के एक दशक से भी अधिक समय के बाद हुआ था।[xiii] यह फैसला अंतरिम सरकार द्वारा अगस्त 2024 में पार्टी पर से प्रतिबंध हटाने के लगभग आठ महीने बाद आया, जिससे पार्टी देश के तेज़ी से बदलते राजनीतिक माहौल में रणनीतिक रूप से स्वयं को फिर से स्थापित कर सके।[xiv]
इसलिए, जेईएल के छात्र विंग की चुनावी सफलता का श्रेय न केवल समाज में बढ़ती धार्मिकता को दिया जाता है बल्कि बीएनपी समेत मुख्यधारा के राजनीतिक नेताओं से युवाओं में बढ़ते मोहभंग को भी दिया जाता है। बीते कुछ वर्षों में, एएल और बीएनपी की संभ्रांत– संचालित सत्ता की राजनीति की वजह से समाज के कुछ तबके निराश हो गए हैं। [xv] इस माहौल में, जेईएल ने खुद को एक अनुशासित, नैतिक रूप से मज़बूत और संगठनात्मक रूप से एकजुट विकल्प के रूप में प्रस्तुत किया है।
इसका मज़बूत संगठनात्मक ढांचा बनाए रखना, साथ ही स्थानीय स्तर पर मज़बूत कैडर– आधारित लामबंदी की रणनीतियों ने पार्टी की मज़बूती को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई है, विशेषरूप से 2024 की जुलाई क्रांति के बाद।[xvi]
आम चुनावों के लिए जेईएल का महागठबंधन
28 दिसंबर 2025 को, जेईएल ने नेशनल सिटिजन्स पार्टी (एनसीपी/ NCP) और लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (एलडीपी/ LDP) के साथ बड़ा चुनावी गठबंधन किया है।[xvii] 24 जनवरी को, बांग्लादेश लेबर पार्टी (बीएलपी/BLP) भी जेईएल के नेतृत्व वाले गठबंधन में शामिल हो गई।[xviii] इससे पहले, जेईएल बांग्लादेश खेलाफत मज़लिस, जातिया गणतांत्रिक पार्टी (एनडीपी/ NDP) और निज़ाम– ए– इस्लाम पार्टी समेत सात विचारधारा वाली पार्टियों के साथ काम करना शुरू कर चुकी थी।[xix]
इस्लामिक पार्टियों के साथ गठबंधन का उद्देश्य, व्यापक वैचारिक विचार को ध्यान में रखते हुए मुस्लिम वोटों को अपने पक्ष में करना है। इस रणनीतिक सीट– साझाकरण का उद्देश्य बीएनपी (BNP) के नेतृत्व वाले गठबंधन के खिलाफ एकजुट चुनावी विकल्प प्रस्तुत कर वैचारिक रूप से समान निर्वाचन क्षेत्रों में बिखराव को रोकना है।
इसके उलट, जेईएल का एनसीपी (NCP), एलडीपी (LDP) और हाल ही में बीएलपी (BLP) के साथ गठबंधन एक अधिक व्यावहारिक चुनावी गणित दिखाता है, जिसका मकसद लंबे समय से चले आ रहे चुनावी अकेलेपन को कम करना औऱ बांग्लादेश की बदलती राजनीतिक स्थिति में राजनीतिक वैधता प्राप्त करना है। अपनी संगठनात्मक शक्ति और चुनावी समर्थन के बीच ऐतिहासिक अंतर के कारण, जेईएल को अक्सर “बिना वोटों वाली पार्टी” बताया जाता है।[xx]
पिछले चुनावों में, जेईएल को अपनी चुनावी शक्ति बढ़ाने में मुश्किल हुई थी, क्योंकि बांग्लादेश की संसद (जातिया संगसद) में 300 सीटों में से उसे कभी भी 20 से अदिक सीटें नहीं मिली थीं।[xxi] इस पुनर्निर्माण के माध्यम से, जेईएल एनसीपी के युवा मतदाता आधार के साथ– साथ उदारवादी मतदाता वर्ग के कुछ हिस्सों का भी फ़ायदा उठाना चाहती है।
इसके उलट, एनसीपी के लिए, यह गठबंधन बहुत महत्वपूर्ण संसाधन और संगठनात्मक शक्ति देता है क्योंकि वह विरोध प्रदर्शनों के दौरान मिले समर्थन को लगातार चुनावी मौजूदगी में बदलने में नाकाम रही है। इसलिए, जेईएल ने खुद को महागठबंधन के एक राजनीतिक केंद्र के रूप में स्थापित किया है जो नतीजतन पार्टी की बीएनपी पर लंबे समय से चली आ रही निर्भरता से भी दूर जाना है। जहाँ बीएनपी 298 में से लगभग 288 सीटों पर चुनाव लड़ने वाली है और अकेले चुनाव जीतने की उम्मीद कर रही है, वहीं जेईएल ने लगभग 224 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं, और एनसीपी 32 सीटों पर चुनाव लड़ने वाली है।[xxii]
इस राजनीतिक बदलाव ने 2024 की जुलाई क्रांति के बाद, जेईएल और दूसरी इस्लामी पार्टियों के लिए अपनी विचारधारा का असर बढ़ाने और उसे चुनावी ताकत में बदलने के लिए रणनीतिक जगह बनाई है। हालांकि, चुनाव के बाद बांग्लादेश की राजनीति में जेईएल क्या भूमिका निभाएगी, इस बारे में सवाल बने हुए हैं। एएल सरकार के गिरने के बाद धर्मनिरपेक्ष राजनीति कमज़ोर होती दिख रही है। अल्पसंख्यकों पर हमले और बढ़ते धार्मिक कट्टरपंथ से चुनाव के बाद, नई राजनीतिक व्यवस्था में निपटने के लिए बड़ी चुनौतियाँ खड़ी होंगी।
निष्कर्ष
आवामी लीग सरकार के गिरने के साथ, जेईएल और बीएनपी के बीच लंबे समय से चला आ रहा गठबंधन खत्म हो गया है, और बांग्लादेश में एक नई दो– ध्रुवीय चुनावी राजनीति आकार ले रही है। हालांकि, बीएनपी आने वाले चुनावों के लिए सबसे लोकप्रिय दावेदार बनी हुई है, फिर भी उभरते हुए आंकड़े जेईएल के एक मजबूत राजनीतिक शक्ति के रूप में उभरने को दिखाते हैं।
इस वैचारिक बदलाव और नीतिगत लचीलेपन के माध्यम से जेईएल अपनी ऐतिहासिक हाशिए पर जाने की स्थिति को कम करना चाहता है, राजनीतिक वैधता हासिल करना चाहता है, और मुख्यधारा की राजनीति में फिर से शामिल होना चाहता है। हालाँकि, इस गठबंधन की मजबूती और भविष्य की दिशा आखिराकर चुनाव के बाद के राजनीति माहौल और जुलाई घोषणापत्र पर जनमत संग्रह के नतीजों पर निर्भर करेगी।
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*मोहम्मद हादी रजा, भारतीय वैश्विक परिषद, नई दिल्ली में शोध प्रशिक्षु हैं।
अस्वीकरण : यहां व्यक्त किए गए विचार निजी हैं।
डिस्क्लेमर: इस अनुवादित लेख में यदि किसी प्रकार की त्रुटी पाई जाती है तो पाठक अंग्रेजी में लिखे मूल लेख को ही मान्य माने ।
अंत टिप्पण:
[i] Abbas, Bashir Ali. 2026. “Expert Explains | Bangladesh’s February 12 Elections Are a Chance at a Fresh Start for All Parties.” The Indian Express. January 26, 2026. https://indianexpress.com/article/explained/explained-global/bangladesh-february-elections-10495818/lite/. Accessed January 2026.
[ii] Chakraborty, Debdutta. 2026. “A 1st in Bangladesh’s History, Major University Campuses under Jamaat’s Control in Post-Hasina Era.” ThePrint. theprint. January 9, 2026. https://theprint.in/world/a-1st-in-bangladeshs-history-all-university-campuses-now-under-jamaats-control-in-post-hasina-era/2823181/. Accessed January 10, 2026.
[iii] Nazmus Sakib. 2025. “Islamist Rise or Vote for Autonomy? How to Read Jamaat’s Recent Win on Bangladeshi Campuses – South Asian Voices.” South Asian Voices. October 29, 2025. https://southasianvoices.org/pol-m-bd-n-student-elections-islam-bangladesh-10-29-2025/. Accessed December 10, 2025.
[iv] Ibid.
[v] Kallol Bhattacherjee. 2025. “Awami League Will Not Be Allowed to Participate in Bangladesh Election: Interim Government.” The Hindu. December 24, 2025. https://www.thehindu.com/news/national/awami-league-will-not-be-allowed-to-participate-in-bangladesh-election-interim-government/article70434647.ece. Assessed December 15, 2025.
[vi] “National Survey of Bangladesh | September - October 2025.” 2025. International Republican Institute. December 1, 2025. https://www.iri.org/resources/national-survey-of-bangladesh-september-october-2025/. Accessed December 13, 2025.
[vii] Ibid.
[viii] Ahsan, Mohammad Amimul. 2025. “Jamaat-e-Islami in Bangladesh in the Post-July 2024 Uprising Era: An Analytical Study of Political and Social Challenges يوليو انتفاضة بعد ما مرحلة في بنغالديش في اإلسالمية الجماعة 2024: واالجتماعية السياسية التحديات في تحليلية دراسة اإلحسان عميم محمد (1).” ResearchGate. December 18, 2025. https://doi.org/10.15849/ZJJHSS.251130.0. Accessed December 31, 2025.
[ix] Kumar, Upendra. 2018. “The Networks of Social Infrastructure Linked with Jamaat-e-Islami in Bangladesh.” Upendra Kumar. January 1, 2018. https://www.researchgate.net/publication/382994336_The_Networks_of_Social_Infrastructure_Linked_with_Jamaat-e-Islami_in_Bangladesh. Accessed January 10, 2026.
[x] Abu Rayhan. 2024. “The Bright Future of Bangladesh Jamaat-e-Islami in Politics.” ResearchGate. February 22, 2024. https://doi.org/10.13140/RG.2.2.32965.97762. Accessed December 30, 2025.
[xi] Kumar, Upendra. 2018. “The Networks of Social Infrastructure Linked with Jamaat-e-Islami in Bangladesh.” Upendra Kumar. January 1, 2018. https://www.researchgate.net/publication/382994336_The_Networks_of_Social_Infrastructure_Linked_with_Jamaat-e-Islami_in_Bangladesh. Accessed January 10, 2026.
[xii] Ibid
[xiii] PTI. 2025. “Bangladesh’s Supreme Court Restores Jamaat-e-Islami’s Party Registration.” The Hindu. June 2025. https://www.thehindu.com/news/international/bangladeshs-supreme-court-restores-jamaat-e-islamis-party-registration/article69645620.ece. Accessed December 31, 2025
[xiv] Ibid
[xv] Ahsan, Mohammad Amimul. 2025. “Jamaat-e-Islami in Bangladesh in the Post-July 2024 Uprising Era: An Analytical Study of Political and Social Challenges يوليو انتفاضة بعد ما مرحلة في بنغالديش في اإلسالمية الجماعة 2024: واالجتماعية السياسية التحديات في تحليلية دراسة اإلحسان عميم محمد (1).” ResearchGate. December 18, 2025. https://doi.org/10.15849/ZJJHSS.251130.0. Accessed December 31, 2025
[xvi] Abu Rayhan. 2024. “The Bright Future of Bangladesh Jamaat-e-Islami in Politics.” ResearchGate. February 22, 2024. https://doi.org/10.13140/RG.2.2.32965.97762. Accessed December 30, 2025.
[xvii] Site Admin. 2025. “Bangladesh Jamaat-e-Islami Announces Expanded Electoral Alliance with NCP and LDP.” Newsonair.gov.in. 2025. https://www.newsonair.gov.in/bangladesh-jamaat-e-islami-announces-expanded-electoral-alliance-with-ncp-and-ldp/. Accessed January 1, 2026.
[xviii] PTI. 2026. “Labour Party Joins Electoral Alliance Led by Jamaat-e-Islami in Bangladesh.” The Hindu. January 24, 2026. https://www.thehindu.com/news/international/labour-party-joins-electoral-alliance-led-by-jamaat-e-islami-in-bangladesh/article70547623.ece. Accessed January 26, 2026.
[xix] “Jamaat, 7 Allied Parties Plan to Join Elections on Consensus-Based Approach.” 2025.
The Business Standard. November 19, 2025. https://www.tbsnews.net/bangladesh/politics/jamaat-7-allied-parties-plan-join-elections-consensus-based-approach-1290151. Accessed December 10, 2025.
[xx] Ahsan, Mohammad Amimul. 2025. “Jamaat-e-Islami in Bangladesh in the Post-July 2024 Uprising Era: An Analytical Study of Political and Social Challenges يوليو انتفاضة بعد ما مرحلة في بنغالديش في اإلسالمية الجماعة 2024: واالجتماعية السياسية التحديات في تحليلية دراسة اإلحسان عميم محمد (1).” ResearchGate. December 18, 2025. https://doi.org/10.15849/ZJJHSS.251130.0. Accessed December 31, 2025.
[xxi] Islam, Md Nazrul, and Md Saidul Islam. 2018. “Islam, Politics and Secularism in Bangladesh: Contesting the Dominant Narratives.” Social Sciences 7 (3): 12. https://doi.org/10.3390/socsci7030037. Accessed January 2, 2026.
[xxii] Abbas, Bashir Ali. 2026. “Expert Explains | Bangladesh’s February 12 Elections Are a Chance at a Fresh Start for All Parties.” The Indian Express. January 26, 2026. https://indianexpress.com/article/explained/explained-global/bangladesh-february-elections-10495818/lite/. Accessed January 27, 2026.