परिचय
दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क/SAARC) जैसे परंपरागत क्षेत्रीय मंच स्थिर बने हुए हैं और बंगाल की खाड़ी बहु– क्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग पहल (बिमस्टेक/BIMSTEC), हालांकि सक्रिए है, लेकिन इसकी प्रगति बहुत धीमी रफ्तार से हो रही है। इस संदर्भ में, दक्षिण एशिया का बदलता हुआ रणनीतिक माहौल व्यावहारिक, हितों पर आधारित त्रिपक्षीय सहयोग पर ज़ोर दे रहा है। भारत, संयुक्त अरब अमीरात और श्रीलंका के बीच त्रिंकोमाली को एक क्षेत्रीय ऊर्जा हब के रूप में विकसित करने के लिए किया गया त्रिपक्षीय समझौता और सीमा पार बिजली व्यापार को संभव बनाने के लिए भारत– नेपाल– बांग्लादेश त्रिपक्षीय समझौता, एक तेज़ी से जटिल होते भू– राजनीतिक माहौल में व्यावहारिक समाधान तलाशने हेतु दक्षिण एशियाई देशों की सामूहिक इच्छा को दर्शाते हैं।
दक्षिण एशिया में भारत जिन त्रिपक्षीय सहयोग व्यवस्थाओं को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहा है वे भारत की पड़ोस प्रथम नीति के भी अनुरूप है जो इस क्षेत्र के देशों के बीच आपसी लाभकारी सहयोग पर ज़ोर देती है। इन त्रिपक्षीय व्यवस्थाओं से यह भी उम्मीद है कि इस क्षेत्र में चीन के त्रिपक्षीय गठबंधनों को बढ़ावा देने की कोशिशों के बीच भू– राजनीति पर भी ध्यान देंगे। पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफ़गानिस्तान के साथ त्रिपक्षीय वार्ता को आगे बढ़ाने के चीन के समानांतर प्रयासों को उसकी बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) का विस्तार माना जा सकता है और यह क्षेत्र में चीन की बड़ी आर्थिक भूमिका का मार्ग प्रशस्त कर सकता है।
इस संदर्भ में, यह शोधपत्र हाल के वर्षों में भारत द्वारा इस क्षेत्र में हस्ताक्षर किए गए दो त्रिपक्षीय समझौतों और उनकी संभावनाओं एवं चुनौतियों पर बात करेगा।
भारत– बांग्लादेश– नेपाल त्रिपक्षीय समझौता
दक्षिण एशिया में ऊर्जा सहयोग को बढ़ाना क्षेत्रीय सहयोग का एक महत्वपूर्ण पहलू बन कर उभरा है। भारत क्षेत्रीय ऊर्जा सहयोग को आकार देने में एक केंद्रीय खिलाड़ी और प्रमुख हितधारक के रूप में उभर रहा है। इसी सिलसिले में 3 अक्टूबर 2024 को,[i] भारत, नेपाल और बांग्लादेश के बीच सीमा पार विद्युत व्यापार को सरल बनाने के लिए एक त्रिपक्षीय समझौता किया गया। समझौते के अनुसार, सभी पक्ष भारतीय क्षेत्र से होते हुए नेपाल से बांग्लादेश को 40 मेगावाट बिजली के आदान– प्रदान पर सहमत हुए हैं। इस समझौते में ऊर्जा क्षेत्र में उप– क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ाने की क्षमता है, जिससे सभी को लाभ होगा।

नक्शा जो भारतीय क्षेत्र से होते हुए नेपाल से बांग्लादेश तक विद्युत संचरण का रास्ता दिखाता है
स्रोत: लेखक द्वारा तैयार किया गया
समझौते के अनुसार, नेपाल ने 15 जून 2025 से 15 नवंबर 2025 तक भारत के रास्ते 400-kV मुज़फ्फरपुर– बहरामपुर– भेरामारा संचरण लाइन का प्रयोग कर बांग्लादेश को 40 मेगावाट (MW) बिजली की आपूर्ति की।[ii] नेपाल आपूर्ति की जा रही बिजली के लिए प्रति यूनिट 6.4 अमेरिकी सेंट ले रहा है जिस पर बांग्लादेश सहमत है और आगामी 5 वर्षों तक नेपाल से बिजली खरीदता रहेगा।[iii]
बिजली व्यापार पर हुआ यह समझौता कई वजहों से महत्वपूर्ण है। देश से निर्यात किए जाने वाले वस्तुओं के सीमित समूह को देखते हुए, यह नेपाल को बिजली व्यापार से राजस्व अर्जित करने में मदद कर सकता है। नेपाल के पास खपत से अधिक बिजली पैदा करने की क्षमता है। जहाँ बिजली की घरेलू खपत लगभग 1,389 मेगावाट (MW) है और स्थापित निर्माण क्षमता लगभग 3878 मेगावाट (MW) की है[iv]। इस विद्युत व्यापार से नेपाल की सालाना कमाई लगभग 1.25 अरब रुपए होने का अनुमान है।[v]
नेपाल को बांग्लादेश से 46.31 मिलियन रु. का व्यापार घाटा भी हुआ है; इसलिए, यह त्रिपक्षीय समौता डॉलर में बिजली बेचकर बांग्लादेश के साथ व्यापार घाटे को कम करने में मदद कर सकता है, जो पहली बार किया जा रहा है[vi]। नेपाल से उम्मीद है कि वह जून से नवंबर तक, पांच माह की अवधि में, हर साल 144,000 MWh बिजली बेचेगा। यह त्रिपक्षीय समझौता नेपाल के ‘ऊर्जा विकास रोडमैप और कार्ययोजना- 2081’ के अनुरूप है। इस योजना को लागू करके, नेपाल का लक्ष्य 2035 तक 28,500 MW बिजली उत्पादित करना है जिसमें से 13,500 MW बिजली का घरेलू इस्तेमाल होगा और शेष 15,000 MW बिजली निर्यात की जाएगी।[vii] यदि योजना के अनुसार इसे लागू किया जाता है तो इससे नेपाल उप–क्षेत्रीय ऊर्जा सुरक्षा में एक अहम योगदान देने वाले देश के रूप में अपनी जगह बना पाएगा।
दूसरी ओर, बांग्लादेश में अनुमानित 30,000 MW से अधिक की मांग के मुकाबले 24,000 MW बिजली का ही उत्पादन हो पाता है।[viii] अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बांग्लादेश भी प्राकृतिक गैस[ix] पर बहुत अधिक निर्भर है। बांग्लादेश की कुल उत्पादन क्षमता में पनबिजली का हिस्सा केवल 1 प्रतिशत है जबकि अक्षय ऊर्जा का कुल हिस्सा केवल 2 प्रतिशत है।[x] इसलिए, नेपाल से पनबिजली के आयात लाभ होने की उम्मीद है क्योंकि इससे बांग्लादेश के ऊर्जा बास्केट में अक्षय ऊर्जा शामिल होगा और भविष्य में ऊर्जा के क्षेत्र में विविधता और सुरक्षा दोनों मिलेगी। बांग्लादेश के अनुसार, यह पहल न केवल ऊर्जा की ज़रूरतों को तत्काल पूरा करेगी बल्कि पर्यावरण के अनुकूल तरीके से लंबे समय तक ऊर्जा सुरक्षा भी सुनिश्चित करेगी।[xi]
यह समझौता भारत को कार्यक्षमता, त्वरित डिलीवरी और पारदर्शिता पर आधारित विकास सहयोग का मॉडल प्रस्तुत करने का अवसर देता है जो नेपाल और बांग्लादेश जैसे दक्षिण एशियाई देशों को तेज़ी से बढ़ते प्रतिस्पर्धी क्षेत्रीय माहौल में ऊर्जा संयोजकता के लिए वैकल्पिक मार्ग देता है।[xii]
भारत– नेपाल– बांग्लादेश समझौता दक्षिण एशिया में ‘HAT’ कनेक्टिविटी में काफी समय से चली आ रही कमी को भी दूर करता है जहाँ ‘H’ का अर्थ है– पनबिजली (hydropower), ‘A’ का अर्थ है– विमानन (aviation) और ‘T’ का अर्थ है पर्यटन (tourism), क्योंकि यह पनबिजली निर्यात करने वाले देश नेपाल को क्षेत्रीय ऊर्जा बाज़ार में अधिक प्रभावी तरीके से आने की अनुमति देता है। बेहतर ऊर्जा और पारगमन सुविधाएं भी पर्यटन के प्रवाह में मदद करती हैं और विमानन कनेक्टिविटी को बढ़ाती हैं। इसी वजह से यह त्रिपक्षीय समझौता दक्षिण एशिया की कनेक्टिविटी की कमियों को दूर करने का एक व्यावहारिक तरीका प्रदान करता है।[xiii]
भारत– श्रीलंका– संयुक्त अरब अमीरात त्रिपक्षीय समझौता
दक्षिण एशिया में एक और महत्वपूर्ण त्रिपक्षीय समझौता भारत, श्रीलंका और संयुक्त अरब अमीरात के बीच 5 अप्रैल 2025 को हुआ जिसके तहत श्रीलंका के त्रिंकोमाली को एक बहुआयामी प्रमुख ऊर्जा हब के रूप में मिलकर विकसित किया जाएगा। इस समझौत् के तहत, तीन देशों ने त्रिंकोमाली में संरचनात्मक और ऊर्जा परियोजनाएं विकसित करने पर सहमति जताई, जिसमें दूसरे विश्व युद्ध के समय के टैंक फार्म का नवीनीकरण और एक नई रिफाइनरी बनाना शामिल है।[xiv] इस समझौते का उद्देश्य श्रीलंका की ऊर्जा सुरक्षा को बेहतर बनाने के साथ– साथ त्रिंकोमाली को दक्षिण एशिया के ऊर्जा और रसद गेटवे के तौर पर उसकी पूरी क्षमता का इस्तेमाल करना है।
त्रिंकोमाली में रसद और ऊर्जा हब के लिए अत्यधिक आर्थिक क्षमता है जिसका आधार ब्रिटिश ज़माने का तेल टैंक फार्म है। यह श्रीलंका के उत्तर– पूर्वी तट पर स्थित है जो विश्व के सबसे बड़े और सबसे गहरे प्राकृतिक बंदरगाहों में से एक है। यह बंदरगाह अपनी स्थिति की वजह से भी बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दक्षिण एशिया, दक्षिणपूर्व एशिया, पूर्व एशिया, मध्य पूर्व और अफ्रीका को जोड़ने वाले प्रमुख समुद्री संचार रेखाओं के पास है। ऐतिहासिक रूप से, त्रिंकोमाली को व्यापक हिंद– प्रशांत में नौसैनिक मार्गों और व्यापार पर नियंत्रण रखने की क्षमता के लिए महत्व दिया गया है। जैसे– जैसे हिंद महासागर क्षेत्र वैश्विक समुद्री व्यापार में प्रमुख खिलाड़ी के रूप में उभरा है, समकालीन समय में इस क्षेत्र के देशों द्वारा इसके रणनीतिक महत्व को बहुत अधिक पहचाना गया है।[xv]

नक्शे पर त्रिंकोमाली बंदरगाह
स्रोत: लेखक द्वारा बनाया गया
भारत की रणनीतिक और सुरक्षा विचार में त्रिंकोमाली का एक अहम स्थान है क्योंकि त्रिंकोमाली बंदरगाह पर किसी भी देश का नियंत्रण भारत के पूर्वी तट और शायद दक्षिण भारत में महत्वपूर्ण परमाणु और अंतरिक्ष प्रतिष्ठानों के लिए गंभीर संकट पैदा कर सकता है। व्यापार के मामले में, भारत का 80% से ज्यादा तेल आयात और 90% व्यापार हिंद महासागरीय मार्ग से होता है। इसलिए, त्रिंकोमाली को विकसित कर भारत इस क्षेत्र में चीन की बढ़ती भूमिका को संतुलित करने का प्रयास कर रहा है। चीन ने श्रीलंका के दक्षिण में स्थित रणनीतिक बंदरगाह, हंबनटोटा बंदरगाह,[xvi] में बड़े पैमाने पर निवेश किया है। इस संदर्भ में, त्रिंकोमाली भारत की हिंद– प्रशांत रणनीति के लिए महत्वपूर्ण है और भारत इस क्षेत्र में कई परियोजनाओं में शामिल रहा है। इनमें सबसे प्रमुख है संपूर गांव में एक सौर ऊर्जा संयंत्र और त्रिंकोमाली में थिरुकोनेस्वरम मंदिर का जीर्णोधार।[xvii]
त्रिंकोमाली को विकसित करने में पश्चिम एशिया में भारत के महत्वपूर्ण द्विपक्षीय साझीदार संयुक्त अरब अमीरात को शामिल कर भारत उन देशों के साथ अपनी साझीदारी को मजबूत बनाने की कोशिश कर रहा है जो इस क्षेत्र में भारत के साथ काम करने के इच्छुक हैं।
संयुक्त अरब अमीरात भी इस क्षेत्र में अपनी पकड़ मज़बूत करना चाहता है, अपनी ऊर्जा कूटनीति में विविधता लाना चाहता है, और दक्षिण एशियाई बाज़ार का लाभ उठाना चाहता है।[xviii] ऊर्जा बाज़ार आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (ओईसीडी/OECD) देशों से हटकर भारत, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे तेज़ी से बढ़ते एशियाई देशों का रुख कर रहा है। इसे हिंद महासागर क्षेत्र (आईओआर/IOR) में ऊर्जा सहयोग विकसित करने में संयुक्त अरब अमीरात की गहरी दिलचस्पी का एक कारण माना जाता है।[xix] संयुक्त अरब अमीरात की ऊर्जा विविधिकरण रणनीति 2030 तक ऊर्जा परियोजना में 150 से 200 अरब एईडी (यूएई की मुद्रा यूएई दिरहम/ AED) के लक्षित निवेश के माध्यम से आर्थिक विविधिकरण का भी समर्थन करती है[xx]।
इसलिए, भारत और श्रीलंका के साथ ऊर्जा समझौता इस क्षेत्र में नए बुनियादी ढांचा लिंकेज बनाकर इस विविधिकरण को सरल बना सकते हैं, जिससे कच्चे तेल और रिफाइंड पेट्रोलियम जैसे अपने परंपरागत निर्यात पर इसकी अधिक निर्भरता कम हो सकती है।[xxi] वर्तमान में, संयुक्त अरब अमीरात की जीडीपी का 30 फीसदी सीधे तौर पर तेल और गैस निर्यात पर निर्भर है।[xxii] ऊर्जा के अलावा, हिंद महासागर क्षेत्र में संयुक्त अरब अमीरात की बढ़ती भागीदारी उसके जेबेल अली बंदरगाह पर केंद्रित है जो दुबई के परिवहन और रसद क्षेत्र का एक अहम हिस्सा है और जीडीपी (2023 में 11.5%) के मामले में दूसरा सबसे बड़ा बंदरगाह है।[xxiii] जेबेल अली बंदरगाह को चालू रखने के लिए हिंद महासागर व्यापार मार्ग का सुरक्षित और बाधामुक्त रहना आवश्यक है। इसलिए, संयुक्त अरब अमीरात हिंद महासागर में समझौतों के जरिए और हिंद महासागर रिम एसोसिएशन (आईओआरए/IORA) जैसे मंचों के माध्यम से अपनी समुद्री कनेक्टिविटी को बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
श्रीलंका के लिए, त्रिंकोमाली तेल टैंक फार्म का विकास कच्चे तेल के लिए दूसरे देशों पर उसकी निर्भरता को कम कर सकता है। श्रीलंका की सपुगास्कंदा तेल रिफाइनरी देश की 30% घरेलू मांग को पूरा करती है और बाकी 70% दूसरे देशों से पेट्रोलियम उत्पाद आयात कर पूरा किया जाता है।[xxiv] इसलिए, श्रीलंका के लिए यह समझौता भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा देता है। ऊर्जा सुरक्षा को और सुदृढ़ करने के लिए श्रीलंका की कैबिनेट ने फरवरी 2025 में बिल्ड– ऑपरेट– ट्रांसफर (बीओटी/ BOT) मॉडल के तहत अपनी सपुगास्कंदा तेल रिफाइनरी की क्षमता को बढ़ाकर 100,000 बैरल प्रति दिन करने के लिए एक इच्छा– पत्र को मंजूरी दी,[xxv] जिससे श्रीलंका को आशा है कि मध्य पूर्व, अमेरिका, चीन, जापान और भारत के निवेशक आकर्षित होंगे।[xxvi]
इसके अलावा, श्रीलंका ने जनवरी 2025 में चीन की सरकारी ऊर्जा कंपनी सिनोपेक के साथ हंबनटोटा अंतरराष्ट्रीय पोर्ट (एचआईपी/HIP) के पास निवेश क्षेत्र में 3.7 अरब डॉलर की अत्याधुनिक तेल रिफाइनरी बनाने के लिए समझौते पर भी हस्ताक्षर किया है।[xxvii]
नवंबर 2025 तक, त्रिंकोमाली ऊर्जा हब पर काम तैयारी के चरण में पहुँच गया है। श्रीलंका के ऊर्जा मंत्री के अनुसार, कोलंबो त्रिंकोमाली तेल फार्म टैंक के नवीनीकरण और संचालन के बारे में आगे की वार्ता के लिए भारत से संयुक्त कार्य टीम की प्रतीक्षा कर रहा है।[xxviii] त्रिंकोमाली समझौते में श्रीलंका की भागीदारी भी उसकी बहु– संरेखित विदेश नीति के प्रति व्यापक प्रतिबद्धता से निर्धारित होती है जो आर्थिक सुधार पर ज़ोर देती है।[xxix]
मूल्यांकन
ये दोनों समझौते दक्षिण एशिया में क्षेत्रीय ऊर्जा कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने की भारत की कोशिशों के मुताबिक हैं। भारत, नेपाल और बांग्लादेश समझौते में बांग्लादेश– भूटान– भारत– नेपाल (बीबीआईएन/BBIN) सीमा– पार विद्युत व्यापार (सीबीईटी/CBET) को बढ़ावा देने की क्षमता है। वर्तमान में, दक्षिण एशिया की हिंद प्रशांत में सीबीईटी में केवल 10% हिस्सेदारी है।[xxx] भारत– नेपाल– बांग्लादेश ऊर्जा सहयोग बिमस्टेक के ग्रिड कनेक्शन पर हुए समझौते के भी अनुरूप है जिससे बिमस्टेक के कनेक्टिविटी लक्ष्यों के लिए भी एक राह बनती है।[xxxi]
श्रीलंका और नेपाल जैसे दक्षिण एशियाई देशों के लिए, इस प्रकार के और त्रिपक्षीय समझौते ऐसे आर्थिक मार्ग प्रशस्त करेंगे जो निवेश को संतुलित करते हुए रणनीतिक स्वायत्तता को बनाए रखेगा।
बढ़ती अहमियत के बावजूद, ये त्रिपक्षीय समझौते घरेलू राजनीतिक बदलावों के प्रति भी कमज़ोर बने हुए हैं। बांग्लादेश में, 2024 में नेतृत्व परिवर्तन से संबंधित राजनीतिक परिवर्तनों ने साझीदार देशों के लिए कुछ सीमा तक अनिश्चितता पैदा कर दी है।[xxxii] ऐसी ही स्थिति नेपाल में भी दिख रही है जहाँ सितंबर 2025 में सरकारी भ्रष्टाचार के खिलाफ युवाओं का विद्रोह हुआ, जिससे नेपाल के नेतृत्व में परिवर्तन हुआ।[xxxiii] यहाँ तक की श्रीलंका में भी, 2022 में जन आंदोलन की वजह से नेतृत्व में परिवर्तन हुआ था और 2024 में चुनावों के माध्यम से नई सरकार बनाई गई थी। भारत के पड़ोसी देशों के ये घटनाक्रम भविष्य में त्रिपक्षीय समझौतों को लागू करने और जारी रखने के संबंध में चुनौती प्रस्तुत कर सकते हैं।[xxxiv]
दक्षिण एशिया में चीन की बढ़ती रणनीतिक भागीदारी के साथ बढ़ता भू– राजनीतिक मुकाबला भी एक बड़ी बाधा है। दक्षिण एशिया में बीजिंग, इस्लामाबाद, काबुल और ढाका को शामिल करते हुए चीन के नेतृत्व वाले त्रिपक्षीय ढांचे का उदय भारत के क्षेत्रीय प्रभाव के मुकाबले एक जवाबी कदम के तौर पर देखा जा रहा है।[xxxv] चीन की बदली हुई विदेश नीति की सॉफ्ट पावर रणनीति लोगों से लोगों के बीच डिप्लोमेसी पर फोकस करती है, जिसका उद्देश्य चीन के बारे में सोच और राय को आकार देना है जो उसके बड़े भू–राजनीतिक एजेंडे को पूरा करता है।[xxxvi] इस संदर्भ में, दक्षिण एशिया में भारत के त्रिपक्षीय समझौते समान विचार वाले देशों के साथ ऊर्जा सहयोग को सुरक्षित करने में मदद कर सकते हैं।
इस पृष्टभूमि में, हस्ताक्षर किए गए त्रिपक्षीय समझौते महत्वपूर्ण हैं क्योंकि वे ऐसे क्षेत्रों में सहयोग के वैकल्पिक तरीके प्रदान करते हैं जिन्हें क्षेत्रीय स्तर पर तत्काल ध्यान और सहयोग की आवश्यकता है। क्षेत्रीय ऊर्जा कनेक्टिविटी और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए त्रिपक्षीय समझौते भी गति बनाने में उपयोगी होते हैं और समय पर नतीजे देने की क्षमता रखते हैं, विशेषरूप से ऐसी स्थिति में जब सार्क स्थिर हो। भारत के नज़रिए से ये त्रिपक्षीय समझौते राजनयिक गति बनाए रखने और पड़ोसी देशों के साथ साझीदार को मज़बूत करने के बीच एक पुल का काम करते हैं।
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*सचिन यादव, भारतीय वैश्विक परिषद, नई दिल्ली में शोध प्रशिक्षु हैं।
अस्वीकरण : यहां व्यक्त किए गए विचार निजी हैं।
डिस्क्लेमर: इस अनुवादित लेख में यदि किसी प्रकार की त्रुटी पाई जाती है तो पाठक अंग्रेजी में लिखे मूल लेख को ही मान्य माने ।
अंत टिप्पण:
[i] “Inauguration of First Trilateral Power Transaction – from Nepal to Bangladesh through the Indian Grid.” 2024. Ministry of External Affairs, Government of India. November 15, 2024. https://www.mea.gov.in/press-releases.htm?dtl%2F38523%2FInauguration_of_first_trilateral_power_trans.
[ii] “Nepal Starts Exporting 40 MW of Electricity to Bangladesh via Indian Grid.” 2025. Business Standard. June 15, 2025. https://www.business-standard.com/world-news/nepal-starts-exporting-40-mw-of-electricity-to-bangladesh-via-indian-grid-125061500236_1.html.
[iii] Prasain, Sangam. 2024. “Nepal Begins Historic Power Export to Bangladesh via India.” Kathmandu Post. The Kathmandu Post. November 16, 2024. https://kathmandupost.com/money/2024/11/16/nepal-begins-historic-power-export-to-bangladesh-via-india.
[iv] “Nepal’s Installed Capacity of Electricity Reaches 3,878 MW.” 2025. My Republica. Republica. July 20, 2025. https://myrepublica.nagariknetwork.com/news/nepals-electricity-installed-capacity-reaches-3878-mw-56-50.html.
[v] Kafle, Laxman. 2025. “Nepal Starts Commercial Export of Electricity to Bangladesh.” Risingnepaldaily.com. The Rising Nepal. June 16, 2025. https://risingnepaldaily.com/news/63613.
[vi] “Nepal Suffers Trade Deficit with Bangladesh for a Decade | New Business Age.” 2024. New Business Age. September 29, 2024. https://newbusinessage.com/news/40714/nepal-suffers-trade-deficit-with-bangladesh-for-a-decade.
[vii] “The Energy Roadmap.” 2025. The Rising Nepal. March 17, 2025. https://risingnepaldaily.com/news/58759.
[viii] Man Shrestha, Prithvi . 2024. “Nepal Proposes Tariff for Electricity Export to Bangladesh.” @Kathmandupost. The Kathmandu Post. February 6, 2024. https://kathmandupost.com/national/2024/02/06/nepal-proposes-tariff-for-electricity-export-to-bangladesh.
[ix] “Energy System of Bangladesh.” 2023. IEA – International Energy Agency. 2023. https://www.iea.org/countries/Bangladesh.
[x] “Energy Scenario of Bangladesh.” 2024. Energy and Mineral Resources Division (EMRD). https://hcu.portal.gov.bd/sites/default/files/files/hcu.portal.gov.bd/publications/ae775b7e_b63d_491d_81e4_b317ff8e11ca/2024-07-15-09-11-d13a3451b969fb9a3c5c74e9130c9f6c.pdf.
[xi] “Nepal, Bangladesh, India Sign 40MW Power Agreement.” 2024. Dhaka Tribune. October 3, 2024. https://www.dhakatribune.com/bangladesh/foreign-affairs/360698/nepal-bangladesh-india-signs-40mw-power.
[xii] Bhanu, Mehjabin. 2023. “India-Nepal-Bangladesh Power Diplomacy Is a Big Step for Regional Cooperation in South Asia.” South Asia Monitor. June 30, 2023. https://www.southasiamonitor.org/spotlight/india-nepal-bangladesh-power-diplomacy-big-step-regional-cooperation-south-asia.
[xiii] Birat Anupam. 2024a. “With Start of Trilateral Hydropower Trade, South Asia Begins Historic Cooperation.” Thediplomat.com. The Diplomat. November 21, 2024. https://thediplomat.com/2024/11/with-start-of-trilateral-hydropower-trade-south-asia-begins-historic-cooperation/.
[xiv] Saha, Rushali . 2025. “Three-Way Energy Play: The India-Sri Lanka-UAE Deal in Trincomalee | Lowy Institute.” Lowyinstitute.org. April 14, 2025. https://www.lowyinstitute.org/the-interpreter/three-way-energy-play-india-sri-lanka-uae-deal-trincomalee.
[xv] Latief Tantray, Talha , Dr R. Sudhakar, and Shubham Singh Charak. 2024. “View of Trincomalee Harbour in the Indo-Pacific: Strategic Significance and Contemporary Geopolitical Implications for India.” Unican.es. Journal of Maritime Research. July 24, 2024. https://www.jmr.unican.es/jmr/article/view/981/968.
[xvi] Ibid.
[xvii] “List of Outcomes: Visit of Prime Minister to Sri Lanka.” 2025. Pib.gov.in. April 5, 2025. https://www.pib.gov.in/PressReleaseIframePage.aspx?PRID=2119186®=3&lang=2.
[xviii] “UAE, India, Sri Lanka Sign Tripartite MoU to Develop Trincomalee as Regional Energy Hub.” 2025. Www.wam.ae. Emirates News Agency -WAM. April 6, 2025. https://www.wam.ae/en/article/bj1itz6-uae-india-sri-lanka-sign-tripartite-mou-develop.
[xix] Loup Samaan, Jean . 2021. “Insight 268: The UAE: An Emerging Middle Power in the Indian Ocean? – NUS – Middle East Institute.” Nus.edu.sg. Middle East Institute (Singapore). October 12, 2021. https://mei.nus.edu.sg/publication/insight-268-the-uae-an-emerging-middle-power-in-the-indian-ocean/#_ftnref4.
[xx] “UAE Energy Strategy 2050 | the Official Platform of the UAE Government.” 2017. The United Arab Emirates’ Government Platform. 2017. https://u.ae/eu/about-the-uae/strategies-initiatives-and-awards/strategies-plans-and-visions/environment-and-energy/uae-energy-strategy-2050.
[xxi] UAE Embassy 2024. “UAE Energy Diversification | UAE Embassy in Washington, DC.” UAE Energy Diversification | UAE Embassy in Washington, DC. 2024. https://www.uae-embassy.org/discover-uae/climate-and-energy/uae-energy-diversification.
[xxii] International Trade Administration 2025. “United Arab Emirates - Oil and Gas.” International Trade Administration. August 25, 2025. https://www.trade.gov/country-commercial-guides/united-arab-emirates-oil-and-gas.
[xxiii] “Jebel Ali: Facilitating Dubai’s Growth Agenda.” 2024. Emirates NBD Research. November 7, 2024. https://www.emiratesnbdresearch.com/-/media/jebel-ali_facilitating-dubai-growth-agenda.pdf.
[xxiv] “Request for Expression of Interest (EOI).” 2025. Ceylon Petroleum Corporation. August 15, 2025. https://ceypetco.gov.lk/wp-content/uploads/2025/08/EOI-Document-Sapugaskanda-Refinary-Development.pdf.
[xxv] Ibid.
[xxvi] “Sapugaskanda Refinery Attracts Global Investors.” 2025. Newsfirst.lk. October 5, 2025. https://www.newsfirst.lk/2025/10/05/sapugaskanda-refinery-attracts-global-investors.
[xxvii] Jayasinghe, Uditha. 2025. “Sri Lanka Agrees with China’s Sinopec to Fast-Track $3.7 Billion Refinery.” Reuters, January 22, 2025. https://www.reuters.com/world/asia-pacific/sri-lanka-china-agree-fast-track-sinopecs-37-bln-refinery-hambantota-2025-01-22/.
[xxviii] “Sri Lanka Expecting Joint Working Team from India on Trinco Tanks : Minister.” 2025. EconomyNext. November 22, 2025. https://economynext.com/sri-lanka-expecting-joint-working-team-from-india-on-trinco-tanks-minister-249362/?utm_source=chatgpt.com.
[xxix] DeVotta, Neil. 2024. “Sri Lanka in 2024: Political Realignment and the Road Ahead – South Asian Voices.” South Asian Voices. December 16, 2024. https://southasianvoices.org/pol-m-sl-r-sri-lanka-2024-12-16-2024/.
[xxx] George, Joseph . 2023. “Cross-Border Electricity Trade in the BBIN Subregion: Status, Issues and Prospects.” ESCAP. Economic and Social Commission for Asia and Pacific. October 16, 2023. https://www.unescap.org/sites/default/d8files/event-documents/Cross-border%20Electricity%20Trade%20in%20the%20BBIN%20Subregion_Joseph%20George%2C%20SRO-SSWA%2C%20ESCAP.pdf.
[xxxi] “Grid Interconnection Coordination Committee - Home-the Bay of Bengal Initiative for Multi-Sectoral Technical and Economic.” 2018. Bimstec.org. BIMSTEC. August 31, 2018. https://bimstec.org/grid-interconnection-coordination-committee.
[xxxii] Paul, Ruma, Krishn Kaushik, Devjyot Ghoshal, and Krishna N Das. 2024. “Insight: Bangladesh Student Protesters Eye New Party to Cement Their Revolution.” Reuters, August 16, 2024. https://www.reuters.com/world/asia-pacific/bangladesh-student-protesters-plan-new-party-cement-their-revolution-2024-08-16/.
[xxxiii] Sharma, Gopal. 2024. “Nepal PM Forms New Coalition, Dumps Old Allies.” Reuters, March 4, 2024. https://www.reuters.com/world/asia-pacific/nepal-coalition-crisis-pm-talks-with-opposition-new-alliance-2024-03-04/.
[xxxiv] DeVotta, Neil. 2024. “Sri Lanka in 2024: Political Realignment and the Road Ahead – South Asian Voices.” South Asian Voices. December 16, 2024. https://southasianvoices.org/pol-m-sl-r-sri-lanka-2024-12-16-2024/.
[xxxv] Pant, Harsh V, and Aditya Gowdara Shivamurthy. 2025. “A China-Led Trilateral Nexus as India’s New Challenge.” Orfonline.org. OBSERVER RESEARCH FOUNDATION ( ORF ). June 28, 2025. https://www.orfonline.org/research/a-china-led-trilateral-nexus-as-india-s-new-challenge.
[xxxvi] Sami, Adnan. 2024. “China’s Soft Power Play in South Asia.” Modern Diplomacy. September 12, 2024. https://moderndiplomacy.eu/2024/09/12/chinas-soft-power-play-in-south-asia/.