परिचय
न सिर्फ भारत में बल्कि दुनिया भर में भी, सरकारों और नीति निर्माताओं का ध्यान समुद्री क्षेत्र में साइबर सुरक्षा की भूमिका के बारे में अधिक जागरूकता पैदा करने पर बढ़ रहा है। अक्टूबर 2025 में हुए एक कार्यक्रम में, भारत के वर्तमान नौसेना प्रमुख एडमिरल डी.के. त्रिपाठी ने साइबर हमलों को ‘केवल सिस्टम पर ही नहीं बल्कि भारत की अर्थव्यवस्था पर हमला बताया’ और ‘भारत के समुद्री भविष्य के लिए साइबर सुरक्षा को प्रमुख चिंता’ बताया।[i] इस प्रकार, उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि 'साइबर सुरक्षा को शुरुआत से ही सभी समुद्री प्रणाली में एकीकृत किया जाए, तेज़ी से जानकारी को साझा करने के लिए हितधारकों के बीच समन्वय को बेहतर बनाया जाए और समुद्री क्षेत्र को एक स्वतंत्र महत्वपूर्ण सूचना अवसंरचना (सीआईआई/CII) के रूप में जोड़ा जाए’।[ii]
महत्वपूर्ण सूचना अवसंरचना (सीआईआई/CII) का अर्थ उन कंप्यूटर सिस्टम, नेटवर्क और सूचना संसाधनों से है जिनके खराब होने से किसी देश की सुरक्षा, अर्थव्यवस्था, जन स्वास्थ्य या सुरक्षा पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।[iii] समुद्री क्षेत्र में साइबर सुरक्षा, साइबर से संबंधित खतरों से निपटने में कार्य–उन्मुख होने के बजाय प्रतिक्रिया–उन्मुख है। जहाजों का डिजिटल आर्किटेक्चर सूचना तकनीक (आईटी/IT), यानि, फ्लीट मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर, क्रू ईमेल, पैसेंजर रिकॉर्ड, कार्गो डेटा मैनेजमेंट आदि जैसे एप्लिकेशन और रडार (RADAR), नौवहन प्रणालियां एवं इंजन कंट्रोल से जुड़ी संचालन तकनीक प्रणालियों (ओटी/OT) से बना होता है।
आज ओटी (OT) और आईटी (IT) प्रणालियों का एकीकरण का अर्थ है ये ज्यादा बड़े वर्ल्ड वाइड वेब (WWW) नेटवर्क में मिल रहे हैं, जिससे हैकर्स अलग– अलग क्षेत्रों में हमला कर पा रहे हैं। आज जहाज़ और बंदरगाह परिसर डिजिटल पारितंत्र की तरह काम करते हैं, जिसमें कई एक– दूसरे पर निर्भर प्लेटफॉर्म और हितधारक होते हैं।[iv] इस जटिल पारितंत्र में रसद, सॉफ्टवेयर और कार्गो प्रबंधन बनाए रखने के लिए कई तीसरे–पक्ष के विक्रेता होते हैं। इनमें से किसी एक के साथ भी समझौता होने पर सामान पहुँचाने में देरी, बंदरगाह पर भीड़ और बंदरगाह के असुरक्षित होने जैसे कई बुरे परिणाम हो सकते हैं।
आज ज्यादातर प्लेटफ़ॉर्म्स में सुरक्षा की तैयारी और तकनीक अपनाने के बीच तालमेल की कमी की वजह से साइबर सुरक्षा की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए आवश्यक अपडेट नहीं हैं। हालांकि साइबर खतरों को अंजाम देने वालों का मुख्य मकसद पैसे बनाना रहा है लेकिन गैर– राष्ट्रीय कारक (नॉन– स्टेट एक्टर्स) की बढ़ती भागीदारी चिंताजनक है, विशेष रूप से बड़ी मात्रा में डेटा स्टोर करने के मामले में, जिसमें कार्गो यात्रा रिकॉर्ड, क्रू की जानकारी, वित्तीय रिकॉर्ड और बौद्धिक संपदा जैसे व्यापारिक रहस्य शामिल हैं।
यह डेटा इन लोगों द्वारा आसानी से एक्सेस किया जा सकता है जिसका प्रयोग वित्तीय लाभ उठाने के लिए किया जा सकता है। अगर डेटा में हेरफेर किया जाता है तो इसका मतलब हो सकता है कि तस्करी की गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए जहाज पर मौजूद क्रू, कार्गो और शिपिंग मार्गों के बारे में जानकारी बिना इज़ाजत के लीक किया गया है। यह शोधपत्र हिंद महासागर क्षेत्र (आईओआर) में साइबर संबंधी हमलों के उभरने और उनसे जुड़े रुझानों पर चर्चा करता है। यह इस क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा और सहयोग के प्रयासों के प्रति भारत के नज़रिए पर भी नज़र डालता है।
समुद्री साइबर सुरक्षा के प्रति भारत का नज़रिया
भारत आईओआर का महत्वपूर्ण क्षेत्रीय खिलाड़ी है। इसके अलावा, यह व्यापक ग्लोबल साउथ की आवाज़ बुलंद करने में भी अहम भूमिका निभाता है, जिसमें कई देश आईओआर का भी हिस्सा हैं। समुद्री क्षेत्र में तकनीक का बढ़ता एकीकरण मुख्य रूप से सतत पोत–परिवहन समाधान बनाने और मजबूत सुरक्षा प्रणाली सुनिश्चित करने के लिए है।
हालांकि, यह एक नई चुनौती प्रस्तुत करता है क्योंकि साइबर सुरक्षा विफलता का बढ़ना अर्थव्यवस्था के लिए खतरा है और राष्ट्रीय सुरक्षा जोखिमों के लिए भी।[viii] अमेरिका के राष्ट्रीय समुद्री साइबर सुरक्षा योजना, 2020, या यूनाइटेड किंगडम की समुद्री सुरक्षा राष्ट्रीय रणनीति, 2022 के उलट भारत के पास समुद्र क्षेत्र में साइबर सुरक्षा के लिए अलग से कोई रणनीति नहीं है।[ix]
हालांकि, अपने समुद्री क्षेत्र में साइबर हमलों के बारे में घरेलू जागरूकता और प्रतिक्रिया में तेज़ी आई है। यह स्वदेशी तकनीक का प्रयोग कर, कर्मियों को प्रशिक्षण देने के लिए साइबर सुरक्षा कार्यशालाओं का आयोजन कर एवं भारतीय नौसेना एवं जहाजरानी महानिदेशालय समेत संस्थानों द्वारा सरकारी–निजी भागीदारी को बढ़ावा देकर किया गया है। भारतीय नौसेना के नेतृत्व वाला और भारत इलेक्ट्रिनिक्स लिमि. (बीईएल) द्वारा लागू की गई– राष्ट्रीय समुद्री डोमेन जागरूकता परियोजना, को, 2022 में सरकार द्वारा मंजूर किया गया था।
इसका उद्देश्य समुद्र आधारित खतरों से निपटने के लिए एक एकीकृत खुफिया ग्रिड के जरिए “समुद्री खतरों से निपटने के लिए कार्रवाई योग्य खुफिया जानकारी” देना था। एक विशेष समुद्री सीईआरटी (कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रया दल/CERT– Computer Emergency Response Team) बनाने पर भी काम चल रहा है यानी, ‘एक विशेषज्ञ एजेंसी जो साइबर घटनाओं पर नज़र रखेगी, प्रतिक्रियाओं का समन्वय करेगी और भारत के समुद्री क्षेत्र के लिए सुरक्षा मानकों का निर्धारण करेगी’।[x]
आईओआर में साइबर संबंधित हमलों का रुझान
नीदरलैंड्स के एनएचएल स्टेंडन द्वारा विकसित एमसीएडी साइबर सुरक्षा हमला डेटाबेस के आंकड़ों के अनुसार हिंद महासागर में 50 से ज्यादा साइबर– संबंधित हमले हुए हैं।[v] आईओआर में 200 से ज्यादा बंदरगाह हैं जबकि अकेले भारत का समुद्र तट 7,500 किमी लंबा है और यहाँ 12 बड़े एवं 200 छोटे बंदरगाह हैं।[vi] दुनिया के लगभग 80 प्रतिशत तेल व्यापार 70 प्रतिशत कंटेनर ट्रैफिक आईओआर से होकर गुज़रता है।[vii] आज आईओआर में होने वाले साइबर हमले हर देश के सीआईआई को निशाना बनाते हैं।
इसका कारण खतरों का एक साथ आना है, जिसका मतलब है कि इस क्षेत्र में साइबर हमले की घटनाएं अलग तरीके से की जाने लगी हैं और अब उनमें दूसरी चुनौतियां भी शामिल हैं जैसे कि समुद्री डकैती, हथियारों से लैस लूट, बिना रोक– टोक मछली पकड़ना, गैर– कानूनी तस्करी और नौवहन की आज़ादी। सिस्टम में साधारण मैलवेयर डालने से, इस क्षेत्र में साइबर हमलों से होने वाला खतरा केवल वित्तीय नुकसान तक ही सीमित नहीं है बल्कि और भी कई दूसरी समस्याएं हैं।
वर्ष 2017 में भारत में, जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह न्यास (जेएनपीटी/JNPT) के तीन टर्मिनलों में से एक पर ग्लोबल रैंसमवेर हमले के कारण कामकाज प्रभावित हुआ था।[xi] वर्ष 2021 में, ऑल इंडिया कार्गो लॉजिस्टिक्स भी एक रैंसमवेर हमले का शिकार हुआ था जिसमें हैकर्स ने 2 टेराबाइट डेटा चुरा लिया था और ईमेल सिस्टम को बंद कर दिया था।[xii] वर्ष 2022 में, भारतीय लॉजिस्टिक्स कंपनी, टीवीएस सप्लाई चेन सॉल्यूशंस पर रूस से जुड़े कराकुर्ट ग्रुप ने हमला किया और इसकी लॉजिस्टिक्स सेवाओं को प्रभावित किया। इस वजह से कंपनी के अलग– अलग आपूर्ति श्रृंखला में वस्तुओं की आवाजाही प्रभावित हुई थी।[xiii] भारतीय नौसेना के लिए स्वदेशी विमानवाहक पोत बनाता है, उसे 2023 में वेबसासइट डाउन होने की समस्या का सामना करना पड़ा था।[xiv] वर्ष 2021 में, बाब–अल–मन्देब जलसंधि के पास, फिशिंग ईमेल के ज़रिए रैंसमवेर हमले ने एक कंटेनर टर्मिनल के परिचालन को प्रभावित किया, जिससे अनुमानित पांच मिलियन डॉलर ($5 million) का नुकसान हुआ था और दर्जनों जहाज़ों का रास्ता बदलना पड़ा था जिससे समुद्र में ट्रैफिक जाम जैसी स्थिति हो गई थी।[xv]
पश्चिमी हिंद महासागर में साइबर संबंधि हमलों का एक नया पैटर्न सामने आया है, जिसमें साइबर पाइरेसी को पाइरेसी के वर्तमान दायरे में शामिल किया जा रहा है। साल 2020 में, कच्चे तेल के टैंकर के साथ गड़बड़ी हुई थी जब उसके ECDIS (इलेक्ट्रॉनिक चार्ट डिस्प्ले एंड इंफॉर्मेशन सिस्टम) में बिना बताए बदलाव दिखने लगे थे, इसकी वजह से जहाज़ अपना रास्ता भटक गया था।[xvi] साल 2022 में, कई जहाज़ों को स्वचालित पहचान प्रणाली (एआईएस/ AIS) स्थितियों की रिपोर्ट करते हुए पाया गया था।[xvii]
इसका असर बहुत खतरनाक था क्योंकि उनकी गलत एआईएस स्थिति सेना वाले इलाकों के आसपास बताई गई थीं जिनमें प्रतिबंधित या अंतरराष्ट्रीय निगरानी वाले इलाके भी शामिल थे और इसके बाद क्षेत्रीय नौसेना की इमरजेंसी संकट संकेत भेजे गए।[xviii] इसी साल, जिबूती के बंदरगाह में लॉजिस्टिक्स सिस्टम पर हमला किया गया, जहाँ सैन्य नौभार और व्यावसायिक कार्गो के बारे में डेटा चुरा लिया गया था।[xix]
विश्व भर में पकड़ी जाने वाली समुद्री मछिलयों का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा, जिसकी अनुमानित सालाना कीमत 10 से 23.5 अरब डॉलर ($10–23.5 billion) है, अवैध, बिना रिपोर्ट की गई, बिना नियमन वाली (आईयूयू) मछली पकड़ने के कारण, बर्बाद हो जाता है। [xx] इसी संदर्भ में आईओआर में वैश्विक मछली पकड़ने के व्यापार की हिस्सेदारी 10 प्रतिशत से अधिक है।[xxi] आज, उपग्रह– आधारित डेटा मछली पकड़ने की गतिविधियों, जहाज़ों की आवाजाही और मालिकाना हक की जानकारी का पता लगा सकते हैं।[xxii] आईओआर में समुद्री क्षेत्र में साइबर सुरक्षा पर मौजूदा व्यवस्था बिना नियमन और बिना जांच के होने की वजह से हैकिंग के ज़रिए यह डेटा चुराने का मतलब होगा कि हैकर्स आईयूयू फिशिंग की दर बढ़ा सकते हैं।
समुद्री क्षेत्र में नॉन–स्टेट एक्टर्स (गैर– देशी कारक) द्वारा साइबर हमलों की बढ़ती दर से साइबर जासूसी का खतरा भी पैदा हो गया है। ये एक्टर्स अहम जानकारी तक अपनी पहुँच और हेरफेर का इस्तेमाल करके झूठी कहानियां बना सकते हैं, खलबली मचा सकते हैं और भू–राजनीतिक उद्देश्यों को पूरा कर सकते हैं। इसके अलावा, मशीनरी, ऑटोमोबाइल, तेल और कच्चे माल की आपूर्ति समेत वैश्विक व्यापार पर इन हमलों की वजह से संकट बना हुआ है जिससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर असर पड़ रहा है क्योंकि अब जहाज़ों का रास्ता बदला जा सकता है और यदि जहाज़ों के डिजिटल सिस्टम को हाईजैक कर लिया जाए तो अन्य वित्तीय लाभ के लिए कार्गो चुराया जा सकता है।
एक बार सिस्टम हाईजैक हो जाए तो हैकर्स ‘घोस्ट शिप’ भी बना सकते हैं या असली जहाजों को ‘गायब' कर सकते हैं। इससे नियंत्रण अधिकारियों के साथ कार्गो डेटा में हेरफेर होता है जिससे तस्करी और अवैध व्यापार करने का प्लेटफॉर्म मिलता है।[xxiii]
आईओआर में समुद्री साइबर सुरक्षा पर सहयोग के प्रयास
आईओआर में क्वाड और कोलंबो सुरक्षा सम्मेलन (सीएससी/CSC) जैसे महत्वपूर्ण बहुपक्षीय रूपरेखा और संगठनों में समुद्री क्षेत्र में साइबर सुरक्षा पर बहुत चर्चा हुई है। सीएससी में, डिजिटल फॉरेंसिक में मुख्य साइबर खतरों से निपटने, साइबर खतरे की इंटेलिजेंस को बढ़ाने और साइबर क्षेत्र में रक्षात्मक अभियानों के लिए 2022 में 'साइबर सुरक्षा और महत्वपूर्ण अवसंरचना एवं तकनीक की सुरक्षा' की शुरूआत की गई थी।[xxiv] इसके तुरंत बाद 2022 में, भारत ने एक ऐसा कदम उठाया जब भारतीय तटरक्षक बल ने कोशिशें शुरू कीं और चेन्नई में सीएससी के सदस्य देशों के तटरक्षक बलों की भागीदारी के साथ दो दिवसीय प्रथम तटीय सुरक्षा सम्मेलन का आयोजन किया गया ताकि समुद्री साइबर सुरक्षा मुद्दों पर बातचीत की जा सके।[xxv] नई दिल्ली में 2025 में सीएससी में सीआईआई (CII) पर संकट पर भी ज़ोर दिया गया; क्योंकि ये स्वाभाविक रूप से आपस में जुड़े हुए डिजिटल सिस्टम हैं, इसलिए इन पर अधिक जटिल हमले होने का खतरा बना रहता है।
क्वाड में साइबर सुरक्षा की बढ़ी अहमियत 2024 की विदेश मंत्रियों की बैठक में देखी गई जहाँ समुद्री क्षेत्र में साइबर सुरक्षा को मज़बूत बनाने के लिए सिस्टम, प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण पर ज़ोर दिया गया। क्वाड साइबर बूटकैंप और क्वाड साइबर चैलेंज जैसी क्षमता– निर्माण परियोजना वैश्विक साइबर सुरक्षा पेशेवरों में दिलचस्पी बढ़ाने और अधिक सार्वजनिक संसाधनों को इकट्ठा करने के लिए शुरू की गई थीं।[xxvii] किसी भी प्रकार के साइबर अपराध को रोकने के लिए संसाधन को एक साथ प्रयोग करने, सर्वोत्तम कार्यप्रणाली को साझा करने और संयुक्त साइबर सुरक्षा ड्रिल करने जैसे समन्वित प्रतिक्रिया को दोहराया गया।
इस बात पर भी ज़ोर दिया गया कि एक मज़बूत साइबर सुरक्षा रूपरेखा बनाया जाए और हिंद–प्रशांत क्षेत्र के देशों को उनकी अपनी साइबर सुरक्षा क्षमताएं बनाने में मदद करने के लिए समर्थन दिया जाए। [xxviii] नेताओं ने साइबर खतरों की स्थिति में आईयूयू फिशिंग पर नज़र रखने के लिए समुद्री क्षेत्र जागरूकता हेतु हिंद–प्रशांत साझेदारी(आईपीएमडीए/IPMDA) का प्रयोग करने पर भी ज़ोर दिया।[xxix]
साइबर सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए जानकारी साझा करना एक अहम पहलू रहा है, साथ ही यह बड़े समुद्री क्षेत्र जागरूकता पहल (एमडीए/MDA) में भी योगदान देता है, और संलयन केंद्रों ने इन्हें आसान बनाने में अहम भूमिका निभाई है। भारत द्वारा 2018 में शुरू किया गया सूचना संलयन केंद्र– हिंद महासागर क्षेत्र (आईएफसी– आईओआर) दूसरे समुद्री सुरक्षा केंद्रों के साथ सामान्य लिंक बनाने के लिए काम कर रहा है।[xxx] भारत, फ्रांस और ऑस्ट्रेलिया के त्रिपक्षीय समूह ने कर्मचारियों को हिंद महासागर क्षेत्र सूचना साझाकरण– का प्रयोग करने के लिए प्रशिक्षण भी दिया है– यह जानकारी के आदान– प्रदान के लिए यूरोपीय संघ द्वारा विकसित एक वेब–आधारित संचार और समन्वय प्रणाली है।[xxxi]
इसके अलावा, भारत ने इस क्षेत्र में प्रमुख साझीदारों के साथ समुद्री क्षेत्र में साइबर सुरक्षा पर समझौतों एवं वार्ता को बढ़ावा दिया है। वर्ष 2025 में प्रथम भारत– मलेशिया सुरक्षा संवाद में दोनों देशों ने साइबर सुरक्षा में सहयोग बढ़ाने के लिए काम किया, जिसके तहत ‘गैर– परंपरागत समुद्री सुरक्षा खतरों से निपटने के लिए संयुक्त फोकस ग्रुप’ बनाया गया।[xxxii] मोरक्को के रक्षा मंत्री की भारत यात्रा में समुद्री सुरक्षा और साइबर सुरक्षा पर एक व्यापक रोडमैप बनाने पर भी ज़ोर दिया गया जिससे हिंद महासागर कॉरिडोर के साथ बहुपक्षीय सहयोग एवं तालमेल को बढ़ावा मिलेगा।[xxxiii] जनवरी 2025 में 7वें भारत– फ्रांस समुद्री सहयोग संवाद के दौरान साइबर सुरक्षा समेत समुद्री खतरों पर संयुक्त मूल्यांकन विकसित करने के लिए भी इसी प्रकार की प्रतिबद्धताएं की गईं।[xxxiv]
आईओआर में साइबर लचीलापन सुनिश्चित करने की राह
साइबर हमलों ने विश्व भर के बंदरगाहों और जहाजों के डिजिटल पारितंत्र में तबाही मचा दी है। दुनिया के दूसरे हिस्सों में होने वाले हमलों आईओआर के देशों को भी प्रभावित कर सकते हैं। कई देश आपूर्ति श्रृंखला प्रक्रिया में शामिल हैं, और बड़े हमलों से अलग– अलग जगहों से लेकर अंतिम गंतव्य तक व्यापार के प्रवाह पर असर पड़ेगा। इस प्रकार हिंद महासागर में समुद्री साइबर सुरक्षा एक उभरता हुआ क्षेत्र है लेकिन यह एक ऐसा क्षेत्र है जो देशों को सीधे तौर पर प्रभावित कर सकता है। आईओआर के अधिकांश देश, कुछ को छोड़कर, विकासशील देश हैं और इसलिए, यदि कोई खतरा करीब आता है तो संसाधनों को साझा करना बहुत आवश्यक हो जाता है।
इस क्षेत्र के लिए समुद्री साइबर सुरक्षा का भविष्य कई बातों पर निर्भर करेगा। सबसे पहले, यह ज़रूरी है कि इससे होने वाले खतरे और दूसरे कई गैर–परंपरागत सुरक्षा संकटों से इसके संबंध को समझा जाए। यह स्पष्ट है कि इस क्षेत्र के कई देश जलवायु परिवर्तन, समुद्री डकैती, अवैध तस्करी और अंतरराष्ट्रीय अपराधों के शिकार हैं। साइबर सुरक्षा में इन सभी को एक ही छत के नीचे लाने की क्षमता है। दूसरा, इन संकटों से निपटने के लिए, इन देशों को एक साथ मिलकर काम करना होगा। आईओआर के हर देश के सुरक्षा हित अलग– अलग हैं और बहुत कम देशों को समुद्री साइबर सुरक्षा के मुद्दों पर बात करने की ज़रूरत महसूस होती है, सच तो यह है कि बहुत कम लोग इसे एक चिंता का विषय मानते हैं।
हिंद महासागर रिम एसोसिएशन (आईओआरए/IORA) और आईओएनएस (IONS) जैसे क्षेत्रीय संगठनों में इन मुद्दों से निपटने के लिए ज़रूरी क्षमता का अभाव है। यह स्पष्ट है कि समुद्री सुरक्षा को मज़बूत करने के लिए सूचना का साझाकरण बढ़ाने, समुद्री एजेंसियों के बीच संवाद को बढ़ावा देने और प्रशिक्षण एवं कार्यशाला के माध्यम से क्षमता निर्माण करने की आवश्यकता होगी।
इन तरीकों को साइबर सुरक्षा से जुड़ी प्रक्रिया के साथ जोड़ने से छोटा लेकिन ज़रूरी फायदा हो सकता है, जिससे सीआईआई (CIIs) को पूरी सुरक्षा मिलेगी। भारत ने ई– समुद्र (सभी समुद्री सेवाओं को एक ही जगह लाने वाला) जैसे स्वदेशी वेब प्लेटफ़ॉर्म लॉन्च करने और क्वांटम तकनीक के जरिए अपने आवश्यक संरचना को सुरक्षित रखने के लिए प्रक्रिया बनाने में भी बहुत प्रगति की है। ये ऐसी तकनीक है जिन्हें यदि अच्छे से लागू किया जाए तो इसे पूरे क्षेत्र में साझा किया जा सकता है।
इस क्षेत्र में आईओआरए प्रमुख क्षेत्रीय संगठन है.
ऐसे में जबकि ‘समुद्री सुरक्षा और बचाव’ आईओआरए के प्राथमिकता वाले छह क्षेत्रों में से एक है लेकिन देशों के बीच एकीकृत समुद्री सुरक्षा संरचना पर कोई सहमति नहीं बन पाई है एवं साइबर सुरक्षा से निपटने पर भी बहुत कम चर्चा हुई है। चूंकि भारत 2 वर्षों के लिए आईओआरए की अध्यक्षता कर रहा है इसलिए वह समुद्री साइबर सुरक्षा क्षमताओं पर चर्चा शुरू कर सकता है और पूरे क्षेत्र में साइबर लचीलेपन को बढ़ावा देने के लिए सहयोग की मांग कर सकता है। आईओआर में सामान्य समुद्री सुरक्षा संरचना नहीं है जिसकी वजह से साइबर से जुड़े हमले आज भी मुश्किल चुनौती पेश कर रहे हैं। इन हमलों के रुझान और इस क्षेत्र में अतंरराष्ट्रीय सहयोग से पता चलता है कि भविष्य के समाधान केवल एकजुट होकर ही हासिल किए जा सकते हैं।
*****
*जीशान अली, भारतीय वैश्विक परिषद, नई दिल्ली में शोध प्रशिक्षु हैं।
अस्वीकरण : यहां व्यक्त किए गए विचार निजी हैं।
डिस्क्लेमर: इस अनुवादित लेख में यदि किसी प्रकार की त्रुटी पाई जाती है तो पाठक अंग्रेजी में लिखे मूल लेख को ही मान्य माने ।
संदर्भ
[i] Navy chief flags rising cyber threats to India’s maritime sector, Hindustan Times, October 16, 2025, https://www.hindustantimes.com/india-news/navy-chief-flags-rising-cyber-threats-to-india-s-maritime-sector-101760620207947.html
[ii] Ibid.
[iii] National Critical Information Infrastructure Protection Centre https://nciipc.gov.in/
[iv] Ports functioning as complex digital ecosystems, Fernando Almeida, October 31, 2025, https://www.mdpi.com/2673-7116/3/4/34
[v] MCAD Maritime Cyber Attack Database, University of Applied Sciences, NHL Stenden, https://maritimecybersecurity.nl/incident/GqKo3Ylmx0
[vi] Sagarmanthan 2024: India’s Maritime Vision, Press Information Bureau, November 19, 2024
[vii] When the Indian Ocean Calls: A New Security Architecture for a Turbulent World. Northeast News, Pallab Bhattacharya, December 1, 2025, https://nenews.in/opinion/when-the-indian-ocean-calls-a-new-security-architecture-for-a-turbulent-world/37010/
[viii] Navy chief flags rising cyber threats to India’s maritime sector, Hindustan Times, October 16, 2025, https://www.hindustantimes.com/india-news/navy-chief-flags-rising-cyber-threats-to-india-s-maritime-sector-101760620207947.html
[ix] Securing Indian Ports: Cybersecurity Vulnerabilities and the Road Ahead, Anusha Guru, ORF Online, July 17, 2025, https://www.orfonline.org/expert-speak/securing-indian-ports-cybersecurity-vulnerabilities-and-the-road-ahead
[x] India’s Cybersecurity Ecosystem Scales New Heights: 400+ Startups and 6.5 Lakh Professionals Powering a $20 Billion Industry: Dr Sanjay Bahl, Director General, CERT-In & Controller of Certifying Authorities (CCA) in India, Press Information Bureau, Ministry of Electronics and IT, October 29, 2025, https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2183994®=3&lang=2
[xi] India’s largest container port, JNPT, hit by ransomware, June 28, 2017, https://timesofindia.indiatimes.com/india/indias-largest-container-port-jnpt-hit-by-ransomware/articleshow/59346704.cms
[xii] All Cargo Logistics (ECU Worldwide) hit by a ransomware attack in India, MCAD Maritime Cyber Attack Database, University of Applied Sciences, NHL Stenden, https://maritimecybersecurity.nl/incident/QNJ62pgzB0
[xiii] TVS Supply Chain Solutions hit by Karakurt, MCAD Maritime Cyber Attack Database, University of Applied Sciences, NHL Stenden, https://maritimecybersecurity.nl/incident/MyKmGGXmYW
[xiv] The website of India's Cochin shipbuilding and maintenance yard was hit by a DDoS attack from a hacktivist group, MCAD Maritime Cyber Attack Database, University of Applied Sciences, NHL Stenden, https://maritimecybersecurity.nl/incident/GqKo3Ylmx0
[xv] Maritime Cybercrimes in the Red Sea and the Indian Ocean: Case Studies https://www.linkedin.com/pulse/maritime-cybercrimes-red-sea-indian-ocean-case-studies-d-auzon-sgtre
[xvi] Ibid.
[xvii] Ibid.
[xviii] Ibid.
[xix] Ibid.
[xx] How data and tech can help combat illegal fishing, Alfredo Giron, World Economic Forum, May 20, 2022, https://www.weforum.org/stories/2022/05/how-can-data-and-tech-help-the-seafood-industry-to-combat-illegal-fishing/
[xxi] Casting Nets, Catching Success, India’s Fisheries on the Rise, Press Information Bureau, February 15, 2025
https://www.pib.gov.in/FactsheetDetails.aspx?Id=149135®=3&lang=2
[xxii] How data and tech can help combat illegal fishing, Alfredo Giron, World Economic Forum, May 20, 2022, https://www.weforum.org/stories/2022/05/how-can-data-and-tech-help-the-seafood-industry-to-combat-illegal-fishing/
[xxiii] Maritime Terrorism and Border Threats: Enhancing India, Marshall Anto I, Electronic Journal of Social and Strategic Studies, May 31, 2025, https://ejsss.net.in/print_article.php?did=15748
[xxiv] Joint Press Statement of the 5th NSA Level Meeting of the Colombo Security Conclave held on 09 – 10 March 2022, in Maldives, Ministry of External Affairs, March 10, 2022, https://www.mea.gov.in/press-releases.htm?dtl/34943/Joint_Press_Statement_of_the_5th_NSA_Level_Meeting_of_the_Colombo_Security_Conclave_held_on_09__10_March_2022_in_Maldives
[xxv] COASTAL SECURITY CONFERENCE (CoS) UNDER THE AEGIS OF COLOMBO SECURITY CONCLAVE (CSC) CONDUCTED BY INDIAN COAST GUARD ON 01-02 AT CHENNAI, Indian Coast Guard, https://indiancoastguard.gov.in/sites/default/files/202212030521267307931Press_release_COLOMBO_CSC_01_Dec_22.pdf
[xxvi] PM Modi declares 2026 as ASEAN-India Year of MaritimeCooperation, DD News, October 26, 2025, https://ddnews.gov.in/en/pm-modi-declares-2026-as-asean-india-year-of-maritime-cooperation/
[xxviii] Japan, U.S., Australia, and India Collaborate to Enhance Maritime and Cybersecurity in Asia-Pacific, Marc, Cybersec Asia, August 12, 2024, https://cybersec-asia.net/japan-u-s-australia-and-india-collaborate-to-enhance-maritime-and-cybersecurity-in-asia-pacific/
[xxix] Ibid.[xxx] Maritime Security: Memorandum of Understanding (MoU) between The Information Fusion Centre - Indian Ocean Region (IFC-IOR) and Regional Coordination Operations Centre (RCOC), Indian Navy, https://indiannavy.gov.in/node/35588
[xxxi] The Power of Three at Sea: India’s Trilateral Partnerships in Action. Saaz Lahiri, National Maritime Foundation, August 4, 2025, https://maritimeindia.org/the-power-of-three-at-sea-indias-trilateral-partnerships-in-action/
[xxxii] India-Malaysia joint focus group to tackle new maritime security threats, Business Standard, February 19, 2025, https://www.business-standard.com/external-affairs-defence-security/news/india-malaysia-joint-focus-group-to-tackle-new-maritime-security-threats-125021900975_1.html
[xxxiii] India and Morocco Sign MoU to Deepen Defence Cooperation, Ministry of Defence, Government of India, September 22, 2025, https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2169733®=3&lang=2
[xxxiv] India and France to jointly assess maritime threats in Indian Ocean Region, Shivani Sharma, India Today, January 21, 2025, https://www.indiatoday.in/india/story/india-and-france-to-jointly-assess-maritime-threats-in-indian-ocean-region-2667770-2025-01-21