23 जुलाई 2023 को, अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (आईसीजे) ने "जलवायु परिवर्तन के संबंध में राष्ट्रों की ज़िम्मेदारियां” नाम से एक महत्वपूर्ण सलाह जारी की।[i] यह कार्रवाई प्रशांत द्वीप देशों के छात्रों के एक समूह ने शुरू की और इसकी अगुवाई छोटा द्वीप देश वानुअतु कर रहा था। इसमें पर्यावरण की रक्षा के लिए सभी देशों की ज़िम्मेदारियों पर ज़ोर दिया गया। इसमें मज़बूत जवाबदेही रूपरेखा और ज्यादा समान व्यवस्था की तात्कालिक आवश्यकता पर ज़ोर दिया गया है।[ii]
अंतरराष्ट्रीय न्यायालय की सलाहकार राय, हालांकि आवश्यक नहीं है लेकिन “समान लेकिन विभेदित उत्तरदायित्व” (सीबीडीआर/ CBDR) के सिद्धांत को सशक्त रूप से दोहराती है और छोटे द्वीप देशों को जलवायु वार्ता में आवश्यक हितधारक के रूप में पहचान देती है। इसने जलवायु परिवर्तन के प्रभाव के लिए सबसे कम ज़िम्मेदार लोगों पर पड़ने वाले गलत बोझ से जुड़े नैतिक सवाल को स्पष्ट रूप से सामने ला दिया है।
हालांकि, बड़ी चुनौतियाँ अभी भी बनी हुई हैं। जलवायु प्रशासन संरचना में वर्तमान असमानता, छोटे द्वीप विकसशील देश (एसआईडीएस/ SIDS) के लिए कई प्रकार की चुनौतियाँ खड़ी करती रहती है। जलवायु कार्रवाई की मांग और बढ़ती कूटनीतिक दृश्यता के बावजूद, एसआईडीएस को बहुत ज्यादा असमान जलवायु संरचना का सामना करना पड़ रहा है। समृद्ध राष्ट्र, जो पहले से ही विश्व भर में होने वाले अधिकांश उत्सर्जन के ज़िम्मेदार रहे हैं, अक्सर अंतरराष्ट्रीय जलवायु वार्ता की रफ्तार और प्राथमिकताएं निर्धारित करते हैं, जबकि एसआईडीएस को दरकिनार कर दिया जाता है। इस स्थिति से निपटने के लिए एसआईडीएस बहुत नए और सक्रिए हो गए हैं, उन्होंने अपनी राजनयिक पहल शुरू की है और अनुकूलन और शमन में क्षेत्रीय और स्थानीय समाधान तैयार किए हैं।
संस्थागत व्यवस्थाओं की सीमाएं
संयुक्त राष्ट्र मानव पर्यावरण सम्मेलन, जिसे स्टॉकहोम सम्मेलन के नाम से भी जाना जाता है, पहली बार 1972 में आयोजित किया गया था। जलवायु परिवर्तन पर बातचीत में विकासशील देशों को सक्रिए रूप से शामिल करने का महत्वपूर्ण बिंदु माना जाता है।[iii] आगामी कुछ दशकों में, दो महत्वपूर्ण रिपोर्ट जारी की गईं, जिन्होंने जलवायु परिवर्तन पर भविष्य की वैश्विक वार्ता को आकार दिया। पहली थी– ब्रैंड्ट रिपोर्ट, जिसे 1980 में अंतरराष्ट्रीय विकास मुद्दों पर स्वतंत्र आयोग ने जारी किया था। इसमें समृद्ध देशों की शोषक नीतियों की वजह से ग्लोबल नॉर्थ और साउथ के बीच बढ़ती खाई पर ज़ोर दिया गया था। इसमें इन अंतरों से पैदा होने वाली पर्यावरण और विकास संबंधी चुनौतियों पर ज़ोर दिया गया और इन्हें ठीक करने के लिए नॉर्थ– साउथ सहयोग को बढ़ावा देने की बात कही गई।[iv]
दूसरी रिपोर्ट 1987 में प्रकाशित ब्रंटलैंड रिपोर्ट थी, शीर्षक था “हमारा साझा भविष्य”, जो सतत विकास की अवधारणा को आरंभ करने में मददगार था, जिसे “ऐसा विकास जो आने वाली पीढ़ियों की काबिलियत से समझौता किए बिना वर्तमान की ज़रूरतों को पूरा करे” के तौर पर बताया गया था।[v] नतीजतन, 1992 में हुए रियो अर्थ समिट में सतत विकास पर महत्वपूर्ण समझौते किए गए, जैसे एजेंडा 21 और पर्यावरण एवं विकास पर रियो घोषणापत्र।[vi]
घोषणापत्र में अ–बाध्यकारी कार्ययोजना दी गई, जिसमें सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरण से संबंधित मुद्दों को एक– दूसरे से जोड़ा गया, जो इन अवधारणा के तीन मूल आधार हैं। हालांकि पहले के सम्मेलन ज्यादातर अ– बाध्यकारी थे, लेकिन बाद में संयुक्त राष्ट्र रूपरेखा के तहत वैश्विक जलवायु वार्ता जैसे कि क्योटो प्रोटोकॉल ( (1997) और पेरिस समझौता (2015) ने वैश्विक मिशन को सीमित करने और जलवायु परिवर्तन को कम करने के इरादे से व्यवस्था प्रस्तुत की।
हालांकि, वर्तमान संस्थागत व्यवस्थाओं में कई कमियां हैं। पेरिस समझौता, जो एक कानूनी तौर पर लागू की गई संधि है, का इरादा ग्लोबल वार्मिंग को पूर्व–औद्योगिक स्तर (1850–1900) से दो डिग्री सेल्सियस (2°C) से बहुत नीचे रखना है, और इसे डेढ़ डिग्री सेल्सियस (1.5°C) तक सीमित करने की बड़ी कोशिश है।[vii] फिर भी, सितंबर 2023 में यह कहा गया कि “विश्व पेरिस समझौते के दीर्घकालिक लक्ष्यों को पूरा करने की राह पर नहीं है”, और लक्ष्यों को पूरा करने की धीमी प्रगति के बारे में चेतावनी दी गई।[viii] इस समझौते की एक बड़ी कमी इसकी रूपरेखा में ही है, जो राष्ट्रों को केवल राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (एनडीसी/NDCs) तैयार और प्रस्तुत करने को विवश करता है।
इस स्वैच्छिक प्रकृति की वजह से राष्ट्रों के बीच बोझ का बंटवारा एक समान न हो सका। पेरिस समझौते के अनुच्छेद 4 में शामिल एनडीसी, हर देश के जलवायु कार्ययोजना को दर्शाता है जो उनके घरेलू स्थिति के हिसाब से बनाए गए हैं और जिनका उद्देश्य विशेष तरीकों और नीति के ज़रिए उत्सर्जन कम करना है। समझौते के तहत राष्ट्रों को प्रत्येक पांच वर्ष में “ अपना एनडीसी तैयार करना, उन्हें सार्वजनिक करना और भविष्य के लिए संभाल कर रखना होगा” और उन्हें जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन (UNFCCC) सचिवालय में जमा करना होगा। इस वर्ष के अक्टूबर माह तक, पेरिस समझौता पर हस्ताक्षर करने वाले केवल 59 देशों ने ही अपने नवीनतम 2035 एनडीसी जमा किए हैं, जैसा कि चित्र–1 में आप देख सकते हैं।[ix]
चित्र 1: राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (एनडीसी) की स्थिति
[स्रोत- जलवायु कार्य ट्रैकर, पेरिस समझौता लक्ष्यों के प्रति सरकार के जलवायु कार्यों को ट्रैक करने वाली एक स्वतंत्र वैज्ञानिक परियोजना]
वर्ष 2024 में बाकू में हुए संयुक्त राष्ट्र पार्टियों का सम्मेलन (सीओपी) 29 में, देशों ने जलवायु वित्तपोषण के लिए हर साल 300 अरब डॉलर जुटाने के एक सामूहिक वादे पर सहमति जताई जिसे “नया सामूहिक परिमाणित लक्ष्य” [x]
इसके अलावा, सीओपी30 का एक बड़ा एजेंडा “बाकू से बेलेम रोडमैप” है जो 2035 तक हर साल जलवायु वित्त पोषण में 1.3 ट्रिलियन डॉलर हासिल करने का दीर्घकालिक लक्ष्य रखता है। ध्यान देने वाली बात है कि जलवायु वित्त ने केवल एक बार 2022[xi] में 100 अरब डॉलर का आंकड़ा पार किया, जैसा कि चित्र 2 में दिखाया गया है, जिससे पता चलता है कि वैश्विक वित्त का अंतर बढ़ता जा रहा है।
चित्र 2: विकसित देशों द्वारा जुटाया गया जलवायु वित्त (बिलियन अमेरिकी डॉलर में)
[स्रोत- ओईसीडी/OECD]
बहुपक्षीय जलवायु वार्ता में कम होते विश्वास के अलावा, बड़ी शक्तियों ने भी इस वैश्विक संकट से निपटने में गंभीरता की कमी दिखाई है। ग्रीनहाउस गैसों का दूसरा सबसे बड़ा उत्सर्जक होने के नाते, जनवरी 2025 में ट्रंप प्रशासन द्वारा पेरिस समझौते से संयुक्त राष्ट्र अमेरिका का हाल ही में पीछे हटना, इसका प्रमाण है। संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सितंबर 2025 में संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने भाषण में जलवायु परिवर्तन को “विश्व के साथ किया गया सबसे बड़ा धोखा” [xii] बताया था। इससे विकसित देशों की वैश्विक जलवायु परिवर्तन को नकारने वाली सोच को बढ़ावा मिल रहा है और खतरे की गंभीरता को कम कर रहा है।
हालाँकि इस फैसले का असर अभी दिखना बाकी है लेकिन इसे अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में “स्वयं– सहायता” की भावना को और मज़बूत कर दिया है, जिसे विशेष रूप से एसआईडीएस के लिए उचित सहयोग और साझेदारी पर विश्वास कमज़ोर हुआ है। संयुक्त राष्ट्र व्यापार एवं विकास सम्मेलन (यूएनसीटीएडी/ UNCTAD) के अनुसार, एसआईडीएस के समुद्र से जुड़े लगभग दो– तिहाई एनडीसी अभी भी बाहरी वित्तपोषण और तकनीकी सहयोग पर निर्भर हैं।[xiii] आगामी सीओपी30 (COP30) का नतीजा और विकसित देशों की उचित मदद देने की मिली– जुली राजनीतिक इच्छा, जलवायु सहयोग का भविष्य तय करेगी।
अतिसंवेदनशीलता से अवसरों तक
पूर्व में, एसआईडीएस का वैश्विक उत्सर्जन बास्केट में बहुत कम हिस्सा रहा है, जो वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में 1% से भी कम योगदान करता है (चित्र 3)।[xiv] फिर भी, उत्सर्जकों के रूप में उनकी बेहद कम भूमिका के बावजूद, एसआईडीएस गंभीर जलवायु परिणामों के मुहाने पर खड़े हैं, जो समुद्र के बढ़ते जलस्तर, बदलते पारिस्थितिक पैटर्न और मौसम की खराब स्थितियों के मंडराते खतरों से भरे पड़े हैं। नतीजतन, एसआईडीएस (SIDS) को 1970 और 2020 के बीच कथित तौर पर 153 अरब डॉलर का नुकसान हुआ है जबकि 65 मिलियन की आबादी के साथ उनका औसत जीडीपी 13.7 अरब डॉलर है।[xv]
पर्यटन जैसे बड़े क्षेत्र, जो उनकी जीडीपी में लगभग 30% का योगदान देते हैं, उन पर असर पड़ने की उम्मीद है।[xvi] जैसे, कोरल रीफ जैसे पारिस्थितिक तंत्र जो पर्यटन गतिविधियों में मदद करते हैं, वे समुद्र के अम्लीकरण की वजह से गंभीर संकट में हैं। इसके अलावा, मछली पालन जैसे क्षेत्रों पर असर पड़ने से भोजन की कमी और तटीय समुदायों की रोज़ी–रोटी की समस्याएं और बढ़ सकती हैं। अनुमान है कि 2100 तक लगभग नौ (9) प्रशांत द्वीप देशों में मछली पकड़ने की क्षमता लगभग 50% कम हो जाएगी।[xvii]
चित्र 3: शीर्ष कार्बन डाईऑक्साइड उत्सर्जक देश, 1750-2021
[यह ग्राफ ग्लोबल कार्बन प्रोजेक्ट के डेटा का प्रयोग कर बनाया गया है जो भविष्य की पृथ्वी और विश्व जलवायु शोध कार्यक्रम की एक शोध परियोजना है]
एसआईडीएस ने अपने नेताओं की पहल पर जलवायु कूटनीती के क्षेत्र में कई सांकेतिक और ठोस प्रयास किए हैं। वर्ष 2009 में मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद ने विश्व की पहला अंडरवाटर कैबिनेट मीटिंग की, ताकि इस नीचले द्वीप देश के लिए बढ़ते समुद्री जल–स्तर के संकट के बारे में जागरूकता बढ़ाई जा सके।[xviii] बारबाडोस की प्रधानमंत्री, मिया मोली को 2021 में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) के चैंपियंस ऑफ द अर्थ सम्मान से सम्मानित किया गया जिससे उन्हें वैश्विक जलवायु नेता के रूप में पहचान मिली। उन्होंने विश्व के पहले जलवायु लचीलेपन के लिए ऋण विनिमय और ब्रिज़टाउन पहल (2022) को सफलतापूर्वक आगे बढ़ाया, जिसका उद्देश्य वैश्विक वित्तीय प्रणाली में सुधार लाना और जलवायु वित्तपोषण के लिए पैसे जुटाना है।[xix]
फिजी के प्रधानमंत्री, सिटिवेनी राबुका भी अपनी “ओशन ऑफ पीस (शांति का महासागर)” पहल को प्रोत्साहित कर रहे हैं जिसे पहली बार 2023 में प्रस्तावित किया गया था, जिसका उद्देश्य प्रशांत क्षेत्र को “शांति का क्षेत्र” बनाना और सहयोग के माध्यम से जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों का समाधान करना है।[xx]
एसआईडीएस ने वैश्विक जलवायु कूटनीति में भी लगातार महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, संयुक्त राष्ट्र और जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन (यूएनएफसीसीसी) जैसे विशेष बहुपक्षीय प्लेटफॉर्म पर सक्रिए रूप से हिस्सा लिया है।[xxi] वर्ष 2017 में, फिजी ने संयुक्त राष्ट्र पार्टियों का सम्मेलन (सीओपी23/COP23) की अध्यक्षता की थी, जिसके साथ ही वह वार्ता का नेतृत्व करने वाला पहला छोटा द्वीप देश बन गया था। सम्मेलन ने “कार्यान्वयन हेतु फिजी गति” दी और तालानोआ वार्ता आरंभ की, जिसे 2020 तक देशों को एनडीसी लागू करने में मदद करने के लिए डिजाइन किया गया है।[xxii]
वर्ष 2021 में संयुक्त राष्ट्र पार्टियों के सम्मेलन (सीओपी26/ COP26) में तुवालु के विदेश मंत्री के भाषण ने, जब वे घुटनों तक समुद्र के पानी में खड़े होकर कह रहे थे “हम डूब रहे हैं”, ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी तरफ खींचा था और जलवायु कूटनीति में एसआईडीएस की जलवायु चिंताओं के समाधान की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।[xxiii] इसी तरह, मार्च 2025 में, सेशेल्स “इंटरनेशनल प्लेटफॉर्म फॉर ओशन सस्टेनेबिलिटी”, जो वैज्ञानिकों और महासागर हितधारकों का एक समूह है, को मंजूरी देने वाला पहला एसआईडीएस बन गया जो महासागर– केंद्रित जलवायु कूटनीति को आगे बढ़ाने की दिशा में उठाया गया एक बड़ा कदम है।[xxiv]
वृहद भौगोलिक दायरे में फैले एसआईडीएस ने क्षेत्रीय व्यवस्था के माध्यम से संस्थागतकरण और सहयोग को आगे बढ़ाया है। छोटे द्वीपीय राज्यों का गठबंधन (एओएसआईएस/AOSIS), 1990 में गठित एक अंतर– सरकारी संगठन है, वर्तमान में इसमें सभी बड़े समुद्री इलाकों के कुल 44 सदस्य देश हैं। इसका मुख्य मिशन “कमज़ोर लोगों की आवाज़ उठाना” और “दुनिया का ध्यान जलवायु कार्रवाई की नैतिक ज़रूरत की ओर खींचना” जो न केवल सबसे शक्तिशाली देशों, बल्कि सभी लोगों, विशेषरूप से उन लोगों के लिए है जो सबसे ज्यादा संकट का सामना कर रहे हैं।[xxv]
पेसेफिक अडैप्टशन टू क्लाइमेट चेंज, जो 2009 में बना 14 प्रशांत द्वीप देशों का एक समूह है, ने, तीन विशेष क्षेत्रों– जलवायु– संवेदनशील क्षेत्र, तटीय ज़ोन प्रबंधन और खाद्य सुरक्षा एवं खाद्य उत्पादन, में सर्वोत्तम कार्यप्रणाली अपनाने के लेन–देन को सरल बनाया है। इसी तरह 2014 में अपनाया गया स्मॉल आइलैंड डेवलपिंग स्टेट्स एक्सेलरेटेड मोडैलिटीज़ ऑफ एक्शन (एसएएमओए/ SAMOA) की राह, एसआईडीएस को घरेलू संदर्भ में संयुक्त राष्ट्र सतत विकास लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के लिए एक रूपरेखा प्रदान करता है और एसडीजी 14, “पानी के नीचे जीवन” के माध्यम से जलवायु शमन के लक्ष्यों को आगे बढ़ाता है।
अनुकूल और शमन के लिए स्थानीय प्रयास
वैश्विक जलवायु कूटनीति और क्षेत्रीय व्यवस्था के अलावा, द्वीप देशों ने “वन– साइज़– फिट– ऑल” नज़रिए को मानने की बजाए घरेलू अनुकूलन और शमन नीति पर अधिक ज़ोर दिया है।[xxvi] वर्ष 2007 में मूल निवासियों के अधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र घोषणा को अपनाने के बाद, मूल निवासियों के जीवन और संस्कृतियों की सुरक्षा की दिशा में एक बड़ा बदलाव आया है।[xxvii] स्वनिर्णय के अधिकार के सिद्धांत को “घोषणापत्र का मूल” बताया गया और उन्हें महत्वपूर्ण राजनीतिक कारक के तौर पर पहचान दी गई है।
कोमोरोस में “एक कोमोरियन, एक पेड़” अभियान के साथ समुदाय को महत्वपूर्ण स्थानीय एजेंट के रूप में शामिल करने से, संरक्षण के लिए “उर्ध्वगामी” नज़रिए को सरल बनाने में मदद मिली है।[xxviii] इसके अलावा, मॉरीशस ने इको– फिश पहल के माध्यम से सामुदायिक आजीविका पर ध्यान दिया है जो पारिस्थितिक रूप से व्यवहार्य तटीय मछली पकड़ने की रणनीतियों पर ज़ोर देता है और साथ– ही– साथ “ब्लू गवर्नेंस” में भी सुधार लाता है।[xxix]
सेशेल्स ने अपने अनन्य आर्थिक क्षेत्र के लगभग 30% हिस्से को कानूनी सुरक्षा में रखा है, जो संवहनीयता और दीर्घकालिक विकास आवश्यकताओं के बीच एक नाज़ुक संतुलन बनाने के उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।[xxx] तकनीक का एकीकरण, जैसे बारबाडोस में सीवीड (समुद्री शैवाल) की खेती पर नज़र रखने के लिए ड्रोन और एआई का प्रयोग, यह दर्शाता है कि आधुनिक तकनीक से परंपरागत जलीय कृषि प्रणालियों को कैसे मज़बूत किया जा सकता है।[xxxi] समुद्री शैवाल और केल्प की प्रजातियों में औषधीय लाभ होते हैं, ये कार्बन पृथक्करण में योगदान करते हैं और समुद्री पारिस्थितिकी के समग्र स्वास्थ्य को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जो एसआईडीएस की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था में एक प्रमुख योगदानकर्ता है।
अक्टूबर 2025 में पूरे हुए तुवालू तटीय अनुकूल परियोजना के तहत, फोगाफले द्वीप पर आठ हेक्टेयर ऊंची ज़मीन बनाई गई। आशा है कि पुनर्निर्मित ज़मीन बढ़ते समुद्री जल–स्तर को झेल लेगी जिससे ज़मीन न होने के गंभीर नतीजों से बचा जा सकेगा।[xxxii] सबसे नीचले स्तर पर बसा द्वीप देश होने के नाते, मालदीव पर समुद्र के बढ़ते जल– स्तर का सबसे अधिक असर पड़ता है।
मालदीव फ्लोटिंग सिटी, जिसे नीदरलैंड्स की डच डॉकलैंड्स के साथ मिलकर डिज़ाइन किया जा रहा है, 200-हेक्टेयर के लैगून में एक मज़बूत आवासीय परिसर की व्यवस्था देता है।[xxxiii] यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि, जैसा कि ऊपर दिखाया गया है, एसआईडीएस इन तरीकों से विकास का एक दूसरा मॉडल उपलब्ध कराता है जो दर्शाता है कि विकास जितना तकनीकी प्रक्रिया है, उतना ही सामाजिक प्रक्रिया भी है।
निष्कर्ष
जलवायु परिवर्तन पर बदलते संवाद से ज़िम्मेदारी और कमज़ोरी के बीच बढ़ती दूरी का पता चलता है। जहाँ वैश्विक जलवायु प्रणाली बड़े उत्सर्जक की आवश्यकताओं से बनता जा रहा है वहीं एसआईडीएस ने लगातार समर्थन, नैतिक नेतृत्व और नए अनुकूलन समाधान के ज़रिए कहानी को नया रूप दिया है। उनकी कोशिशें, चाहे स्थानीय सतत मॉडल के माध्यम से हों, क्षेत्रीय सहयोग के माध्यम से हों या कानूनी माध्यम से, यह दर्शाती हैं कि जलवायु कूटनीति अब केवल शक्तिशाली देशों का ही अधिकारक्षेत्र नहीं रह गई है; सबसे कमज़ोर देश भी मिसाल बनकर आगे बढ़ सकते हैं।
फिर भी, संस्थागत प्रतिनिधित्व, शमन प्रतिबद्धताओं और वित्तपोषण में असमानताओं का बने रहना वैश्विक व्यवस्था की हमेशा रहने वाली असमानताओं को दर्शाता है। इसलिए, जलवायु के मुद्दे पर एकजुटता को नया स्वरूप देने के लिए केवल बयानबाज़ी से आगे बढ़ना होगा। इसके लिए न्याय, जवाबदेही और सामूहिक दृढ़ता पर आधारित एक व्यवस्था की आवश्यकता है। एसआईडीएस के अनुभव से यह स्पष्ट है कि वास्तविक जलवायु कार्रवाई में न केवल उत्सर्जन कम करना शामिल होना चाहिए बल्कि वैश्विक जलवायु संरचना का भी नवीनीकरण करना चाहिए जिसने लंबे समय से उन समुदायों को अलग– थलग कर दिया है जो इसके परिणामों से सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं।
*****
*अनुष्का सिंह, भारतीय वैश्विक परिषद, नई दिल्ली में शोध प्रशिक्षु हैं।
अस्वीकरण : यहां व्यक्त किए गए विचार निजी हैं।
डिस्क्लेमर: इस अनुवादित लेख में यदि किसी प्रकार की त्रुटी पाई जाती है तो पाठक अंग्रेजी में लिखे मूल लेख को ही मान्य माने ।
अंत टिप्पण:
[i] “Obligations of States in Respect of Climate Change.” 2025. Icj-Cij.org. 2025. http://www.icj-cij.org/case/187.
[ii] “Climate Crisis: Small Island States Take Landmark Case to the ICJ.” 2025. Ibanet.org. 2025. https://www.ibanet.org/Small-Island-States-take-landmark-case-to-the-ICJ.
[iii] “United Nations Conference on the Environment, Stockholm 1972.” United Nations, 16 June 1972, www.un.org/en/conferences/environment/stockholm1972.
[iv] “The Brandt Report: A Summary – Share the Worlds Resources.” Share the Worlds Resources, 31 Jan. 2006, sharing.org/information-centre/reports/brandt-report-summary/.
[v] Brundtland, Gro Harlem. Report of the World Commission on Environment and Development: Our Common Future. United Nations, 20 Mar. 1987.
[vi] “United Nations Conference on Environment and Development, Rio de Janeiro, Brazil, 3-14 June 1992.” United Nations, 1992, www.un.org/en/conferences/environment/rio1992.
[vii] UNFCCC. “The Paris Agreement.” United Nations Climate Change, 2025, unfccc.int/process-and-meetings/the-paris-agreement.
[viii] “Global Stocktake Reports Highlight Urgent Need for Accelerated Action to Reach Climate Goals.” United Nations, www.un.org/en/climatechange/global-stocktake-reports-highlight-urgent-need-for-accelerated-action-to-reach-climate-goals.
[ix] “CAT 2035 Climate Target Update Tracker.” Climateactiontracker.org, 2024, climateactiontracker.org/climate-target-update-tracker-2035/.
[x] “Why the ‘Finance COP’ in Baku Missed the Mark.” 2024. Carnegie Endowment for International Peace. 2024. https://carnegieendowment.org/posts/2025/01/cop29-climate-finance-scale-logistics?lang=en.
[xi] OECD. “Climate Finance and the USD 100 Billion Goal.” OECD, 2022, www.oecd.org/en/topics/sub-issues/climate-finance-and-the-usd-100-billion-goal.html.
[xii] “US President Trump Criticizes UN, NATO and Climate ‘Hoax.’” 2025. UN News. September 23, 2025. https://news.un.org/en/story/2025/09/1165924.
[xiii] “Small Island Nations: How Oceans Offer Solutions to Climate Change.” 2025. UN Trade and Development (UNCTAD). January 2, 2025. https://unctad.org/news/small-island-nations-how-oceans-offer-solutions-climate-change.
[xiv] United Nations. 2024. “About Small Island Developing States (SIDS) | Department of Economic and Social Affairs.” Sdgs.un.org. 2024. https://sdgs.un.org/smallislands/about-small-island-developing-states.
[xv] “Snapshot: Small Island Developing States.” 2023a. UNDP Climate Promise. January 16, 2023.https://climatepromise.undp.org/research-and-reports/snapshot-small-island-developing-states.
[xvi] GOAP Secretariat. “Understanding the Impact: Using Ocean Accounts to Support Sustainable Coastal Tourism.” The Global Ocean Accounts Partnership, September 27, 2024, www.oceanaccounts.org/understanding-the-impact-using-ocean-accounts-to-support-sustainable-coastal-tourism/.
[xvii] Lazzari, Kiara. “Adaptation Solutions for Fisheries in Small Island Developing States -
Global Center on Adaptation.” Global Center on Adaptation, 15 Oct. 2025,
gca.org/how-can-sids-fisheries-cope-with-and-adapt-to-climate-change/. Accessed
November 7, 2025.
[xviii] “Maldives Holds World’s First Underwater Cabinet Meeting.” The President’s Office, 2020, presidency.gov.mv/Press/Article/633.
[xix] “Mia Mottley Prepares for Center Stage at COP30.” Americas Quarterly, October 20, 2025, www.americasquarterly.org/article/mia-mottley-prepares-for-center-stage-at-cop30/.
[xx] “Oceans of Peace - Ministry of Foreign Affairs.” 2024. Ministry of Foreign Affairs. August 8, 2024. https://www.foreignaffairs.gov.fj/oceans-of-peace/.
[xxi] “COP 23 | Partnership for Observation of the Global Ocean.” 2023. Partnership for Observation of the Global Ocean. November 8, 2023. https://pogo-ocean.org/outreach-and-advocacy/outreach-events-and-projects/cop-23/.
[xxii] “COP 23 | Partnership for Observation of the Global Ocean.” 2023. Partnership for Observation of the Global Ocean. November 8, 2023. https://pogo-ocean.org/outreach-and-advocacy/outreach-events-and-projects/cop-23/.
[xxiii] Packham, Colin. 2021. “COP26: Tuvalu Minister Delivers COP26 Plea from the Sea.” World Economic Forum. November 11, 2021. https://www.weforum.org/stories/2021/11/tuvalu-minister-stands-in-sea-to-film-cop26-speech-to-show-climate-change/.
[xxiv] “Seychelles Becomes the First Small Island Developing State to Support the International Platform for Ocean Sustainability (IPOS) - Ministry of Fisheries and Blue Economy.” Ministry of Fisheries and Blue Economy. March 28, 2025. https://mofbe.gov.sc/seychelles-becomes-the-first-small-island-developing-state-to-support-the-international-platform-for-ocean-sustainability-ipos/.
[xxv] AOSIS. “Why Is AOSIS Important?” AOSIS, July 10, 2019, www.aosis.org/with-caribbean-island-life-under-threat-un-chief-pushes-to-face-headwinds-together/.
[xxvi] Feffer, John. 2025. “Small Island States Are Leading the Fight against Climate Change - FPIF.” Foreign Policy in Focus. April 17, 2025. https://fpif.org/small-island-states-are-leading-the-fight-against-climate-change/.
[xxvii] United Nations. 2007. “United Nations Declaration on the Rights of Indigenous Peoples.” United Nations Declaration on the Rights of Indigenous Peoples. https://doi.org/10.1353/hrq.2011.0040.
[xxviii] “One Comorian, One Tree | UNDP Climate Change Adaptation.” 2022. Adaptation-Undp.org. February 10, 2022. https://www.adaptation-undp.org/one-comorian-one-tree.
[xxix] “Empowering Artisanal Fishers in the Republic of Mauritius: Terminal Steering Committee of the Mauritius E€OFISH Project.” 2024. UNDP. 2024. https://www.undp.org/mauritius-seychelles/press-releases/empowering-artisanal-fishers-republic-mauritius-terminal-steering-committee-mauritius-eeuofish-project
[xxx] “Protect 30% of Seychelles Marine and Coastal Waters More than 400,000 Square Kilometers of Improved Protection and Ocean Management. | Department of Economic and Social Affairs.” 2018. Un.org. December 2018. https://sdgs.un.org/partnerships/protect-30-seychelles-marine-and-coastal-waters-more-400000-square-kilometers-improved.
[xxxi] Buckholtz, Alison. 2023. “Barbados Is Using Data and Tech to Build Climate Resilience.” World Economic Forum. June 21, 2023. https://www.weforum.org/stories/2023/06/barbados-climate-resilience-data-technology/.
[xxxii] “Tuvalu and Partners Deliver Landmark Coastal Adaptation Project Creating New Land for the Future.” UNDP, 2025, www.undp.org/pacific/press-releases/tuvalu-and-partners-deliver-landmark-coastal-adaptation-project-creating-new-land-future. Accessed October 23, 2025.
[xxxiii] Marchant, Natalie. “Maldives Plans a “Floating City” as Sea Levels Rise.” World Economic Forum, May 19, 2021, www.weforum.org/stories/2021/05/maldives-floating-city-climate-change/.