राष्ट्रव्यापी युद्धविराम समझौता क्या है?
राष्ट्रव्यापी युद्धविराम समझौता (एनसीए/ NCA) एक ऐतिहासिक उपलब्धि है, जो म्यांमार की शांति के लिए आवश्यक प्रमाण है। यह उसके इतिहास में पहले कभी नहीं हुए समझौते, सहनशीलता, धैर्य और शांति की चाह के स्तर को दर्शाता है। एनसीए देश और आठ जातीय सशस्त्र संगठनों (ईएओ/EAOs) के बीच 15 अक्टूबर 2015 को हस्ताक्षर किया गया एक समझौता या अनुबंध है जो बीते दस वर्षों से जारी है।
एनसीए न केवल शांति प्रक्रिया का सबसे बुनियादी आधार है बल्कि यह एक समझौता भी है जिसमें लोकतांत्रिक और संघीय व्यवस्था पर आधारित संघ बनाने के लिए आवश्यक राजनीतिक रूपरेखा शामिल हैं। यह सरकार एवं जातीय सशस्त्र संगठनों के बीच की प्रतिबद्धता है। एनसीए को किसी एक व्यक्ति या संगठन ने नहीं बनाया था; यह जातीय सशस्त्र संगठनों के प्रतिनिधियों के आरंभिक प्रस्तावों पर आधारित था, और इसे सरकार, तत्माडॉ (सेना), और ईएओ (EAOs) के बीच लगभग एकमत से विस्तृत, पूरी वार्ता और समझौते के माध्यम से तैयार किया गया था। वर्ष 2011 में जिस दिन पहली लोकतांत्रिक सरकार ने शांति वार्ता को आगे बढ़ाया, उस दिन से लेकर एनसीए पर अंतिम हस्ताक्षर होने तक, यानि 1,450 दिनों की अवधि में, कुल 5,000 से ज्यादा बैठकें और वार्ताएं हुईं।
15 अक्टूबर 2015 को एनसीए पर हस्ताक्षर किए जाने के समारोह की मेजबानी सरकार ने की थी और आठ जातीय सशस्त्र संगठनों, जिनके नाम हैं– करेन नेशनल यूनियन (केएनयू/ KNU), डेमोक्रेटिक बुद्धिस्ट करेन आर्मी (डीकेबीए/ DKBA), करेन नेशनल लिबरेशन आर्मी– पीस कमिटी (केएनयू/ केएनएलए– पीसी; KNU/KNLA-PC), चिन नेशनल फ्रंट (सीएनएफ/ CNF), पा– ओ नेशनल लिबरेशन ऑर्गेनाइज़ेशन (पीएनएलओ/ PNLO), ऑल बर्मा स्टूडेंट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एबीएसडीएफ/ ABSDF), अराकन लिबरेशन पार्टी (एएलपी/ALP), और रेस्टोरेशन काउंसिल ऑफ शान स्टेट (आरसीएसएस/ RCSS), ने संयुक्त राष्ट्र (यूएन), यूरोपीय संघ( ईयू), चीन, भारत, जापान और थाइलैंड के राजनयिकों के साथ– साथ घरेलू साक्ष्यों की उपस्थिति में समझौते पर हस्ताक्षर किए। हस्ताक्षर किए जाने के बाद संघ संसद ने भी समझौते को मंजूरी दे दी। 13 फरवरी 2018 को दो और जातीय सशस्त्र संगठन– लाहू डेमोक्रेटिक यूनियन (एलडीयू/ LDU) और न्यू मोन स्टेट पार्टी (एनएमएसपी/ NMSP) ने भी इस समझौते पर हस्ताक्षर किया जिससे एनसीए पर हस्ताक्षर करने वाले संगठनों की कुल संख्या दस हो गई।
एनसीए में 104 शर्तें हैं जिनमें 7 अध्याय, 33 अनुच्छेद और 86 उपनियम हैं। इसमें बुनियादी सिद्धांत, लक्ष्य और उद्देश्य, युद्धविराम के मामले, युद्धविराम बनाए रखने, राजनीतिक वार्ताओं की गारंटी, भविष्य में काम करने के तरीके और साधारण नियम शामिल हैं। एनसीए का मूल सिद्धांत है: "लोकतंत्र और संघीय व्यवस्था पर आधारित एक संघ बनाना जिसमें स्वतंत्रता, समानता और न्याय की पूरी गारंटी हो, पांगलोंग समझौते की भावना के अनुसार और राजनीतिक वार्ताओं के आधार पर, साथ ही संघ को टूटने से बचाने, देश की एकता को बनाए रखने एवं संप्रभुता को बनाए रखने पर ज़ोर देना। राजनीतिक समस्याएं को सैन्य तरीकों से नहीं बल्कि राजनीतिक तरीकों से सुलझाया जाना चाहिए। एक नई राजनीतिक संस्कृति बनाकर सैन्य विवादों को पूरी तरह खत्म करने के लिए सबसे पहले पूरे देश में युद्धविराम लागू किया जाएगा।"
एनसीए पर हस्ताक्षर किए जाने के बाद, समझौते के नियमों के अनुसार राष्ट्रव्यापी युद्धविराम समझौता (जेआईसीएम/ JICM) को लागू करने के लिए समन्वय बैठकें हुईं। संघ शांति वार्ता संयुक्त समिति (यूनियन पीस डायलॉग ज्वाइंट कमिटी– UPDJC) और संयुक्त युद्धविराम निगरानी समिति (ज्वाइंट सीज़फायर मॉनीटरिंग कमिटी– JMC) बनाई गईं, और उनके संदर्भ की शर्तें (ToR), मानक संचालन प्रक्रियाएं (SOPs), और राजनीतिक वार्ता की रूपरेखा तैयार की गई और उन्हें लागू किया गया।
जनवरी 2021 के आखिर तक, JICM की नौ (9) बैठकें, UPDJC की बीस (20) बैठकें और JMC(U) की उन्नीस (19) बैठकें हो चुकी थीं। UPDJC ने राजनीतिक क्षेत्र, आर्थिक क्षेत्र, सामाजिक क्षेत्र, सुरक्षा के क्षेत्र और भूमि एवं प्राकृतिक पर्यावरण क्षेत्र से जुड़े राजनीतिक मूल सिद्धांतों की चर्चा की और 5 संघ शांति सम्मेलन कराने में कामयाब रहा। संघ शांति सम्मेलन में हुए समझौतों को मंजूरी के लिए संघ संसद में भेजा गया, जिसके परिणामस्वरूप संघ के समझौते के भाग (1), (2), और (3) में सहमति के 72 प्वाइंट बने। इन समझौतों को लागू करने के लिए बातचीत जारी है।
एनसीए का मूल्यांकन
एनसीए केवल तत्माडॉ और जातीय सशस्त्र समूहों के बीच युद्धविराम समझौता नहीं है बल्कि यह एक राजनीतिक सुधार समझौता है जो राजनीतिक वार्ता का मार्ग प्रशस्त करता है। सेना की तैनाती, सीमांकन और सत्यापन जैसे विस्तृत सैन्य मामलों में स्पष्ट रूप से शामिल न होना या उन्हें शामिल न करना, साथ ही संबंधित प्रदेशों में स्थानीय राजनीतिक वार्ता करने के बारे में स्पष्ट न होना, एनसीए को लागू करने में बड़ी चुनौतियां बन रही हैं।
हालाँकि एनसीए पर हस्ताक्षर किए जाने के समारोह के बाद पहली लोकतांत्रिक सरकार के कार्यकाल (2011-2015) में 90 दिनों के भीतर समझौते को लागू करने के सरकार के अल्प–कालिक प्रतिबद्धताओं को लागू कर दिया गया था लेकिन नवंबर में हुए चुनावों में सरकार के बदल जाने की वजह से नतीजे न मिल सके। जब अप्रैल 2016 में एनएलडी की सरकार सत्ता में आई तो एनसीए समझौते के विवरण का अनुपालन करने और जल्द नतीजे देने में उनकी नाकामी की वजह से कुछ जातीय सशस्त्र संगठन (ईएओ) को एनसीए पर संदेह होने लगा। दोनों पक्षों (तत्माडॉ और ईएओ) के बीच संवेदनशील मुद्दों पर आगे बढ़ने में समस्याएं आईं जैसे कि संवैधानिक संशोधन, एक संधीय सेना का गठन, गैर– अलगाव, सुरक्षा क्षेत्र में सुधार और राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक वार्ता करना।
लोकतांत्रिक सरकार के दूसरे कार्यकाल (2016- 2021) के दौरान, शांति प्रक्रिया को लगातार लागू रखने की बजाय संवैधानिक बदलावों को प्राथमिकता देने से एनसीए पर हस्ताक्षर करने वाले ईएओ की चिंताएं और संदेह बढ़ गए, जिससे राजनीतिक संवाद की रफ्तार कम हो गई। संसद में कानूनी कार्यों के लिए ज़िम्मेदार लोगों के प्रतिनिधियों ने राष्ट्र की सुरक्षा और कानून से संबंधित कानूनों को रद्द कर दिया। इसके अलावा, संघीय संसद में क्षेत्रीय और राज्य स्तर के मामलों पर फैसलों की अवहेलना करने के लिए बहुमत मत का प्रयोग करने के तरीके से सरकार पर जातीय लोगों का विश्वास कम हुआ।
वर्ष 2020 के बहु–दल लोकतांत्रिक आम चुनाव में मतदाता– पंजीकरण में गड़बड़ियों के 11 मिलियन से ज्यादा मामले सामने आए थे जिसमें मतदाता सूची में गलत जानकारी देना, अयोग्य मतदाताओं को सूची में शामिल करना, गैर– कानूनी मतदान प्रणालियां और वार्ड एवं गावों में गैर– कानूनी तरीके से अग्रिम वोट इकट्ठा करना शामिल था। तत्माडॉ ने 31 जनवरी 2021 की रात तक चुनावी गड़बड़ियों की जांच और समाधान की बार– बार मांग की लेकिन सत्ताधारी एनएलडी की सरकार के अधिकारियों ने बातचीत की मांग को ठुकरा दिया और नतीजों को दुरुस्त करने के लिए संसद सत्र कराने की कोशिश की। ऐसे राजनीतिक माहौल में, तत्माडॉ ने 2008 के संविधान के अनुसार इमजेंसी की घोषणा की और 1 फरवरी 2021 को देश की सत्ता की बागडोर अपने हाथों में ले ली।
एनसीए: किस दिशा में बढ़ रहा है?
मार्च 2021 में आपातकाल के दौरान, देश में आम विरोध प्रदर्शनों से लेकर बड़े पैमाने पर दंगे और फिर आतंकवादी हमले हुए। आखिरकार, यह देश के खिलाफ सशस्त्र आतंकवादी हमलों में बदल गया। कुछ कट्टरपंथी एनएल़डी दल के सदस्यों के नेतृत्व में, युवाओं को संगठित किया गया, उनमें जोश भरा गया और देश भर में तथाकथित पीडीएफ कट्टरपंथी हथियारबंद समूह बनाए गए।
समझौते पर हस्ताक्षर न करने वाले जातीय सशस्त्र संगठनों (EAOs) के अलावा, एनसीए पर हस्ताक्षर करने वाले कुछ ईएओ ने भी कट्टरपंथी पीडीएफ का समर्थन किया, यहाँ तक कि उन्हें सैन्य प्रशिक्षण भी दिया। नाखुश लोगों और विदेश में रहने वालों ने एनयूजी (NUG) और सीआरपीएच (CRPH) जैसी समानांतर सरकारें बनाईं, पीडीएफ को भर्ती और संगठित किया, और अलग– अलग तरीकों से हथियारबंद आतंकवादी हमलों का समर्थन किया। नागर प्रशासनिक अधिकारियों की बेरहमी से हत्या कर दी गई, उन पर मुख़बिर या "दलान" होने का आरोप लगाया गया, जिससे हिंसा बढ़ी। फरवरी 2021 से जुलाई 2025 तक, आतंकवादी हमलों में आम लोगों, सैनिकों, वार्ड अधिकारियों, शिक्षकों, स्वास्थ्यसेवा कर्मियों, मठवासियों और भिक्षुणियों समेत कुल 7,284 लोग मारे गए।
जिन ईएओ (EAOs) ने समझौते पर हस्ताक्षर नहीं किए थे, उन्होंने संघवाद के बैनर तले सशस्त्र युद्ध आरंभ कर दिए जबकि एनयूजी और पीडीएफ ने “लोकतंत्र के लिए जनता की क्रांति” नाम से पूरे देश में सशस्त्र संघर्ष आरंभ किए। एनसीए पर हस्ताक्षकर करने वाले 10 ईएओ (EAOs) में से तीन– केएनयू, सीएनएफ और एबीएसडीएफ– ने शांति वार्ता की मेज से मुँह मोड़ लिया और तत्मॉड के खिलाफ लड़ना शुरू कर दिया। कुछ और ईएओ (EAOs) भी इन्हीं की राह पर चल पड़े। 15 फरवरी 2024 को खुन थू रिन की नेतृत्व वाली सेना ने दलबदल लिया, पीडीएफ का समर्थन किया, पीएनएलओ का साथ छोड़ दिया, एनसीए को खारिज कर दिया और तत्माडॉ एवं सुरक्षा बलों पर हमला करना शुरू कर दिया। 14 फरवरी 2024 को एनएमएसपी– मून समूह के कुछ सैनिक अलग हो गए और खुद को एनएमएसपी (एडी) (NMSP(AD)) कहने लगे एवं एनसीए से अलग हो गए।
27 अक्टूबर 2023 को, एनएनडीएए (MNDAA), एए (AA) और टीएनएलए (TNLA) ने ऑनलाइन स्कैम अभियानों को खत्म करने के बहाने उत्तरी शान राज्य में एक साथ हथियारों से लैस आतंकवादी हमले किए और इसे ऑपरेशन 1027 नाम दिया। शुरू में, उन्होंने विदेशी विशेषज्ञों की मदद से महत्वपूर्ण ड्रोन तकनीक का प्रयोग कर लाभ उठाया, तत्माडॉ की टुकड़ियों, कैंपों और मुख्यालयों पर कब्ज़ा कर लिया जिससे देश की स्वतंत्रता संकट में पड़ गई। यह लड़ाई लौक्काई के सीमा प्रदेशों से फैली जहाँ ऑनलाइन स्कैम ऑपरेटर मौजूद थे और देश के अंदरूनी इलाकों जैसे कुनलॉन्ग, लाशियो, थीनी, ह्सिपाव, क्यौकमे औऱ मोगोक इलाकों तक फैल गई। इन हमलों से इलाके में अस्थिरता पैदा हुई जिससे स्थानीय लोगों की सामाजिक और आर्थिक जीवन में बहुत अधिक नुकसान हुआ और बहुत सारे लोग मारे गए।
उत्तरी शान राज्य की सैन्य स्थिति का लाभ उठाते हुए देश भर में ईएओ— काचिन राज्य में केआईए (KIA) और पीडीएफ (PDFs); चिन राज्य में सीएनएफ (CNF) और सीडीएफ (CDF (PDF)); कायिन राज्य में केएनयू ( KNU), केएनएलए (KNLA) और पीडीएफ (PDFs); कायाह राज्य में केएनपीपी (KNPP) और पीडीएफ (PDFs); मोन राज्य और तनिनथारी क्षेत्र में केएनयू (KNU), एनएमएसपी (अलग हुए/ NMSP (breakaway)) और पीडीएफ; रखाइन राज्य में एए (AA) और पीडीएफ (PDFs); और सागाइंग एवं मैगवे क्षेत्रों में स्थानीय पीडीएफ (PDFs)— ने पूरे देश में अपने हमले शुरू कर दिए हैं।
म्यांमार में अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए कुछ देशों ने सशस्त्र विद्रोहियों, राजनीतिक विरोधियों और आतंकवादी राह पर चलने वाले संगठनों को पैसे, हथियार, गोला– बारूद और प्रौद्योगिकी से मदद की है। उन्होंने "देश निकाला" का सामना कर रहे मीडिया आउटलेट्स को भी पैसों से मदद की, आतंकवादी कार्यों को उचित ठहराने के लिए उनके आख्यान को मजबूत किया। इस बीच, पश्चिम की सरकारों ने अलग– अलग मानवाधिकारों के बहाने और बिना सबूत वाले आरोपों के तहत म्यांमार पर कई तरह के प्रतिबंध लगा दिए।
ज्यादातर हस्ताक्षर नहीं करने वाले ईएओ (EAOs) ने लगातार देश निकाला “प्रचार” का प्रयोग इस बात को फैलाने के लिए किया है कि एनसीए खत्म हो गया है या गलत हो गया है और अलग– अलग मीडिया आउटलेट्स के ज़रिए बार– बार बदनाम करने वाली कहानियां चलाई हैं। इस बात का कि, "एनसीए खत्म हो गया है, म्यांमार में शांति प्रक्रिया समाप्त हो चुकी है", कुछ ईएओ, राजनयिक समुदायों और शांति प्रक्रिया में शामिल कुछ विदेशी संगठनों पर बहुत प्रभाव पड़ा है।
राजकीय प्रशासनिक परिषद (एसएसी/SAC) ने शांति प्रक्रिया को नई गति से जारी रखने के लिए पांच– बिन्दु वाला रोडमैप बनाया है। रोडमैप में पूरे देश में स्थायी शांति पाने के लिए "एनसीए समझौते को पूरी ईमानदारी से लागू करने" का वादा शामिल है। इसके अलावा, इसके राजनीतिक उद्देश्य में "पूरे देश में स्थायी शांति हासिल करने के लिए एनसीए को पूरी ईमानदारी से लागू करने," पर ध्यान देना शामिल है जो एनसीए को लागू करने के इसके गंभीर मंशा को दिखाता है। यह पक्का करने के लिए शांति प्रक्रिया बिना किसी रुकावट के जारी रहे, 17 फरवरी 2021 को निम्नलिखित तीन शांत समितियां बनाई गईं:
22 अप्रैल 2022 को, एसएसी (SAC) के अध्यक्ष ने जातीय सशस्त्र संगठनों एवं जनता को शांति भाषण दिया और 2022 को शांति का वर्ष बताया। उन्होंने जातीय सशस्त्र समूह के नेताओं को सांति के मुद्दों को व्यावहारिक एवं प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए मिलने और सच्ची एवं खुलकर बातचीत करने के लिए बुलाया। इस न्यौते के जवाब में, एनसीए पर हस्ताक्षर करने वाले 7 ईएओ— एएलपी (ALP), डीकेबीए (DKBA), केएनयू/केएनएलए– पीसी (KNU/KNLA-PC), एलडीयू (LDU), एनएमएसपी (NMSP), पीएनएलओ (PNLO) और आरसीएसएस (RCSS)— और हस्ताक्षर नहीं करने वाले तीन (3) समूहों— यूडब्ल्यूएसपी (UWSP), एनडीएए (NDAA) और एसएसपीपी (SSPP)—कुल 10 ईएओ, शांति वार्ता के लिए ने प्यी ताव आए।
फरवरी 2021 से अक्टूबर 2025 तक, समन्वय समिति ने कुल 160 बैठकें की: 97 बैठकें एनसीए पर हस्ताक्षर करने वाले ईएओ के साथ, 26 बैठकें एनसीए पर हस्ताक्षर नहीं करने वाले ईएओ के साथ, 22 बैठकें राजनीतिक दलों के साथ, 13 बैठकें शांति मध्यस्थ समूहों के साथ, 1 शांति वार्ता और 1 शांति संगोष्ठि। वर्ष 2022 से जनवरी 2025 तक राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों और पंजीकृत राजनीतिक दलों के कार्यसमूहों के साथ बैठकें की गईं। बैठकों में ईएओ के 2008 के संविधान में बदलाव और संशोझन के प्रस्ताव के साथ– साथ शांति एवं विकास के मुद्दों पर चर्चा की गई। राजनीतिक दल कार्य समूह के साथ चर्चा के बाद 2008 के संविधान में बदलाव के लिए संशोधन हेतु 43 सहमति बिन्दुओं वाले समझौते पर हस्ताक्षर किए गए।
ईएओ और राजनीतिक दलों के कार्य समूह के साथ बातचीत के ज़रिए ये चार वादे भी पूरे किए गए:
एनसीए की 8वीं सालगिरह के मौके पर अपने भाषण में रक्षा सेवा के सर्वोच्च कमांडर और राष्ट्रीय एकता एवं शांति वार्ता केंद्रीय समिति (NSPCC) के अध्यक्ष, वरिष्ठ जनरल मिन आंग ह्लाइंग ने एनसीए के प्रति तत्माडॉ और सरकार का रुख दोहराया:
मानवीय मदद देने के बारे में, जो एनसीए का अध्याय 3 (युद्धविराम के मामले) में शामिल है, NSPNC शांति प्रक्रिया में मदद करने के लिए 2022 से 2025 तक JMC-TSC चैनल के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ बेहतर समन्वय और सहयोग कर रहा है। साल 2022 से दिसंबर 2024 तक शान, रखाइन, कायिन, कायाह स्टेट और सागाइंग एवं मैगवे क्षेत्र जैसे युद्ध प्रभावित इलाकों में बेघरों एवं स्थानीय निवासियों को आठ खेपों में मानवीय मदद पहुँचाईं गईं जिससे 250,000 लोगों को लाभ मिला। वर्ष 2025 में सागाइंग क्षेत्र के म्यांग, अयाडॉ, वेललेट, खिन–यू, ये–यू और डेपायिन शहरों में 214,967 बेघरों को मानवीय मदद मुहैया कराए जाने का मूल्यांकन किया जा रहा है।
एनसीए पर हस्ताक्षर करने वाले 7 ईएओ के प्रदेशों में विवादों से परेशान बेघरों को मानवीय मदद के लिए NSPNC ने निप्पॉन फाउंडेशन के साथ समन्वय किया था। वर्ष 2022 से 2024 तक, चावल की 58,055 बोरियां वाली चार खेपें पहुँचाईं गई और 2025 के लिए 29,300 बोरियों को पहुँचाने का इंतज़ाम किया जा रहा है। वार्ता करने वाले दलों के साथ अनौपचारिक बातचीत (आमने– सामने, वीडियो कॉन्फ्रेंस और वर्चुअल) नियमित रूप से चल रही है जो शांति वार्ता का एक तरीका है।
NSPNC का फिनलैंड के क्राइसिस मैनेजमेंट इनिशिएटिव (सीएमआई) के साथ, 2019 से 2025 तक का, एक समझौता है। सीएमआई (CMI) तकनीकी प्रशिक्षण, शांति संबंधी मुद्दों पर कार्यसालाओं और JMC-TSC, NSPNC, और नागर प्रतिनिधियों के बीच बैठक के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सहयोग के ज़रिए निरंतर समर्थन देता है एवं शांति प्रक्रिया में मदद करने के लिए तकनीकी परामर्श और अंतरराष्ट्रीय शांति अनुभव प्रदान करता है। सीएमआई (CMI) अलग– अलग JMC स्तरों पर नागर प्रतिनिधियों के लिए कार्यशालाओं, अंतरराष्ट्रीय अध्ययन दौरा और JMC-TSC के साथ हर दो सप्ताह में बैठक करता है।
स्विस विदेश मंत्रालय के सहयोग से, 2021 में डीडीआर (निरस्त्रीकरण, वियोजन और पुनः एकीकरण/DDR –Disarmament, Demobilization, and Reintegration) और एसएसआर (सुरक्षा क्षेत्र सुधार/SSR) को समर्थन देने के लिए भावी सुरक्षा एवं पुनःएकीकरण विषय पर विशेषज्ञों से चर्चा, शांति प्रक्रिया समीक्षा पर कार्यशालाएं और सुरक्षा क्षेत्र की मैपिंग कार्यशालाओं का आयोजन किया गया। वर्ष 2022 में म्यांमार की शांति प्रक्रिया की समीक्षा और सुरक्षा क्षेत्र के फिर से जुड़ने पर चर्चा के लिए कार्यशालाएं आयोजित की गईं। वर्ष 2023 में सुरक्षा एकीकरण और विश्वास निर्माण पर कार्यशालाएं आयोजित की गईं और मानवीय मदद पर चर्चा 2025 में भी जारी रहेगी।
भारत NSPNC के साथ मिलकर और शांति एवं सुलह केंद्र (सीपीआर/CPR) की मदद से ‘संविधानवाद और संघवाद’ विषय पर पहले ही चार दौर की चर्चा कर चुका है। इन चर्चाओं का उद्देश्य संघीय व्यवस्था के संदर्भ में मुख्य संवैधानिक अवधारणा की गहन समझ को बढ़ावा देना है। इस व्याख्यान श्रृंखला में राजनेताओं, शिक्षाविदों, नीति निर्माताओं और अलग– अलग संगठनों के प्रतिनिधियों समेत कई लोग शामिल होते हैं ताकि संवैधानिक मुद्दों और संघीय शासन पर सार्थक चर्चा हो सके, ताकि ये जानकारियां म्यांमार में एक लोकतांत्रिक और संघीय संघ बनाने में मदद कर सके।
पहली बार चर्चा जून 2023 में यांगून और ने पी तॉव में चार दिनों तक चली जिसमें NSPNC, तत्माडॉ, सरकारी मंत्रालयों, राजनीतिक दलों, NCA-S EAOs, CPR और ने पी तॉव स्टेट अकैडमी के 100 से ज्यादा प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। जिन विषयों पर चर्चा की गई उनमें भारत के संविधान की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, इसे बनाने वाले नेताओं के बुनियादी विचार, धीरे– धीरे बनने की प्रक्रिया और शासकों की भूमिका शामिल थे।
दूसरे दौर की चर्चा नवंबर 2024 में नई दिल्ली, भारत में दो दिनों तक चली जिसमें NSPNC, CPR, राजनीतिक दलों और NCA-S EAOs के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। कार्यशाला के दौरान जिन छह विषयों पर चर्चा की गई। विषय थे– भारत के संविधान के तहत राष्ट्रपति और राज्यपालों की भूमिका, भारतीय संघ का पुनर्गठन, संघीय व्यवस्था में शक्तियों का बंटवारा और राजस्व साझाकरण, भारत के नजरिए से उप– राष्ट्रीय स्तर पर संवैधानिक अनुभव, भारत की पंचायती राज व्यवस्था, जो एक स्थानीय स्व–शासन व्यवस्था है और एक आधुनिक देश में भाषा, विविधता और सामंजस्यपूर्ण सह–अस्तित्व।
तीसरी बार की चर्चा 18 मार्च 2025 को म्यांमार के यांगून में इंडिया सेंटर में आयोजित की गई जिसमें NSPNC, CPR, राजनीतिक दलों और NCA-S EAOs के कुल 45 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इस सत्र के दौरान संवैधानवाद और संघवाद के विषय के तहत तीन अलग– अलग मुद्दों पर चर्चा की गई।
चौथा दौर 18 नवंबर 2025 को म्यांमार के यांगून के इंडिया सेंटर में हुआ जिसमें NSPNC, CPR, राजनीतिक दलों और NCA-S EAOs के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस सत्र में जिन तीन विषयों पर चर्चा हुई वे थे– भारत के सीमावर्ती राज्यों में संघवाद के कुछ व्यावहारिक पहलू, भारत में क्षेत्रीय राजनीतिक दलों की भूमिका और स्थान एवं एकता की रक्षा करते हुए विविधता को बढ़ावा देने के लिए संवैधानिक प्रावधान।
इन चर्चाओं से हमें भारत के संविधान के तहत राष्ट्रपति और राज्यपालों की भूमिकाओं, भारतीय संघ के पुनर्गठन, संघीय व्यवस्था में शक्तियों के बंटवारे और राजस्व साझाकरण, उप– राष्ट्रीय स्तर पर संवैधानिक अनुभव, स्थानीय स्व– शासन के पंचायती राज व्यवस्था और भारत की भाषा नीति के बारे में जानने का मौका मिला। भारत के संवैधानिक विशेषताओं और अनुभवों के बारे में जानकारी प्राप्त करना, जिसमें इसके संघीय व्यवस्था का काम करना भी शामिल है, हमारे देश में लोकतंत्र और संघवाद पर आधारित संघ बनाने में हमारे लिए बहुत लाभकारी रहा है। मुझे पूरा विश्वास है कि ये जानकारियां हमारे प्रयासों में बहुत मदद करेंगी।
तालिका 1: सालाना कार्यक्रम और परिणाम
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वर्षगांठ |
तिथि |
प्रतिभागी |
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1 |
15 अक्टूबर 2016 |
415 |
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2 |
15 अक्टूबर 2017 |
479 |
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3 |
15 अक्टूबर 2018 |
उपलब्ध नहीं |
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4 |
28 अक्टूबर 2019 |
475 |
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5 |
15 अक्टूबर 2020 |
0 |
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6 |
15 अक्टूबर 2021 |
35 |
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7 |
15 अक्टूबर 2022 |
40 |
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8 |
15 अक्टूबर 2023 |
1,300 |
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9 |
15 अक्टूबर 2024 |
75 |
एनसीए की 10वीं वर्षगांठ, जिसमें समारोह और कार्यशाला दोनों शामिल थे, पूर्ण राज्य– स्तरीय औपचारिकताओं और राजनीतिक महत्व के साथ हुई जो दस्तूर और महत्व दोनों को दर्शा रही थीं। एनसीए की 10वीं वर्षगांठ का उद्घाटन समारोह जिसका मोटो ‘एनसीए से कायम रहने वाली शांति, हमारे भविष्य को संवारना’ था, में, कार्यवाहक राष्ट्रपति, राष्ट्रीय सुरक्षा एवं शांति आयोग के अध्यक्ष और राष्ट्रीय एकता एवं शांति स्थापना केंद्रीय समिति के अध्यक्ष वरिष्ठ जनरल मिन आंग ह्लाइंग शामिल हुए और स्वागत भाषण दिया।
एनसीए समारोह में कुल 1,200 से अधिक प्रतिनिधि शामिल हुए, जिनमें एनसीए पर हस्ताक्षर करने वाले घरेलू और अंतरराष्ट्रीय गवाह, सेना के वरिष्ठ अधिकारी, घरेलू और विदेशी विचार– मंचों के जानकार, NSPNC के अध्यक्ष और सदस्य, प्रदेशों और राज्यों के मुख्यमंत्री, NCA को बनाने में मदद करने वाले लोग, शांति प्रक्रिया में हिस्सा लेने वाले, जातीय सशस्त्र संगठन (एनसीए– हस्ताक्षरकर्ता और हस्ताक्षर न करने वाले EAOs), राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि, बुद्धिजीवी, अलग– अलग क्षेत्रों के पेशेवर और दूतावासों के राजनयिक शामिल थे। इसके अलावा, 300 से अधिक प्रतिभागी कार्यशाला का हिस्सा बने।
चर्चा में, भारत, चीन और थाईलैंड के अंतरराष्ट्रीय विद्वानों ने एनसीए के बारे में जो कुछ विशेष बातें बताईं, वे इस प्रकार थीं:
अंतराष्ट्रीय विद्वानों के साथ कार्यशाला की अनुशंसाओं और घरेलू विशेषज्ञों के साथ कार्यशाला के सुझावों– जिन्हें राजनीतिक, आर्थिक और एनसीए (NCA) के नज़रिए से देखा गया है, साथ ही भविष्य के कार्यान्वयन योजना भी– की बहुत ही बारीकी से समीक्षा की गई है और श्रेणियों में बांटा गया है। इज़ाजत लेकरस ये, सुझाव राष्ट्र प्रमुख को सौंप दिए गए हैं ताकि इन्हें व्यावहारिक रूप से लागू किया जा सके। मुझे पूरा विश्वास है कि इन सुझावों से शांति प्रक्रिया में हिस्सा लेने वालों के बीच विश्वास और सहयोग बढ़ेगा एवं वर्तमान राजनीतिक परिस्थिति के हिसाब से शांति स्थापित करने एवं देश के विकास कोशिशों को निरंतर लागू करने में मदद मिलेगी।
हस्ताक्षर न करने वाले ईएओ और कुछ आलोचक जो ये दावा करते हैं "एनसीए समाप्त हो चुका है, यह बिखर गया है, शांति प्रक्रिया समाप्त हो चुकी है," मैं, लेखक, यह कहना चाहूँगा: "म्यांमार में शांति प्रक्रिया अभी भी जीवित है। एनसीए भी जिंदा है और भविष्य की ओर कदम बढ़ा रहा है।” मैं क्यों कह रहा हूँ कि एनसीए जीवित है?
राष्ट्राध्यक्ष, रक्षा सेवा के कमांडर– इन– चीफ और NSPCC के अध्यक्ष सीनियर जनरल मिन आंग ह्लाइंग द्वारा 27 फरवरी 2021 से 3 अगस्त 2025 तक एनसीए के बारे में दिए गए बयानों और भाषणों की समीक्षा करने पर मैंने पाया कि उन्होंने 73 बार एनसीए का उल्लेख किया, जिससे ये कुछ निम्नलिखित बातें सामने आती हैं:
ये बातें स्पष्ट रूप से बताते हैं कि तत्माडॉ का फोकस और इरादा एनसीए को पूर्ण रूप से लागू करना है क्योंकि देश के विकास के लिए अंदरूनी शांति बहुत आवश्यक है, इसलिए तत्माडॉ ने 21 दिसंबर 2018 से 31 जुलाई 2025 तक कुल 27 एकतरफा युद्धविराम वक्तव्य जारी किए जो शांति के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं। सभी नागरिकों को यह समझना चाहिए कि शांति केवल बातचीत और समझौता वार्ता के रास्ते से ही मिल सकती है।
देशव्यापी युद्धविराम समझौता (एनसीए/NCA) केवल युद्धविराम नहीं है बल्कि यह तत्माडॉ का एक राजनीतिक प्रतिबद्धता है जो शांति प्रक्रिया को लागू करने और लोकतांत्रिक एवं संघीय संघ बनाने का मार्ग दिखाता है। इसे म्यांमार के इतिहास का एकमात्र ऐसा दस्तावेज भी कहा जाता है जो स्पष्ट रूप से एक संघीय संघ बनाने का इरादा बताता है।
जारी सशस्त्र विवादों से विशेषरूप से जातीय क्षेत्रों में लोगों के घरों, जान–माल और संपत्ति का बहुत अधिक नुकसान हो रहा है। बड़ी संख्या में लोग और युवा विवादों से मुँह मोड़ रहे हैं, इससे न केवल उनके पढ़ाई– लिखाई के अवसर खत्म होते जा रहे हैं बल्कि देश के भविष्य हेतु मानवपूंजी का भी बहुत बड़ा नुकसान हो रहा है। इसलिए, सरकार के लिए यह बहुत ही आवश्यक हो गया है कि वह झगड़े को सुलझाने के इरादे से एनसीए की प्रक्रिया को जारी रखे।
म्यांमार गणराज्य में रहने वाले सभी जातीय समूहों की राजनीतिक इच्छाओं, ऐतिहासिक परंपराओं, संस्कृति, साहित्य, भाषाओं और राष्ट्रीय पहचान को देश द्वारा स्वीकार किया जाना चाहिए और सभी नागरिकों को मिलकर देशवासियों एवं भाषाओं की विविधता के आधार पर एक संघीय पहचान बनानी चाहिए।
लंबे समय तक शांति बनाए रखने के लिए, सुरक्षा क्षेत्र सुधार (एनसीए अनुच्छेद 30) से जुड़े मामलों और प्रक्रियाओं पर बातचीत करने और उन्हें लागू करने के लिए एनसीए की पूरी प्रक्रिया को फिर से शुरू करने की आवश्यकता है। यह सब लोकतंत्र और संघीय व्यवस्था पर आधारित संघ के निर्धारित समीकरण के तहत हासिल किया जाना चाहिए जिसमें बातचीत और समायोजन के माध्यम से अनुच्छेद– 30 को चरण– दर– चरण लागू किया जाएगा।
देश की वर्तमान वास्तविक स्थिति के आधार पर दीर्घकालिक शांति तभी मिल सकती है जब एक सच्चा संघीय संघ बनाया जाए। संघीय व्यवस्था के तरीकों के हिसाब से “सत्ता साझाकरण, संसाधन साझाकरण और कर साझाकरण” पर व्यवस्थित रूप से बातचीत करना, उन्हें सुलझाना और समझौते, यह पक्का करते हुए कि सत्ता– साझाकरण का सूत्र भी सभी राज्यों के लिए बराबरी और स्वायत्तता की गारंटी दे, पर पहुँचना आवश्यक है।
हालांकि, चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं। वर्ष 2016 की शुरूआत से ही, कछ एनसीए पर हस्ताक्षर करने वाले ईएओ और तत्माडॉ के बीच झड़पें हुईं और जेएमसी(JMC) अक्सर एनसीए के नियमों के हिसाब से घटनाओं को सुलझाने में कमज़ोर रहा। इसलिए, एनसीए (NCA) प्रावधानों के उल्लंघन पर कार्रवाई करने के लिए संयुक्त युद्धविराम निगरानी समिति (जेएमसी/JMC) के अलग– अलग स्तर को व्यवस्थित रूप से फिर से सक्रिए करने और उनमें सुधार करने के लिए ज़रूरी काम करना आवश्यक है।
आज के समय में, कुछ बुरी मंशा वाली बाहरी मीडिया शांति प्रक्रिया को समाप्त करने का प्रयास कर रही हैं, इसलिए जनता के लिए यह आवश्यक है कि वे सनसनीखेज पक्षपातपूर्ण और बढ़ा–चढ़ाकर बताई गई रिपोर्टों, मनगढ़ंत खबरों, गलत जानकारी और दुष्प्रचार एवं आतंकवादी कार्यों को बढ़ावा देने एवं समर्थन करने वाली नफरत भरी बातों को खारिज करते हुए निष्पक्ष खबरें पाएं ताकि हिंसा और विवादों को कम किया जा सके।
राष्ट्रीय सुरक्षा और शांति आयोग का नेतृत्व 28 दिसंबर 2025 से शुरू होने वाले चरणों में स्वतंत्र और निष्पक्ष बहु–दलीय लोकतांत्रिक आम चुनाव को व्यवस्थित रूप से कराने की योजना बना रही है, NSPNC 10वीं वर्षगांठ का कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बना रहा है, जिसमें "एनसीए से स्थायी शांति की ओर हमारे भविष्य को आकार देना" और "म्यांमार के शांतिपूर्ण भविष्य के निर्माण हेतु शांति प्रक्रिया की पहचान करना" के माध्यम से भविष्य का रास्ता तय किया जाएगा।
निष्कर्ष
देश की नीतियों के अनुसार, NSPNC लगातार बैठकें और वार्ता कर विश्वास बनाने एवं राष्ट्रीय संवाद को बढ़ावा देकर पूरे देश में लंबे समय तक चलने वाली स्थायी शांति बनाने के लिए अपने एनसीए एजेंडा को लागू करता रहेगा। इस काम पर ध्यान देते हुए, NSPNC का मानना है कि एनसीए (NCA) प्रक्रिया को फिर से शुरू किया जाए और लेकतंत्र एवं संघीय व्यवस्था पर आधारित एक शांतिपूर्ण म्यांमार बनाया जाए। यह एनसीए की प्रक्रिया और इस प्रक्रिया में बाकी बचे हस्ताक्षर न करने वालों को शामिल कर हासिल किया जाएगा।
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