30 अक्टूबर 2025 को साइप्रस गणराज्य के विदेश मंत्री महामहिम डॉ. कॉन्स्टेंटिनोस कोम्बोस द्वारा 'साइप्रस और विश्व' विषय पर आयोजित 55वें सप्रू हाउस व्याख्यान में आईसीडब्ल्यूए की कार्यवाहक महानिदेशक एवं अपर सचिव श्रीमती नूतन कपूर महावर का स्वागत भाषण
महामहिम डॉ. कॉन्स्टेंटिनोस कोम्बोस, विदेश मंत्री, साइप्रस गणराज्य
डॉ. एस. जयशंकर, भारत के माननीय विदेश मंत्री,
राजदूत सिबी जॉर्ज, सचिव (पश्चिम)
राजनयिक दल के विशिष्ट सदस्यगण, शिक्षा जगत, मीडिया, छात्रगण एवं मित्रगण!
आज 'साइप्रस और विश्व' विषय पर आयोजित 55वें सप्रू हाउस व्याख्यान में साइप्रस गणराज्य के विदेश मंत्री महामहिम डॉ. कॉन्स्टेंटिनोस कोम्बोस की मेज़बानी करते हुए हमें बेहद गर्व का अनुभव हो रहा है। भारत के सबसे पुराने तथा विदेश नीति में अग्रणी थिंक टैंक, भारतीय वैश्विक परिषद द्वारा आयोजित इस सप्रू हाउस व्याख्यान श्रृंखला में पहले भी कई देशों के राष्ट्राध्यक्ष और शासनाध्यक्ष, अंतर्राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय संगठनों के प्रमुख और अन्य प्रतिष्ठित हस्तियों समेत कई प्रतिष्ठित हस्तियाँ शामिल हो चुकी हैं।
माननीय डॉ. कॉन्स्टेंटिनोस कोम्बोस की राजनीतिक पृष्ठभूमि बेहद प्रभावशाली रही है और उनको विधि क्षेत्र में लंबा अनुभव है। उन्होंने यूरोपीय संघ विधि में स्नातकोत्तर उपाधि के साथ-साथ यूरोपीय संवैधानिक विधि में पीएचडी की उपाधि भी हासिल की है। उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ साइप्रस के विधि विभाग के अध्यक्ष और सीनेट के सदस्य के रूप में भी कार्य किया है। वे एक अच्छे लेखक हैं और उनकी रचनाओं का छह भाषाओं में अनुवाद किया जा चुका है।
उन्हें सर्वोच्च न्यायालय द्वारा न्यायाधीश मंडल का सदस्य नियुक्त किया गया था। साइप्रस गणराज्य की ओर से, वे यूरोपीय संघ के न्यायालय में उपस्थित हुए और उन्होंने यूरोपीय संघ विधि तथा साइप्रस संविधान के मुद्दों पर प्रतिनिधि सभा को सिफारिशें कीं। उन्हें 2014 में साइप्रस समस्या वार्ता दल का सदस्य नियुक्त किया गया और उन्होंने जिनेवा I, क्रांस-मोंटाना, जिनेवा II में वार्ता प्रक्रिया के सभी चरणों और स्तरों में हिस्सा लिया।
वह मार्च 2023 से साइप्रस गणराज्य के विदेश मंत्री के रूप में कार्यरत हैं। साइप्रस के विदेश मंत्री के रूप में यह उनकी भारत की पहली आधिकारिक यात्रा है, जो जून 2025 में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की साइप्रस की ऐतिहासिक यात्रा के छह महीने के भीतर हो रही है।
मित्रो, दुनिया को देखने का साइप्रस का नज़रिया वास्तव में महत्वपूर्ण है। यह द्वीपीय देश भू-रणनीतिक रूप से पूर्वी भूमध्य सागर में यूरोप, पश्चिम एशिया एवं उत्तरी अफ्रीका के समुद्री चौराहे पर स्थित है। इस वजह से, साइप्रस कई संस्कृतियों और सभ्यताओं का संगम स्थल भी है।
औपनिवेशिक शक्तियों और साम्राज्यों की सैन्य रणनीति में साइप्रस का पहले से ही एक महत्वपूर्ण स्थान रहा है। साइप्रस की भूमि ऐतिहासिक रूप से प्रतिस्पर्धी यूरोपीय और एशियाई हितों के बीच संघर्ष का भी विषय रही है; लेकिन स्वतंत्रता के पश्चात् इसने अपनी सामरिक स्वायत्तता को सोच विचारकर आकार दिया है, जिसे वह मौजूदा भू-राजनीतिक बदलावों के बीच और मज़बूत करने की उम्मीद रखता है।
भूमध्य सागर का सबसे बड़ा द्वीप होने के नाते साइप्रस समुद्री व्यापार, नौवहन मार्गों, कनेक्टिविटी, रणनीतिक जुड़ाव एवं ऊर्जा संसाधनों के मामले में बेहद खास स्थिति में है। साइप्रस के साथ घनिष्ठ संबंध बनाने के भारत के प्रयास इन्हीं कारणों, साथ ही बदलती विश्व व्यवस्था की वजह से मिले घनिष्ठ सहयोग के अवसरों के दोहन से प्रेरित हैं। भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (आईएमईसी) के नए रुप के ज़रिए प्राचीन भारत-भूमध्य कनेक्टिविटी और व्यापार नेटवर्क को फिर से शुरु करने और एक-दूसरे की समुद्री शक्तियों से पारस्परिक लाभ पाने के प्रयासों को भी इसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
हम माननीय विदेश मंत्री द्वारा भारत-साइप्रस संबंधों को और मजबूत करने में दिखाई गई गहरी रुचि की सराहना करते हैं। विदेश मंत्री का कार्यभार संभालने के बाद से, उन्होंने विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर के साथ नियमित संवाद बनाए रखा है, जिसमें 2023 में स्टॉकहोम में, 2024 में दोहा में और 2023, 2024 और 2025 में न्यूयॉर्क में व्यक्तिगत रूप से बैठकें और टेलीफोन पर बातचीत शामिल हैं।
साइप्रस यूरोपीय संघ का एक महत्वपूर्ण सदस्य है। यह 2026 की पहली छमाही में यूरोपीय संघ की अध्यक्षता करेगा और भारत-यूरोपीय संघ रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने हेतु भारत साइप्रस के साथ मिलकर काम करने को लेकर बेहद उत्सुक है।
मित्रों, भारत-साइप्रस संबंध ऐसी दूरदर्शी साझेदारी का सृजन करते हैं, जो एक संयुक्त रणनीतिक विज़न और आपसी विश्वास एवं सम्मान पर आधारित है। हम आज दुनिया में मौजूद भू-राजनीतिक अशांति के बीच इस साझेदारी को और गति देने को लेकर माननीय विदेश मंत्री के विचार जानने हेतु बेहद उत्सुक हैं।
महामहिम, मैं आपका और आज उपस्थित सभी अतिथियों का हार्दिक स्वागत करती हूँ।
धन्यवाद!
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