जलवायु परिवर्तन के गंभीर प्रभावों का सामना कर रहा भारत विश्व के सबसे अधिक जलवायु– संवेदनशील देशों में से एक बना हुआ है। इसे एक स्थायी, भविष्योन्मुख संक्रांति की तत्काल आवश्यकता है जिसके लिए जलवायु– संरेखित अर्थव्यवस्था हेतु अभूतपूर्व एकजुट प्रयासों की जरूरत है। यह लेख जलवायु वित्तपोषण और जलवायु वर्गीकरण की सामयिक भूमिका में भारत के प्रयासों पर चर्चा करता है।
जलवायु– संरेखित अर्थव्यवस्था क्यों जरूरी है
साल 2023 और 2027 के बीच विश्व के तापमान का पूर्व– औद्योगिक स्तरों से अधिक 1.5°सेल्सियस की सीमा पार करने की उम्मीद है।[i] इस समस्या को दूर करने के लिए, भारत ने 2022 में अपने राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDCs)[ii] और दीर्घकालिक– कम उत्सर्जन विकास रणनीति (LT-LEDS)[iii] को अपडेट किया है, और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने, अक्षय ऊर्जा को बढ़ावा देने एवं जलवायु प्रभावों के खिलाफ लचीलापन बढ़ाने के लिए अधिक महत्वाकांक्षी कार्यों के प्रति प्रतिबद्धता जताई है। जलवायु– संरेखित निवेश चैनल संसाधनों को पर्यावरणीय परियोजनाओं में और पंचामृत लक्ष्यों की दिशा में भारत की प्रगति का समर्थन करता है।[iv] भारत के लिए इसका अर्थ है कि नेट जीरो हेतु हरित क्रांति का वित्तपोषण करना, 2030 तक 2.5 ट्रिलियन डॉलर और 2070 तक 10 ट्रिलियन डॉलर।[v] न्यून– कार्बन अर्थव्यवस्था में बदलने के लिए नए निवेश और वित्तीय पारिस्थितिकी व्यवस्था की आवश्यकता होगी।
जलवायु लक्ष्यों को पूरा करने वाले नीतिगत और वित्तीय साधन
जलवायु अभियान की उच्च पूंजी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए भारत विभिन्न वित्तीय व्यवस्थाओं पर निर्भर करता है जिसमें ग्रीन फाइनेंस, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (PSEs), बजट आवंटन, निजी निवेश और अंतरराष्ट्रीय वित्तपोषण शामिल हैं। राष्ट्रीय स्वच्छ ऊर्जा कोष (एनसीईएफ/NCEF), जलवायु परिवर्तन हेतु राष्ट्री अनुकूलन कोष (एनएएफसीसी/NAFCC), भारतीय अक्षय ऊर्जा विकास संस्थान (आईआरईडीए/ IREDA), भारतीय सौर ऊर्जा निगम (एसईसीआई/SECI), क्लाइमेट चेंज फाइनेंस यूनिट (सीसीएफयू/CCFU) और राष्ट्रीय ताप विद्युत निगम (एनटीपीसी/NTPC) जैसे प्रमुख संस्थान अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं में सहयोग करने और उनके विकास को सुविधाजनक बनाने के लिए दीर्घकालिक ऋण प्रदान करते हैं। इसके अलावा, राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड/NABARD) घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय अनुकूलन कोष का प्रबंधन कर ग्रामीण लचीलेपन को बेहतर बनाता है।[vi]
सरकार ने स्वच्छ ऊर्जा को अपनाने को प्रोत्साहित करने हेतु प्रदर्शन, उपलब्धि और व्यापार (पीएटी/PAT) योजना, नवीकरणीय ऊर्जा प्रमाण पत्र (आरईसी), नवीकरणीय खरीद दायित्व (आरपीओ) और फीड– इन टैरिफ (एफआईटी) समेत कई वित्तीय साधनों को लागू किया है। घरेलू वाणिज्यिक बैंक, गैर– बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (एनबीएफसी) और बहुपक्षीय विकास बैंक (एमडीबी) भी प्राथमिक सूत्रधारों में से हैं। विश्व बैंक और एशियाई विकास बैंक (एडीबी) भारत में 50% से अधिक वैश्विक पर्यावरण सुविधा (जीईएफ) परियोजनाओं का वित्तपोषण करते हैं। ग्रीन क्लाइमेट फंड (जीसीएफ) नीति, प्रौद्योगिकी और वित्त में नवाचार को बढ़ावा देते हुए अनुकूलन और शमन में निवेश को बढ़ावा देते हैं। भारतीय मंत्रालयों और एजेंसियां इन अंतरराष्ट्रीय निकायों के साथ मिलकर राष्ट्रीय जलवायु प्राथमिकताओं के साथ वैश्विक संसाधनों का तालमेल बैठाने के लिए काम करती हैं जिससे वित्तपोषण संबंधी चुनौती से निपटने के लिए समन्वित नज़रिया सुनिश्चित होता है।[vii]
इन सहयोगी प्रयासों को दर्शाती प्रमुख राष्ट्रीय योजनाएं हैं– प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवम् उत्थान महाभियान (PM-KUSUM),[viii] प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY),[ix] जल जीवन मिशन,[x] अटल कायाकल्प और शहरी परिवर्तन मिशन (अमृत/AMRUT),[xi] स्वच्छ भारत मिशन[xii] और फास्टर अडप्शन एंड मैन्युफैक्चरिंग ऑफ हाइब्रिड एंड इलेक्ट्रिक ह्वीकल्स (फेम/FAME भारत योजना),[xiii] ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर,[xiv] राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन, संप्रभु हरित बॉन्ड जारी करना,[xv] और भारत स्मॉल रिएक्टर (बीएसआर/BSR)[xvi] कार्यक्रम हाल के पहलों में से हैं जो उच्च निवेश को आकर्षित करते हैं और भारत के लिए जलवायु– परिवर्तन के अनुकूल बुनियादी ढांचा निर्माण का समर्थन करते हैं।
जलवायु अर्थव्यवस्था वर्गीकरण: एक अनिवार्य कदम
इन प्रयासों के बावजूद, वर्तमान आवंटन की तुलना में वित्तपोषण जरूरतें बहुत अधिक हैं। ऐसे में जबकि ऊर्जा और शहरी क्षेत्रों पर अब तक बहुत ध्यान दिया गया है– उच्च– उत्सर्जन के दूसरे क्षेत्रों जैसे कृषि, विनिर्माण और भारी उद्योग, अभी भी डीकार्बोनाइजेशन (कार्बन उत्सर्जन को कम करना) के संदर्भ में अनछुए हैं।[xvii] भारत सरकार ने 2025 में राष्ट्रीय वर्गीकरण का एक प्रारूप पेश किया जिसका उद्देश्य विभिन्न उद्योगों में जलवायु– संरेखित निवेशों को परिभाषित और मानकीकृत करना था।[xviii]
यह प्रारूप जलवायु शमन और अनुकूलन हेतु पूंजी प्रवाह को प्रेरित करने के लक्ष्य के साथ तैयार किया गया था। यह विकसित भारत विज़न के तहत भारत के व्यापक विकास उद्देश्यों का समर्थन करता है जो स्थायी विकास, समावेशी विकास और हरित अवसंरचनाओं पर ज़ोर देता है।[xix] रूपरेखा “जलवायु– संरेखित” गतिविधियों को परिभाषित करने की मंशा रखती है और निवेश हेतु रोडमैप प्रदान करती है। यह मानकीकरण एक खंडित पारितंत्र में नियामकों एवं निवेशकों हेतु संदर्भ बिंदु प्रदान करता है[xx] जिसका उद्देश्य ग्रीनवॉशिंग (मार्केटिंग तकनीक जिसका उद्देश्य पर्यावरणीय उत्तरदायित्वों को पूरा करने का भ्रम पैदा करना है) गतिविधियों को रोकना और वित्तीय पारदर्शिता को बढ़ाना है।
वर्गीकरण मुख्य रूप से भारत के उच्च– उत्सर्जन, पूंजी– गहन क्षेत्रों को लक्षित करती है जिसमें विद्युत, परिवहन, उद्योग, बुनियादी ढांचा, कृषि, वानिकी और भूमि उपयोग शामिल हैं। इसके तीन मुख्य उद्देश्य जलवायु के अनुकूल प्रौद्योगिकियों के लिए संसाधनों को बढ़ावा देना, हार्ड– टू– अबेट सेक्टरों (ऐसे सेक्टर्स जिनमें उत्सर्जन को कम करना कठिन है– जैसे सीमेंट, इस्पात, पेट्रोलियम और रसायन) में लचीलेपन का समर्थन करना और नवाचार, स्वदेशी न्यून– उत्सर्जन प्रौद्योगिकियों एवं जलवायु– केंद्रित शोध और विकास हेतु प्रत्यक्ष निवेश। जैसे, यह विश्वसनीय और सत्यापन योग्य हरित निवेश के लिए ब्लूप्रिंट के रूप में काम करना चाहता है जिससे व्यवसायों और निवेशकों को विश्वसनीय जलवायु मानदंडों को पूरा करने वाली परियोजनाओं की पहचान करने में मदद मिलती है। इसका उद्देश्य भारत के हरित संक्रांति का समर्थन करने हेतु विकसित बाज़ारों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों से पूंजी प्रवाह को बढ़ावा देना है।[xxi]
निष्कर्ष
भारत जलवायु उद्देश्यों के साथ अपनी वित्तीय रणनीतियों को संरेखित करने की दिशा में प्रगति कर रहा है हालाँकि वर्तमान निवेश चुनौतियों को पार पाने के लिए अपर्याप्त हैं। जीवाश्म ईंधन से कम– कार्बन वाले विकल्पों की ओर वित्तपोषण को प्रभावी तरीके से पुनर्निर्देशित करने के लिए सरकारों, बैंकों और निजी हितधारकों से सहयोग और समन्वित प्रतिक्रियाओं की जरूरत होती है। जलवायु अर्थव्यवस्था का वर्गीकरण इस संक्रमण में एक साधन प्रदान करती है जो "हरित/ स्वच्छ" होने की योग्यता बताती है, निवेशकों की अनिश्चितता को कम करती है और मिश्रित वित्त, गारंटी एवं सरकारी– निजी भागीदारी को जोखिम– रहित निवेश बनाती है जिससे भारत के हरित वित्त प्रयासों को मजबूत आधार मिलता है।
वैश्विक जलवायु अर्थव्यवस्था परिदृश्य असमान बना हुआ है, विशेष रूप से ग्लोबल साउथ के लिए हानिकारक है। जी20 और ब्रिक्स जैसे मंच के माध्यम से भारत का नेतृत्व, साथ ही अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन एवं “एक सूर्य, एक विश्व, एक ग्रिड” जैसी पहल, समान वित्तीय पहुँच में निष्पक्षता को बढ़ावा देता है।[xxii] भारत की परिपक्व जलवायु कूटनीति ने अंतरराष्ट्रीय सहयोग, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और वित्तीय मदद में वृद्धि का लाभ उठाने के अवसर खोलती है।[xxiii]
साथ ही, एक बेहतर– संरचित वर्गीकरण सार्थक साझेदारी और पूंजी प्रवाह को बनाए रखने के लिए तैयार है, जो वैश्विक जलवायु शासन में भारत की स्थिति को मजबूत करता है। एक रणनीतिक ढांचे के रूप में यह भारत की पंचामृत प्रतिबद्धताओं, विकसित भारत विज़न और 2070 नेट– ज़ीरो लक्ष्य का समर्थन करता है, यह बताते हुए कि आर्थिक विकास और पर्यावरणीय उत्तरदायित्व का निर्वहन एक साथ संभव है।
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*रितिका मौर्या , भारतीय वैश्विक परिषद, नई दिल्ली में शोध प्रशिक्षु हैं।
अस्वीकरण : यहां व्यक्त किए गए विचार निजी हैं।
डिस्क्लेमर: इस अनुवादित लेख में यदि किसी प्रकार की त्रुटी पाई जाती है तो पाठक अंग्रेजी में लिखे मूल लेख को ही मान्य माने ।
अंत टिप्पण:
[i] World Meteorological Organization (WMO). 2023. “Global Temperatures Set to Reach New Records in Next Five Years.” World Meteorological Organization, May 17, 2023. https://wmo.int/news/media-centre/global-temperatures-set-reach-new-records-next-five-years (Accessed June 21, 2025).
[ii] Ministry of Environment, Forest and Climate Change, Government of India. 2022. India’s Updated First Nationally Determined Contribution Under Paris Agreement (2021–2030). United Nations Framework Convention on Climate Change, August 2022.
[iii] United Nations Framework Convention on Climate Change (UNFCCC). 2023. “Long-Term Low-Emission Development Strategies: Synthesis Report by the Secretariat.” FCCC/PA/CMA/2023/10, November 14, 2023. https://unfccc.int/lt-leds-synthesis-report (Accessed June 25, 2025).
[iv] Press Information Bureau. 2022. “India’s Panchamrit Climate Commitments Announced at COP26.” Ministry of Environment, Forest and Climate Change, January 3, 2022. https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=1795071 (Accessed June 25, 2025).
[v] Press Information Bureau, Government of India, 2022, “India’s Updated Nationally Determined Contribution Communicated to UNFCCC,” Ministry of Environment, Forest and Climate Change, https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=1868284 (Accessed July 21, 2025)
[vi] Indian Institute for Human Settlements (IIHS). 2023. Climate Finance in India 2023: Landscape of Climate Finance in India. Bengaluru: IIHS. https://iihs.co.in/knowledge-gateway/wp-content/uploads/2023/11/20231128_Climate-Finance-in-India2023.pdf (Accessed July 18, 2025).
[vii] Ibid.
[viii] Ministry of New and Renewable Energy (MNRE), Government of India. PM-KUSUM Scheme. Accessed July 21, 2025. https://pmkusum.mnre.gov.in/.
[ix] India Brand Equity Foundation (IBEF). "Pradhan Mantri Awas Yojana: A Game Changer for Urban and Rural Housing." IBEF, September 15, 2022. https://www.ibef.org/blogs/pradhan-mantri-awas-yojana-a-game-changer-for-urban-and-rural-housing.
[x] Jal Jeevan Mission. Government of India. Accessed July 20, 2025. https://jaljeevanmission.gov.in/.
[xi] Ministry of Housing and Urban Affairs. Atal Mission for Rejuvenation and Urban Transformation (AMRUT). Government of India. Accessed July 21, 2025. http://164.100.87.10/.
[xii] Ministry of Housing and Urban Affairs. Swachh Bharat Mission. Government of India. Accessed July 21, 2025. https://swachhbharatmission.gov.in/.
[xiii] Bureau of Energy Efficiency. FAME India Scheme – Faster Adoption and Manufacturing of Hybrid and Electric Vehicles in India. Government of India. Accessed July 21, 2025. https://udit.beeindia.gov.in/fame/.
[xiv] Asian Development Bank. “India: Green Energy Corridor and Grid Strengthening Project.” Asian Development Bank. Accessed July 20, 2025. https://www.adb.org/projects/44426-016/main.
[xv] Ministry of New and Renewable Energy, Government of India. “National Green Hydrogen Mission.” National Single Window System, accessed July 10, 2025. https://www.nsws.gov.in/portal/scheme/greenhydrogenpolicy#:~:text=The%20Mission%20will%20facilitate%20demand,and%20expeditious%20approvals%20leveraging%20technology.
[xvi] World Nuclear News. “NPCIL Seeks Proposals for Privately Funded Small Reactor Projects.” World Nuclear News, July 3, 2024. https://www.world-nuclear-news.org/articles/npcil-seeks-proposals-for-privately-funded-small-reactor-projects.
[xvii] World Economic Forum. 2021. Mission 2070: A Green New Deal for a Net Zero India. World Economic Forum. https://www3.weforum.org/docs/WEF_Mission_2070_A_Green_New_Deal_for_a_Net_Zero_India_2021.pdf (Accessed May 20, 2025).
[xviii] Ministry of Finance, Government of India, 2025, Draft Framework of India’s Climate Finance Taxonomy, https://dea.gov.in/sites/default/files/%28F%29%20Draft%20Framework%20of%20Indias%20Climate%20Finance%20Taxonomy%20for%20publication%206th%20May%202025%20%281%29.pdf (Accessed June 02, 2025).
[xix] Press Information Bureau, Government of India. 2023. “Prime Minister Launches ‘Viksit Bharat @2047: Voice of Youth’ Initiative.” https://www.pib.gov.in/PressReleaseIframePage.aspx?PRID=1985077 (Accessed June 25, 2025).
[xx] Greenwashing misleading the public to believe that a company or other entity is doing more to protect the environment than it is.
United Nations, 2024, “Greenwashing – the deceptive tactics behind environmental claims,” United Nations Climate Change, https://www.un.org/en/climatechange/science/climate-issues/greenwashing (Accessed June 20, 2025).
[xxi] International Energy Finance Policy Agency (IEEFA). 2024. Building the Climate Finance Ecosystem: India’s Draft Taxonomy Framework. IEEFA. https://ieefa.org/resources/building-climate-finance-ecosystem-indias-draft-taxonomy-framework (Accessed June 20, 2025).
[xxii] Wadhwani Institute for Sustainable Development, 2024, “A Brief History of India’s Climate Policy and What Lies Ahead”, https://wifdelhi.org/a-brief-history-of-indias-climate-policy-and-what-lies-ahead/ (Accessed June 24, 2025).
[xxiii] Bhattacharya, Abhishek, 2021, “Net Zero by 2070: Financing India’s Biggest Infrastructure Buildup,” Observer Research Foundation, November 12, 2021, https://www.orfonline.org/expert-speak/net-zero-by-2070-financing-india-s-biggest-infrastructure-buildup (Accessed June 24, 2025).