अंडमान सागर नशीली दवाओं (ड्रग्स) की तस्करी और अनियमित प्रवास जैसे अंतरराष्ट्रीय अपराधों का केंद्र बन कर उभरा है जिससे इस क्षेत्र में सुरक्षा संबंधी चुनौतियां पैदा होती हैं। दक्षिण और दक्षिण–पूर्व एशिया के बीच इसकी रणनीतिक स्थिति समन्वित प्रतिक्रियाओं की तत्काल आवश्यकता को दर्शाती है।
अंडमान सागर उत्तर में म्यांमार, पूर्व में थाईलैंड और मलेशिया और पश्चिम में अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के तटों से घिरा है। यह बंगाल की खाड़ी को मलक्का जलडमरूमध्य से जोड़ता है जिसकी वजह से यह एक महत्वपूर्ण व्यापार मार्ग भी बन जाता है। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में स्थित भारत की एकमात्र त्रि– सेवा कमान मलक्का जलडमरूमध्य के पास भारत को अग्रिम तैनाती प्रदान करती है और इस क्षेत्र एवं उसके परे समुद्री निगरानी को सुगम बनाती है। हालाँकि, अंडमान सागर समुद्री व्यापार को बढ़ावा देने के लिए रणनीतिक रूप से उपयुक्त स्थान पर है लेकिन यह गैर– सरकारी तत्वों द्वारा शोषित संवेदनशील क्षेत्र भी है। यह नशीले पदार्थों (ड्रग्स) की तस्करी, अनियमित प्रवास, हथियारों की तस्करी, अवैध, अप्रतिबंधित और अनियमित (आईयूयू) मछली पकड़ने और साइबर अपराधों जैसे अंतरराष्ट्रीय अपराधों का केंद्र बन गया है।
मानचित्र 1: अंडमान सागर और बंगाल की खाड़ी
मानचित्र 2: बंगाल की खाड़ी के समुद्री संचार मार्ग[i]
अंडमान सागर में अंतरराष्ट्रीय अपराध
ड्रग्स की तस्करी
अंडमान सागर नशीली दवाओं (ड्रग्स) की तस्करी विशेष रूप से मेथामफेटामाइन (मेथ/ meth) और हेरोइन के उत्पादन केंद्रों से लेकर क्षेत्रीय और वैश्विक बाज़ारों तक के लिए एक महत्वपूर्ण गलियारा हुआ करता था। वर्ष 2023 में, दक्षिण– पूर्व एशिया में अभूतपूर्व 190 टन मेथामफेटामाइन पकड़ा गया,[ii] जिससे अवैध ड्रग्स व्यापार के व्यापक पैमाने का पता चलता है। अंडमान सागर म्यांमार से दक्षिण– पूर्व एशिया और ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे प्रशांत क्षेत्र के बाज़ारों तक मेथ और हेरोइन के परिवहन का प्रमुख समुद्री मार्ग है जबकि स्थल मार्ग से ड्रग्स को बांग्लादेश, भारत और चीन तक पहुँचाया जाता है।
दशकों से, म्यांमार हेरोइन, याबा (मेथ की गोलियां) और क्रिस्टल मेथ (बर्फ) के उत्पादन का वैश्विक केंद्र रहा है।[iii] म्यांमार अब विश्व का सबसे बड़ा अफ़ीम उत्पादक देश है जिसका अनुमानित क्षेत्रफल 2023 में 47,100 हेक्टेयर था जो 2022 में तालिबान द्वारा अफ़ीम की खेती पर प्रतिबंध लगाने के बाद अफ़गानिस्तान से आगे निकल गया।[iv] शान राज्य से ड्रग्स यंगून के बंदरगाह तक पहुँचते हैं जो तस्करी किए गए रसायनों का भंडारण केंद्र है। फिर इसे इंडोनेशिया के आचे, थाईलैंड के रानोंग और बांग्लादेश के कॉक्स बाज़ार जैसे अंडमान सागर के बंदरगाहों एवं तटीय इलाकों के रास्ते भेजा जाता है। ये सारे स्थान ड्रग्स की खेपों के लिए प्रमुख प्रवेश और निकास स्थल के रूप में काम में लिए जाते हैं।ii
ड्रग्स के उत्पादन में तेज़ी के कारण 2023 और 2024 के शुरूआती दिनों में मेथ के साथ– साथ केटामाइन और याबा की भी बड़ी मात्रा में ज़ब्ती की गई थी। उदाहरण के लिए, नवंबर 2024 के आखिरी दिनों में, श्रीलंकाई नौसेना के साथ मिलकर भारतीय तटरक्षक बल ने अंडमान सागर में बैरन द्वीप से लगभग 8 समुद्री मील पूर्व में म्यांमार के झंडे वाली एक मछली पकड़ने वाली नौका को रोका था। इस नौका से थाईलैंड ले जाई जा रही 5,500 किग्रा मेथ को भारतीय तटरक्षक बल ने जब्त किया, यह भारतीय तटरक्षक बल द्वारा जब्त की गई ड्रग्स की अब तक की सबसे बड़ी खेप थी। इस कार्रवाई से पता चलता है कि तस्कर अपनी गतिविधियों के समन्वय के लिए स्टारलिंक उपग्रह संचार जैसी अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर रहे थे।
अनियमित प्रवास
अंडमान सागर में अनियमित प्रवास विशेष रूप से रोहिंग्या शरणार्थियों का, एक और बड़ी चुनौती है। म्यांमार के रखाइन में 2017 की सैन्य कार्रवाई के कारण 800,000 से अधिक रोहिंग्या बांग्लादेश में विस्थापित हुए। म्यांमार में दशकों से हो रहे उत्पीड़न से तंग आकर कई लोगों ने बांग्लादेश में शरण ली है जो रोहिंग्या शरणार्थियों का सबसे बड़ा मेज़बान देश है और जहाँ 11 लाख से ज्यादा रोहिंग्या रहते हैं।[v] बांग्लादेश में क्षमता से अधिक शरणार्थियों वाले शिविरों और आजीविका के सीमित अवसरों के कारण, रोहिंग्याओं को खतरनाक समुद्री मार्गों से गुजरना पड़ता है जिसमें अक्सर तस्करों और मानव तस्करों को मदद मिलती है।
तस्करी के नेटवर्क बांग्लादेश के कॉक्स बाज़ार (जो एक प्रमुख प्रस्थान बिंदु है) से लेकर इंडोनेशिया, मलेशिया और थाईलैंड के आचेह तक के समुद्री मार्गों पर सक्रिए हैं। साल 2022 और 2023 के बीच इन मार्गों पर नावों की आवाजाही में 340% से अधिक की वृद्धि हुई है,[vi] जिसमें अकेले 2024 में 7,500 से अधिक लोगों ने सीमा पार करने की कोशिश की और इस खतरनाक सफर में 650 से ज्यादा लोगों के मारे जाने या लापता होने की सूचना मिली है।[vii] हाल ही में, मई 2025 में, म्यामांर के तट पर हुई नौका दुर्घटना में 400 से अधिक लोगों की मौत हो गई जिनमें से आधे से ज्यागा बांग्लादेश के कॉक्स बाज़ार से रवाना हुए थे। [viii]
अनियमित आवाजाही, मानव तस्करी, ड्रग्स की तस्करी और दूसरे आपराधिक गतिविधियों के बीच एक अंतर्संबंध है। विश्व भर से अनियमित प्रवासियों एवं दूसरे लोगों को थाईलैंड से सटे म्यांमार के सीमावर्ती क्षेत्रों में साइबर अपराध केंद्रों में ठगा गया है जहाँ उन्हें ऑनलाइन धोखाधड़ी का काम करने के लिए मजबूर किया जाता है।[ix] ऐसी आपराधिक गतिविधियों के कारण अंडमान सागर के तटीय देशों में सुरक्षा संबंधी गतिविधियों को मजबूत करना आवश्यक है।
क्षेत्रीय कर्ता और अंतरराष्ट्रीय अपराधों पर प्रतिक्रियाएँ
लाओस, म्यांमार और थाईलैंड के संगम, स्वर्ण त्रिभुज क्षेत्र से जुड़े जटिल नेटवर्क अंडमान सागर में अंतरराष्ट्रीय अपराधों को बढ़ावा देते हैं। स्वर्ण त्रिभुज के देशों के साथ सीमा साझा करने वाला चीन कथित तौर पर पूर्वगामी रसायनों का एक प्रमुख उत्पादक और ड्रग्स का एक बड़ा बाज़ार एवं पारगमन बिंदु है। चीन के नागरिक इस क्षेत्र में ड्रग्स और साइबर – घोटालों का नेटवर्क चलाने वालों में शामिल हैं। चीन म्यांमार की सेना और जातीय सशस्त्र संगठनों (ईएओ/ EAOs) दोनों के साथ जुड़ा हुआ है, एवं ड्रग्स से वित्त पोषित विद्रोही समूहों को समर्थन देकर क्षेत्रीय अस्थिरता बनाए रखने के लिए उसकी आलोचना की जाती है।[x] यह भी ध्यान देने योग्य बात है कि म्यांमार में आंतरिक अस्थिरता के कारण क्षेत्र में हथियारों की आवाजाही में वृद्धि हुई है।[xi]
इन कारकों द्वारा उत्पन्न चुनौतियों के बावजूद, अंतरराष्ट्रीय अपराधों से निपटने के लिए क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं शुरू की हई हैं। वर्ष 2015 में, जब थाईलैंड, मलेशिया और इंडोनेशिया द्वारा वापस भेजे जाने के बाद हज़ारो रोहिंग्या शरणार्थी समुद्र में फंस गए थे तो दक्षिण– पूर्व एशियाई देशों ने क्षेत्रीय प्रवासन नीतियों को ठोस बनाना शुरू कर दिया।[xii] दक्षिण पूर्व एशियाई राष्ट्र संघ (आसियान/ ASEAN) और मानव तस्करी एवं संबंधित अंतरराष्ट्रीय अपराध पर बाली प्रक्रिया, दो प्रमुख क्षेत्रीय निकाय हैं जिनके पास जबरन प्रवासन पर व्यावहारिक अधिदेश हैं।[xiii] इंडोनेशिया और ऑस्ट्रेलिया की सह– अध्यक्षता में 45 एशिया– प्रशांत सदस्य देशों के साथ बाली प्रक्रिया, संवाद, सूचना– साझाकरण और खोज– एवं– बचाव मिशन जैसे संयुक्त अभियानों को सुगम बनाती है और अनियमित प्रवासन के प्रति मानवीय एवं समन्वित प्रतिक्रियाओं को बढ़ावा देती है।vi
हिंद– प्रशांत क्षेत्र के सामरिक महत्व को समझते हुए भारत ने 2023 में आसियान– भारत समुद्री अभ्यास (एआईएमई/ AIME), भारत– आसियान समुद्री सुरक्षा संवाद और मलेशिया एवं थाईलैंड के साथ संयुक्त अभ्यासों के जरिए अपने प्रयासों को बेहतर बनाया है।[xiv] त्रि– सेवा अंडमान और निकोबार कमान संयुक्त नौसैनिक अभ्यासों, समन्वित गश्तों और समुद्री क्षेत्र जागरूकता पहलों के जरिए थाईलैंड, इंडोनेशिया, म्यांमार, मलेशिया और श्रीलंका के साथ समुद्री सहयोग को सुविधाजनक बनाती है ताकि इन जल क्षेत्रों में विषम सुरक्षा चिंताओं का समाधान किया जा सके।
अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद, अंतराष्ट्रीय संगठित अपराध और अवैध ड्रग्स तस्करी से निपटने हेतु बंगाल की खाड़ी बहु– क्षेत्रीय तकनीकी एवं आर्थिक सहयोग पहल (बिम्सटेक/ BIMSTEC) सम्मेलन संगठित अपराध और ड्रग्स की तस्करी के खिलाफ सहयोग को बढ़ावा देता है।[xv] अप्रैल 2025 में, बिम्सटेक (BIMSTEC) और संयुक्त राष्ट्र ड्रग्स एवं अपराध कार्यालय (यूएनओडीसी/ UNODC) ने दक्षिण और दक्षिण पूर्व एशिया में अंतरराष्ट्रीय अपराधों के विरुद्ध सहयोग को बेहतर बनाने के लिए, सूचना– साझाकरण, क्षमता– निर्माण और समन्वित समुद्री सुरक्षा प्रयासों पर मुख्य रूप से ध्यान देने की बात करने वाले समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए[xvi]। ड्रग्स की तस्करी के वृद्धि के जवाब में थाईलैंड, मलेशिया और इंडोनेशिया ने अपनी तटीय सुरक्षा को बेहतर बनाया है और सक्रिए रूप से रसायनिक नियंत्रण के क्षेत्र में सुधार करने में लगे हुए हैं।[xvii]
म्यांमार की अस्थिरता ने अंडमान सागर के भू– रणनीतिक महत्व को फीका कर दिया है जिससे यह अंतरराष्ट्रीय अपराधों के प्रति संवेदनशील हो गया है। हालाँकि क्षेत्रीय पहलों ने इस क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ाने के प्रयास किए हैं फिर भी परिचालन संबंधी कमियां मौजूद हैं। भारत के लिए, विशाल हिंद– प्रशांत क्षेत्र को देखते हुए अंडमान सागर अपने पूर्वी तट की रक्षा और दक्षिण– पूर्व एशियाई पड़ोसियों के साथ अपने संबंधों को बेहतर करने का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है।
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*भविष्य लक्ष्मी बी, भारतीय वैश्विक परिषद, नई दिल्ली में शोध प्रशिक्षु हैं।
अस्वीकरण : यहां व्यक्त किए गए विचार निजी हैं।
डिस्क्लेमर: इस अनुवादित लेख में यदि किसी प्रकार की त्रुटी पाई जाती है तो पाठक अंग्रेजी में लिखे मूल लेख को ही मान्य माने ।
अंत टिप्पण:
[i] Anu Anwar, “Positioning the Bay of Bengal in the Great Game of the Indo-Pacific Fulcrum”, Journal of Indo-Pacific Affairs - Air University Press, April 1, 2022. https://www.airuniversity.af.edu/JIPA/Display/Article/2980896/positioning-the-bay-of-bengal-in-the-great-game-of-the-indo-pacific-fulcrum/ (Accessed on July 16, 2025)
[ii] UNODC, “Synthetic Drugs in East and Southeast Asia”, 2024. https://www.unodc.org/roseap/uploads/documents/Publications/2024/Synthetic_Drugs_in_East_and_Southeast_Asia_2024.pdf (Accessed on July 4, 2025)
[iii] Fire and Ice: Conflict and Drugs in Myanmar’s Shan State, International Crisis Group, January 08, 2019. https://www.crisisgroup.org/asia/south-east-asia/myanmar/299-fire-and-ice-conflict-and-drugs-myanmars-shan-state (Accessed on July 11, 2025)
[iv] UNODC, “Southeast Asia Opium Survey 2023 Cultivation, Production, and Implications”. https://www.unodc.org/roseap/uploads/documents/Publications/2023/Southeast_Asia_Opium_Survey_2023.pdf (Accessed on July 10, 2025)
[v] UNHCR, “Desperate Irregular Journeys: Rohingya Refugees in Search of Protection”, December 31, 2024. https://data.unhcr.org/ar/documents/download/114965 (Accessed on July 3, 2025
[vi] Bali Process Member States and international organisations convene to promote coordinated efforts in Combatting Maritime People Smuggling in Andaman Sea region, The Regional Support Office of the Bali Process, March 11, 2024. https://rso.baliprocess.net/bali-process-member-states-and-international-organisations-convene-to-promote-coordinated-efforts-in-combatting-maritime-people-smuggling-in-andaman-sea-region/ (Accessed on July 8, 2025)
[vii] UNHCR, “Focus on saving lives, urges UNHCR as more Rohingya flee by sea”, January 8, 2025. https://www.unhcr.org/asia/news/press-releases/focus-saving-lives-urges-unhcr-more-rohingya-flee-sea (Accessed on July 8, 2025)
[viii] UNHCR, “UNHCR fears extreme desperation led to deaths of 427 Rohingya at sea”, May 23, 2025. https://www.unhcr.org/news/press-releases/unhcr-fears-extreme-desperation-led-deaths-427-rohingya-sea (Accessed on July 10, 2025)
[ix] Clara Fong, “How Myanmar became a global center for cyber scams”, Council on Foreign Relations, May 31, 2024. https://www.cfr.org/in-brief/how-myanmar-became-global-center-cyber-scams (Accessed on July 20, 2025)
[x] Myanmar War: China’s Support for Ethnic Armed Groups, Special Eurasia, July 4, 2024. https://www.specialeurasia.com/2024/07/04/myanmar-war-chinas-ethnicmilitia/ (Accessed on July 20, 2025)
[xi] Beyond legacy weapons: South East Asia’s illicit arms trade is diversifying, Global Initiative Against Transnational Organised Crime, June 25, 2025. https://globalinitiative.net/analysis/south-east-asia-illicit-arms-trade-ocindex/ (Accessed on July 20, 2025)
[xii] 10 Years of Rohingya Refugees Stranded at Sea, Human Rights Watch, 27 May 2025. https://www.hrw.org/news/2025/05/26/10-years-rohingya-refugees-stranded-sea (Accessed on June 30, 2025)
[xiii] Australia’s role in preventing the next Andaman Sea refugee catastrophe, Lowy Institute, May 26, 2025. https://www.lowyinstitute.org/the-interpreter/australia-s-role-preventing-next-andaman-sea-refugee-catastrophe (Accessed on July 14, 2025)
[xiv] Acting East on the seas: India’s naval cooperation with ASEAN, Lowy Institute, June 19, 2023. https://www.lowyinstitute.org/the-interpreter/acting-east-seas-india-s-naval-cooperation-asean (Accessed on July 14, 2025)
[xv] BIMSTEC Convention on Cooperation in Combating International Terrorism, Transnational Organised Crime And Illicit Drug Trafficking, MEA, December, 2009.
https://www.mea.gov.in/bilateral-documents.htm?dtl/5070/BIMSTEC+Convention+on+Cooperation+in+Combating+International+Terrorism+Transnational+Organised+Crime+And+Illicit+Drug+Trafficking (Accessed on July 16, 2025)
[xvi] UNODC and BIMSTEC sign Memorandum of Understanding for a Safer Bay of Bengal, UNODC, April 8, 2025. https://www.unodc.org/unodc/en/news/2025/April/unodc-and-bimstec-sign-memorandum-of-understanding-for-a-safer-bay-of-bengal.html (Accessed on July 16, 2025)
[xvii] Improving precursor chemical and other non-controlled chemical control in Southeast Asia, Global Coalition to Address Synthetic Drug Threats, n.d. https://www.globalcoalition.us/node/71 (Accessed on July 16, 2025)