माननीय अध्यक्ष महोदया और विशेषज्ञों, राजनयिक दल के सदस्यों, छात्रों और मित्रों!
- साल 1971 में खूनी मुक्ति संग्राम, जिस संग्राम में यह पश्चिमी पाकिस्तान के दमनकारी और नरसंहारकारी शासन से सफलतापूर्वक अलग हो गया, के बाद, बांग्लादेश ने अपने नागरिकों को पूर्ण सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक अधिकार प्रदान करने की आकांक्षा के साथ स्वयं को एक अलग पहचान देने के लिए जन्म लिया।
- अकाल, बाढ़ और महाचक्रवातों जैसी लगातार आई प्राकृतिक आपदाओं, गंभीर राजनीतिक अस्थिरता– सत्तावादी शासन, राजनीतिक हत्याएं और तख्तापलट, सैन्य एवं अब हाइब्रिड शासन व्यवस्थाओं और निराशाजनक सामाजिक– आर्थिक मापदंडों से त्रस्त बांग्लादेश के लोग अभी भी वादा किए गए सुरक्षा, स्थिरता और समृद्धि की बाट जोह रहे हैं।
- सेना और न्यायपालिका जैसी राष्ट्रीय संस्थाएं बांग्लादेश में घरेलू और विदेश नीति निर्माण में बड़ी भूमिका निभाती है। साल 1971 से या तो आवामी लीग या बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी सत्ता में रही है। बीच– बीच में सैन्य शासन या अंतरिम सरकारें आती रही हैं। निर्वाचित सरकारों की अक्सर होने वाली बर्खास्तगी बांग्लादेश की राजनीतिक संस्कृति की बहुत ही बुरी तस्वीर पेश करती है– इसमें गंभीर राजनीतिक दमन, हिंसक विरोध, हड़ताल, अपवित्रता, लूट और आगजनी, निजी और सार्वजनिक संपत्तियों का विध्वंस, राजनीतिक कैद और हत्याएं शामिल हैं। जैसे कि यह पर्याप्त नहीं था, हर शासन परिवर्तन के बाद इतिहास को फिर से लिखने का प्रयास किया गया है और यही वह बात है जो एक बार फिर से वर्तमान बांग्लादेश में देखी जा रही है।
- बांग्लादेश की अंतर्निहित राजनीतिक संस्कृति पाकिस्तान से बहुत अलग नहीं है। एक चौथाई सदी से जुड़वां होने के कारण, उनका राजनीतिक डीएनए एक जैसा ही है। उदाहरण के लिए, बांग्लादेश की सेना ने दशकों से पाकिस्तान की सेना के साथ जो सौहार्द एवं आत्मीयता दिखाई है, वह गैर– राजनीतिक भारतीय सेना और अत्यधिक राजनीतिक बांग्लादेशी सेना के बीच के संबंधों से कहीं अधिक गहरा है। इसी तरह, इस्लामी कट्टरपंथी समूहों को बांग्लादेश में उपजाऊ ज़मीन मिली है और उन्होंने अपने पाकिस्तानी समकक्षों के साथ घनिष्ठ संबंधों का लाभ उठाया है, यह आज भी जारी है। वर्ष 1971 ने भले ही दोनों को विभाजित कर दिया हो लेकिन वही अस्वस्थता उनकी राजनीति को निर्धारित करती है।
- वर्तमान मुख्य सलाहकार यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार का गठन सामान्य स्थिति बहाल होने के बाद की गई थी ताकि नए स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराए जा सकें। यह देखते हुए कि आवामी लीग सरकार की देखरेख में जनवरी 2024 के चुनाव में कथित तौर पर धांधली हुई थी, वर्तमान अंतरिम सरकार के सत्ता में आने के बाद से अगले चुनाव से पहले चुनावी सुधारों की मांग की जा रही है। हालांकि, छात्र समुदाय और विभिन्न राजनीतिक गुटों एवं कट्टरपंथी तत्वों को शांत करने के लिए इस संबंध में कार्रवाई करने की बजाय सेना द्वारा समर्थित अंतरिम सरकार सक्रिए रूप से ध्रुवीकरण के एजेंडे को आगे बढ़ा रही है। देश को "अस्थिर" करने की इच्छा रखने वालों पर कथित रूप से लक्षित "ऑपरेशन डेविल हंट" जैसे छापे मारने के नाम पर अंतरिम सरकार सीधे– सीधे लोकतंत्र के समर्थकों को निशाना बना रही है और उन्हें गिरफ्तार कर रही है जिससे हाइब्रिड शासन की विश्वसनीयता गंभीर रूप से कमज़ोर हो रही है।
- अर्थव्यवस्था और बुनियादी ढांचा भी ठप्प पड़ा हुआ है। पिछले छह महीनों में बांग्लादेश में अर्थव्यवस्था के प्रमुख क्षेत्रों में हड़तालें देखी गई हैं जिसमें कपड़ा और परिवहन जैसे निर्यातोन्मुख क्षेत्र शामिल हैं और अक्सर राजमार्गों की नाकेबंदी भी देखी गई है।
- असहिष्णुता अंतर– धार्मिक और अंतर– जातीय संबंधों में व्याप्त हो गई है। हालांकि अंतरिम सरकार और स्थानीय मीडिया द्वारा इसे कम करके आंका गया है, लेकिन धार्मिक एवं जातीय अल्पसंख्यकों के खिलाफ असहिष्णुता और हिंसा के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। अंतरराष्ट्रीय कट्टरपंथी इस्लामी समूहों की उपस्थिति में भी वृद्धि देखी जा रही है। जबकि मीडिया और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की स्वतंत्रता का दमन जनता के बीच निराशा को बढ़ावा दे रहा है, स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रमुख अल्पसंख्यकों से संबंधित लोगों की हत्याएं, जैसे कि हाल ही में अमेरिकी नागरिक समाज संगठन ‘सेव द चिल्ड्रेन’ के प्रोजेक्ट डायरेक्टर उत्पल रॉय की हत्या, फिर भी व्यापक ध्यान आकर्षित कर रही हैं।
- इतिहास को फिर से लिखने और सामाजिक ताने– बाने को बदलने के हिंसक प्रयास करते हुए, सेना द्वारा समर्थित यूनुस की अंतरिम सरकार ने पिछली आवामी लीग सरकार द्वारा भारत के साथ बनाए गए सहयोग एवं साझेदारी के स्तर को समायोजित करने एवं जांचने का विकल्प भी चुना है। यूनुस रक्षा और सैन्य क्षेत्रों समेत पाकिस्तान एवं चीन जैसे देशों के साथ नए रास्ते तलाशने और साझेदारी को मजबूत करने का विकल्प अपना रहे हैं। बेशक, पिछले अमेरिकी प्रशासन और यूनुस के बीच की निकटता पर मीडिया में व्यापक रूप से चर्चा हुई है; और नए अमेरिकी प्रशासन के तहत गतिशीलता को देखा जाना बाकी है। बांग्लादेश– म्यांमार अंतरराष्ट्रीय सीमा पर स्थिति के मामले में बढ़ती राजनीतिक अस्थिरता के प्रभाव, विशेष रूप से अराकान सेना के बढ़ते प्रभाव के साथ, की भी सावधानीपूर्वक पड़ताल की जानी चाहिए।
- भारत के लिए, बांग्लादेश एक महत्वपूर्ण पड़ोसी बना हुआ है, चाहे सत्ता में कोई भी सरकार हो और भारत को अपने राष्ट्रीय और सुरक्षा हितों को कम किए बिना विश्वास को फिर से बनाने के लिए काम करना होगा। हालांकि यह बांग्लादेश के आंतरिक मामलों का सम्मान करता है लेकिन विशेष रूप से 4000 किलोमीटर से अधिक लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा पर कड़ी नज़र रखने की जरूरत है, क्योंकि ऐसी राजनीतिक और आर्थिक अस्थिरता आमतौर पर मानव, हथियार, नशीली दवाओं और पशु तस्करी एवं घुसपैठ जैसे आपराधिक गतिविधियों को बढ़ावा देती हैं। यह कहने की आवश्यकता नहीं है कि सीमा के दोनों ओर के लोगों की भलाई सर्वोपरि है।
- मैं, आज हमारे पैनल में शामिल प्रतिष्ठित विशेषज्ञों का स्वागत करती हूँ। मुझे विश्वास है कि वे इन मुद्दों पर विस्तार से चर्चा करेंगे और अपने विचार हमसे साझा करेंगे। मैं एक विचारोत्तेजक एवं जीवंत चर्चा की आशा करती हूँ। शुभकामनाएं।
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