ICWA की तरफ से जो आज यहाँ पर international conference हो रही हैं ‘Women Across Geographies: Issues and Perspectives’, मैं ICWA का बहुत बहुत अभिनन्दन करती हूँ कि उन्होंने इतने महत्वपूर्ण विषय पर आज दुनिया के अनेक अनेक देशों को एकत्रित करते हुए इस विषय पर सोचना शुरू किया है। आज यहाँ पे अलग अलग देशों से आये हुए सभी प्रतिनिधियों का मैं बहुत बहुत स्वागत करती हूँ, अभिनन्दन करती हूँ।
आज का यह जो मंच है, ये मंच सिर्फ चर्चाओं का नहीं हैं, बल्कि विचारों का और परिवर्तन का मंच हैं । जब हम महिलाओं की स्तिथि को विश्व के स्तर पर देखेंगे तब हम यह समझेंगे की उनका सशक्तिकरण केवल महिलाओं का अधिकार नहीं है बल्कि महिलाओं का सशक्तिकरण यह समाज और राष्ट्र की ज़रूरत है, अगर हर देश की महिलाएं आगे बढ़ती हैं तो ही वो देश प्रगति कर सकता है। जब हम कहते हैं women across geographies, तो यह केवल देश की भौगोलिक सीमाओं की बात नहीं है, बल्कि ये बात है हमारी संवेदनाओं की, संस्कारों की, संघर्शों की और अपार सम्भावनाओं की।
आज हम देख रहे हैं की दुनिया में बहुत अच्छे तरीके से महिलाएं आगे बढ़ रही हैं, अपने role को बखूबी निभा भी रही हैं और वो खुद को आज सिद्ध कर रही हैं, prove कर रही हैं की वो कही भी पीछे नहीं हैं. पर उसी के साथ-साथ, दुनिया की महिलाएं अलग-अलग चुनोतियों का सामना भी कर रही हैं, जिसमें से मैं बात करुँगी पर्दा प्रथा की। आज भी पर्दा प्रथा हम सभी को बहुत तकलीफ दती है। कितनी बार हमें यह भी लगता है की स्त्री की जो अभिव्यक्ति है, उस अभिव्यक्ति पर रोक लगाई गई है। भारत ने हमेशा यह दिखाया है कि संस्कृति और स्वतंत्रता दोनों साथ साथ चल सकते हैं। संस्कार का अर्थ बंधन नहीं होता है, वह तो मर्यादा की सीमा है। जिसमें स्वतंत्रता की खुशबु है और उसी के साथ-साथ सुरक्षा का कवच भी है।
वैसे मैं बात करुँगी बहु विवाह और वैश्या वृत्ति के बारे में। मैं ये ज़रूर कहूँगी कि इन मुद्दों को केवल सामाजिक दृष्टी से देखना ठीक नहीं रहेगा, इन मुद्दों को हमें मानवाधिकार की नज़र से भी देखने की बहुत बहुत ज़रूरत है। जब हम देखते हैं की वैश्या वृत्ति की वजह से अनेक अनेक बेटियों की ज़िन्दगी ख़राब हो जाती है, उनका पूरा जीवन संघर्षमय तो होता ही है, पर जीवन में पूरा अंधकार भी आ जाता है। और वैसे ही बात है बहु विवाह की भी।
मैं यह ज़रूर कहूँगी कि जब तक स्त्री के देह को एक वस्तु के रूप में हम देखेंगे, तब तक समाज की ये जो आत्मा है, समाज की आत्मा उन सभी देशों की स्त्री ही है, तब तक समाज की यह आत्मा बहुत घायल रहेगी, हमें उसको बहुत सँभालने की ज़रूरत है, इस विषय पर बात करने की, प्रत्यक्ष रूप में आगे आते हुए उसको रोकने की भी बहुत बहुत ज़रूरत है। हम सबकी ये सामूहिक ज़िम्मेदारी बनती है कि हम स्त्री को केवल शरीर से नहीं, हम उसको चेतना से देखें, कि वो हमारी चेतना है और हम अगर इस तरीके से सोचते हैं तो कहीं भी महिलाओं के साथ अन्याय और अत्याचार नहीं होगा।
आज विधवा पुनर्विवाह की बात आयी है। इसके पहले भी देश में कई विधवा बहुत ही बुरा जीवन जीती थी, परन्तु भारत में अनेक अनेक समाज सुधारकों ने इस अंधकार को तोड़ा, मैं आज उनका विशेष उल्लेख करना चाहती हूँ – राजा राम मोहन रॉय, इश्वरचंद विद्यासागर जैसे अनेक महापुरुषों ने यही कहा है कि विधवा का जीवन भी उतना ही पवित्र है और जीवंत हैं जितना किसी अन्य स्त्री का है। उन्होंने सिर्फ कहा नहीं, उसके लिए संघर्ष भी किया और आज हम देख रहें है कि भारत में अब वो कोई विषय नहीं बचा है। आज भारत काफी अच्छे तरीके से आगे बढ़ चुका है। विधवाओं के पुनर्विवाह तो हो भी रहे हैं। वो काफी अच्छे तरीके से अपने पैरों पर खड़ी हो कर आगे बढ़ भी रही हैं। मैं इसमें महर्षि धोंडोकेशव कर्वेश जी का भी नाम ज़रूर ज़रूर जोड़ना चाहूंगी जिन्होंने इस विषय के लिए भी बहुत काम किया है। आज भी दुनिया के कई हिस्सों में विधवा पुनर्विवाह को एक अपराध समझा जाता है। मैं भारत का उधाहरण दे कर ये ज़रूर बताना चाहती हूँ की जब परंपरा प्रगति से मिलती है, तभी तो समाज जीवित रहता है और जीवित समाज को हमेशा जीवित रखने के लिए भारत ने हमेशा प्रयास भी किए हैं।
आज हम ये भी देख रहे हैं कि भारत में महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तिकरण हमारी प्राथमिकता है। मैं यह भी कहूँगी कि भारत में केवल महिलाओं के विकास की बात नहीं होती है, बल्कि महिलाओं के नेतृत्वो में विकास की बात भी होती है। सभी महिलाओं को अच्छे तरीके से उनको समय दिया जाता है, उनके लिए नईं योजनाएं आ जाती हैं और प्रत्यक्ष रूप में इस देश के विकास के लिए उनका योगदान भी हम साथ लेकर चल रहे है। आज अनेक अनेक योजनाएं हैं जिनके माध्यम से यहाँ पर महिलाओं को, बेटियों को सशक्त किया जा रहा है। मैं उल्लेख करुँगी समग्र ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान की जिसने करोड़ों लड़कियों का भविष्य सुरक्षित किया है। ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ यह जो पहल है यह पहल बेटी के जन्म से लेकर उनकी शिक्षा के लिए, उनकी उच्च शिक्षा के लिए, उनके अपने खुदके पैरों पर खड़े होने के लिए, इन सभी चीजों को साथ लेकर चलने की एक बहुत अच्छी पहल है, जिसमें उनके स्वास्थ का भी अच्छे तरीके से ध्यान रखा गया है। उसी के साथ साथ Mission शक्ति है, self-defence workshop है जिसके माध्यम से लाखों महिलाओं को हमने आत्म रक्षा सिखाई है। महिलाओं के स्वरोजगार की योजनाओं पर भी भारत ने बहुत ध्यान दिया है और आज मैं बहुत अच्छे तरीके से कह सकती हूँ की मुद्रा योजना जैसी योजना के माध्यम से हमारे देश की करोड़ो महिलाएं आत्मनिर्भर हो गयी हैं, अपने पैरों पर खड़ी हो गई हैं और बेटियों के लिए सुकन्या समृध्ही योजना बनाई, उनके भविष्य को secure करने के लिए। और इसी के साथ साथ में बात करुँगी की हर क्षेत्र में महिलाएं आगे तो बढ़ ही रही है पर मैं आज विशेष उल्लेख करना चाहती हूँ कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम के माध्यम से हमने महिलाओं को 33% जो reservation दिया हैं जिसमें लोक सभा और विधान सभा में महिलाओं को यह reservation मिला है जिसकी वजह से महिलाओं की आव़ाज अब अधिक बुलंद होने की प्रक्रिय शुरू हो गयी है। और इसी के माध्यम से निति निर्माण में उनकी भागीदारी सुरक्षित करी हैं। हम देख रहे हैं हमारा जो 3-tier system है, इसमें महिलाओं को 50% reservation है ही, जिसमें से वो अपने गाँव को अपने विभाग को अच्छे तरीके से सींच रही हैं, काम कर रही हैं, पर अब नारी शक्ति वंदना अधिनियम के माध्यम से हम और अच्छे तरीके से आगे बढ़ भी रहे हैं।
मेरे सभी प्यारे मित्रो, ये केवल आकड़ें नहीं हैं, यह हर उस माँ, बहन और बेटी की कहानी है जो अब डर के बजाय, हिम्मत के साथ दुनिया में कदम रख रही हैं। भारत ने महिलाओं की सामाजिक, आर्थिक राजनितिक सशक्तिकरण की दिशा में अनेक कार्य भी किये हैं और भारत में महिलाओं के नेतृत्व में विकास की गाथा हम सभी लोग लिख भी रहे हैं। मैं यह भी कहूँगी कि इसके साथ हमारे सामने, भारत के सामने और उसी के साथ साथ विश्व की सभी चुनौतिया ख़त्म नहीं हुई हैं। हम अनेक अनेक विषयों पर अभी जूझ रहे हैं। अनेक विषयों पर हमें काम करने की ज़रूरत हैं। मैं बात करुँगी महिलाओं की मानवतस्करी की, मैं बात करुँगी बाल विवाह की, घरेलूं हिंसा की, online उत्पीडन की, ऐसे अनेक consent age की, ऐसे अनेक अनेक विषय आज भी हमारे सामने चुनौती बनकर खड़े हैं पर मैं एक बात ज़रुर कहूँगी की केवल सिर्फ भारत की नारी नहीं, विश्व की नारी, पूरी मानवता की आत्मा है, यह हम कभी नहीं भूलें।
विश्व की यह जो नारी हैं वो कभी गंगा की तरह बहती हैं, कभी वो नील नदी की ताराग सभ्यता को जन्म देती हैं, तो कभी वो Amazon की तरह जीवन को पोषित करती हैं. परन्तु हर युग में, हर भूगोल में उसकी यात्रा इसके पहले आसान नहीं रही हैं। वह परदे के पीछे छिपाई गयी थी, कभी बहु विवाह की परम्पराओं में बाँधी गई थी, तो कभी वैश्यावृत्ति के अँधेरे कोने में धकेली गयी थी। जैसे मैंने पहले भी उल्लेख किया, आज भी बाल विवाह, घरेलु हिंसा अब नए ज़माने में online उत्पीड़न या उसी के साथ साथ मानवतस्करी जो विश्व का बहुत बड़ा अनैतिक व्यापर हम कह सकते हैं, इसमें भी आज हम देख रहे हैं की महिलाओं को तकलीफ हो रही है, यह चुनौती केवल भारत की नहीं है, ये चुनौती पूरी दुनिया की है। लेकिन हमने कहा है की हम पीछे नहीं हटेंगे, हम लड़ेंगे ये जो बुरी चुनौतिया हैं, बुरा जो समय चल रहा है, बुरी जो प्रथाएं हैं, इसके खिलाफ हम लड़ेंगे, और हम बदलेंगे भी। यहाँ पर कानून का बहुत अच्छा अमल भारत में हो रहा हैं। आज सामाजिक जागरूकता भी हम बढ़ा रहे हैं। मुझे विश्वास है कि विश्व के पटल पर भी ऐसे अनेक अनेक प्रयास हो रहे हैं। उन सभी प्रयासों की मैं बहुत बहुत सराहना करती हूँ, कि अगर हम सभी मिलके इन कुप्रथाओं के खिलाफ लड़ते हैं तो विश्व में हम महिलाओं को अच्छा स्थान दे सकते हैं परन्तु दुनिया को आगे बढ़ाने के लिए जो दुनिया की आत्मा है, जो महिला है, उसी को अगर हम आगे बढ़ाते हैं तो अपने आप में gender discrimination ख़तम हो जाता है। हम बराबरी के युग में उन्हें लेकर आगे बढ़ रहे हैं।
आज महिलाओं को अनेक अनेक अवसर भी मिल रहे हैं। हमें उन अवसरों की भी बात करनी चाहिए। मैं यह ज़रूर कहूँगी कि एक glass है वो कैसा है, खाली है, आधा है या भरा है, तो मैं कहूंगी कि हमारा वो glass आधा भरा हुआ है। जो थोड़ा सा खाली है उसको हमें और प्रयास करके भरने की ज़रूरत है। और मुझे यह भी लग रहा है कि आज का यह जो platform है, यह platform ऐसे अवसरों को बहुत अच्छे तरीके से आगे बढ़ाने वाला platform है। हमारे देश की, भारत की और विश्व की महिलाओं को, हम सभी के प्रयासों से काफी अच्छे अवसर भी देंगे और हम बदलाव की राह में हर महत्वपूर्ण कदम भी डालेंगे।
महिलाएं, हमारी पूरे देश की और समाज की, राष्ट्र की ताकत भी हैं। जब महिला सशक्त होती है तो राष्ट्र सशक्त होता है। आज हम केवल अपने घर की सीमा तक सीमित नहीं हैं, उसी के साथ साथ चाहे विज्ञान हो, खेल हो, व्यवसाय हो, राजनीती हो, या अंतरिक्ष हो, हम देश का नाम बुलंद कर हैं। मुझे पूर्ण विश्वास है कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग से हम और मजबूत बनेंगे। विश्व स्थर पर महिलाओं की स्तिथी सुधारने के लिए हम सभी देशों के साथ आगे आयेंगे और बदलाव हम पूरी दुनिया में करेंगे, यह मंच उसके लिए काफी प्रयास करेगा यह मेरा विश्वास है।
मैं आज ज़रुर कहूँगी की राष्ट्रिय महिला आयोग का एक संकल्प है, हमें दृढ़ विश्वास है कि यदि समाज की सोच बदलनी है तो संवाद के द्वार हमें खोलने होंगे। इस लिए हम सभी लोग शिक्षा, सुरक्षा, स्वालंबन, सम्मान और स्वत: इन पांच स्तंभों पर हम काम करेंगे। हम केवल शिकायत नहीं सुनेंगे, हम उन शिकायतों का सम्मान भी करते हुए आगे बढ़ेंगे। हम केवल आकड़ें नहीं गिनेंगे, हम आकड़ो के साथ साथ विश्वास बनाने के काम भी करेंगे। हर महिला का अधिकार है स्वतंत्रता, यह हर राष्ट्र की ताकत है, तो इस लिए अंत में यही कहना चाहती हूँ की महिलाओं का सशक्तिकरण केवल उनका अधिकार नहीं है, बल्कि उन सभी राष्ट्रों की ताकत है। हमारा संकल्प है कि हर महिला सुरक्षित रहे, शिक्षित रहे और वो स्वतंत्र भी हो। हर महिला सम्मानित हो, हर महिला सक्षम भी हो, यही भारत की नई दिशा है, यही भारत की नई कहानी हैं। अब और अधिक कदम उठाने का समय आ गया है। हम सभी लोग मिलके काम करेंगे, अभी हमारा काम ख़त्म नहीं हुआ है, अब हम सभी को मिलकर, हर गाँव, हर शहर, हर महिला तक सुरक्षा, शिक्षा और अवसरों को पहुंचाना हैं। हमारा भारत तभी सशक्त होगा जब हर बेटी, हर महिला, हर गाँव अपने अधिकारों, और सम्मान के साथ आगे बढ़ेगा।
तो चलिए हम सब लोग मिलकर संकल्पित हों कि हम सभी मिलकर, पूरी दुनिया मिलकर महिलाओं के खिलाफ जो भी कुप्रथा है उसका हम अंत करें और हम महिलाओं को साथ साथ लेकर gender discrimination ख़त्म करते हुए gender equality की ओर आगे बढ़ें। आज मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि नूतन जी आपने इतने अच्छे तरीकेसे ये conference आयोजित की है, मैं आपका, हमारे Department का, ICWA का बहुत बहुत अभिनन्दन करती हूँ की उन्होंने इस अच्छे conference में आप सभी के साथ मिलने का मुझे अवसर दिया, सभी के साथ मेरी बात साँझा करने का एक अच्छा अवसर दिया, आपका सभी का बहुत बहुत धन्यवाद, और उसी के साथ साथ आप सभी को भी बहुत बहुत शुभकामनायें कि हम सभी लोग मिलकर दुनिया की महिलाओं को सशक्त बनाने का प्रयास करें, आप सभी का बहुत कोटिशः धन्यवाद।
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